शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-53
(Desi Kahani) 2
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कविता ने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया और पिंटू को अपनी बाहों में भरकर.. रेणुका-राजेश के बिस्तर पर गिरा दिया
पिंटू घबरा गया “ये क्या कर रही है पगली??” उसने कविता को धक्का देकर अपने आप को उससे दूर किया
“अरे पिंटू मेरी जान.. रेणुका मैडम ने जान बूझकर हम दोनों को यहाँ भेजा है.. अभी उनका ही फोन था.. डरने की कोई बात नही है.. हम एकदम सेफ है यहाँ.. आई लव यू पिंटू” कहते हुए वह पिंटू से लिपट पड़ी..
उसी वक्त.. पूरे माउंट आबू में एक साथ लाइट चली गई.. कहीं किसी ट्रैन्स्फॉर्मर में एक जबरदस्त धमाके की आवाज सब ने सुनी.. अंधेरा होते ही पीयूष का हाथ कविता के पतले टॉप के अंदर घुस गया और वह उसके दसहरी आम का रस निकालने लगा.. कविता के अद्भुत कामुक स्तनों को वो मसलने लगा.. कविता का हाथ सीधा पीयूष के लंड पर पहुँच गया.. पेंट के ऊपर से लंड को मालते हुए उसने अपने लिपस्टिक लगे होंठ पीयूष के होंठों पर रख दिए..
कविता के बिना ब्रा वाले स्तनों को हाथ में पकड़ते ही पिंटू की आह निकल गई.. कविता ने तुरंत अपना टॉप ऊपर कर लिया और पिंटू का चेहरा अपने दोनों स्तनों पर दबा दिया.. दोनों एक दूसरे में ऐसे खो गए.. जैसे धरती पर वो दो आखिरी इंसान हो.. पिंटू से ज्यादा भूख कविता की थी इसलिए वह काफी आक्रामक थी.. पीयूष की अवहेलना से परेशान कविता अपने प्रेमी के आगोश में आते ही उत्तेजित हो गई.. उसका जिस्म किसी मर्द को चाहता था.. क्योंकि पिछले काफी दिनों से पीयूष ने उसे हाथ भी नही लगाया था.. ऊपर से माउंट आबू आने के बाद उसकी इच्छाएं और उछलने लगी थी.. पिछले दो घंटों में.. अनगिनत मर्दों की भूखी नज़रों को अपने स्तन पर पड़ती हुई महसूस कर वह तड़पने लगी थी..
पिंटू भी अपने पहले प्यार को पा कर खुश हो गया था.. कविता के स्तनों की गर्माहट का मज़ा लेते हुए वह उसकी जांघों को सहलाने लगा.. जैसे जैसे पिंटू का हाथ उसकी जांघों पर आगे बढ़ता जा रहा था वैसे वैसे कविता अपनी टांगें चौड़ी करते हुए अपना राजद्वार खोल रही थी..पिंटू के हाथ के स्पर्श से वह सिहरते हुए उसने अपनी आँखें बंद कर ली.. चिकनी जांघों को सहलाते हुए पिंटू को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे संगेमरमर पर हाथ फेर रहा हो.. कविता का सहकार भी ऐसा मिल रहा था की कुछ ही सेकंड में पिंटू का हाथ उसकी चूत तक पहुँच गया..
पता नही.. ऐसा कौनसा जादू होता है स्त्री की योनि में..जिसे देखते ही पुरुष बेकाबु होकर जानवर की तरह टूट पड़ता है.. कविता ने अब पेंट की अंदर हाथ डालकर पिंटू का लंड पकड़ लिया था..
“कितना सख्त हो गया है यार” कविता को उसके लंड की गर्मी अपनी हथेली पर महसूस हो रही थी
“तुझे इस तरह देखने के बाद.. किसी का भी सख्त हो जाए.. क्या लग रही है तू कविता.. आह्ह.. ” कविता की छाती को चूम चाटकर मदहोश कर दिया उसे पिंटू ने ..
उत्तेजनावश पिंटू के लंड पर कविता के हाथों की पकड़ और सख्त हो गई.. अपने स्तनों को और सख्ती से दबा दिया पिंटू के मुंह पर..
“अब मुझसे रहा नहीं जाता पिंटू.. कुछ कर ना जल्दी.. ”
“ओह्ह कविता.. मेरी जान.. ” कहते हुए पिंटू ने अपने पेंट की चैन खोलकर लंड बाहर निकाल लिया.. कविता बेचैन होकर पिंटू के लंड के टोपे को चूसने लगी.. कविता की इस हरकत से पिंटू भी अपना आपा खो बैठा.. कभी वो कविता की नंगी पीठ को सहलाता.. कभी उसके बालों में उँगलियाँ फेरता.. तो कभी उसके स्तन को दबाता
“जल्दी करना होगा कविता.. सब हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे.. तू जल्दी उलटी लेट जा.. हमारी फेवरिट पोजीशन में करेंगे.. ” पिंटू ने कहा
“नही यार.. मेरी बिना चाटे मैं तुझे छोड़ने वाली नही हूँ आज.. कितना वक्त हो गया.. आखिरी बार जब मेरे घर के पीछे की अंधेरी गली में मिले थे तब तूने चाटी थी मेरी.. वो रात मुझे बहोत याद आती है.. तेरी जीभ जब अंदर गई थी तब.. आह्ह इतना मज़ा आया था की क्या बताऊ.. प्लीज यार.. आज अपनी जीभ अंदर तक घुसेड़कर चाट दे एक बार”
“जो भी करवाना है जरा जल्दी कर यार” पिंटू ने कहा..
कविता ने तुरंत अपनी छोटी सी शॉर्ट्स और पेन्टी एक साथ उतार फेंकी.. पिंटू कविता की जांघों को चाटने लगा.. वो भी गरम हो चुका था.. कविता ने उसका सर पकड़ा और उसके मुंह को अपनी चिपचिपी बुर पर लगा दिया.. पिंटू की जीभ का अपनी चूत पर स्पर्श प्राप्त होते ही कविता स्वर्ग में पहुँच गई.. पिंटू के कामुक चुंबनों का असर इतनी तीव्रता से हुआ की एक ही पल में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.. उसके स्तन सख्त हो गए और निप्पल बंदूक की गोली जैसी टाइट हो गई.. पिंटू जैसे जैसे चाटता गया.. कविता की सिसकियों का वॉल्यूम बढ़ता गया.. अपने पसंदीदा पात्र के साथ संभोग करने से बेहतर मज़ा ओर कोई नही है..
पिंटू की जीभ ने कविता को उसके सारे गम भुला दिए.. कमर को उचक उचक कर वह अपनी चूत को पिंटू के मुंह से घिस रही थी.. कराहते हुए कविता का जिस्म एकदम सख्त और सीधा हो गया.. वह थरथराने लगी.. और एक छोटी सी चीख के साथ पिंटू के मुंह में झड़ गई.. स्खलित होते ही कविता का जिस्म एकदम हल्का हो गया.. दिमाग शांत हो गया.. मन तृप्त हो गया.. अपना काम खतम होते ही उसे वास्तविकता का ज्ञान हुआ..
अब लाइट भी आ चुकी थी
“अब हमे चलना चाहिए पिंटू.. बहोत देर हो गई” कविता ने कहा
“अच्छा?? तो फिर इस सख्त लोडे का क्या करू? ये अब ढीला होने नही वाला.. अब ईसे वापिस पेंट में डालना भी मुमकिन नही है.. क्या करू? तू बता” पिंटू ने थोड़े गुस्से से कहा..
कविता उठकर पिंटू के लंड को तेज गति से हिलाने लग गई.. पिंटू कविता के बॉल को पागलों की तरह दबाने लगा.. पिंटू को बिस्तर पर सुलाते हुए कविता उसके ऊपर चढ़ बैठी.. और अपने हाथ को नीचे ले गई.. पिंटू के कड़े लंड को अपनी चूत के सेंटर पर रखकर उसने दबाया.. पर लंड अंदर गया नही.. कविता ने अपनी हथेली पर थोड़ा सा थूक लेकर नीचे लंड पर लगाया.. और ऊपर वज़न देने लगी..
“उफ्फ़ पिंटू.. तेरा ज्यादा मोटा हो गया है क्या.. !! अंदर जा ही नही रहा.. दर्द हो रहा है मुझे.. ऊईई माँ.. !!” धीरे धीरे कविता की चूत लंड निगलती रही.. अपने प्रेमी को खुश करने के लिए कविता ऊपर नीचे होते हुए धक्के लगाने लगी..
अपना ऑर्गजम हो जाने के बावजूद.. अपने प्रेमी को खुश करने के लिए.. अपनी कामुक अदाओं से वह पिंटू को रिझाने लगी.. कविता की चूत के एकदम टाइट वर्टिकल होंठों की पकड़ इतनी मजबूत थी की पिंटू नीचे लैटे लैटे स्वर्ग का आनंद ले रहा था.. ऊपर नीचे करते हुए लय बनाकर कविता अपने स्तनों को उछाल रही थी.. अपनी चूत की गहराई में अंदर तक उसे लंड की गर्माहट का एहसास हो रहा था.. गति बढ़ाते हुए कविता चाहती थी पिंटू जल्दी से जल्दी झड़ जाए..
अपने स्तनों पर पिंटू की टाइट पकड़ महसूस करते हुए कविता को पता चल गया की पिंटू अब झड़ने के करीब था.. उसने अपनी उछलने की गति दोगुनी कर दी..
“ओह्ह गॉड.. फक मी.. लव यू मेरी जान.. बहोत मज़ा आ रहा है मुझे.. कितनी टाइट है तेरी चूत.. पीयूष डालता भी है या नही अंदर.. ओह्ह ओह!!” कविता की कमर पकड़कर उसे धक्के लगाने में मदद कर रहा था पिंटू
लंड के घर्षण से अभी अभी स्खलित हुई कविता फिर से गरम होने लगी.. अपनी चूत की मांसपेशियों को उसने इतना टाइट कर दिया जैसे पिंटू के लंड का गला घोंट देना चाहती हो.. लंड और चूत की लड़ाई में हम मानते है की आखिर में लंड जीता या चूत जीती.. पर हकीकत में चूत कभी हारती नही.. हार हमेशा लंड की ही होती है.. कभी चूत से बाहर निकले लंड के हाल देखें है!!! कोल्हू से निकले हुए गन्ने जैसी हालत होती है लंड की..
लंड पर दबाव बढ़ते ही पिंटू के लंड ने पिचकारी मार दी.. दोनों प्रेमी एक दूसरे से लिपट गए..
कुछ सेकंडों तक लिपटे रहने के बाद रीलैक्स होकर पिंटू के होंठों को चूमते हुए कविता ने कहा.. “अब मुझे जाना होगा पिंटू.. जाने का मन तो नही है पर क्या करें.. !! काश हम दोनों को साथ में एक रात गुजारने का मौका मिल जाएँ ”
“फिलहाल तो ऐसा मौका मिलना मुमकिन नही है.. तू अब कुंवारी नही है.. पीयूष की पत्नी है तू.. चल अब तू जल्दी जा.. मैं थोड़ी देर में आता हूँ वरना किसी को शक हो जाएगा”
“नही.. तू पहले निकल.. मैं यह बेड की चादर और मेरा मेकअप ठीक करके आती हूँ” पिंटू का चेहरा उसने अपने रुमाल से पोंछ कर उसके बाल ठीक कर दिए और उसे एक आखिर किस देकर जाने दिया.. उसके जाने के बाद कविता ने आईने में देखकर अपना मेकअप ठीक किया.. लिपस्टिक फिर से लगाई.. ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी रेणुका की डार्क ब्राउन शेड की लिपस्टिक होंठों पर लगाते हुए उसे पिंटू के सुपाड़े की याद आ गई.. कविता हंस पड़ी.. सोचने लगी.. दुनिया की सर्वश्रेष्ठ लिपस्टिक तो लंड ही है.. उससे होंठ गीले करने में जो मज़ा है वो बेजान लिपस्टिक में कहाँ!!! शायद इसी कारण सारी कंपनियां लिपस्टिक को लंड के आकार की ही बनाते है..
कविता ने फटाफट अपने बाल ठीक कीये.. बेड की चादर की सिलवटें दूर की.. और सब कुछ एक आखिरी बार चेक करते हुए रूम से बाहर निकली। हॉल में पहुंचते ही उसने देखा की सब पार्टी इन्जॉय कर रहे थे.. कविता के उछलते स्तनों की गैरमौजूदगी में सारा वातावरण शांत सा था.. पर जैसे आंधी आते ही सब अस्तव्यस्त हो जाता है.. वैसे ही कविता की पायलों की झंकार सुनते ही सब अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए उसे देखने लगे.. अपने हाथ के ग्लास में पड़ी दारू को भूलकर कविता के जोबन को पीने लगे.. मर्द तो मर्द.. सारी औरतें भी कविता के स्तन युग्म को देखती ही रह गई.. सब कविता को देख रहे थे.. एक पीयूष को छोड़कर.. पीयूष नाम का भँवरा.. मौसम नाम के ताजे खिले फूल का रस चूसने के लिए यहाँ वहाँ मंडरा रहा था..
रेणुका ने केक काटकर सेलीब्रेशन की शुरुआत की.. सब ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ रेणुका को विश किया.. रेणुका ने राजेश और बाद में सब को केक का छोटा छोटा पीस अपने हाथों से खिलाया.. जब वो केक का टुकड़ा पीयूष को खिलाने गई तब दोनों की आँखें एक हुई.. उस दिन रेणुका के घर जब पीयूष पैसे लेने गया था तब दोनों के बीच जो हुआ उसकी यादें ताज़ा हो गई..
रेणुका के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान खिल उठी.. उसका पल्लू हल्का सा सरक गया और तंग ब्लाउस में कैद उसका रूप.. पीयूष को दिखने लगा.. रेणुका ने तुरंत ही अपना पल्लू ठीक कर लिया.. और पीयूष के मुंह में केक का टुकड़ा डालते हुए.. बिल्कुल धीरे से उसके कानों के पास बोली “हमारा सेलीब्रेशन बाकी रहेगा.. तू मेरे घर आना फिर उसे पूरा करेंगे” कहते हुए वह चली गई.. रेणुका के कूल्हों को देखकर एक पल के लिए पीयूष मौसम को भी भूल गया
दूर कोने में खड़ी वैशाली यह सारा तमाशा देख रही थी.. पीयूष के साथ कुछ घंटों पहले हुए झटपट सेक्स का नशा अब उतर गया था और वैशाली नए सिरे से उत्तेजित हो गई थी.. अब वो पीयूष के साथ.. एकदम आराम से.. पूरा वक्त लेकर भरपूर चुदाई करने का प्रोग्राम मन ही मन बनाने लगी.. वह सोच रही थी की तसल्ली के साथ चुदवाने के लिए कम से कम डेढ़ घंटे का समय चाहिए.. पर उतनी देर तक अगर वो और पीयूष गायब रहें तो कविता को पक्का शक हो जाएगा.. क्या किया जाए !!! पीयूष के आसपास इतनी गोपियाँ मंडरा रही है की डेढ़ घंटा तो क्या.. डेढ़ मिनट के लिए भी उससे अकेले मिल पाना मुश्किल था..
पीयूष के लंड को याद करते ही वैशाली की चूत में सुरसुरी होने लगी.. इतना मज़ा तो उसे हिम्मत या संजय के साथ भी कभी नही आया था.. आखिर ऐसी कौन सी बात थी पीयूष में.. जो उससे चुदवाने में इतना मज़ा आता था? क्या वो चूत चाटता था इसलिए?? पर वो तो संजय भी चाटता था.. संजय तो एक घंटे तक उसकी चूत चाटता ही रहता था.. पर फिर भी उसके साथ वो मज़ा नही आता था जो पीयूष के संग आता था.. ओह पीयूष.. तेरे बिना जीना अब खाली खाली सा लगता है.. संजय के बर्ताव से जो खलिश उसके दिल में उठ खड़ी हुई थी.. उसे सिर्फ पीयूष ही भर सकता है
संजय.. क्या कर रहा होगा संजय अभी?? एक सेकंड के लिए वैशाली को संजय की याद आ गई.. और क्या कर रहा होगा वो? पक्का किसी रांड को गेस्टहाउस में ले जाकर अपना लंड चुसवा रहा होगा.. और क्या !! संजय की याद आते ही वैशाली का मुंह कड़वा हो गया.. जिंदगी की माँ चोद दी थी संजय ने.. ना ही वो मेरे जज़्बातों को समझ पाया और ना ही मुझे.. एक पत्नी की हमेशा यह मनोकामना होती है की उसका पति उसे समझे.. !! संजय तो जब देखो तब चूत, चुदाई और सेक्स.. बस इन्ही विचारों में डूबा रहता था.. ढेले भर की कमाई नही.. बस सारा दिन पड़े रहो और मौका मिलते ही लंड घुसा दो.. पर जो भी कहो.. संजय चुदाई जबरदस्त करता था.. एक ही बार में शरीर के अंजर-पंजर ढीले कर देता था.. वैशाली की सोच का सिलसिला यूं ही चलता रहा
होटल के मेनेजर ने राजेश से आकर ये कहा की पावर तो अभी भी ऑफ था.. इन्वर्टर से होटल में कनेक्शन दिया गया है.. अगर अगले ४५ मिनट तक बिजली नही आई तो इन्वर्टर भी बंद हो जाएगा.. इसलिए जितनी जल्दी हो सके पार्टी को निपटा लिया जाएँ ताकि किसी को अंधेरे के कारण दिक्कत ना हो..
राजेश ने सब के सामने अनाउन्स किया “हमारी पार्टी चालू रहेगी.. अगर इन्वर्टर की बेटरी डाउन हो जाए तो हम अंधेरे में पार्टी जारी रखेंगे.. सब से विनती है की अंधेरे का गलत उपयोग न करें.. “हँसते हुए उसने कहा “और जिन पर सबकी निगाहें चिपकी हुई है.. वह अपना ध्यान जरूर रखें” कविता के स्तन और मौसम के गालों के डिम्पल की ओर देखते हुए राजेश ने कहा..
सब ने हँसते हँसते तालियों से इस घोषणा का स्वागत किया.. कविता और मौसम शरमा गए.. वैशाली और फाल्गुनी साथ खड़े थे.. वैशाली के हातों में ज्यूस का खाली ग्लास था.. वहाँ से गुजर रहे राजेश ने ये देखा और बोला “मैडम, क्या बात है ?? खाली ग्लास पकड़े पार्टी इन्जॉय कर रही हो? सच सच बताना.. आपके पति को मिस कर रही हो ना.. ??”
वैसे वैशाली संजय को ही याद कर रही थी.. पर उसे मिस करना नही कहा जा सकता.. संजय के प्रति उसके मन में कितनी कड़वाहट थी ये राजेश को बताने का कोई मतलब नही था.. ऐसा समझकर वैशाली ने अपने चेहरे पर नकली मुस्कान धारण कर ली.. और कहा “जी सर.. यहाँ ज्यादातर कपल्स है.. उन्हे देखने के बाद.. जाहीर सी बात है”
राजेश: “ऑफ कोर्स.. ये तो जाहीर सी बात है.. अब आप एक काम कीजिए.. उनके हिस्से का ज्यूस आप पी लीजिए.. वेटर.. मैडम को एक ग्लास दो, प्लीज”
वैशाली: “अरे नही नही सर.. मैं दो ग्लास पहले ही पी चुकी हूँ.. ”
राजेश: “अरे.. ये शराब थोड़े ही है.. सिर्फ ज्यूस है.. एक ओर ग्लास तो आराम से पी सकती है आप.. वैसे ज्यूस पीकर कोई कैसे इन्जॉय कर सकता है मेरी तो समझ में नही आ रहा”
वैशाली: “मैं शराब नही पीती सर.. ”
राजेश: “और बीयर??”
वैशाली: “कभी कभी.. पर आज मन नही है”
राजेश: “इतनी अच्छी पार्टी चल रही है.. तो आपका मन क्यों नही है?”
वैशाली: “बात वो नही है.. पर बिना कंपनी पीने में मज़ा नही आता मुझे ”
राजेश: “हम्म.. तो ये बात है.. क्या आप मेरे साथ बियर पीना चाहोगी? वैसे एक बात बता दूँ.. मैंने आज से पहले कभी बियर नही पी है.. पर आज आप के साथ शुरुआत करने का मन कर रहा है”
वैसे भी वैशाली अकेले अकेले बोर हो रही थी.. क्या पता.. राजेश के साथ बातें कर के थोड़ा अच्छा लगे.. !! राजेश भी वैशाली के उभरे हुए स्तनों को देख रहा था.. पूरी तरह से ढंके हुए स्तन थे.. पर उभार और आकार को वस्त्रों की परतें कहाँ छुपा सकती है!! इतर को ढँककर रखो फिर भी उसकी खुशबू तो आ ही जाती है.. स्त्रीओं के अंग ढंके हुए हो या खुले.. पुरुषों को दोनों ही स्थिति में देखने में मज़ा तो आता ही है.. बस सुंदर साथ होना चाहिए और विचारों में तालमेल होना चाहिए.. फिर ढंके हुए वस्त्रों को उतरने में कहाँ देर लगती है.. !! सिर्फ किसी के पहल करने के ही देर होती है..
वैशाली सोच में पड़ गई.. क्या करू? हाँ कहूँ या मना कर दु? वैसे मुझे पीयूष की कंपनी चाहिए पर वो तो अभी मुमकिन नही है.. वैसे भी अकेले अकेले खड़े रहने का क्या मतलब?? वैशाली को गहरी सोच में डूबा देख.. राजेश इंतज़ार करता रहा.. उसे यकीन था की वैशाली मना नही करेगी
वैशाली ने बीच का रास्ता निकाला.. “सर, क्यों न हम रेणुका जी को भी हमारे साथ शामिल कर ले?”
राजेश: “हाँ जरूर कर सकते है.. पर फिर आपको मज़ा नही आएगा”
राजेश का कहने का मतलब समझकर शरमा गई वैशाली.. उनके कहने के दो मतलब निकलते थे.. कौन सा मतलब निकालना वो वैशाली पर निर्भर करता था..
वैशाली: “वैसे आप कभी शराब पीते नही है.. और यहाँ मेरे साथ पीते हुए देखकर कहीं रेणुका जी कुछ उल्टा-सीधा न सोच लें.. ”
राजेश: “उसकी चिंता आप छोड़ दीजिए.. उसके पास अभी भी कुछ भी सोचने का समय नही है.. देखो ना.. कितने सारे लोगों से घिरी हुई है वो!! मुझे तो डाउट है की रात को भी मुझ से मिल पाएगी या नही.. हा हा हा हा.. अब दो ग्लास मँगवा लूँ??”
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