शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-17

(Desi Kahani) 9

redwalker69 2026-05-08 Comments

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शीला घर के अंदर आई और सब्जी को कढ़ाई में डालकर तड़का लगाया.. और रोटी के लिए आटा गूँदने लगी.. आटा गूँदते गूँदते उसे रूखी के दूधभरे खरबूजों की याद आ गई.. रूखी और उसके ससुर के बीच जो कुछ भी हुआ था.. शीला की आँखों के सामने चलचित्र की तरह चलने लगा.. अच्छा हुआ ये रसिक हाथ लग गया.. वरना अभी भी चुत खुजाते हुए तड़प रही होती!! एक मर्द के स्पर्श और उसके सख्त लंड के लिए वो कितना तड़प रही थी!! जिस तरह मैं अपने पति की गैरमौजूदगी में.. मर्द के स्पर्श, उसके लिंग और उसकी गर्माहट के लिए तड़प रही थी.. वैसे ही कई मर्द अपनी पत्नी की गैरहाजरी में चूचियाँ और चुत के लिए तड़प रहे होंगे.. शीला के दिमाग में ये सारे विचार अविरत चल रहे थे

 

आटा गूँदकर तैयार हो गया था.. शीला ने रोटी बनाई और प्लेट में खाना लेकर टीवी के सामने बैठ गई.. टीवी पर कोई बाबाजी प्रवचन दे रहे थे.. और सारी महिलायें उन्हे एकटक होकर सुन रही थी.. शीला को मज़ा नहीं आया.. उसने चैनल बदलकर देखा.. एक चैनल पर ठीकठाक अंग्रेजी पिक्चर चल रही थी.. देखते देखते उसने खाना खतम किया और बिस्तर पर लेट गई।

 

चुदाई के सुकून और काम की थकान के बाद हमेशा अच्छी नींद आती है.. यही सोचते हुए शीला ने अपनी दोनों जांघों के बीच तकिया दबाया.. और सोने का प्रयास करने लगी। जब तक तकिये को अपने भोसड़े से सटाकर ना रखे.. तब तक उसे नींद ही नहीं आती थी। जैसे छोटे बच्चों को अंगूठा चूसते हुए सोने की आदत होती है वैसे ही शीला को चुत के पास तकिये के दबाव से ही नींद आती थी।

 

सोते सोते कब शाम के पाँच बज गए.. पता ही नहीं चला.. कविता ने जब दरवाजा खटखटाया तब शीला की नींद खुली

 

कविता: “भाभी.. पाँच बज गए.. आप अब तक तैयार नहीं हुई? ६ बजे पहुंचना है.. पीयूष तो तैयार भी हो गया.. जल्दी कीजिए”

 

शीला: “मेरी चिंता मत कर.. मुझे तैयार होने में देर नहीं लगेगी.. और मेरी बात ध्यान से सुन” कविता का हाथ पकड़कर उसे बिस्तर पर खींच लिया शीला ने “देख.. आज तू ब्रा या पेन्टी मत पहनना.. और अपने ढीले इलास्टिक वाली स्कर्ट पहनना.. ” कविता को ज्ञान देते हुए शीला ने कहा

 

“क्यों भाभी??” कविता को समझ में नहीं आया

 

शीला: “बिल्कुल अनाड़ी है तू कविता.. मूवी के दौरान पिंटू जब तेरे टॉप में हाथ डाले तब सीधे तेरी चुची हाथ में आनी चाहिए.. ब्रा के चक्कर में मज़ा किरकिरा हो जाएगा उसका.. और स्कर्ट में हाथ डालेगा तब पेन्टी बीच में आएगी तो कैसे मज़ा आएगा!! बेचारे को ऐसा लगेगा की किला फतेह कर लिया पर खजाने की चाबी नहीं मिली.. ”

 

कविता: “वाह भाभी.. आपका दिमाग तो बड़ा ही तेज चलता है..” कविता ने ब्लाउस के ऊपर से ही शीला के खजाने को मसलते हुए कहा “मैं चलती हूँ भाभी.. और हाँ.. आप भी ब्रा-पेन्टी मत पहनना.. वरना पीयूष को मज़ा नहीं आएगा” आँख मारते हुए कविता ने कहा और चली गई

 

चंचल, खिलखिलाती, सुंदर झरने जैसी कविता जब जा रहे थे तब उसके मटकते कूल्हे तक लटक रही चोटी को देखती रही शीला!!!

 

शीला ने अलमारी खोली और सोचने लगी की क्या पहनूँ !! काफी सारे कपड़े रिजेक्ट करने के बाद उसने मदन की भिजवाई हुई सिल्क की साड़ी और ब्लाउस पहन लिया.. आईने में अपने स्तनों को थोड़ा सा एडजस्ट करते हुए सोचने लगी.. कुदरत ने क्या जादू छुपाया है उसके स्तनों में!! सारे मर्द देखते ही रहते है हमेशा.. ब्लाउस के हुक को ऊपर से बंद किया तो उसके स्तन नीचे से बाहर निकल गए.. बड़ी मुश्किल से उन दोनों लफंगों को ब्लाउस के अंदर दबाकर उसने हुक बंद किए.. सिल्क के ब्लाउस और साड़ी में शीला किसी अप्सरा जितनी सुंदर लग रही थी..

 

कविता का फिरसे फोन आ गया था। शीला घर को ताला लगा रही थी तभी उसे पीयूष की आवाज सुनाई दी “क्या लग रही है??” शीला समझ गई की पीयूष कविता से उसके बारे में ही कह रहा था

 

पीयूष नुक्कड़ से ऑटो ले आया.. और तीनों रिक्शा में बैठ गए.. ट्राफिक को चीरते हुए, गड्ढों पर कूदते फाँदते रिक्शा आगे बढ़ने लगी.. शीला और पीयूष के बीच में कविता बैठी हुई थी। कविता की जांघ से अपनी जांघ दबते ही शीला रोमांचित हो गई.. कविता को एक तरफ शीला और दूसरी तरफ पीयूष का स्पर्श मिलते ही वह भी सिहर उठी.. मरून कलर के टॉप और काले स्कर्ट में कविता बेहद सुंदर लग रही थी। शीला तिरछी निगाहों से पीयूष को देखती रही और आगे की योजना बनाने में जुट गई।

 

लगभग २० मिनट के सफर के बाद वह तीनों मल्टीप्लेक्स पर पहुँच गए.. पीयूष ऑटो वाले को पैसे दे रहा था तब तक शीला ने बुकिंग काउन्टर से एडवांस बुकिंग करवाई हुई चार टिकट ले ली.. शीला ने कविता को वहीं काउन्टर पर रुकने को कहा और खुद लेडिज टॉइलेट की ओर चली गई.. पिंटू कहीं नजार नहीं आ रहा था.. शीला को गुस्सा आया.. वह समय की बड़ी पाबंद थी.. कोई देर से आए और उससे इंतज़ार करवाए वह उसे बिल्कुल पसंद नहीं था..

 

“कहाँ मर गया ये हरामखोर!! में यहाँ कितने सेटिंग कर रही हूँ और इसे तो कुछ पड़ी ही नहीं है!! साला चोदने और मजे मारने भी जो वक्त पर ना पहुँच पाएं उससे और क्या उम्मीद की जा सकती है!!” शीला का पारा चढ़ता जा रहा था

 

“कैसी हो शीला भाभी?” पीछे से पिंटू की आवाज आई

 

“कब से तेरा इंतज़ार कर रही हूँ.. कहाँ मरवा रहा था तू? ” शीला बरस पड़ी

 

“मैं तो टाइम पर ही आया हूँ.. आप ही जल्दी आ गए तो मैं क्या करू!!..” पिंटू ने सफाई देते हुए कहा

 

“ठीक है.. ठीक है.. ज्यादा होशियारी मत कर.. ये पकड़ टिकट.. और मूवी शुरू हो जाए उसके बाद अंधेरा होने पर ही अंदर आना… समझा..!!”

 

“भाभी.. आज तो आप बड़ी कातिल लग रही हो.. लगे हाथों आपके भी दबा दूँ तो दिक्कत तो नहीं होगी ना!!”

 

“मैं सेटिंग करती हूँ उसका भी.. मैं चलती हु अब.. वो दोनों मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे”

 

“ठीक है भाभी”

 

शीला तेजी से चलते हुए कविता और पीयूष के पास जा पहुंची।

 

“चलो कुछ खाते है” कविता ने कहा

 

“हाँ.. अभी कुछ खा लेते है.. बाद में भीड़ हो जाएगी” तीनों मल्टीप्लेक्स के अंदर बने रेस्टोरेंट में पहुँच गए। शो शुरू होने में अभी देर थी..

 

पीयूष तो शीला के गुंबज जैसे स्तन देखकर पागल सो हो गया था.. पीयूष को यूं घूरते हुए देखकर शीला ने मुस्कुराकर अपने पल्लू को इस तरह एडजस्ट किया की जिससे उनके उभार आसानी से नजर आ सके.. पीयूष गरम गरम सांसें छोड़ रहा था

 

रेस्टोरेंट में खाने का ऑर्डर देने के बाद तीनों बातें करने लगे..

 

शीला: “पीयूष, कैसा चल रहा है तेरा काम?”

 

पीयूष: “ठीक ही चल रहा है भाभी.. वैसे कविता आपसे काफी घुलमिल गई है.. बहोत तारीफ करती है आपकी”

 

कविता: “मैं नहीं भाभी.. ये पीयूष ही हर वक्त आपकी तारीफ करता रहता है..” कहते हुए कविता पीयूष के सामने देखकर हंसने लगी

 

पीयूष बेचारा शर्म से लाल हो गया

 

शीला: “मेरी तारीफ?? किस बात की तारीफ करते हो पीयूष.. जरा मुझे भी तो कहो”

 

पीयूष: “वो.. कुछ नहीं भाभी.. ये कविता भी ऐसे ही मज़ाक कर रही है”

 

कविता: “अच्छा बच्चू.. उस दिन तो बोल रहे थे की शीला भाभी बहोत सुंदर है.. कितने मस्त लगते है.. झूठ क्यों बोल रहे हो!!”

 

पीयूष ने जवाब नहीं दिया और अपनी नजरें झुका ली

 

शीला: “पीयूष.. ऐसा तो क्या पसंद आ गया मुझ में??”

 

कविता के सामने कुछ भी बोलने से शर्मा रहा था पीयूष..

 

पीयूष: “अरे भाभी.. आप हो ही ऐसी.. आप भला किसे पसंद नहीं आएगी.. !!!”

 

इसी तरह की शरारती बातों में तीनों उलझे रहे.. खाना आ गया और तीनों ने खा भी लिया.. पीयूष बिल देने के लिए रुक तब तक शीला और कविता रेस्टोरेंट के बाहर निकल गए.. शीला कविता को और एक-दो बातें समझा रही थी तभी पीयूष उनके पास आया.. और तीनों चलते हुए हॉल के बाहर बेंच पर बैठ गए।

 

नया मूवी था इसलिए काफी भीड़ थी.. एक १९-२० साल की लड़की, ब्लू जीन्स और सफेद टाइट टीशर्ट में घूम रही थी.. स्किन टाइट टीशर्ट से नजर आ रहे उसके मध्यम कद के गोल मटोल स्तनों को पीयूष घूर रहा था.. हाईहिल के सेंडल पहन वह लड़की मटकते हुए.. अपने स्तनों को उछलते हुए वहाँ से चली गई

 

शीला ने धीमी आवाज में कहा “मस्त लग रही है ना.. !!”

 

पीयूष: “हाँ भाभी.. एकदम धांसू लड़की थी”

 

शीला: “कविता, तू टीशर्ट क्यों नहीं पहनती?? कितनी सुंदर लगेगी तू टीशर्ट में?”

 

कविता: “मेरी सास को पसंद नहीं है भाभी.. इसलिए नहीं पहनती.. मेरे मायके में तो मैं रोज टीशर्ट ही पहनती थी.. पर शादी के बाद सब छूट गया”

 

पीयूष: “फिगर भरा भरा हो तो ही टाइट टीशर्ट जचती है..!!” इशारा उसके छोटे कद के स्तनों पर था ये समझ गई कविता

 

कविता: “अब कुदरत ने जिसे जैसा फिगर दिया उसमें थोड़े ही कोई बदलाव किया जा सकता है!!” पीयूष की कही बात से कविता अपमानित महसूस करने लगी।

 

शीला ने बात को घुमाने के इरादे से कहा “पीयूष, फिगर बड़ा हो या पतला.. सुंदरता तो देखने वाले की आँखों में होनी चाहिए”

 

शीला के अति-विकसित स्तनों की तरफ देखते हुए पीयूष ने कहा “फिर भी भाभी.. फरक तो पड़ता ही है” पीयूष की आँखों में शीला के स्तनों को दबाने की इच्छा साफ झलक रही थी। जिस लाचारी से भूखा भिखारी हलवाई की दुकान में पड़े गुलाबजामुन को देखता है.. बिल्कुल वही दशा पीयूष की भी थी..

 

शीला: “जैसे जैसे स्त्री की उम्र बढ़ती है.. वैसे वैसे ही जिस्मानी बदलाव होते रहते है.. मैं जब कविता की उम्र की थी तब मेरा फिगर भी कविता जैसा ही था” पीयूष को दिलासा देते हुए शीला ने कहा

 

आग बुझाने के बजाए उसमें पेट्रोल डाल रही थी शीला.. !!

 

शीला: “कविता, तू एक बार टीशर्ट पहन कर तो देख.. बहोत जाचेगा तुझ पर.. और तेरा फिगर इतना छोटा भी नहीं है.. ३६ की साइज़ तो होगी ही तेरी.. !!”

 

कविता: “३४ की साइज़ है मेरी, भाभी”

 

कविता का मन अब पिंटू को मिलने व्याकुल हो रहा था इसलिए पीयूष का ध्यान शीला की ओर आकर्षित करने के लिए उसने कहा “आपकी साइज़ क्या है भाभी??”

 

शीला: “४२ की साइज़ है मेरी”

 

ये सुनते ही पीयूष ने गहरी सांस ली.. शीला झुककर अपना सेंडल ठीक करने लगी.. और उसके ब्लाउस के ऊपर से दिख रहे नज़ारे से पीयूष को पसीना आने लगा..

 

शीला: “पीयूष, तुझे कैसा फिगर पसंद है? पतला या मोटा?”

 

पीयूष शरमाते हुए नीचे देखने लगा.. शीला और कविता हंस पड़े..

 

कविता: “पीयूष को तो सब बड़ा बड़ा ही अच्छा लगता है भाभी.. इसे तो मेरी फिगर पसंद ही नहीं है” रूठने का अभिनय करते हुए कविता ने कहा

 

अभिनय का गुण स्त्रीओं में जन्मजात होता है.. पर पीयूष इसे परख नहीं पाया.. और सकपका गया

 

पीयूष: “अरे कविता.. किसने कहा तू मुझे पसंद नहीं है!! बहोत पसंद है तू मुझे”

 

कविता: “लेकिन अगर मेरा फिगर शीला भाभी जैसा होता तो ज्यादा पसंद आता.. हैं ना!!”

 

शीला के सिखाने के अनुसार कविता बहुत बढ़िया तरीके से आगे बढ़ रही थी.. शीला भी बड़ी शांति से पति-पत्नी की इस मीठी नोक-झोंक को सुन रही थी

 

कविता: “आप से एक बात करनी थी.. आप बुरा मत मानना”

 

शीला: “बोल ना.. क्या बात है?”

 

कविता: “ऐसे नहीं.. पहले आप मुझे वचन दीजिए की आप बुरा नहीं मानोगी.. और मेरे बारे में बुरा नहीं सोचोगी”

 

शीला: “प्रोमिस.. अब बता मुझे.. ”

 

कविता: “कैसे कहूँ.. मुझे तो शर्म आती है”

 

पीयूष: “अब पूछ भी ले.. एकता कपूर की तरह सस्पेंस खड़ा मत कर!!”

 

शीला हंस पड़ी..

 

कविता: “अभी नहीं भाभी.. अंदर हॉल में मूवी शुरू होने के बाद में कहूँगी”

 

पीयूष: “क्यों? पिक्चर शुरू हो जाने के बाद पूछने में शर्म नहीं आएगी तुझे?”

 

कविता: “ऐसा नहीं है पीयूष.. हॉल में अंधेरा होगा तो पूछने में शर्म नहीं आएगी.. चेहरा ही नहीं दिखेगा फिर शर्म कैसी!!”

 

शीला: “अंधेरे में तो बहोत कुछ हो सकता है.. जो कुछ भी उजाले में नहीं हो सकता वो सब कुछ अंधेरे में हो सकता है”

 

ये सुनते ही पीयूष की आँखों में चमक आ गई

 

कविता: “पीयूष, अभी वो सफेद टीशर्ट वाली लड़की की सीट, गलती से तेरी बगल में आ गई तो तू उसका फिगर दबाने में.. बड़े फिगर का मज़ा लेना मत भूल जाना”

 

पीयूष: “और अगर फिगर दबाने के चक्कर में सर पर जूते पड़ेंगे तो!!”

 

शीला: “तेरे सर पर जूते नहीं पड़ेंगे.. मेरी गारंटी है.. ”

 

कविता और शीला दोनों हंस पड़े.. तभी शो का टाइम हो गया और हॉल का गेट खुल गया.. ऑडियंस अंदर जाने लगी..

 

पीयूष: “चलिए भाभी.. चलते है अंदर”

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