शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-54

(Desi Kahani) 3

redwalker69 2026-05-25 Comments

This story is part of a series:

रोमांचित होकर वैशाली ने हाँ कहते हुए सिर हिलाया.. जैसे बिना पिए ही उसे नशा सा हो रहा था.. वैशाली और राजेश बातें करने में मशरूफ़ थे तभी रेणुका खुद चलकर उनके पास आकर खड़ी हो गई.. और बोली.. “वैशाली डिअर.. तू बियर पीती है ये मुझे कविता से जानने को मिला.. चलो बढ़िया है.. ”

 

वैशाली ने शरमाते हुए कहा ” आप कंपनी दो तो जरूर पियूँगी.. आप को पता नही है.. बिना कंपनी ईसे पीओ तो दूसरे दिन हेंगओवर होता है”

 

रेणुका: “अच्छा ऐसा है? तब तो राजेश ही तुम्हें कंपनी देगा.. मेरा जन्मदिन है आज इसलिए होश में रहना जरूरी है.. लेकिन वादा करती हूँ.. नेक्स्ट टाइम जरूर कंपनी दूँगी.. वैसे मुझे आश्चर्य इस बात का हो रहा है की राजेश पीने के लिए मान कैसे गया? तुझे तो इसकी गंध पसंद नही थी.. खैर जो भी हो.. आप दोनों इन्जॉय करो.. ” रेणुका ने जाते जाते राजेश का नाक खींचा.. जवाब में राजेश ने रेणुका को अपनी ओर खींच लिया.. राजेश की छाती से रेणुका के स्तन दब गए.. देखकर वैशाली की आह निकल गई..

 

दोनों को अकेला छोड़कर रेणुका दूसरे लोगों से मिलने चली गई..

 

वैशाली को राजेश का सीधा स्वभाव पसंद आ गया… घुमा-फिराकर बात करने वालों में से नही था वो.. इतना अमीर होने के बावजूद जरा सा भी घमंड नही था.. उसका पति संजय.. जेब में ५०० का नोट हो तो भी ऐसे घूमता था जैसे कोई सुल्तान हो..

 

इस तरफ कविता और पीयूष अब भी एक दूसरे की तरफ देख नही रहे थे.. ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे एक दूसरे का अस्तित्व ही न हो.. कविता भी बेफिक्र हो कर पीयूष को इग्नोर कर रही थी.. बाहर से खुश दिख रही कविता अंदर ही अंदर घूंट रही थी.. सिर्फ पिंटू ही था जो कविता को ठीक से समझता था.. आखिर प्रेमी था वो कविता का.. और एक सच्चा प्रेमी अपने साथी के मन की हालत बिना बताए ही जान जाता है

 

राजेश से बातें करते हुए वैशाली धीरे धीरे खुलती जा रही थी

 

राजेश: “आपके पति क्या करते है? जॉब या बिजनेस?”

 

वैशाली थोड़ी देर सोचती रही की क्या जवाब दे.. फिर उसने असलियत बता ही दी..

 

वैशाली: “वो कुछ काम नही करते.. बल्कि ऐसा कह सकते है की वो किसी काम के है ही नही.. पूरा दिन भटकते रहते है.. मुझ में या मेरे जीवन में उन्हे कोई इन्टरेस्ट ही नही है.. हमारा वैवाहिक जीवन एक दुखद वास्तविकता बनकर रह गया है.. इन शॉर्ट, मैं अपनी जिंदगी से.. और अपने पति से बिल्कुल खुश नही हूँ.. ” एक ही सांस में अपने जीवन का दुखड़ा सुनाते हुए वैशाली ने ग्लास खतम कर दिया और बोली “एक और ग्लास मँगवा लीजिए सर.. ”

 

वैशाली की आँखों से बहते हुए आंसुओं को देखकर राजेश घबरा गया.. वो सोचने लगा की यह सवाल नही पूछा होता तो अच्छा होता.. !!

 

राजेश: “अरे वैशाली.. आप तो सीरीअस हो गई.. मुझे लगता है की यह पूछकर मैंने आपको दुखी कर दिया.. आई एम सॉरी.. अब यह मेरी जिम्मेदारी है की मैं आपको खुश करूँ.. क्योंकि आपको दुखी भी मैंने किया है.. ” राजेश ने दो ओर ग्लास मँगवाए और एक ग्लास वैशाली को दिया.. दोनों अब पास पड़े एक टेबल और कुर्सी पर बैठ गए.. वेटर ने तले हुए काजू का एक बाउल उनके बीच रख दिया.. दोनों पीते गए और बातें करते गए.. खास कर वैशाली ने ही अपनी बातें बताई.. राजेश बिल्कुल चुपचाप सुनते रहे.. वैशाली को आज तक अपनी बातें इतने इत्मीनान से सुनने वाला कोई नही मिला था..

 

किसी के कहने पर मौसम ने एक सुरीला गाना छेड़ दिया.. पूरे हॉल में गजब का माहोल छा गया.. शराब, सिगरेट, सौन्दर्य, सेक्स और संगीत का अनोखा मिश्रण जम चुका था.. सब मुग्ध होकर मौसम की ओर देख रहे थे.. आँखें बंद कर गाती हुई मौसम संगीतमय हो चुकी थी.. उसका ध्यान गाने के आराह-अवरोह पर था..

 

“अजीब दास्तान है ये.. कहाँ शुरू कहाँ खतम.. ये मंज़िलें है कौन सी.. न वोह समझ सकें न हम.. ”

 

गाना सुनने की आड़ में पीयूष मौसम की छातियाँ ताड़ रहा था.. गायकी कितनी मुश्किल चीज है.. बिना इस बात को समझे.. पीयूष बस मौसम के उभारों को और अंगों को नापने में मशरूफ़ था.. मौसम के गाने के बोल सुनते सुनते कविता पिंटू की तरफ देख रही थी.. और दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे..

 

पीयूष चलते चलते वैशाली और राजेश सर के पास आया.. अपना सिगरेट का पैकेट खोलकर दोनों को सामने रखा और बोला “बस इसी की कमी है सर.. लीजिए”

 

राजेश पीयूष की इस पेशकश से थोड़ा सा गुस्सा हो गया.. पीयूष के आते ही वैशाली चुप हो गई

 

राजेश: “क्या तुझे ये पता नही की आई डॉन्ट स्मोक??”

 

पीयूष: “सर, वैसे तो आप पीते भी नही हो.. लेकिन आपके हाथ में आज ग्लास भी है.. तो सोचा ये भी ट्राय कर लिया जाएँ.. जो भी है बस आज ही है.. कल किसने देखा है सर.. !!”

 

राजेश और पीयूष के आश्चर्य के बीच वैशाली ने पैकेट से दो सिगरेट खींच ली.. और उसमें से एक राजेश को देते हुए बोली.. “पी लीजिए सर.. वरना पीयूष बुरा मान जाएगा.. और पीयूष.. बदले में तुझे हमारे साथ बैठकर बियर पीनी पड़ेगी”

 

“बियर क्या.. तुम कहो तो मैं जहर पीने के लिए भी राजी हूँ.. ” हँसते हँसते पीयूष ने पास पड़ी एक कुर्सी खींच ली और इन दोनों के साथ बैठ गया

 

तीनों बियर और सिगरेट पीने लगे.. तभी मौसम का गाना पूरा हुआ.. वैशाली खड़ी होकर मौसम के पास गई

 

वैशाली: “अरे वाह.. सुपर्ब.. मेरी एक फरमाइश है.. प्लीज ईसे गा दो.. !!” मौसम और वैशाली के बीच मीठी नोक-झोंक चल रही थी जो राजेश और पीयूष को सुनाई नही दे रही थी.. थोड़ी ही देर में वैशाली वापस लौटी और बोली “अब मौसम मेरी पसंद का गीत पेश करेगी”

 

मौसम के सुरीले कंठ ने एक और नगमा छेड़ दिया

 

“जाने क्यों लोग मोहब्बत.. किया करते है.. !! दिल के बदले दर्द-ए-दिल.. लिया करते है”

 

इतना सुरीला गा रही थी मौसम की सब उसकी आवाज में खो गए.. गीत के हर अंतरे को सुनते हुए वैशाली सिगरेट के कश पर कश लगा रही थी.. जैसे बाहर निकलते धुएं के साथ साथ अपने गम को भी धुआँ कर रही हो..

 

कविता की फरमाइश पर मौसम ने तीसरा गीत गया

 

“छोड़ दे.. सारी दुनिया किसी के लिए.. ये मुनासिब नही आदमी के लिए.. प्यार से भी जरूरी कई काम है.. प्यार सब कुछ नही ज़िंदगी के लिए”

 

यह नगमा पूरा होने तक वैशाली की आँखों से आँसू टपकने लगे.. रो रही वैशाली को कैसे शांत किया जाए ये सोचते हुए एक दूसरे की ओर देख रहे थे पीयूष और राजेश.. आखिर कविता की उन पर नजर पड़ते वो उनके पास आई.. वैशाली की पीठ को सहलाते हुए उसे कहने लगी “शांत हो जा वैशाली.. प्लीज” वैशाली कविता से लिपटकर फुट-फुटकर रोने लगी.. काफी देर तक ऐसे ही रोते रहने के बाद वह चुप हो गई.. रोने से उसका दिल भी हल्का हो गया.. मौसम के गीत के बोल ने वैशाली को रुला दिया था..

 

वैशाली: “कविता, तू इन्जॉय कर.. अब मैं ठीक हूँ.. पीयूष.. तू भी कविता को कंपनी दे.. कब से वो अकेले घूम रही है.. ” वैशाली के कहने पर पीयूष को न चाहते हुए भी कविता के साथ जाना पड़ा..

 

वैशाली और राजेश फिर से अकेले पड़ गए.. वैशाली के दुखी दिल को डाईवर्ट करने के लिए राजेश अन्य विषयों पर बात करने लगे.. राजेश ने अपने बिजनेस के बारे में.. रेणुका की बारे में.. कई बातें की.. वैशाली अब धीरे धीरे मूड में आने लगी थी.. जैसे जैसे दोनों बातें करते गए.. वैसे वैसे ही उन दोनों के बीच की शर्म और संकोच कम हो रहे थे.. राजेश की बातों में एक अपनापन था.. जो वैशाली को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था.. बियर के सिप लेते और सिगरेट के कश लगाते हुए वह दोनों कई अलग अलग विषयों पर बातें कर रहे थे

 

तभी मेनेजर ने आकर ये घोषणा की.. पावर आ चुका था.. अब वो लोग जब तक चाहें पार्टी कर सकते थे..

 

राजेश और वैशाली के ग्लास खतम होते ही.. बिना राजेश से पूछे.. वैशाली ने और दो ग्लास मँगवा लिए.. पहली बार पी रहे राजेश का दिमाग धीरे धीरे नशे की असर में आने लगा था.. राजेश ने वैशाली के करीब आकर पूछा

 

राजेश: “एक बात पूछूँ वैशाली.. अगर तुम बुरा न मानो तो.. शराब और सिगरेट पीती स्त्री बड़ी ही सुंदर लगती है”

 

वैशाली: “उसमें कोई बड़ी बात नही है.. आप तो विदेश घूमते रहते है.. वहाँ पर तो ये काफी आम बात है”

 

राजेश: “ऑफ कोर्स.. पर उन फिरंगी औरतों को ऐसा करता देख कुछ खास महसूस नही होता.. पर पता नही क्यों.. भारतीय स्त्री के हाथों में शराब और सिगरेट देखकर एक अलग ही कीक मिलती है.. ”

 

वैशाली के सर पर भी शराब का सुरूर छा रहा था.. उसकी आवाज भी अब लहराने लगी थी.. बियर का ग्लास आते ही वैशाली ने एक बड़ा घूंट भर लिया.. और नई सिगरेट जलाई.. दोनों पर अब सोमरस का प्रभाव हो रहा था

 

वैशाली: “सर, आपने तो जीवन में पहली बार शराब पी है.. कैसा रहा ये पहला अनुभव?”

 

राजेश: “शराब का नशा तो कुछ खास नही है.. हाँ.. तेरी कंपनी का नशा जबरदस्त हो रहा है” नशे में राजेश “आप” से “तू” पर कब आ गया ये पता ही नही चला !!!

 

वैशाली शरमाते हुए बोली “मैंने कभी सोचा भी नही था की कभी किसी पराए मर्द के साथ बैठकर शराब पीऊँगी.. आज तक मैंने मेरे पति के अलावा किसी के साथ शराब नही पी है.. !!”

 

राजेश ने हँसते हुए कहा “मैंने तो किसी के भी साथ आज तक नही पी है.. शायद ये हमारे दोनों के बीच एक खास संबंध की शुरुआत हो सकती है”

 

वैशाली: “मतलब? मैं समझी नही!!!”

 

राजेश: “वैशाली.. तुम वयस्क हो.. और अभी अभी तुमने बताया की तुम्हारे पति के साथ तुम्हारी ट्यूनिंग कुछ खास नही है.. तुम्हारा पति तुम्हें जो नही दे पा रहा है.. वो देने का मौका मुझे दे सकती हो??”

 

वैशाली: “सर, मुझे लगता है आपको शराब चढ़ गई है.. ” नशे में होने के बावजूद वैशाली सतर्क हो गई..

 

वैशाली का हाथ पकड़कर राजेश ने कहा “हाँ, मुझे चढ़ गई है वैशाली.. यहाँ सब इन्जॉय कर रहे है.. तो फिर हम भी क्यों इन्जॉय न करें??”

 

वैशाली: “आप जरूर इन्जॉय कर सकते है.. पर वो रेणुका जी के साथ.. मेरे साथ नही.. ओके??”

 

राजेश के स्पर्श से वैशाली के पूरे जिस्म में झनझनाहट होने लगी थी.. वैशाली जवान थी.. खूबसूरत थी.. सेक्सी थी.. और माउंट आबू के मदहोश वातावरण में शराब का नशा अपना असर दिखाएं.. फिर कोई कैसे अपने आप को कंट्रोल करेगा!!!

 

राजेश का हाथ अपने हाथ पर से हटा नही पाई वैशाली.. वैशाली ने सिगरेट जलाने के लिए अपना हाथ खींच लिया तब राजेश ने कहा “वैशाली, जब हम एक ही ब्रांड की सिगरेट पी रहे हो.. तो फिर दो अलग अलग जलाने की क्या जरूरत है? एक सिगरेट से ही पीते है ना.. !!”

 

वैशाली: “वैसे तो हम बियर भी एक ही ब्रांड की पी रहे है” हँसते हुए उसने कहा

 

राजेश: “अरे हाँ.. फिर दूसरे ग्लास की जरूरत ही नही है” कहते हुए उसने अपने हाथ का ग्लास छोड़ दिया.. ग्लास जमीन पर जा टकराया और चूर चूर हो गया.. सब की नजर उन दोनों की ओर गई.. उस दौरान रेणुका पीयूष की ओर देखकर मुस्कुरा रही थी.. कविता ये देखकर खुश थी की आखिर वैशाली पीयूष को छोड़ किसी और मर्द से उलझ चुकी थी.. हाँ पीयूष ये देखकर थोड़ा दुखी जरूर था.. पर उसका ज्यादा ध्यान मौसम की ओर था.. एक बार वो हाथ लग जाए फिर वैशाली की क्या जरूरत.. !!!

 

शराब और राजेश के स्पर्श का ऐसा असर हो रहा था वैशाली पर.. की वो खुद तय नही कर पा रही थी की उसके शरीर के अंदर ये अजीब सी सुरसुरी क्यों हो रही थी.. !! आज तक जीतने मर्दों के संपर्क में वह आई थी वो सामान्य लोग थे.. पहली बार उसे किसी अमीर और सफल बीजनेसमेन से संपर्क करने का मौका मिला था.. वैशाली सोचने लगी “काश संजय भी ऐसा होता” वैसे उसे बड़ी गाड़ी या बंगले की चाह नही थी.. वह तो सिर्फ इतना चाहती थी की संजय सीधी राह पर चलें.. और दोनों खुशी खुशी अपनी ज़िंदगी व्यतीत करें.. पर संजय के लक्षण देखते हुए यह मुमकिन नही लग रहा था..

 

वैशाली: “आप से एक बात पूछूँ सर?”

 

राजेश: “अरे वैशाली.. इतनी देर तक साथ बैठने के बाद तू अभी भी मुझे पराया मान रही है?? मैंने तो तुझे अपना समझकर अभी ओफर भी कर दी.. लेकिन तूने ध्यान नही दिया.. हा हा हा हा.. कोई बात नही.. पूछ जो भी पूछना हो”

 

वैशाली: “मेरा पति संजय जीतने भी बिजनेस करता है उन सब में निष्फल ही रहता है.. बिजनेस की बात छोडो.. किसी नौकरी में भी वो दो महीनों से ज्यादा नही टिकता.. और जब देखों तब वह अपनी निष्फलताओं के लिए दूसरों की ही जिम्मेदार ठहराता है.. ऐसा क्यों? क्या आप मेरी इसमें कोई मदद कर सकते है?”

 

राजेश के अंदर का बिजनेसमेन सोचने लगा ” ऐसा है वैशाली.. तेरी बातों से मुझे ये लगता है की तेरा पति गलत संगत में पड़ गया है.. उसे लाइन पर लाने के लिए सब से पहले उसे उसके नालायक दोस्तों से अलग करना जरूरी है.. उसके बाद ही कुछ सोच सकते है.. अगर तुम चाहो तो मैं उसे अपनी कंपनी में ले सकता हूँ.. पर फिर उसे मेरे स्ट्रिक्ट स्वभाव को झेलना होगा.. मैं काम में कोताही जरा भी बर्दाश्त नही करता हूँ.. और हाँ.. उसके लिए तुम दोनों को कलकता छोड़कर यहाँ शिफ्ट भी होना पड़ेगा.. अगर तुम कलकत्ता रहोगी और वो यहाँ अकेला नौकरी करेगा तो फिर से अपने उलटे धंधे शुरू कर देगा ”

 

राजेश सर की बातें बड़ी ही ध्यान से सुन रही थी वैशाली.. अपनी ज़िंदगी की गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने के लिए कुछ करना जरूरी था.. राजेश सर जैसे अच्छे व्यक्ति की संगत में अगर संजय सुधार जाएँ तो पूरा जीवन सुखमय हो जाएगा.. ऐसा सोच रही वैशाली के स्तनों को देखते हुए राजेश मन ही मन उन्हे दबाने की सोच रहा था.. वैसे राजेश हर औरत को ऐसी नजर से देखने वालों में से नही था.. पर वो काफी खुले विचारों वाला था.. बार बार विदेश जाते हुए लोगों को कुछ कुछ बातों के लिए खुली सोच रखना बेहद जरूरी हो जाता है..

राजेश की भूखी नजराओं को अपनी छाती पर महसूस किया वैशाली ने.. अब कुदरत ने भरभरकर सौन्दर्य दिया है तो लोग देखेंगे ही ना!!! और उसने कौन सा अपने स्तनों को खुला रखा था!! कपड़ों से ढंके हुए तो थे उसके स्तन.. अब इससे ज्यादा उन्हे कैसे छुपाती.. !! जवान लड़कियों को शुरू शुरू में अपनी छातियों पर गंदी नजर डालने वालों से सख्त नफरत होती है.. गुस्सा भी बहोत आता है.. शर्म भी!! फिर धीरे धीरे आदत पड़ जाती है.. और काफी को तो वो नजरें अच्छी भी लगने लगती है..

 

अपने स्तनों को तांक रहे राजेश सर की नज़रों को इग्नोर कर उनकी वाणी और वर्तन पर फोकस कर रही थी वैशाली

 

“देखो वैशाली.. मेरी बात पर गौर करके देखना.. आपके सास और ससुर से भी डिस्कस कर लेना.. मोम-डेड से भी.. अगर सबको ठीक लगे तो तुम मेरी कंपनी जॉइन कर लो.. इसी बहाने तुम्हारे साथ रहने का मौका भी मिलेगा मुझे.. फ्रेंकली कहूँ तो आई लाइक यॉर कंपनी.. ”

 

वैशाली: “आई लाइक यॉर कंपनी टू.. मैं जरूर इस बारे में सोचूँगी”

राजेश: “वैशाली.. माउंट आबू में हमारी इस मुलाकात को यादगार बनाने के लिए.. हमारी दोस्ती के पहले कदम की ओर जाते हुए.. क्या तुम मुझे एक किस दे सकती हो?”

 

वैसे तो वैशाली को ऐसा कोई परहेज नही था पर राजेश के साथ वह हर कदम फूँक फूँक कर रखना चाहती थी.. बहोत सी बातें जुड़ी थी राजेश के साथ..

 

राजेश: “वैशाली.. माउंट आबू में हमारी इस मुलाकात को यादगार बनाने के लिए.. हमारी दोस्ती के पहले कदम की ओर जाते हुए.. क्या तुम मुझे एक किस दे सकती हो?”

 

वैसे तो वैशाली को ऐसा कोई परहेज नही था पर राजेश के साथ वह हर कदम फूँक फूँक कर रखना चाहती थी.. बहोत सी बातें जुड़ी थी राजेश के साथ..

 

वैशाली: “नो सर.. माफ कीजिए पर आप जो चाहते है वो मैं आपको नहीं दे पाऊँगी.. सॉरी”

 

राजेश: “कोई बात नहीं.. अगर तुम्हारा मन हो तो ही.. जबरदस्ती तो मैंने आज तक रेणुका से नही की.. डॉन्ट वरी.. कब से अकेले पी रही हो.. क्या तुम भूल गई की हम दोनों एक ही ग्लास से पी रहे है?”

 

वैशाली: “ओह.. सॉरी सर.. बातों बातों में भूल ही गई.. ये लीजिए ग्लास.. ” वैशाली ने जब ग्लास देने के लिए अपना हाथ आगे किया.. तब राजेश ने उसकी हथेली को दबाते हुए कहा “बुरा मत मानना वैशाली.. पर अगर शराब का इतना भी असर न हो तो फिर पीना ही बेकार है.. तुम बहोत सेक्सी हो यार.. मैं अपने आप पर कंट्रोल नही रख पा रहा हूँ.. ”

 

वैशाली को जिस बात का डर था वहीं हो रहा था.. राजेश सर उसकी ओर फिसलते जा रहे थे.. क्या करूँ?? खड़ी होकर चली जाऊँ?? तो उन्हे बुरा लगेगा.. उनकी कंपनी की पार्टी में.. उनके खर्चे पर यहाँ आई हूँ.. सिर्फ हाथ ही तो पकड़ा है.. चलता है.. !!

 

वैशाली: ओह्ह सर.. मेरे खयालात उतने पुराने भी नही है की आप मेरा हाथ न पकड़ सको.. मुझे भी अच्छा लगा”

 

दोनों के बीच अब तक ४ ग्लास बियर खतम हो चुकी थी.. और सिगरेट का पूरा एक पैकेट खतम हो चुका था.. और उस दरमियान राजेश वैशाली के हाथ तक पहुँच गया था.. वैशाली के गोरे कोमल हाथ को सहलाते हुए राजेश उसकी आँखों में आँखें डालकर देख रहा था.. वैशाली और ज्यादा देर तक उसका सामना नही कर पाई.. बार बार वह अपनी नजरें झुका लेती थी.. एक अजीब प्रकार का आकर्षण दिख रहा था उसे राजेश की आँखों में..

 

राजेश: “वाकई वैशाली.. तू बहोत सुंदर है.. तेरा फिगर भी जबरदस्त है.. जो भी देखें वो पागल हो जाएँ.. मैं भी आखिर एक मर्द हूँ.. ऊपर से माउंट आबू का ये मदहोश आलम.. साथ में शराब का नशा.. आज अगर रात को तेरा साथ मिल जाएँ तो हम दोनों की रात रंगीन हो जाएगी”

 

बियर के नशे में धुत होकर राजेश वैशाली को मना रहा था.. कविता पार्टी में अब भी अपने स्तनों की नुमाइश करते हुए यहाँ वहाँ घूम रही थी.. पीयूष और मौसम के नैन लड़ रहे थे.. फाल्गुनी और रेणुका किसी विषय पर गंभीर चर्चा कर रहे थे..

 

अपने फिगर की तारीफ सुनकर वैशाली फुली न समाई.. और वो भी किसी ऐरे गैरे इंसान से नही.. राजेश जैसे सफल और अमीर व्यक्ति के मुंह से..

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