जीजा ने गरम करके साली की सील तोड़ी पार्ट 2
(हिंदी सेक्स स्टोरीज) 86
फिर आपकी जो मर्जी कर लेना मैं कुछ भी नहीं कहूंगी। मैं भी कसम खाती हूं कि आप अगर सिर्फ बालों को चूमे तो मैं कुछ भी नहीं कहूंगी।” मैंने जवाब दिया।
“देख लो बाद में पीछे मत हटना।” अनीश जी ने कहा।
“जी मैं आप जैसी नहीं हूं। जो कहती हूं करके रहती हूं।”
“ठीक है जब तुम राजी हो ही गई हो तो ये काम आराम से किया जाए। चलो बेड रूम में। वहां बिस्तर पर लिटाकर आराम से चूमूंगा तुम्हारे बालों को।” उन्होंने चहकते हुए कहा।
मैंने और ज्यादा बहस नहीं की और चुपचाप उनके साथ हो ली। हम बेडरूम में आ गए। मैं बिस्तर पर लेट गई। और अपने बदन को ढीला छोड़ दिया। मेरी पीठ नरम गद्देदार बिस्तर से पूरी तरह सट गई थी। मेरे हाथ पैर बिल्कुल शिथिल पड़ गए थे। मेरी सांसें अभी भी थोड़ी तेज चल रही थीं और दिल की धड़कन गले तक महसूस हो रही थी।
दीदी ने मेरे लंबे नम बालों को दोनों हाथों से उठाकर बिस्तर पर अच्छी तरह फैला दिया। बाल तकिए पर और चारों तरफ बिखर गए। उनकी ताज़ी शैम्पू की महक पूरे कमरे में फैल रही थी। जीजाजी बिस्तर पर मेरे ठीक बगल में बैठ गए। उनकी जांघ मेरी बांह को हल्का सा छू रही थी।
उन्होंने अपने बड़े मजबूत हाथों में मेरे बालों की मोटी लट पकड़ ली। वे उन्हें अपनी नाक के पास ले जाकर गहरी गहरी सांसों से सूंघने लगे। फिर उन्होंने अपने गर्म नरम होंठों से बालों को चूमना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उनके होंठ मेरे सिर की ओर बढ़ने लगे। हर चुंबन के साथ उनकी गर्मी मेरी खोपड़ी तक पहुंच रही थी।
उन्होंने मेरे सिर के बालों को तरह तरह के कोणों से चूमा। कभी हल्के हल्के चुंबन तो कभी होंठों को दबाकर लंबे समय तक चूसते हुए। फिर उन्होंने मुझे धीरे से पीछे घूमने को कहा। मैंने लेटे लेटे ही करवट ले ली। जीजाजी ने मेरी गर्दन के बाल हटाए और अपने गर्म होंठ मेरी नाजुक गर्दन पर छुआ दिए।
गर्दन पर पहली बार किसी मर्द की गर्म सांसों के पड़ने से मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी और सिहरन दौड़ गई। मेरे पूरे शरीर पर रोएं खड़े हो गए। उनकी सांसें मेरी संवेदनशील त्वचा पर गर्म हवा की लहर की तरह बह रही थीं। उनकी जीभ हल्के से गर्दन पर फिसली और वे धीरे धीरे चूमने लगे। मेरी सांसें भारी हो गईं। एक हल्की सी कराह मेरे होंठों से निकल गई। “Khoobsurat Kunwari Sali Chudai”
फिर उन्होंने मुझे वापस सीधा कर दिया। मेरे बालों से उनके होंठ हटकर अब मेरे माथे पर आ गए। उन्होंने मेरे माथे को धीरे से चूम लिया। मैं इस अचानक स्पर्श को महसूस करते ही चौंक उठी। “ये क्या कर रहे हो। आपने वादा किया था कि मेरे बालों के अलावा किसी अंग को नहीं छुएंगे।”
मैंने उठने की कोशिश की। मेरा बदन तन गया था। “मैं वही कर रहा हूं जो मैंने वादा किया था। मैं तुम्हारे बालों को ही चूम रहा हूं। मैंने ये कहां कहा था कि सिर्फ सिर के बालों को चूमना चाहता हूं। हां अगर ये साबित कर दो कि तुम्हारे बदन पर सिर के अलावा कहीं और बाल नहीं हैं तो छोड़ दूंगा।” उनकी आवाज़ में शरारत और कामुकता दोनों झलक रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मुझे सारा कमरा घूमता हुआ सा लगा। मैं अपने ही जाल में फंस चुकी थी। सिर, बगल, चूत पर ही क्या रोएं तो पूरे शरीर पर ही होते हैं। उफ्फ ये मैं क्या कसम ले बैठी। लेकिन अब तो देर हो चुकी थी। उनके होंठ मेरे भौंहों से सरकते हुए मेरी आंखों की पलकों पर आ गए। उनकी होंठों का हल्का हल्का स्पर्श मुझे मदहोश कर दे रहा था।
मेरी पलकें फड़फड़ा रही थीं। उनकी होंठों की नमी मेरी पलकों को छू रही थी। मेरी पलकों पर से घूमते हुए वापस माथे पर आकर ठहरे। फिर नाक के ऊपर से धीरे धीरे नीचे सरकने लगे। स्पर्श इतना हल्का था मानो कोई मेरे बदन पर मोर पंख फेर रहा हो। मेरे रोएं उसके स्पर्श से खड़े हो जा रहे थे।
अब उनके होंठ मेरे होंठों के ऊपर आकर ठहर गए। उनके और मेरे होंठों में सिर्फ कुछ मिलीमीटर की दूरी थी। मैं सख्ती से आंखें भींचकर उनके होंठों के स्पर्श का इंतजार कर रही थी। मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। मेरे स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे। मैं मन ही मन चाह रही थी कि अब वे मुझे चूम लें।
कुछ देर उसी जगह ठहरने के बाद उन्होंने अपने होंठ वापस खींच लिए। मैं उनकी इस हरकत से झुंझला कर आंखें खोल दी। पता नहीं क्यों आज वो इतने निष्ठुर हो गए थे। रोज तो मुझे स्पर्श करने का बहाना ढूंढते थे। मगर आज जब मैं मन ही मन चाह रही थी कि वो मुझे स्पर्श करें तो वो दूरी मेंटेन कर रहे थे।
वो उठकर बैठ गए। “इसके कपड़े उतार दो। कपड़ों के ऊपर से मैं कैसे पूरे बदन के बालों को चूम सकूंगा।” उन्होंने कहा। दीदी ने मेरी तरफ देखा। मैंने बैठते हुए अपने हाथ ऊपर करके अपनी रजामंदी जता दी। दीदी ने मेरी कमीज़ उतार दी। टाइट ब्रा में कसे मेरे गोल भरे स्तनों को देखकर अनीश जी की आंखें बड़ी बड़ी हो गईं।
उनकी नजर मेरे उभरे हुए क्लीवेज पर अटक गई। फिर दीदी ने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा ढीली होकर कंधे पर झूल गई। मैंने खुद अपने हाथों से उसे उतारकर तकिए के पास रख दी। मैंने अपने स्तनों को अपने हाथों से ढक लिया और शरमाते हुए अनीश जी की तरफ देखा। वो मुस्कुराते हुए अपनी भूखी आंखें मेरे बदन पर फिरा रहे थे।
फिर दीदी बोली कि देखा ना ऐसा ही करते हैं। दीदी नीचे झुककर मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। साथ ही दीदी ने अपनी ब्लाउज को थोड़ा सा ऊपर कर लिया। एकदम साफ दीदी के भारी बूब्स लटकते हुए नजर आ रहे थे। उनके बड़े स्तन हिल रहे थे और भूरी निप्पल्स साफ दिख रही थीं। “Khoobsurat Kunwari Sali Chudai”
उन्होंने जीजाजी की शर्ट को भी उतार दिया। जीजाजी का चौड़ा सीना और मजबूत मसल्स नंगी हो गए। फिर दीदी उनकी बेल्ट निकालने लगी। वो बड़ी मुश्किल से हिला हिलाकर निकली। फिर पैंट के हुक खोले और उसे उतारने की कोशिश कर रही थी। दीदी ने मुझे बोला कि संजना मेरी थोड़ी मदद कर इनकी पैंट मुझसे नहीं उतर रही है। तो मैंने उनकी मदद की और उनकी पैंट उतर गई। अब जीजाजी सिर्फ अंडरवियर में थे।
जिसे मैं बहुत ध्यान से देखे जा रही थी। मेरी आंखें जीजाजी के बदन से हट ही नहीं रही थीं। क्या मस्त बॉडी थी उनकी। चौड़ा सीना, मजबूत बाहें और अंडरवियर के अंदर एक बहुत बड़ी सी उभरी हुई चीज जो बाहर आने के लिए बेताब हो रही थी। वो कपड़े को तान रही थी और हल्का हल्का थरथरा रही थी। मैं उसे घूरती जा रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
तो अचानक से दीदी ने मुझे देख लिया कि मैं जीजाजी के लंड की तरफ देख रही हूं और उन्होंने मुझसे कहा कि यह वही सांप है जो रोज मुझे डसता है। क्या तुझे देखना है तो बता? तो मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी और मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या जवाब दूं।
मेरा मन पूरी तरह खाली हो गया था। दिल जोर जोर से धड़क रहा था और गला सूख गया था। मैं बस जीजाजी के उस उभरे हुए लंड को घूरती जा रही थी। मेरी आंखें हिल भी नहीं पा रही थीं। इतने में देखते ही देखते दीदी ने अंडरवियर को एक झटका देकर खींच दिया।
लंड बाहर निकल आया और सीधा खड़ा हो गया। दीदी ने उसे अपनी नरम हथेली में पकड़कर सहलाने लगी। उनकी उंगलियां लंड की मोटी नसों पर ऊपर नीचे घिस रही थीं। लंड की टोपी से थोड़ी सी पारदर्शी चिपचिपी तरल पदार्थ निकल रही थी जो दीदी की उंगलियों पर लग रही थी।
जीजा जी भी मुस्कुराने लगे और कहने लगे कि तुम बाजी हार गए हो। अब मुझे जो चाहिए तुम्हें देना पड़ेगा। मेरा चूत तो पहले से ही गीला हो गया था। मेरी चूत की अंदरूनी दीवारें सिकुड़ सिकुड़कर गीली चिपचिपी हो चुकी थीं। क्या करूं मुझे समझ में नहीं आ रहा था। मेरे पैरों के बीच गर्मी फैल रही थी और मेरी सांसें भारी हो गई थीं।
दीदी बोली देख इन्हें कितना मजा आ रहा है। मैं तो बस देखे ही जा रही थी। उनका इतना बड़ा और मोटा था कि बस पूरी चूत गीली हो रही थी। लंड की मोटाई मेरी हथेली जितनी थी और लंबाई कम से कम आठ इंच थी। फिर दीदी बोली कि तू भी एक बार इस सांप को पकड़कर देख कितना मजा आता है। “Khoobsurat Kunwari Sali Chudai”
उन्होंने मेरा हाथ खींचकर लंड पर रख दिया। बोली कि ऊपर नीचे करके देख कितना मजा आएगा। फिर मैंने जैसे ही हाथ रखा वो इतना गरम था और इतना मोटा सख्त लंबा कि मेरे पूरे बदन में सनसनी सी दौड़ रही थी। लंड की नसें मेरी हथेली पर उभरी हुई महसूस हो रही थीं। वो थरथरा रहा था और उसकी गर्मी मेरी उंगलियों तक पहुंच रही थी।
मैंने धीरे धीरे ऊपर नीचे करना शुरू किया। लंड की टोपी पर से चिपचिपा रस मेरी हथेली पर फैल गया। फिर दीदी ने कहा कि साली तू शरमाती बहुत है आज यह तेरी शर्म उतारनी पड़ेगी। वो जीजाजी से बोली कि आप ही समझाओ इसे। उन्होंने मेरी ब्रा उतार फेंकी। मेरे दोनों कपड़ों को जल्दी से खींचकर फाड़ दिया।
जीजाजी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया। उनकी मजबूत बाहें मेरी कमर को जकड़ लिया। मैं छटपटा रही थी चिल्ला रही थी लेकिन मुझे बचाने वाला वहां पर कोई नहीं था। फिर दीदी ने मेरे दोनों हाथ आगे से पकड़ लिए। जीजाजी पूरे नंगे हो गए थे और उनका लंड मेरी गांड को छू रहा था।
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