शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-5

(Desi Kahani) 8

redwalker69 2026-03-28 Comments

This story is part of a series:

रसिक की फटी हुई कमीज देखकर शीला शर्म से लाल हो गई.. “रुको में तुम्हारे भैया को कोई शर्ट लाकर देती हूँ.. ” अलमारी से तुरंत एक शर्ट निकालकर उसने रसिक को दीया।

 

“बहोत देर हो गई आज” कहते हुए रसिक ने शर्ट पहन लिया और भागा

 

इस तरफ शीला सीधे बाथरूम में चली गई.. गीजर चालू कर वह नहाने बैठ गई। दो साल के बाद आज उसके भोसड़े की भरजोर चुदाई हुई थी इसलिए थोड़ा दर्द हो रहा था.. पर बहोत अच्छा लगा उसे.. साले का लंड क्या मस्त था.. बस थोड़ी सी ओर ट्रैनिंग देनी पड़ेगी.. फिर एक जबरदस्त चुदाई मशीन में तब्दील हो जाएगा रसिक!! मदन के लंड से दोगुना था रसिक का लंड!! शीला अपनी बुर पर साबुन मलते हुए रसिक के मूसल के विचारों में खो गई।

 

शीला का भोंसड़ा रसिक का लंड पाकर खिल सा गया था। पिछले दो सालों से लंड की गर्मी के बगैर, बेचारा उसका भोंसड़ा मुरझा सा गया था। पूरा दिन सुबह की चुदाई की यादों में ही गुजर गया… शाम के साढ़े पाँच बजे रूखी आई। शीला और रूखी दोनों बातें करने में व्यस्त हो गए।

 

बातों बातों में शीला ने रूखी का पल्लू हटा दिया… और उसकी चोली के बटन खोलकर एक चुचे को बाहर निकाला… और उसकी निप्पल को चूसते हुए दुग्धपान करने लगी… दूध पीना बीच में ही रोककर उसने रूखी की ओर देखा.. अपने होंठों से दूध की बूंदें पोंछते हुए शीला ने कहा

 

“रूखी, तेरा मरद आज सुबह मुझे चोदकर गया” छिनालों जैसी मुस्कान के साथ शीला ने कहा

 

एक पल के लिए चोंककर

 

रूखी मुस्कुराई और बोली “कोई बात नही भाभी.. मैंने भी मेरे मरद के दोस्त जीवा से संपर्क बना लिया है.. वो न सही तो उसका दोस्त ही सही.. वैसे आपको चुदवाने में मज़ा तो आया न!!”

 

“बहोत मज़ा आया.. दो साल बाद असली लंड को हाथ में पकड़ने का मौका मिला… तेरे पति का लंड तो काफी तगड़ा है री” शीला ने शरमाते हुए कहा

 

“अरे भाभी, आपने मेरे यार जीवा का लंड नही देखा इसलिए मेरे मरद का लंड बड़ा लग रहा है.. जीवा का लंड तो… क्या बताऊँ आपको.. गधे के लंड जितना मोटा और तगड़ा.. अंदर घुसाकर मेरी मुनिया को ऐसे ठोकता है साला.. अंदर चुत में हंगामा मच जाता है” रूखी की आँखें बंद हो गई और वह जीवा के लंड के सपनों में खो गई।

 

रूखी शीला की चिकन जांघों पर हाथ फेरकर मजे लेते हुए बोली “भाभी आपका शरीर तो कितना गोरा और चिकना है.. सच कहूँ भाभी तो मुझे अभी जीवा से चुदवाने का बहुत मन कर रहा है ”

 

“तो बुला ले उसे यहाँ.. तुम दोनों अंदर के रूम में अपना कार्यक्रम करते रहना… और में छुप कर देखूँगी..” शीला ने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा

 

“क्या सच में उसे यहाँ बुलाया सकती हूँ भाभी? पर कहीं रसिक को पता चल गया तो.. वो तो मुझे जिंदा गाड देगा” रूखी को डर लगा

 

“उसकी चिंता तू मत कर… मुझ पर छोड़ दे.. तू बुला ले जीवा को यहाँ” शीला ने रूखी का होसला बढ़ाते हुए कहा। वास्तव में जिस तरह रूखी ने जीवा के लंड का ब्यौरा दिया था.. शीला भी उस मुश्टंडे लंड को देखना चाहती थी…

 

रूखी ने अपने मोबाइल से जीवा को फोन लगाया… जीवा से बात की और शीला के घर का पता और दूसरे दिन मिलने का समय उसे बता दिया। अब शीला जीवा का लँड देखने के लिए बेकरार हो चली थी।

 

“भाभी, आपको भी जीवा का लंड देखना है?” रूखी ने जैसे शीला के मन की बात पढ़ ली। बिना कुछ कहे शीला ने हाँ कहते हुए गर्दन हिलाई

 

“आप उस खिड़की के पीछे छुप जाना.. में कैसे भी करके जीवा को उस तरह घुमाऊँगी जिससे की आपको उसका लंड दिख जाए” रूखी ने कहा

 

“ठीक है रूखी… अभी मैं सोच रही हूँ की रसिक को फोन करूँ.. उसने मुझे फोन करने के लिए कहा था.. तू भी सुन की तेरा पति कैसे बात करता है” शीला ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा

 

“हाँ हाँ भाभी.. लगाइए फोन” उत्सुकता वश रूखी ने कहा

 

शीला ने रसिक को फोन लगाया.. रसिक के फोन उठाने का इंतज़ार करती हुई शीला के स्तन रूखी मसल रही थी

 

“अभी रिंग जा रही है… और रूखी.. तू जरा धीरे धीरे दबा… रसिक से बात चल रही हो तब जोर से मत मसलना… वरना मेरी चीख निकल जाएगी और उसे पता चल जाएगा.. ” तभी रसिक ने फोन उठाया ” हैलो” शीला ने कहा

 

“अच्छा हुआ भाभी आपने फोन किया… मैं आपको ही याद कर रहा था” रसिक ने कहा

 

“अच्छा!! क्या याद कर रहे थे?” शीला ने शरारत करते हुए पूछा

 

“भाभी, आपने जिस तरह मेरा मुंह में लिया था.. मज़ा आ गया.. रूखी तो कभी मेरा चूसती ही नही है” स्पीकर फोन पर यह सुनकर रूखी को गुस्सा आ गया

 

“रसिक, मुझे अभी चुदवाने का मन कर रहा है.. आ जा घर पर अभी” शीला ने कहा

 

“नही आ सकता भाभी… अभी खेत पर हूँ.. ” रसिक ने कहा

 

“पर रसिक.. मुझसे रहा ही नही जाता… क्या करूँ?”

 

“आप यहाँ खेर पर या जाओ भाभी.. यहाँ कोई नही है… खेत में छोटा स कमरा बना है और उसमे खटिया भी है”

 

“खेत में भला तूने खटिया क्यों रखी है तूने? रूखी को वहाँ ले जाकर चोदता है क्या?” शीला ने पूछा

 

“रूखी मिले तो रूखी… और ना मिले तो सूखी.. में तो यहाँ खेत में काम करने आती मज़दूरनों को भी चोद देता हूँ” रसिक ने ताव में आकर कहा “और वैसे उस रूखी को बच्चों से फुरसत ही कहाँ मिलती है कभी.. ”

 

“गजब का खिलाड़ी है रे तू रसिक.. ” शीला ने हंसकर कहा

 

“खिलाड़ी मैं नही.. मेरा लंड है भाभी। इसे रोज चुत चाहिए.. अब घर में नही मिलती तो बाहर से लाकर भी इसे खुश रखना पड़ता है”

 

“तुम्हें तो बाहर मिल जाती है.. मुझ जैसी का क्या? में कहाँ जाऊँ?”

 

“आपको कहीं जाने की जरूरत नही है.. दोपहर के समय मेरे खेत पर आ जाइए.. रसिक का लंड आपकी सेवा में हाजिर रहेगा”

 

शीला हंसने लगी और कुछ नही बोली

 

“एक बात पूछूँ भाभी.. क्या आप रूखी को आपके जैसा लंड चूसना सीखा देंगे?” रसिक ने पूछा

 

“वो तो मैं कैसे सिखाऊँ उसे.. उसके सामने अगर तेरा लंड चुसूँगी तो वो कैसे सह लेगी भला”

 

“वो तो मुझे भी पता है भाभी पर आप ही कुछ करो ना!! रूखी एक नंबर की गंवार अनपढ़ है… ” रसिक ने शिकायती स्वर में कहा

 

“जैसे तुम मर्दों को लंड चुसवाना अच्छा लगता है वैसे ही हम औरतों को अपनी पुत्ती चटवाना बहुत पसंद होता है यह तो पता है ना तुझे!! तो क्या कभी तूने रूखी की चुत को चाटकर उसे खुश किया है?” शीला ने वेधक सवाल पूछा

 

“क्या भाभी आप भी… वहाँ भला कौन चाटता है!!” रसिक ने हँसते हुए कहा

 

“बहनचोद सुबह तो बड़ी मस्ती से चुसवाया था तब कितना मज़ा आया था तुझे… एक मिनट में ही मेरे मुंह में मलाई गिरा दी थी.. वैसे ही हम औरतों को अपनी चुत चटवाने में मज़ा आता है” शीला ने कहा

 

“अरे भाभी… क्या कहूँ.. आपने सुबह जिस तरह मेरा लंड चूसा था… उसे याद करते हुए मैंने सुबह से पाँच बार मूठ मार दी.. मेरा हाथ भी दर्द करने लगा है.. लगता है आज क्रोसिन लेनी पड़ेगी… इतनी बार पानी निकालने के बावजूद लंड फिर खड़ा हो गया है.. क्या करूँ बताइए” रसिक ने कहा

 

“आजा घर पर.. और मेरी गांड में डाल दे.. तेल लगाकर तैयार रखती हूँ” शीला ने चुटकी लेते हुए कहा

 

“क्या भाभी… गांड में भी कोई डालता है भला” अबुद्ध रसिक ने कहा

 

“क्यों नही डाल सकते.. घर पर आ तुझे सब सिखाती हूँ”

 

“आप तो जबरदस्त हो भाभी… रूखी अगर आपके जितनी माहिर होती तो मुझे इन मजदूरनों के गंदे भोसड़े चोदने नही पड़ते… कुछ सिखाओ आप उसे भाभी” रसिक ने कहा

 

“रसिक, मुझे तो एक साथ दो मर्द चोदे ऐसा भी बहुत पसंद है.. कभी तू अपने किसी दोस्त को लेकर घर आजा… सब साथ में मजे करेंगे.”

 

“सच में भाभी!! मेरा एक दोस्त है रघु.. उसकी बीवी कुएं में गिरकर मर गई थी.. तब से बेचारा चुत के लिए तड़प रहा है.. अगर आप कहों तो कल हम दोनों सुबह दूध देने आपके घर आयें??” रसिक के मन में लड्डू फूटने लगे

 

“हाँ तो आ जा.. मैं तो सामने से बुला रही हूँ… पर जरा जल्दी आना ताकि पूरा वक्त मिलें.. मुझे आराम से चुदवाना है.. हड़बड़ी में मज़ा नही आता” शीला ने कहा

 

“भाभी हम सुबह ४ बजे आ जाएंगे.. चलेगा ना!!” उत्साहित रसिक ने कहा

 

“पर घर पर रूखी से क्या कहेगा की इतनी जल्दी कहाँ जा रहा है?

 

“उसकी चिंता आप मत करो.. उसे बता दूंगा की खेत में पानी देने जा रहा हूँ ”

 

“फिर ठीक है.. कल सुबह ४ बजे… पक्का ना!!:

 

“एकदम पक्का भाभी… आप बस लगाने के लिए तेल तैयार रखना” रसिक ने हँसते हुए कहा

 

“तू एक बार आ जा.. सब तैयार ही है” शीला ने कहा

 

“ठीक है भाभी, रखता हूँ” रसिक ने फोन काट दिया

 

फोन रखकर शीला ने रूखी के विशाल गुंबज जैसे स्तनों को दबाया और कहा “तू जीवा को आज रात यहाँ बुला ले.. पूरी रात वो यहाँ रहेगा.. सुबह जैसे ही रसिक यहाँ आएगा.. में जीवा को तुरंत तेरे घर भेज दूँगी.. ठीक है!!”

 

“वाह भाभी… गजब तरकीब ढूंढ निकाली आपने.. बड़ी उस्ताद हो” रूखी ने तारीफ करते हुए कहा

 

“रूखी, मैं अपने दिमाग और चुत दोनों का उपयोग कर सोचती हूँ ” अपने सर पर उंगली रखकर हँसते हुए शीला ने कहा

 

रसिक कल भाभी के घर चला जाएगा… उसके जाते ही जीवा अपने पास आ जाएगा इस सोच से ही रूखी की चुत से बूंदें टपक पड़ी। पर वह ये नही जानती थी की शीला ने एक ही रात में तीन तीन लंड से चुदवाने का प्रबंध कर लिया था!!

 

रूखी ने लगभग १ घंटे तक शीला के साथ मस्ती की.. और फिर अपने घर के लिए निकल गई। जीवा के साथ रात बिताने के खयाल से ही वह रोमांचित हो गई थी। अब तो रसिक भी उसका कुछ नही बिगाड़ पाएगा.. क्योंकी उसकी पोल भी खुल चुकी थी। अब तक वह जीवा के साथ रिक्शा में हाइवे पर जाती.. और वहीं जितना हो सकता था उसके मजे लेती.. वो भी डरते डरते की कहीं कोई आ न जाए… उसमे उसे जरा भी मज़ा नही आता था.. जीवा का मोटी लौकी जैसा भारी लंड को वह किसी भी डर के बिना अपनी चुदासी चुत में लेना चाहती थी.. और अब उसे अपना सपना सच होता दिखाई दे रहा था

 

जीवा की हरएक हरकत को याद करते करते रूखी अपने घर की ओर जा रही थी… जीवा का खयाल आते ही उसके दूध से भरे हुए उरोज ओर फूल गए.. और उसके हर कदम के साथ उछलने लगे..

 

इस तरफ शीला… अपने दिमाग को खुद ही शाबाशी दे रही थी.. काश ये रूखी पहले मिल गई होती..!! दो दो साल से भोसड़े में गाजर मुली और ककड़ी डालकर चुत को सब्जीमंडी ना बनाना पड़ता..!! उसे ताज्जुब यह हो रहा था की आज से पहले उसे रसिक के बारे में खयाल क्यों नही आया?? वो तो कलमुँहा रोज दूध देने आता ही था!!

 

शीला जब भी चौराहे से गुजरती तब सारे बूढ़े उसके स्तनों को टिकटिकी लगाकर देखते.. पूरा मोहल्ला उसे ठोंकने के लिए बेकरार था.. सब जानते थे की उसका पति २ सालों से विदेश था.. और तब से वह अपने बिस्तर में करवटें बदलती रही थी.. काफी लोगों ने कोशिश भी की थी.. जब भी वह कुछ सामान खरीदने जाती तब किराने की दुकान वाला हलकट उसके बोबलों को खुलेआम ताकता रहता.. मादरचोद साला!! और सबके सामने उसे देखते हुए अपने लंड को मसलने लगा था.. यह तो गनीमत थी की उसके साथ अनुमौसी भी थे वरना वह हरामज़ादा शीला पर टूट ही पड़ता.. और वो कॉर्पोरेटर का लड़का.. होली के दिन रंग लगाने के बहाने शीला के दोनों स्तनों को मसल गया था.. भड़वा साला!!

 

शीला को चुदने के लिए लंड का इंतेजाम करना कोई बड़ी बात नही थी.. उसके एक इशारे पर कई सारे मर मिटने को तैयार बैठे थे.. पर उसे डर था समाज का.. आज तक शीला ने बड़े ही विश्वास के साथ अपने आप को काबू में रखा था.. पर यह कमबख्त बारिश ने पूरा काम बिगाड़ दिया… इस मौसम में शीला का भोसड़ा बेकाबू हो गया.. और फिर रूखी और रसिक ने इस आग में पेट्रोल डालने का काम किया.. चलो, जो कुछ भी हुआ ठीक ही हुआ…!!

 

लंड को चुत की और चुत को लंड की जरूरत तब से पड़ती आई है जब से मानवजात का इस पृथ्वी पर अवतरण हुआ.. शीला बस यही खयालों में थी की कब रात हो और जीवा का मूसल जैसा लंड देखने को मिले!! शीला की पुत्ती में फिर से खाज होने लगी..

What did you think of this story

Comments