बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 4
दीदी अभी जाग रही थी- “मोनू एक बात पुछूं? सच-सच बताना…” मुझे लगा दीदी क्या पूछेंगी?
दीदी अभी जाग रही थी- “मोनू एक बात पुछूं? सच-सच बताना…” मुझे लगा दीदी क्या पूछेंगी?
रात के साढ़े बारह बजे.. एक जानदार ऑर्गैज़म के बाद.. शीला और संजय बाथरूम में साथ नहाने गए..
वैशाली की सिट्टी-पीट्टी गुम हो गई.. उसके मुंह से चीख निकल गई "मतलब तू मौसम के पापा के साथ..........
मौसम को कंधे से पकड़कर फाल्गुनी ने अपनी और खींचा और बोली "नाराज हो गई यार!!
फाल्गुनी की उंगली को गीला करके वैशाली ने उस उंगली को मौसम की चूत के अंदर डाल दिया
फिर उसने मुझे उन दोनों की चुदाई दिखाई.. तब से मैं ये मानने लगी हूँ की सेक्स में कुछ भी मुमकिन
वैशाली: "सहला क्या रही है.. जरा जोर से दबा.. तभी तो मज़ा आएगा"
पार्टी का अलग ही मज़ा आता.. बाकी कपल्स की तरह रूम में जाकर जबरदस्त चुदाई भी करते..
वैशाली ने एक दम लगाते हुए कहा "सर, अभी थोड़ी देर पहले ही आपने खोलकर दबाए है.. चूसे भी है..
दीदी न जाने क्यों उसे रोक नहीं रही थी और बीच-बीच में मुझे भी देख रही थी