शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-65

(Desi Kahani) 4

redwalker69 2026-10-11 Comments

This story is part of a series:

फाल्गुनी खामोश रही.. बदले में उसने मौसम के गाल को चूसा और अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी और मौसम की चूत को सहलाने लगी.. सहलाते हुए कभी उसकी उंगली वैशाली की जीभ का स्पर्श करती तो वैशाली उसकी उंगली को भी चाट लेती.. फाल्गुनी की उंगली को गीला करके वैशाली ने उस उंगली को मौसम की चूत के अंदर डाल दिया

 

“आह्ह.. ” फाल्गुनी की उंगली अंदर घुसते ही मौसम की सिसकी निकल गई..

 

“कितनी गरम गरम है तेरी चूत तो यार.. !!” फाल्गुनी ने कहा.. और तेजी से अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगी..

 

“आह्ह.. मर गई.. ऊईई.. माँ” मौसम चिल्लाई.. फाल्गुनी ने तुरंत अपने होंठ उसके होंठों पर दबाकर और उसके स्खलित होने से निकली चीख को रोक दिया.. मौसम का पूरा शरीर अकड़ कर बिस्तर से ऊपर उठ गया.. दो सेकंड के लिए उसी अवस्था में थरथराने के बाद वह धम्म से बिस्तर पर गिरी.. तेज सांसें भरते हुए.. ए.सी. कमरे में भी उसे पसीने छूट गए.. फाल्गुनी की उंगली और वैशाली की जीभ, दोनों ने मिलकर मौसम की मुनिया को एक जानदार ऑर्गजम दिया था..

 

अब वैशाली ने अपनी जीभ से फाल्गुनी की चूत पर हमला कर दिया.. उसकी चूत को चाटते हुए वैशाली एक पल के लिए रुकी और उसने मौसम से कहा “मौसम, अब तेरी बारी.. चल मेरी चूत चाट जल्दी से.. ”

 

अपनी साँसों को नियंत्रित करते हुए मौसम ने कहा “यार, मुझसे नही होगा ये.. !!”

 

“क्यों? मादरचोद.. चटवाते वक्त तो तुझसे सब कुछ हो रहा था.. अब चाटने की बारी आई तो नखरे कर रही है? चुपचाप चाटना शुरू कर वरना ये हेरब्रश का हेंडल तेरी चूत में घुसेड़कर गुफा बना दूँगी” वैशाली ने गुर्रा कर कहा

 

“यार, मैंने पहले कभी चाटी नही है वैशाली”

 

“साली रंडी.. आजा.. तुझे सब सीखा दूँगी.. ” कहते हुए वैशाली अपने विशाल स्तनों को खुद ही दबाते हुए खड़ी हुई और मौसम को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया.. वैशाली मौसम के स्तनों पर सवार हो गई और अपनी गुलाबों को दोनों होंठ उंगलियों से चौड़े करके मौसम के होंठों पर रगड़ने लगी.. न चाहते हुए भी मौसम उसकी चुत पर जीभ फेरने के लिए मजबूर हो गई.. यह देख उत्तेजित होकर फाल्गुनी अपनी चूत पर हेरब्रश तेजी से घिसने लगी..

 

वैशाली की बेकाबू जवानी हिलोरे ले रही थी.. अनुभवहीन मौसम की जीभ को ट्रेन करते हुए उसने मौसम के सर के नीचे दोनों हाथ डालकर उसे कानों से पकड़ते हुए अपनी चूत से दबाए रखा था.. और अपनी चूत चटवाएं जा रही थी.. मौसम को शुरू शुरू में चूत और उसके पानी की गंध बड़ी ही विचित्र लगी.. पर वैशाली ने उसे ऐसे पकड़ रखा था की छूटना मुश्किल था.. आखिर अपने हथियार डालकर उसने अपनी जीभ को वैशाली के सुराख के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.. थोड़ी ही देर में वह सीख गई.. वैशाली चुत चटवाते हुए अपनी गदराई गांड मौसम के स्तनों पर रगड़ रही थी.. जिससे मौसम नए सिरे से सिहर रही थी.. वैशाली ने मौसम के स्तनों पर घोड़े की तरह सवारी करते हुए अपनी लय प्राप्त कर रही थी.. आगे पीछे हो रही वैशाली के दोनों खरबूजे बड़ी ही अद्भुत तरीके से हिल रहे थे.. दोनों के नरम नरम अंग एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे..

 

मौसम की चूत में फिर से खुजली होने लगी.. वो अभी थोड़ी देर पहले ही झड़ी थी.. पर वैशाली की चूत की मादक गंध और बबलों की मजबूत रगड़ाई के कारण उसकी चुनमुनिया फुदकने लगी.. तीन चार मिनट तक चाटते रहने के बाद अब मौसम को भी वैशाली की पनियाई चूत के अंदर जीभ डालने में मज़ा आने लगा था.. उसकी रसीली कामुक चिपचिपी चूत के वर्टिकल होंठ और क्लिटोरिस को अपने मुंह में भरकर वो मस्ती से चूस रही थी.. बगल में लेटी फाल्गुनी हेरब्रश के हेंडल को अपनी चूत पर रगड़े जा रही थी..

 

तीनों लड़कियां अपनी हवस शांत करने के लिए अलग अलग क्रियाएं करने में व्यस्त थी.. लेकिन उनकी वासना शांत होने के बदले और भड़क रही थी.. रात के डेढ़ बजे का समय हो रहा था.. पर तीनों में से किसी की भी आँखों में नींद का नामोनिशान नही था.. थी तो बस नारी की हवस..

 

तीनों लड़कियां अपनी हवस शांत करने के लिए अलग अलग क्रियाएं करने में व्यस्त थी.. लेकिन उनकी वासना शांत होने के बदले और भड़क रही थी.. रात के डेढ़ बजे का समय हो रहा था.. पर तीनों में से किसी की भी आँखों में नींद का नामोनिशान नही था.. थी तो बस नारी की हवस..

 

आज फाल्गुनी का बिल्कुल नया ही स्वरूप देख रहे थे मौसम और वैशाली.. अचानक वैशाली ने अपनी आगे पीछे होने की गति बधाई.. वो बड़ी ही आक्रामकता से अपनी चूत को मौसम के चेहरे के साथ रगड़ने लगी.. वैशाली के प्रहारों से मौसम बिलबिलाने लगी.. लेकिन वैशाली के जोर के सामने वो ज्यादा कुछ नही कर पाई.. अब मौसम थक चुकी थी.. खुले बालों के साथ हाँफ रही वैशाली का पूरा चेहरा लाल हो गया था.. पसीने से तरबतर हो गई थी उसकी गर्दन.. उसका पसीना दोनों स्तनों के बीच से गुज़रता हुआ उसकी चूत से होकर मौसम के चेहरे पर टपकने लगा था.. फाल्गुनी यह द्रश्य और वैशाली का कामुक स्वरूप देखकर ही झड़ गई.. हेरब्रश का डंडा चूत में डालने की जरूरत ही नही पड़ी..

 

“ओह्ह ओह्ह ओह्ह आह्ह मर गई.. चाट जल्दी.. डाल जीभ अंदर.. ऊईई आह्ह.. ओह गॉड.. उफ्फ़.. !!!!” की कामुक आवाजों के साथ वैशाली झड़ गई.. जैसे भूकंप आने से बहुमंजिला इमारत ढह जाती है.. संध्या होते ही दो पर्वतों के बीच सूरज ढल जाता है.. वैसे ही वैशाली भी पस्त होकर गिर पड़ी.. फाल्गुनी की चूत ने झड़ने के बाद काफी पानी निकाला था.. बेड के चद्दर पर बड़ा सा धब्बा हो गया था चूत के रिसे हुए पानी से.. फाल्गुनी और वैशाली दोनों ठंडी हो चुकी थी.. पर मौसम अब फिरसे उत्तेजित हो गई थी.. अब समस्या यह थी की वैशाली या फाल्गुनी दोनों में से कोई भी उसका साथ देने के लिए फिलहाल तैयार नही थे..

 

मौसम खड़ी हो गई.. और बालकनी की दीवार के पास खड़ी होकर अपनी चूत को खुजाने लगी.. चारों तरफ अंधकार था.. ठंडी सरसराती हवाएं उसके नंगे बदन को चूमते हुए निकल रही थी.. मौसम की पुच्ची में खुजली का जोर बढ़ता जा रहा था.. उसे अपने पीयूष जीजू की याद आ रही थी.. पीयूष ने कैसे उसके होंठों पर उसके जीवन का प्रथम चुंबन दिया था.. उसके ड्रेस में हाथ डालकर उरोजों को पकड़कर दबाया था.. आह्ह.. !!

 

मौसम ने पीछे मुड़कर बिस्तर की तरफ देखा.. वैशाली और फाल्गुनी.. एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर.. नवविवाहित जोड़ें की तरह पड़े हुए थे.. फाल्गुनी वैशाली के होंठों पर अपनी जीभ फेर रही थी.. और हेरब्रश का हेंडल वैशाली की चुत के अंदर डाल रही थी.. लगभग ६ इंच लंबा हेंडल कैसे वैशाली की चूत के अंदर चला गया ये देखना चाहती थी मौसम.. !! वह वापिस बेड पर आई.. वैशाली के दोनों पैरों को चौड़ा किया और फाल्गुनी के हाथ से हेरब्रश ले लिया..

 

मौसम: “मुझे सच सच बता.. फाल्गुनी.. तूने जो लंड लिया वो इतना ही लंबा था?”

 

फाल्गुनी: “इतना लंबा तो नही था”

 

मौसम: “तो इससे आधा ??”

 

वैशाली: “मौसम, लगता है तुझे लंड देखने की बड़ी चूल मची है.. एक काम कर.. यहाँ हमारे ग्रुप में से किसी भी एक मर्द को पसंद कर और चुदवा ले.. यहाँ कौन देखने वाला है तुझे!! घर वापिस लौटकर चुदवाना तो छोड़.. लंड देखना भी नसीब नही होगा !!”

 

फाल्गुनी: “मन तो मेरा भी कर रहा है.. पर किसी को भी कैसे राजी करें? सीधा जाकर ऐसा तो नही बोल सकते की चलो चोदते है!!”

 

वैशाली: “तुम दोनों मुझे एक बात बताओ.. अगर तुम्हें एक रात के लिए किसी एक मर्द के साथ बिताने का मौका मिले.. तो हमारे ग्रुप में से कीसे चुनोगी?”

 

सवाल बड़ा ही रोमांचक था.. मौसम और फाल्गुनी दोनों शरमा गई.. नग्न स्त्री या लड़की को शरमाते देखना बड़ा ही मनोहर द्रश्य होता है

 

मौसम: “पहले तू बता वैशाली.. तुझे कौन पसंद है?”

 

वैशाली: “मुझे तो सब पसंद है.. अगर मौका मिले तो मैं एक ही रात में सभी मर्दों से चुदवा लूँ.. पर अभी बात मेरी नही, तुम दोनों की हो रही है.. तो बताओ मुझे.. हो सकता है की तुम्हारी पसंद के मर्द के साथ रात गुजारने का मैं ही तुम दोनों के लिए सेटिंग कर दूँ….

 

फाल्गुनी: “माय गॉड.. तुम तो दलाल जैसी बात कर रही हो.. !!”

 

मौसम: “यार फाल्गुनी.. मुझे तो लगता है की वैशाली ने इस ग्रुप के किसी मर्द के साथ ऑलरेडी सेक्स कर लिया है.. मुझे तो यकीन है!!”

 

फाल्गुनी: “अच्छा? तो तेरे हिसाब से वैशाली ने किसके साथ किया होगा? कौन हो सकता है?”

 

थोड़ी देर सोचने के बाद मौसम ने कहा “हम्म.. एक तो राजेश सर के साथ और दूसरा.. !!”

 

वैशाली रोमांची होकर बोली “हाँ हाँ बोल ना.. कौन हो सकता है दूसरा!!” वो देखना चाहती थी की मौसम अपने मुंह से पीयूष का नाम लेती है या नही

 

मौसम: “दूसरा कौन हो सकता है.. ये मुझे पता नही.. फाल्गुनी, तू बता.. तू किसके साथ रात गुजारना चाहेगी?”

 

फाल्गुनी के स्तन टाइट हो गए.. रात बिताने की कल्पना से ही.. !!

 

उसने शरमाते हुए कहा “पिंटू के साथ, मौसम। मुझे वो बहोत ही पसंद है.. कितना क्यूट है यार!! कल से उसकी तरफ देखकर लाइन दे रही हूँ.. पर वो कमीना मेरे सामने नजर उठाकर देखता तक नही है!! मुझे लगता है की उसे किसी ओर लड़की में इन्टरेस्ट होगा.. !!”

 

मौसम अपनी बहन कविता के राज के बारे में थोड़ा बहोत जानती थी.. फाल्गुनी के मुंह से पिंटू का नाम सुनकर वो चोंक गई.. कहीं पिंटू और कविता के बीच अब भी कुछ??? बाप रे.. !! जिस कंपनी में पिंटू जॉब करता हैं, वहीं पर जीजू भी है.. ये कड़ियाँ कहीं न कहीं तो जुड़ ही रही होगी.. मौसम चुपचाप सोचती रही..

 

फाल्गुनी: “अब तेरी बारी है मौसम.. तू बता”

 

मौसम उलझन में पड़ गई.. कैसे कहूँ की मैं अपने जीजू पीयूष के साथ रात बिताना चाहती हूँ!!

पीयूष जीजू की याद आते ही मौसम बेचैन हो गई.. जीजू के संग बिताएं वो दो घंटों का सुहाना समय.. उसके जीवन का एक अविस्मरणीय पन्ना था.. पीयूष के साथ बिताएं उन पलों के बाद.. मौसम ज्यादातर उत्तेजित रहती और उसे बार बार अपनी गीली मुनिया में उंगली करने को दिल कर रहा था.. आज से पहले उसे कभी ऐसा एहसास नही हुआ था.. अब तक तो वो दो हफ्तों में.. कभी कभी महीने में एकाध बाद चूत में उंगली करती या टूथब्रश घुसाकर सो जाती.. पर माउंट आबू के इस मदहोश वातावरण में.. पीयूष के संग बिताई उस दोपहर के बाद.. और खास कर उस सेक्स शॉप में हुए अनुभव के बाद.. जैसे उसकी कामुकता को रोके रखने वाला दरवाजा ही टूट गया.. हाय रे जवानी.. !! बालकनी में नंगी खड़ी मौसम.. अपने कुँवारे स्तनों पर लग रही ठंडी ठंडी हवा के स्पर्श का मज़ा लेते हुए पीयूष की लिप किस को याद कर रही थी.. उसने हल्के से अपनी छाती पर हाथ रखा और बालकनी की दीवार पर एक पैर टीकाकर.. मजबूत लंड के धक्के कखाने को बेकरार.. उसकी गुलाबी चूत को सहलाने लगी.. जैसे अपनी चूत को मना रही हो.. उसे ताज्जुब इस बात का हो रहा था की कैसे वैशाली, फाल्गुनी और पीयूष के हाथ उसके जिस्म पर सरककर निकल गए!! वो माउंट आबू की हसीन वादियों का मज़ा लेने आई तब निर्दोष मासूम बच्ची थी.. एक ही दिन में जिंदगी ने ऐसी करवट ली.. की उसकी पूरी सोच ही बदल गई.. उसने कभी सपने में भी नही सोचा था की उसकी कुंवारी जवानी की धरती पर.. पीयूष नाम का बादल यूं बरस पड़ेगा.. !!

 

स्तन मर्दन करते हुए उसकी जवानी की भूख इतनी बेकाबू हो चली.. की बार बार उसकी चूत फड़फड़ा उठती.. अपने दिल को उसने बार बार समझाया की शादी के बाद ही ये सारी चीजें हो सकती है.. पर कमबख्त दिल था की मानता ही नही था.. !! क्या करूँ? कैसे समझाऊँ अपने जिस्म को? ये तो अच्छा हुआ की ऐसे वक्त पर मुझे वैशाली और फाल्गुनी का साथ मिल गया.. नहीं तो जरूर मैं कुछ गलती कर बैठती.. !! उसने एक नजर बेड पर लेटी अपनी नंगी सहेलियों की ओर देखा.. एक दूसरे के गले में बाहें डालकर बेफिक्र होकर दोनों लेटी हुई थी..

 

मौसम धीरे से बेड की तरफ आई.. ट्यूबलाइट के सफेद प्रकाश में वैशाली की मदमस्त छाती इतनी गदराई और तंदूरस्त नजर आ रही थी.. देखते ही अच्छे अच्छों की नियत खराब हो जाएँ.. मौसम ने फाल्गुनी के स्तनों की ओर देखा.. देखकर पता चलता था की भले ही वैशाली जीतने दबे नही थे पर फाल्गुनी अनछुई भी नही थी.. और अब तो उसने खुद ही इस बात का एकरार कर लिया था.. !! वो खुद ही बता चुकी थी की वो सात से आठ बार चुद चुकी थी.. पर पहली बार जब उसने अपनी नाजुक सी फुद्दी में लंड लिया होगा तब उसे कैसा अनुभव हुआ होगा?? लंड.. लंड.. लंड.. !! बाप रे.. ये शब्द सोचते ही चूत में ४४० वॉल्ट का झटका लग जाता था.. पता नही चूत के अंदर लेते वक्त क्या होता होगा..!!

 

वैशाली और फाल्गुनी के बीच पड़ा हेरब्रश मौसम ने उठाया.. और उसे चूम लिया.. पता नही चल रहा था की वो ऐसा क्यों कर रही थी!! एक निर्जीव लकड़ी से बने ब्रश को चूमने पर इतना मज़ा क्यों आ रहा था भला.. !! मौसम को वो रात याद आ गई जब उसके गाने से खुश होकर संजय ने उसे ५०० रुपये दिए थे.. वैशाली का कहना था की उसका पति संजय बहोत ही लोफ़र और दिलफेंक किस्म का आदमी था.. कहीं ५०० रुपये देकर संजय मुझे पटाना तो नही चाहता था.. !!! उस वक्त तो ऐसा कुछ नही लगा था.. और उस वक्त के बाद संजय से मिलना भी तो नही हुआ था.. वैसे संजय दिखने में बड़ा हेंडसम है.. तो फिर वैशाली को उससे इतनी भी क्या दिक्कत होगी??

 

हेरब्रश को अपनी छाती से रगड़ते हुए मौसम ये सब सोच रही थी.. सारे विचारों को अपने दिमाग से हटाकर मौसम ने फाल्गुनी की नंगी जांघों पर हेरब्रश का डंडा हल्के से रगड़ दिया.. कहीं फाल्गुनी को संजय ने तो नही चोद दिया होगा?? नही नही.. संजय और फाल्गुनी मिले ही एक बार है.. ऐसा होना असंभव था.. गहरी नींद में सो रही फाल्गुनी को अपने शरीर पर किसी चीज का स्पर्श महसूस नही हुआ.. मौसम की नजर फाल्गुनी की चूत पर पड़ी.. उसकी चूत भी जैसे गहरी नींद सो रही थी.. वैशाली द्वारा चटवाने के बाद शांत पड़ी चूत काफी सुस्त लग रही थी.. वैशाली की टांगें थोड़ी सी चौड़ी करके हेरब्रश का डंडा उसकी चुत पर रगड़ा.. वैशाली का सुराख थोड़ा सा चौड़ा था.. पर मेरी चूत तो अब भी कितनी टाइट और कसी हुई है!! शायद इसी वजह से वैशाली को फाल्गुनी पर शक हुआ था की उसका सील टूटा हुआ था.. सील टूटते वक्त कैसा महसूस होता होगा?? अब मौसम वापिस फाल्गुनी की चूत पर हेरब्रश रगड़ने लगी.. सोचते सोचते अनजाने में ही मौसम ने हेरब्रश का हेंडल फाल्गुनी की चूत के अंदर धकेल दिया..

 

“आह्ह.. !!” फाल्गुनी की आँख एकदम से खुल गई.. उसने बगल में बैठी नग्न मौसम को चूत के अंदर डंडा डालते देख वह अपनी आँखें मलते हुए खड़ी हो गई.. “तू अभी भी जाग रही है.. !! नींद नही आ रही क्या?”

 

मौसम को हाथ में हेरब्रश पकड़े देखकर उसने आगे पूछा “क्या बात है मौसम? तू क्या करने वाली थी? सच सच बता मुझे”

मौसम: “कुछ नही यार.. मैं ये सोच सोचकर परेशान हो रही हूँ की आखिर तूने इतनी सारी बार सेक्स किया किसके साथ? मैंने दिमाग पर जोर डालकर बहोत सोचा पर कोई नाम नही सुझा मुझे.. मुझे बता न यार!! जब तक मैं ये जान नही लूँगी तब तक मेरे मन को चैन नही पड़ेगा.. तेरा उस व्यक्ति का संपर्क कैसे हुआ था? पहचान कैसे हुई थी? मुझे तूने क्यों कुछ नही बताया? मुझसे छुपाने का क्या कारण था?? इस बात का मुझे दुख हो रहा है ये जाहीर सी बात है.. मैंने आज तक तुझसे मेरी कोई बात नही छुपाई फिर तूने मेरे साथ आखिर ऐसा किया ही क्यों?”

 

एक ही सांस में मौसम ने कई सवाल दाग दिए फाल्गुनी की ओर.. पूछते पूछते उसने हेरब्रश का चार इंच जितना हिस्सा फाल्गुनी की चूत में डाल दिया था.. और वो उसे हिलाते हुए आगे पीछे भी कर रही थी.. फाल्गुनी को मज़ा आना शुरू हो गया था इसका पता चल रहा था क्योंकि वो मौसम के हाथों की हलचल के साथ तालमेल मिलाते हुए अपने चूतड़ भी हिला रही थी.. !! उसकी कमर और गांड की हलचल से ये साफ प्रतीत हो रहा था की उसकी चूत में भी खुजली हो रही थी..

 

मौसम: “बोल ना फाल्गुनी.. मुझसे क्यों छुपा रही है? क्या तू मुझे अपना नही मानती? ठीक है.. नही बताना है तो मत बता” कहते हुए नाराज होकर उसने हेरब्रश चूत से बाहर निकाल लिया और नाराज होकर फाल्गुनी की बगल में लेट गई

 

फाल्गुनी: “मौसम, तू समझती क्यों नही है यार!!! मैं नाम नही बता सकती.. अगर बता सकती तो तुझसे छुपाती ही क्यों? अगर मैंने नाम बता दिया तो हाहाकार मच जाएगा.. प्लीज यार.. मुझे नाम बताने के लिए ओर फोर्स मत कर”

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