दोस्त ने मेरे लंड की किस्मत बदल दी

(XXX Kahani) 1

Akash Kumar 2026-05-21 Comments

हार्ड फक स्टोरी में मेरे दोस्त ने मुझे उसकी मदद करने को कहा. उसने मुझे उसकी शादीशुदा बहन को चोद कर उसे औलाद देने को कहा. उसने अपनी बहन को मेरे कमरे में भेज दिया.

नमस्ते दोस्तो! कैसे हो आप लोग? आशा करता हूँ कि सब ठीक होंगे।

मैं आपका दोस्त विक्की, लखनऊ से हूँ और बैंक ऑफ बड़ौदा में जॉब करता हूँ।
मेरी उम्र 26 साल है।

यहाँ लखनऊ में मेरा एक खास दोस्त है, जिसका नाम राशिद है।
वह ऑटो चलाता है।

उसके घर में उसकी बीवी नरगिस (25) और उसकी अम्मी नफीसा (46) रहती हैं।
मैं अक्सर उसके घर आया-जाया करता था और वे लोग मुझे अपने परिवार के सदस्य की तरह ही मानते थे।

लेकिन इस बार ईद पर कुछ ऐसा हुआ कि हमारे रिश्तों की परिभाषा ही बदल गई और यह हार्ड फक स्टोरी बन गयी।

ईद के एक दिन पहले राशिद की छोटी बहन ज़ोया अपने शौहर के साथ मायके आई थी।
घर में सब बहुत खुश थे।

शाम को राशिद मेरे कमरे में आया और बोला, “विक्की भाई, एक बात बोलनी है, अगर तुम बुरा न मानो तो?”

मैंने कहा, “भाई, आज तक तेरी किसी बात का बुरा माना है क्या? बोल, जो बोलना है!”
राशिद ने हिचकिचाते हुए कहा, “भाई, ज़ोया के निकाह को 4 साल हो गए हैं, पर वह हमल (गर्भवती) से नहीं हो पा रही है। टेस्ट में पता चला है कि उसके शौहर बाप नहीं बन सकते। तो क्या तुम मेरी बहन को प्रेग्नेंट कर सकते हो? तुम्हारी बहुत मेहरबानी होगी भाई!”

मैं सुनकर दंग रह गया और बोला, “भाई, कैसी बात कर रहा है? ज़ोया मेरी बहन जैसी है! अगर यह बात घर में किसी को पता चली तो बवाल हो जाएगा!”
तब राशिद ने खुलासा किया, “अम्मी ने ही मुझे तुमसे बात करने को बोला है!”

सच कहूँ तो मैं भी अंदर ही अंदर खुश हो रहा था कि 22 साल की एक खूबसूरत गैर मजहबी लड़की को चोदने का मौका मिलेगा।
मैंने राशिद से कहा, “भाई देख, अगर घर में किसी को कोई दिक्कत नहीं है, तो मैं कर दूँगा। रात में ज़ोया को मेरे कमरे में भेज देना।”

वह खुश होकर बोला, “शुक्रिया भाई!” और वहाँ से चला गया।

मैं कमरे में लेटा यही सोच रहा था कि मैं सही कर रहा हूँ या गलत।

तभी 10 मिनट बाद मेरा दरवाजा खुला और अंदर ज़ोया आई।
मैंने उसे अंदर बुलाया।

उस समय उसने पीले रंग का सूट और सफेद रंग की लेगी पहनी थी, जिसमें वह बेहद सेक्सी लग रही थी।
वह मेरे पास आकर बैठ गई और मैं बस उसे निहारता रहा।

वह बोली, “क्या देख रहे हो भाई जान?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं।”

वह मुस्कुराकर बोली, “तो क्या सोचा आपने?”
मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। मैंने बस इतना पूछा, “क्या यह सब तुम्हारे शौहर को पता है?”

उसने तुरंत जवाब दिया, “हाँ, उन्हें सब पता है!”
और इतना कहते ही उसने अपना दुपट्टा हटा दिया जिससे उसके टाइट बूब्स कपड़ों में साफ झलकने लगे।

मैं थोड़ा शर्मा गया और मुँह दूसरी तरफ कर लिया।

ज़ोया करीब आकर बोली, “क्या हुआ भाई जान? पसंद नहीं आई क्या आपको?”
मैंने कहा, “नहीं, ऐसी बात नहीं है, तुम बहुत सुंदर हो!”

फिर वह उठी और मेरे मुँह को अपनी चूचियों के बीच दबाने लगी।
मेरे अंदर भी कामवासना जाग उठी और मैंने अपने दोनों हाथों से उसके भारी चूतड़ दबाने शुरू कर दिए।

मैं उठकर खड़ा हुआ तो वह मेरे सामने काफी छोटी लग रही थी, क्योंकि मेरी हाइट 6’4″ है।
वह चेहरा ऊपर करके मुझे देख रही थी।

मैंने उसकी गर्दन में हाथ डालकर उसे ऊपर खींचा और हम एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे।

मैंने उसकी कुर्ती उतार दी।
उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी जिसमें उसकी गोरी चूचियाँ कयामत ढा रही थीं।

मैं उसके बूब्स को जोर-जोर से मसलने लगा।
वह सिसकते हुए बोली, “आह्ह… धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है!”

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोला और उसे उतारकर साइड में फेंक दिया।

मैं उसके मस्त बूब्स को चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबा रहा था।

फिर मैंने उसकी लेगी में हाथ डाला।
वह पहले ही पानी छोड़ चुकी थी और उसकी पैंटी पूरी भीगी हुई थी।

मैंने उसकी पैंटी और लेगी एक साथ खींचकर निकाल दी।

वह अब मेरे सामने पूरी तरह नंगी थी।
उसकी चूत एकदम साफ (Clean-shaven) थी।

मैं खुद को रोक नहीं पाया और उसकी चूत में दो उंगलियां डाल दीं।
उसकी जोर से आवाज निकली, “आह्ह अम्मी!”

मैं डर गया और पूछा, “क्या हुआ?”
वह बोली, “कुछ नहीं, आप करते रहो!”

थोड़ी देर बाद वह बोली, “मुझे आपकी वो मशीन देखनी है!”
मैंने पूछा, “क्या देखना है?”

वह शरमाते हुए बोली, “मुझे शर्म आती है नाम लेने में!”
मैंने कहा, “नाम बोलो तभी दिखाऊंगा!”

तो वह धीरे से बोली, “आपका लंड देखना है!”

मैंने कहा, “देख लो, आज से यह तुम्हारा ही है!”

मैंने जैसे ही अपना शॉर्ट्स नीचे किया, मेरा लोहे जैसा टाइट लंड सीधे उसके मुँह पर लगा।
उसका मुँह खुला का खुला रह गया।

मैंने पूछा, “क्या हुआ ज़ोया?”
वह बोली, “हायल्ला! कितना बड़ा है! मैं इसे नहीं ले पाऊँगी!”

उसका हाथ मेरे लंड पर ही था।
मैंने उसे तसल्ली दी, “कुछ नहीं होगा, तुम बड़े आराम से ले लोगी, घबराओ मत!”

वह धीरे-धीरे लंड को सहलाने लगी।
मैंने उसे मुँह में लेकर चूसने को कहा, पर उसने मना कर दिया और मैंने भी जोर नहीं दिया।

जब मेरा लंड एकदम पत्थर जैसा हो गया तो मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया।

उसने खुद अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के छेद पर सेट किया।

मैंने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “डाल दूँ अंदर?”
उसने कहा, “हाँ भाई जान! लेकिन आराम से करना, आपका लंड बहुत बड़ा और मोटा है, मुझे डर लग रहा है!”
मैंने उसके माथे को चूमा और कहा, “फिक्र न करो ज़ोया, सब आराम से हो जाएगा!”

फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा और आधा लंड ज़ोया की चूत फाड़ता हुआ अंदर घुस गया।
उसकी चूत काफी टाइट थी।

ज़ोया की चीख निकल गई और वह रोने लगी।
वह मुझे धक्का देते हुए चिल्लाई, “नहीं चुदवाना मुझे! छोड़ दो मुझे! आपको खु.दा का वास्ता, बहुत दर्द हो रहा है! छोड़ दो मुझे!”

मैं चुपचाप लंड अंदर डाले हुए रुक गया और उसके बूब्स दबाने लगा।
2-3 मिनट बाद जब वह शांत हुई.
तो मैंने फिर से तेजी से 4-5 धक्के मारे और अपना पूरा लंड उसकी गहराई तक उतार दिया।

ज़ोया फिर से चिल्लाई और रोने लगी।

मैं थोड़ी देर रुका और फिर धीरे-धीरे चोदने लगा।

उसकी चूत सच में बहुत टाइट थी।
थोड़ी देर बाद जब उसने पानी छोड़ा, तो लंड आराम से अंदर-बाहर होने लगा।

अब मैं पूरी ताकत से चोदने लगा।

हर धक्के पर ज़ोया “आह्ह-आह्ह” की आवाज निकाल रही थी।

करीब 35 मिनट तक नॉन-स्टॉप चोदने के बाद मैंने अपना पूरा गर्म बीज ज़ोया की चूत के अंदर ही निकाल दिया।

हम दोनों पसीने से लथपथ थे।

थोड़ी देर बाद वह उठी और बोली, “भाई जान, मुझे पेशाब करने जाना है!”
वह बाथरूम से आई और मेरे बगल में बैठ गई।

उसने प्यार से कहा, “भाई जान, आप बहुत बुरे हो!”
मैंने हँसकर पूछा, “क्यों, क्या हुआ?”

वह बोली, “अपनी बहन को कोई इतना दर्द देकर चोदता है क्या!”
मैंने कहा, “हर कोई बहन इतनी सेक्सी नहीं होती!”

यह सुनकर वह लजाकर मुस्कुरा दी।
मैंने उसे फिर से अपनी तरफ खींचा और हम फिर से गर्म हो गए।

उस रात मैंने ज़ोया को कुल 5 राउंड चोदा।

सुबह हमारी नींद तब खुली जब कोई दरवाजा पीट रहा था।
मैंने जाकर दरवाजा खोला तो देखा सामने नरगिस भाभी खड़ी थीं।

उन्होंने मैक्सी पहनी थी, जिसमें से उनका क्लीवेज साफ दिख रहा था।

मेरी नजर उनकी चूचियों पर टिक गई।

भाभी ने यह नोटिस किया और शरारत से बोलीं, “क्यों? ज़ोया की दबाओ और चूसो! मेरा क्यों देख रहे हो?”

वह अंदर आईं और ज़ोया से बोलीं, “उठो! कितना करोगी? सुबह के 10 बज गए हैं!”

ज़ोया उस वक्त एकदम नंगी थी।

भाभी उसे देखकर हँसने लगीं और मुझसे पूछा, “मजा आया?”
मैंने कहा, “ज़ोया से ही पूछ लो!”

भाभी ने ज़ोया से पूछा, “क्यों, मजा आया?”
ज़ोया मुँह बनाकर बोली, “भाभी, भाई जान बहुत बेरहम हैं! चूत फाड़ चुदाई से मैं रात भर चिल्लाती रही और तुम एक बार भी देखने नहीं आईं कि क्या दिक्कत है!”

भाभी जोर से हँसीं और बोलीं, “क्यों? क्या रात में ही फट गई क्या? अभी तो पूरा महीना यही करना है प्रेग्नेंट होने के लिए!”

ज़ोया बोली, “तौबा-तौबा! हालत खराब हो जाएगी भाभी जान! रात में 5 बार हार्ड फक किया है, चूत फाड़ डाली है एकदम!”

भाभी ने उसकी चुटकी लेते हुए कहा, “कोई बात नहीं! आज रात अम्मी तुम्हारी मदद करेंगी!”
ज़ोया हैरान होकर बोली, “कैसी मदद भाभी?”
भाभी मुस्कुराकर बोलीं, “रात में सब पता चल जाएगा!” और फिर ज़ोया को लेकर नीचे चली गईं।

बाकी कहानी बाद में बताऊंगा कि आंटी ने किस तरह से हमारी चुदाई में मदद की।

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