शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) – 2
(Desi Kahani) 13
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शाम के पाँच बज रहे थे… धोबी का लड़का कपड़े देने आया था.. उसे देखकर शीला का दिल किया की उसे पटाकर ठुकवा ले.. पर उसका सुककड़ शरीर देखकर शीला की सारी इच्छाएं मर गई। जाते जाते वह पापड़तोड़ पहलवान भी शीला के बबलों को घूर रहा था। शीला भी भूखी नागिन की तरह उसे देख रही थी… फिर उसने सोचा की यह २० साल का लौंडा भला कैसे बुझा पाएगी मेरी चुत की प्यास!!!
शीला को चाहिए था एक मजबूत मर्द.. ऐसा मर्द जिसके बोझ तले शीला पूरी दब जाए… जो बिना थके शीला के भोसड़े की सर्विस कर सके… पर ऐसा मर्द कहाँ मिलेगा.. यह शीला को पता नही था
दिन तो जैसे तैसे गुजर जाता था… पर रात निकालनी बड़ी मुश्किल थी। इतने बड़े मकान में वह अकेली… पूरी रात करवटें बदल बदल कर बिताती थी।
५५ वर्ष की अधेड़ उम्र की शीला की कामेच्छा अति तीव्र थी। ऊपर से उसके पति मदन ने उसे ऐसे ऐसे अनोखे आसनों में चोदा था की अब उसे सीधे साधे सेक्स में मज़ा ही नही आता था। रोज रात को वह मादरजात नंगी होकर.. अलग अलग स्टाइल में मूठ मारकर सोने की कोशिश करती। पर जो मज़ा असली लोडे में है.. वह अगर गाजर, ककड़ी या शक्करकंद में होता तो लड़कियां शादी ही क्यों करती!!!
स्त्री का जन्म तभी सफल होता है जब मस्त लंड उसकी चुत में जाकर भरसक चुदाई करता है। मूठ मारना तो मिसकॉल लगाने जैसा है.. कोशिश तो होती है पर सही संपर्क नही होता…
सुबह ५ बजे, फिरसे डोरबेल बजी और शीला की आँख खुल गई। खुले स्तनों को गाउन के अंदर ठूंस कर, एक बटन बंद कर वह दूध लेने के लिए बाहर आई। दरवाजा खोलते ही उसका मूड खराब हो गया। आज रसिक की पत्नी दूध देने आई थी।
“क्यों री, आज दूध देने तू आ गई? तेरा मरद नही आया?” शीला ने पूछते तो पूछ लिया फिर उसे एहसास हुआ की इसका दूसरा अर्थ भी निकल सकता था। गनीमत थी की वह गंवार औरत को ज्यादा सूज नही थी वरना जरूर पूछती की आपको दूध से मतलब है या मेरे मरद से!!!
“वो तो पास के गाँव गया है.. नई भेस खरीदने.. ग्राहक बढ़ते जा रहे है और दूध कम पड़ रहा है… साले जानवर भी चालक बन गए है… जितना खाते है उस हिसाब से दूध नही देते है.. ” दूधवाले की पत्नी ने कहा
शीला हंस पड़ी “क्या नाम है तेरा?”
“मेरा नाम रूखी है” उसने जवाब दिया
शीला ने सर से लेकर पैर तक रूखी का निरीक्षण किया… आहाहाहा इन गांवठी औरतों का रूप गजब का होता है..!! शहर की पतली लौंडियो का इसके रूप के आगे कोई मुकाबला ही नही है… ज़ीरो फिगर पाने के चक्कर में.. आजकल की लड़कियों के आम सुखकर गुटलियों जैसे बन जाते है। और नखरे फिर भी दुनिया भर के रहते है। असली रूप तो इस रूखी का था.. उसके बबले शीला से बड़े और भारी थे.. असली फेटवाला दूध पी पी कर रूखी पूर्णतः तंदूरस्त दिख रही थी। उसकी छाती पर लपेटी छोटी सी चुनरी उन बड़े स्तनों को ढंकने में असमर्थ थी। गेंहुआ रंग, ६ फिट का कद, चौड़े कंधे, लचकती कमर और घेरदार घाघरे के पीछे मदमस्त मोटी मोटी जांघें.. झुककर जब वह दूध निकालने गई तब उसकी चोली से आधे से ज्यादा चूचियाँ बाहर निकल गई..
शीला उस दूधवाली के स्तनों को देखती ही रह गई.. वह खुद भी एक स्त्री थी… इसलिए स्तन देखकर उत्तेजित होने का कोई प्रश्न नही था.. पर फिर भी इस गाँव की गोरी की सुंदरता शीला के मन को भा गई। ध्यान से देखने पर शीला ने देखा की रूखी की चोली की कटोरियों पर सूखा हुआ दूध लगा हुआ था.. शीला समज गई.. की उसके स्तनों में दूध आता है.. उसने थोड़े समय पहले ही बच्चे को जनम दिया होगा!! दूध के भराव के कारण उसके स्तन पत्थर जैसे सख्त हो गए थे… उन्हे देखते ही शीला को छूने का दिल किया. वैसे भी शीला १ नंबर की चुदैल तो थी ही..!!
लंड के लिए तरसती शीला.. रूखी का भरपूर जोबन देखकर सिहर गई.. उसका मन इस सौन्दर्य का रस लेने के लिए आतुर हो गया.. और योजना बनाने लगा..
कहते है ना… की प्रसव से उठी हुई और बारिश में भीगी हुई स्त्री के आगे तो इंद्रलोक की अप्सरा भी पानी कम चाय लगती है..!!
“रूखी.. मुझे तुझसे एक बात करनी है.. पर शर्म आ रही है… कैसे कहूँ?” शीला ने पत्ते बिछाना शुरू किया
“इसमें शर्माना क्या? बताइए ना भाभी” रूखी ने कहा
“तू अंदर आजा… बैठ के बात करते है.. ”
“भाभी, अब सिर्फ दो चार घरों में ही दूध पहुंचना बाकी है.. वो निपटाकर आती हूँ फिर बैठती हूँ.. थकान भी उतार जाएगी और थोड़ी देर बातें भी हो जाएगी”
“हाँ.. हाँ.. तू दूध देकर आ फिर बात करते है… पर जल्दी आना” शीला ने कहा
“अभी खतम कर आई.. आप तब तक चाय बनाकर रखिए” रूखी यह कहती हुई निकल गई
चाय बनाते बनाते शीला सोच रही थी.. की अगर रूखी के साथ थोड़े संबंध बढ़ाए जाए तो उसके बहाने रसिक का आना जाना भी शुरू हो जाएगा… और फेर उससे ठुकवाने का बंदोबस्त भी हो पाएगा… एक बार हाथ में आए फिर रसिक को गरम करना शीला का बाये हाथ का खेल था.. एक चुची खोलकर दिखाते ही रसिक का लंड सलाम ठोकेगा..
रसिक के लंड का विचार आते ही शीला की जांघों के बीच उसकी मुनिया फिर से गीली होने लगी… खुजली शुरू हो गई.. किचन के प्लेटफ़ॉर्म के कोने से अपनी चुत दबाकर वह बोली “थोड़े समय के लिए शांत हो जा तू.. तेरे लिए लंड का इंतेजाम कर ही रही हूँ.. कुछ न कुछ जुगाड़ तो करना ही पड़ेगा” रूखी को सीढी बनाकर रसिक के लंड तक पहुंचना ही पड़ेगा!!
क्या करूँ… क्या करूँ.. वह सोच रही थी… रूखी अभी आती ही होगी
उसका शैतानी दिमाग काम पर लग गया.. एक विचार मन में आते ही वह खुश हो गई… “हाँ बिल्कुल ऐसा ही करूंगी” मन ही मन में बात करते हुए शीला ने एक प्लेट में थोड़ा सा दूध निकाला और अलमारी के नीचे रख आई.. अब इंतज़ार था रूखी के आने का!!
थोड़ी ही देर में रूखी आ गई… शीला ने उसे अंदर बुलाया और मुख्य दरवाजा बंद कर दिया।
“कहिए भाभी, क्या काम था?” रूखी ने पूछा
५-५ लीटर के कनस्तर जैसी भारी चूचियों को शीला देखती ही रही..
शीला ने संभालकर धीरे धीरे बाजी बिछाई
“रूखी, बात दरअसल ऐसी है की आँगन में रहती बिल्ली ने ३ बच्चे दिए है… बड़े ही प्यारे है.. छोटे छोटे… अब कल रात किसी कमीने ने गाड़ी की पहिये तले उस बिल्ली को कुचल दिया” शीला ने कहा
“हाय दइयाँ.. बेचारी… उसके बच्चे अनाथ हो गए.. ” भारी सांस लेकर रूखी ने कहा
“अब में उस बिल्ली के बच्चों के लिए दूध रखती हूँ… पार वह पी ही नही रहे… भेस का दूध उन्हे कैसे हजम होगा? अभी दो दिन की उम्र है बेचारों की.. ”
“माँ के दूध के मुकाबले और सारे दूध बेकार है भाभी.. बोतल का दूध पियेंगे तो मर जाएंगे बेचारे” रूखी ने करुणासभर आवाज में कहा
“इसीलिए आज भगवान ने तुझे भेज दिया… अब मुझे चिंता नही है.. वह बच्चे बच जाएंगे” शीला ने कहा
“वो कैसे?” रूखी को समझ नही आया
“देख रूखी… तेरी छाती से दूध आता है… अगर तो रोज अपना थोड़ा थोड़ा दूध निकालकर देगी… तो वह बिचारे बच जाएंगे.. नही तो १-२ दीं में ही मर जाएंगे… और पाप तुझे लगेगा..” शीला की योजना जबरदस्त थी
“अरे, उसमें कौन सी बड़ी बात है!! मुझे तो इतना दूध आता है की मेरे लल्ला का पेट भर जाने के बाद भी बच जाता है”
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