छोटी चाची को 4 साल बाद दोबारा चोदा
(Aunty Sex Story) 21
देसी चाची फक स्टोरी में मैं अपनी चाची को पहले चोद चुका था. पर उसके बाद 4 साल मौक़ा ही नहीं मिला. एक बार चाची मेर साथ ट्रेन में थी फर्स्ट एसी में.
जैसा कि आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी
छोटी चाची की चूत चुदाई का मजा
में पढ़ा कि कैसे मैंने छोटी चाची को चोदा था।
अब उसके बाद मैंने दो-तीन महीने तक उनको रोज चोदता था, फिर चाचा ने चाची को अपने पास बुला लिया।
उसके बाद मैंने चाची को नहीं चोद पाया।
अब उनका एक बेटा भी हो गया है, जो कि मेरी मेहरबानी से ही हुआ है।
फिर मैं भी दिल्ली चला गया काम करने।
मैं तो बीच-बीच में घर आता रहता था, लेकिन मैं जब भी आता था तब चाची जी नहीं आती थीं, तो कभी फिर उनको चोदने का मौका ही नहीं मिला।
अब 4 साल के बाद वो आई हैं और मैं भी उनके साथ ही दिल्ली से आया हूँ।
चाची को मैं ही लेकर आया हूँ साथ में।
तभी ट्रेन में यह देसी चाची फक स्टोरी बनी.
मैं जब आ रहा था तब चाचा का मुझे कॉल आया और बोले, “अरमान, मुझे कोई टिकट नहीं मिल रहा है गाँव जाने के लिए! तुम्हारी चाची का बहुत मन है गाँव जाने का। तुम जा रहे हो तो अपने साथ ले जाओ!”
तो मैंने बोला, “ठीक है, कोई बात नहीं! आप उनको मेरे साथ भेज दीजिए, मेरी सीट कन्फर्म है।”
चाचा ने बोला, “ठीक है!”
फिर मैं बोला, “लेकिन मेरा टिकट 1st AC का है, तो कैसे जा पाएँगी?”
चाचा बोले, “जो भी टिकट का फाइन होगा, मैं भर दूँगा!”
मैं बोला, “ठीक है!”
स्टेशन पर चाची को चाचा छोड़ने आए थे, चाचा उन्हें छोड़कर चले गए।
चाची उस दिन एकदम हॉट माल लग रही थीं।
वो उस दिन ग्रीन कलर की फ्रॉक पहन कर आई थीं।
फिर ट्रेन खुल गई, हम लोगों ने काफी बातें कीं।
हमारा ट्रेन रात का ही था तो भाग्यवश मेरे सीट वाले केबिन में दूसरा कोई भी नहीं था।
ऐसे ही बातों-बातों में उनसे कहा, “आप तो आज काफी हॉट लग रही हैं!”
वो हँसने लगीं।
मैंने उनसे सीधा पूछ लिया, “चाचा ने आपकी लेनी बंद कर दी है क्या? आप तो अब काफी पहले से भी हॉट हो गई हैं!”
चाची बोलीं, “नहीं, ऐसा नहीं है! आपके चाचा के पास टाइम ही नहीं होता है। वो तो बस महीने में बस एक से दो बार ही चुदाई करते हैं!”
इसीलिए मैंने बोला, “कोई बात नहीं! अब मैं आ गया हूँ आपके लिए!”
वो हँसने लगीं।
उनका बेटा अभी डेढ़ साल का है तो चची ने उसे सामने वाली सीट पर दूध पिलाकर सुला दिया और उनकी एक 3 साल की बेटी है जो पहले सीट पर सो चुकी थी।
रात काफी हो गई थी तो ट्रेन में सब लोग सो गए थे।
फिर मैंने चाची को बोला, “आप सो जाइए, मैं बैठे-बैठे ही सो जाऊँगा।”
तो उन्होंने बोला, “नहीं, सो जाओ!”
फिर मैं बोला, “हम दोनों इसी पे सो जाते हैं!”
बोलीं, “ठीक है!”
दोनों एक ही सीट पर सोने लगे।
सीट कम होने के कारण चिपक कर सोने लगे।
इतने में मैंने उनकी गांड पकड़ कर सहलाने लगा.
फिर उन्होंने मुझे किस कर लिया।
मैं बोला, “चाची, काफी दिन हो गए हैं! करते हैं ना!”
उन्होंने बोला, “मन तो मेरा भी है, लेकिन यहाँ ट्रेन में कैसे?”
मैं बोला, “कुछ नहीं होगा, सब सो चुके हैं!”
फिर मैं उनके बूब्स को दबाने लगा और किस करने लगा।
फिर कुछ देर बाद मैंने उनके पजामे में हाथ डाल कर उनकी चूत में उँगली करने लगा।
चाची को भी मजा आने लगा।
फिर मैंने अपना लंड उनके मुँह में दे दिया।
वो भी पूरे मजे से चूस रही थीं।
फिर मैंने मुँह में एक धक्का मार दिया, पूरा लंड उनके गले में उतर गया!
अब वो खाँसने लगीं और बोलीं, “आराम से करिए!”
तो मैंने बोला, “आराम से ही तो कर रहा हूँ! इतने दिनों बाद तो आपको चोदने का मौका मिला है!”
तो चाची बोलीं, “अब तो घर जा ही रहे हैं, फिर वहाँ करेंगे ना आराम से!”
मैंने बोला, “तब का तब देखेंगे, अभी तो मज़े करते हैं!”
उसके बाद मैंने उनके पजामे को उतार दिया।
अब वो मेरे सामने पेंटी में थीं।
चाची ने ब्लैक कलर की ट्रांसपेरेंट चड्डी पहनी थी।
पेंटी में उनकी चूत साफ़ दिख रही थी, उसमें वो एकदम कड़क माल लग रही थीं!
उनको देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि वो दो बच्चों की माँ हैं।
उनका फिगर तो ऐसा है कि कोई भी देखकर उसकी लेने का ही सोचता होगा।
फिर मैंने चाची की पेंटी को भी उतार दिया और उनके बूब्स को भी निकाल दिया।
अब मैंने उनकी चूत पर अपना लंड सेट किया और एक धक्का दे दिया! उससे उनकी चूत में मेरा आधा से ज्यादा लंड चला गया।
और मैंने दूसरा धक्का दिया, अबकी बार पूरा लंड चूत में समा गया!
उनको थोड़ा दर्द हुआ लेकिन चची ने आराम से लंड को अपने अंदर ले लिया और पूरा मजा लेने लगीं।
अब मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया और अब चाची को भी मजा आने लगा।
लगभग एक घंटे चुदाई करने के बाद हम दोनों अलग हुए और चाची ने अपने कपड़े पहने।
फिर हमने एक किस किया और फिर दोनों एक ही सीट पर सो गए।
सुबह होते ही हमारा स्टेशन आ गया और हम लोग घर आ गए।
फिर हमने घर आराम किया और फिर चार-पांच दिन तक तो हम दोनों सेक्स नहीं कर पाए क्योंकि वो अपने कमरे में सोती थीं और मैं अपने कमरे में।
और दिन में काफी लोग रहते थे तो टाइम ही नहीं मिल पा रहा था।
उसके चार-पांच दिन बाद चाची ने चाचा को कहा- कमरे को पेंट करवाना है।
अगले दिन पेंट का काम चालू हो गया जिसके कारण वो अपने कमरे में नहीं सो पाईं।
मैंने भी मौके का फायदा उठाकर बोल दिया, “आप मेरे कमरे में सो जाना! वैसे भी मेरा बेड काफी बड़ा है और मैं अकेला ही सोता हूँ तो आप सो सकती हैं साथ में मेरे रूम में।”
वो भी मान गईं।
अब अगले कुछ दिन वे मेरे साथ ही सोने वाली थीं।
रात को चाची मेरे रूम में आ गईं और लाइट को बंद करके वो मेरे बगल में लेट कर अपने बेटे को सुलाने लगीं।
मैंने उनकी कमर को पीछे से पकड़ लिया।
चाची कहने लगीं, “अभी रुक जाइए! बाबू को सोने दीजिए, फिर आराम से करते हैं।”
मैं बोला, “आप सुलाइए, मैं कुछ कर नहीं रहा हूँ अभी।”
दस मिनट में उनका बेटा सो गया और फिर मैंने चाची की गांड पर हाथ फेरते हुए बोला, “अब रहा नहीं जा रहा! अब करते हैं ना यार!”
चची ने भी हामी भर दी।
चाची ने कहा, “चेंज कर लेती हूँ पहले।”
मैंने बोला, “क्या फायदा? फिर तो उतारना ही है!”
वो भी बोलीं, “हाँ, बात तो सही बोल रहे हो!”
फिर मैंने चाची को पकड़ा और किस करने लगा।
छोटी चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं।
फिर मैंने उनके शर्ट को उतार दिया, अब वो मेरे सामने ब्रा में थीं।
मैंने उनकी ब्रा को भी उतार दिया।
ऐसे ही धीरे-धीरे उनके पूरे कपड़ों को उतार दिया और अपने कपड़ों को भी उतार दिया।
अब हम दोनों ही नंगे थे!
फिर मैं अपना लंड उनके होठों पर रख दिया।
छोटी चाची ने लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं।
कुछ देर लंड चूसवाने के बाद मैंने चाची से बोला, “मेरी जान! अब मैं इंतज़ार नहीं कर सकता।”
तो उन्होंने भी बोला, “हाँ मेरे राजा! अब लंड डाल दो अंदर!”
छोटी चाची के इतने कहते ही मैंने उनको अपने लंड पर बिठा लिया और चाची मेरे लंड को अपने हाथों से अपनी चूत में सेट करके डालने लगीं।
फिर मैंने एक धक्का लगाया तो चाची की चूत में मेरा आधा लंड चला गया।
छोटी चाची दर्द से एकदम उछल पड़ीं, फिर मेरा लंड उनकी चूत से निकल गया।
मैंने फिर चाची को लंड पर बैठा दिया और एक ही झटके में पूरा लंड चूत के अंदर डाल दिया!
चाची जी को दर्द तो हुआ लेकिन मैंने उनको पकड़ कर किस करने लगा।
थोड़ी देर बाद जैसे ही उनका दर्द कम हुआ, वो खुद ही लंड पर उछल-उछल कर चुद रही थीं।
थोड़ी देर उस पोजीशन में चोदने के बाद मैंने चाची को लिटा दिया और छोटी चाची की चूत पर लंड सेट करके एक ही झटके में अंदर घुसा दिया और काफी स्पीड से चोदने लगा।
तो फिर चाची बोलीं, “थोड़ा धीरे से करो अरमान! अभी पूरी रात बाकी है!”
मैं बोला, “ठीक है, धीरे से करते हैं।”
मैं धीरे-धीरे करने लगा।
आधे घंटे चूत मारने के बाद मैं चाची के मुँह में लंड डालकर अपना वीर्य निकाल दिया।
छोटी चाची ने पूरा वीर्य मजे से खा लिया।
फिर मैं छोटी चाची से चिपक कर किस करने लगा।
चाची अपने हाथ से लंड खड़ा करने लगीं।
फिर मैंने उनके मुँह में लंड लेकर चूसने को कहा।
वो बड़े मजे से चूसने लगीं जैसे कि काफी दिनों से भूखी ही हों!
फिर एक बार मेरा लंड चूत फाड़ने के लिए तैयार हो गया।
अबकी बार मैंने चाची को घोड़ी बना दिया और उनकी गांड पे तेल लगाया और लंड सेट कर एक जोर का धक्का मारा!
लेकिन चाची की गांड टाइट होने के कारण फिसल गया।
फिर मैंने चाची से पूछा, “चाचा आपकी गांड नहीं मारते हैं क्या?”
चाची बोलीं, “नहीं! तेरे चाचा को तो बस चूत मारनी आती है, वो भी दस-पंद्रह मिनट। गांड तो तुमने ही मारी थी, वो भी चार साल पहले!”
मैंने बोला, “कोई बात नहीं! मैं हूँ ना आपकी गांड मारने के लिए!”
चाची हँसने लगीं और बोलीं, “बहुत बिगड़ गए हो!”
मैं बोला, “आप ही ने तो बिगाड़ा है!”
फिर मैंने चाची की गांड पे लंड सेट किया और एक ही झटके में आधा लंड उनकी गांड में घुसा दिया!
चाची दर्द से रोने लगीं और लंड बाहर निकालने की कोशिश करने लगीं.
लेकिन मैंने उनको काफी ज़ोर से पकड़ रखा था और थोड़ी देर तक बिना कुछ किए लंड घुसाए रखा।
फिर जैसे ही दर्द कम हुआ, मैंने एक झटका दिया और पूरा लंड उनकी गांड के अंदर उतार दिया!
अबकी बार दर्द तो हुआ चाची को लेकिन इस बार सह लिया और फिर मैंने लंड अंदर-बाहर करके चोदने लगा।
और इसी तरह उस दिन रात में हम लोगों ने सात घंटे तक सेक्स किया!
अगले दिन सुबह चाची से चला नहीं जा रहा था।
उसके बाद से हम दोनों रोज सेक्स करने लगे।
अगर मुझसे इस कहानी को लिखने में कुछ गलती हो गई हो तो अपना दोस्त समझ कर माफ़ कर देना।
धन्यवाद!
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