शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-13

(Desi Kahani) 5

redwalker69 2026-04-28 Comments

This story is part of a series:

“इतनी देर क्यों लगा दी भाभी?” प्यार से शीला के उभारों पर चिमटी काटते हुए रूखी ने कहा

 

“अरी जल्दी आने के लिए मैंने ऑटो ली थी.. पर वह हरामी रिक्शा वाला मेरे ये दूध के कनस्तर देखकर पागल हो गया.. और जानबूझकर ऑटो आराम से चला रहा था.. क्या करती!! भाड़ा भी नहीं लिया उसने.. सोच तू.. कितना पागल हो गया होगा इन्हे देखकर!!”

 

रूखी: “बेचारे की बीवी के छोटे छोटे होंगे.. तभी इन्हे देखकर पागल हो गया.. आपके तो पैसे बच गए ना!! वो सब छोड़िए.. भाभी, अब आप उस कोने में छुपकर खड़े हो जाइए.. अभी आपको बढ़िया वाला पिक्चर दिखाती हूँ.. अभी शुरू होगा.. देखकर आप मुझे बताना की मुझे क्या करना चाहिए”

 

शीला रूखी के दूध भरे स्तनों को देखकर उत्तेजित हो गई.. उसने रूखी से कहा “तेरा दूध पिए कितने दिन हो गए यार.. पहले थोड़ा सा दूध पी लेने दे मुझे.. ”

 

रूखी: ” भाभी.. वो रसिक भी मुझे कितने दिनों से हाथ नहीं लगाता.. मेरा भी बड़ा मन कर रहा है.. पर क्या करू!!”

 

शीला ने रूखी का हाथ पकड़कर अपने करीब खींच लिया और कोने में ले जाकर पूछा “फिर कैसा रहा उस रात रघु और जीवा के साथ??”

 

जवाब देने से पहली रूखी ने अपनी तंग चोली के दो हुक खोल दिए और नारियल जैसी चूचियों में से एक बाहर निकालकर शीला के हाथ में थमा दी..

 

रूखी: “जीवा की तो क्या ही बात करू मैं भाभी.. पूरी रात चोदा था मुझे.. और रघु भी कुछ कम नहीं था.. वो भी मुआ पीछे से उंगली करता रहा”

 

रूखी की चुची को मसलते हुए शीला ने कहा “तेरे बोबे तो वाकई जबरदस्त है रूखी..” शीला रूखी की निप्पल से खेलते हुए बोली

 

रूखी ने शीला का सर पकड़कर अपनी निप्पल के करीब खींचा और बोली “जो भी करना है जल्दी करो भाभी.. अभी पिक्चर बस शुरू होने ही वाला है.. फिर मौका हाथ से निकल जाएगा.. फटाफट चूस लो जितना चाहिए.. फिर घर पर आऊँगी तब इत्मीनान से पीना मेरा दूध.. ”

 

शीला ने रूखी के स्तन को पकड़कर उठाने की कोशिश की.. कम से कम ढाई किलो का वज़न था एक स्तन का!!

 

“जल्दी कीजिए भाभी.. इसे बाद में नाप लेना.. ” रूखी ने बेसब्री से कहा

 

“रूखी मुझे ये तो बता की आखिर तूने मुझे यहाँ पर किस लिए बुलाया है??”

 

“सब बताऊँगी भाभी.. थोड़ी शांति रखिए.. आप खुद ही देख पाओगी.. मुझे बताने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी” कहते हुए रूखी ने शीला को अपनी बाहो में भर लिया..

 

शीला ने रूखी की निप्पल को दबाकर दूध की एक चुस्की लगाई.. और फिर भागकर पिलर के पीछे छुप गई.. और पीछे से देखने लगी की आखिर वो क्या था जो रूखी उसे दिखाना चाहती थी।

 

थोड़ी देर के बाद.. ६० साल का एक बूढ़ा घर के अंदर आया.. उम्र भले ही ज्यादा था पर दिलडोल काफी चुस्त और तंदूरस्त था.. उसकी खुली छाती पर घुँघराले सफेद बाल नजर आ रहे थे और कमर के नीचे उसने धोती बांध रखी थी..

 

पास में रूखी खटिया पर बैठे हुए अपने बच्चे को दूध पीला रही थी

 

“बहु, क्या कर रहा है मेरा लल्ला?? तुझे तंग तो नहीं करता है ना!! ” कहते हुए वह बूढ़ा रूखी के करीब जा पहुंचा और झुककर उस दूध पीते बच्चे के गाल को सहलाने लगा.. रूखी का एक स्तन बाहर लटक रहा था.. यह पूरा द्रश्य शीला पिलर के पीछे छुपकर देख रही थी.. उसे सबकुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था.. रूखी के स्तन से बस आधे फुट की दूरी पर था वो बूढ़ा..

 

शीला समझ गई की वह बूढ़ा.. रूखी का ससुर था..

 

“तेरी सास जब मंदिर जाती है.. तभी में शांति से इसे देख पाता हूँ.. ” कहते हुए वह बूढ़ा खटिया पर रूखी के बगल में बैठ गया

 

“बहु, मुझे हमारा लल्ला बहोत प्यारा है.. वो कहते है ना.. पूंजी से ज्यादा ब्याज की किंमत होती है.. बस वैसे ही.. ” कहते हुए वह रूखी के बेहद आकर्षक दूध टपकाते स्तन को घूरने लगा.. उस बूढ़े की आँखों में बालक की भूख और मर्द की हवस का जलद मिश्रण था..

 

रूखी: “बापू, अभी माँ लौट आएगी और ऐसे देखेगी तो उन्हे गलतफहमी हो जाएगी.. आप अपने कमरे में चले जाइए.. लल्ला का पेट भर जाए बाद में उसे आप को सौंप दूँगी.. जितना मर्जी खेल लेना फिर”

 

रूखी का एक स्तन बाहर और एक चोली के अंदर था.. उस १००० वॉल्ट के एलईडी बल्ब जैसे स्तन को देखकर रूखी का ससुर पागल सा हो रहा था.. उस छोटे बच्चे के सिर के बालों को सहलाने के बहाने वो बार बार रूखी के स्तन को छु रहा था.. तभी उस दूध पीते बच्चे के मुंह से निप्पल छूट गई.. वह पीते पीते सो गया था.. रूखी की गुलाबी निप्पल से दूध की तीन चार बूंदें बच्चे के गाल पर गिर गई.. और आखिरी बूंद निप्पल पर अभी भी चिपकी हुई थी..

 

“अरे अरे बहु.. ऐसे तो कपड़े खराब हो जाएंगे.. साथ में एक रुमाल रखा करो तुम.. ” ससुर ने रूखी की निप्पल के नीचे उंगली रख दी

 

रूखी के पूरी शरीर में झुनजूनाहट होने लगी.. अपनी सख्त निप्पल पर ससुर के हाथ का स्पर्श होती ही उसका दूसरा स्तन कठोर होकर चोली को फाड़कर बाहर निकलने की धमकी देने लगा.. जो स्तन पहले से बाहर था वो भी सख्त हो गया.. मानों बम की तरह फटने वाला हो

 

रूखी की निप्पल के नीचे उंगली रखकर ससुर ने दूध की उस बूंद को उंगली पर ले लिया और फिर उसे रूखी के चेहरे के पास लेजकर बोला

 

“लल्ला को तो रोज दूध पिलाती हो.. कभी खुद भी चखकर देखा है क्या??”

 

रूखी शर्म से पानी पानी हो गई

 

“मुझे भला क्या जरूरत है इसे चखने की.. ” रूखी ने सिर झुकाकर जवाब दिया

 

“अरे बेटा.. तुम्हें रोज सबसे पहली बूंद खुद ही चख लेनी चाहिए.. उसके बाद ही लल्ला को पिलाना चाहिए.. क्या पता हमें कोई बीमारी हो और दूध खराब हो गया हो तो लल्ला बेचारा बीमार हो सकता है.. ये ले.. चख कर देख” कहते हुए ससुर ने उस दूध वाली उंगली का स्पर्श रूखी के होंठों से करवाया। रूखी ने अपना मुंह खोला.. ससुर ने अपनी उंगली अंदर डाल दी और थोड़ी देर तक वैसे ही रहने दी.. उंगली को चूसते हुए रूखी की आँखें बंद हो गई.. वह गहरी सांसें लेने लगी.. हर सांस के साथ उसके मादक उन्नत उरोज ऊपर नीचे होने लगे..

 

अनजाने में रूखी ने अपने ससुर की उंगली को ऐसे चूस लिया जैसे जीवा के लंड को चूस रही हो.. अपने ससुर को उंगली को उसने चाट चाट कर साफ किया.. अब उस बुढ़ऊ ने अपनी दूसरी उंगली भी रूखी के मुंह के अंदर डाली और अंदर बाहर करने लगा.. जैसे अपने लंड को रूखी के मुंह में दे रहा हो.. रूखी की आँखें अभी भी बंद थी..

 

रूखी: “बापू.. फिर से दूध की बूंदें टपकने की तैयारी में है.. जल्दी से अपनी उंगली से पोंछ लीजिए वरना मेरे कपड़े गीले हो जाएंगे” रूखी ने अपने ससुर को सेक्स के शतरंज में अप्रत्यक्ष रूप से आमंत्रित कर ही दिया

 

रूखी ने नजर झुकाकर देखा तो उसके ससुर का लंड धोती के अंदर खड़ा हो चुका था.. भला हो उसकी लंगोट का जिसने उस थिरकते हुए घोड़े जैसे लंड को बांध कर रखा था..

 

बूढ़े ने आगे बढ़ने का फैसला किया.. और निप्पल को हल्के से दबाकर अपनी उंगली पर दूध लेकर खुद के मुंह तक ले गया और बोला

 

“बहु.. मैं चखकर देखूँ एक बार???”

 

रूखी का यह नया रूप देखकर शीला अचंभित रह गई.. खटिया पर बैठी रूखी का बदन इतना सुंदर लग रहा था.. कुछ ही महीनों पहले हुई डिलीवरी के कारण उसका मांसल शरीर और गदरा गया था..

 

बूढ़े ससुर ने खुद की उंगली चूसकर रूखी का दूध चख लिया… रूखी शर्म से लाल लाल हो गई..

 

“बापू.. आपने तो पहले चखा ही होगा ना!! अम्मा का दूध.. जब लल्ला के पापा का जनम हुआ तब.. ” रूखी ने धीरे से कहा

 

“बेटा.. क्या बताऊँ तुझे.. जब रसिक पैदा हुआ था तब तेरी सास के बोब्बे भी तेरी ही तरह सुंदर और रसीले थे.. रसिक ज्यादा दूध नहीं पी पाता था.. इसलिए तेरी सास की छाती दूध से भर जाती.. रात को जब उसकी छाती दर्द करने लगती.. तब वो मुझे आधी रात को जगा देती.. मैं चूस चूस कर उसके बबले खाली कर देता तब जाकर बेचारी को नींद आती थी..

 

“बापू, लल्ला के पापा तो अब भी ज्यादा नहीं पी पाते.. मुझे भी कभी कभी रात को दर्द होने लगता है.. पर वो पीते ही नहीं है.. पूरी रात मैं दर्द के मारे तड़पती रहती हूँ.. और क्या कर सकती हूँ मैं.. तड़पने के अलावा.. ” रूखी ने अपने पत्ते बिछाने शुरू कर दिए

 

“अरे बहु.. अब मैं मेरे बेटे से ये तो नहीं कह सकता ना.. की अपनी बीवी का दूध चूस दे.. पर हाँ.. एक काम हो सकता है.. रात को जब दूध से तेरी छाती फटने लगे तब मुझे जगा देना.. मैं सारा दूध चूसकर तेरा दर्द कम कर दूंगा.. ठीक है!!”

 

“आप कितने अच्छे है.. बापू!! देखिए ना.. मेरी छाती दूध से फटी जा रही है.. और लल्ला भी थोड़ा सा ही पीकर सो गया.. अब पता नहीं ये कब जागेगा और दूध पिएगा.. ”

 

“अरे बेटा.. क्यों चिंता कर रही हो!! मैं हूँ ना.. ला मैं तेरा दूध चूसकर तेरी छातियाँ हल्की कर देता हूँ”

 

“पर बापू.. मुझे बड़ी लाज आती है.. ” शरमाते हुए रूखी ने कहा

 

“अब शर्म करोगी तो फिर दर्द भुगतना पड़ेगा.. और तो मैं कुछ नहीं कर सकता!!”

 

“नहीं नहीं बापू.. ये लीजिए.. चूस लीजिए.. बहोत दर्द हो रहा है.. ” रूखी ने तोप के नाले जैसे दोनों स्तन खोलकर अपने ससुर के सामने पेश कर दिए

 

रूखी के मदमस्त स्तनों को देखकर उसका ससुर पानी पानी हो गया.. यौवन के कलश जैसे बेहद सुंदर चरबीदार बोब्बे.. बड़े सुंदर लग रहे थे

 

“आप कितने अच्छे है.. बापू!! देखिए ना.. मेरी छाती दूध से फटी जा रही है.. और लल्ला भी थोड़ा सा ही पीकर सो गया.. अब पता नहीं ये कब जागेगा और दूध पिएगा.. ”

 

“अरे बेटा.. क्यों चिंता कर रही हो!! मैं हूँ ना.. ला मैं तेरा दूध चूसकर तेरी छातियाँ हल्की कर देता हूँ”

 

“पर बापू.. मुझे बड़ी लाज आती है.. ” शरमाते हुए रूखी ने कहा

 

“अब शर्म करोगी तो फिर दर्द भुगतना पड़ेगा.. और तो मैं कुछ नहीं कर सकता!!”

 

“नहीं नहीं बापू.. ये लीजिए.. चूस लीजिए.. बहोत दर्द हो रहा है.. ” रूखी ने तोप के नाले जैसे दोनों स्तन खोलकर अपने ससुर के सामने पेश कर दिए

 

रूखी के मदमस्त स्तनों को देखकर उसका ससुर पानी पानी हो गया.. यौवन के कलश जैसे बेहद सुंदर चरबीदार बोब्बे.. बड़े सुंदर लग रहे थे

 

बूढ़े ससुर ने दोनों स्तनों को पकड़कर दबाया

 

“आह्ह.. दुख रहा है बापू.. ” कामातुर रूखी ने कहा

 

“अपनी भेस के थन जैसे है तेरे चुचे.. ” ससुर लार टपकाते हुए बोला.. रूखी ने अपने चेहरे को घूँघट से ढँक लिया.. देखिए इस नारी का चरित्र.. स्तन खुले हुए है और चेहरा ढँक रही है..!! संस्कारी होने का दिखावा करती रूखी का अगर घाघरा उठाया जाएँ.. तो उसकी बिना पेन्टी वाली चुत से.. कल रात जीवा और रघु के साथ हुई चुदाई के अवशेष मिल जाते..

 

जरा सा ही दबाने पर.. रूखी की निप्पलों से दूध की धार बरसने लगी.. रूखी का दूध उसकी गोद में ही गिरने लगा..

 

“बेटा.. एक काम करो.. लल्ला को पालने में सुला दो.. नहीं तो हलचल से वो जाग जाएगा.. ” ससुर ने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा

 

अपने ब्लाउस से लटक रही दो खुली चूचियों के साथ रूखी खटिया से खड़ी हुई.. और बच्चे को उठाकर बगल के कमरे में पालने के अंदर सुला दिया.. वापिस लौटते वक्त उसकी नजर पिलर के पीछे खड़ी शीला पर गई.. दोनों की नजरे मिली और चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ गई..

 

चलकर आ रही रूखी का अर्धनग्न सौन्दर्य देखकर बूढ़े ससुर का जबड़ा लटक गया.. क्या अद्भुत सौन्दर्य था रूखी का!! पूनम के चाँद जैसे गोरे गोरे दो स्तन देखकर शीला के भोसड़े में भी आग लग गई.. रूखी चलते चलते खटिया तक आई और ससुर के सामने जाकर खड़ी हो गई।

 

रूखी को देखकर उस बूढ़े की जवानी फूटने लगी.. बिना अपना घूँघट हटाए रूखी ने अपना दाया स्तन ऊपर किया.. उसका ससुर उस स्तन को देखता ही रह गया..

 

“जल्दी कीजिए बापू.. अम्मा कभी भी वापिस आ जाएगी.. ” कहते हुए रूखी ने अपने ससुर का सिर पकड़कर उनके मुंह में अपनी निप्पल दे दी

 

“ओह बहुरानी.. अमम.. ” ६० साल के बूढ़े का लंड धोती के अंदर फुँकारने लगा.. अपने बेटे की जवान बीवी के स्तनों से दूध चूसने की समाजसेवा शुरू कर दी बूढ़े ने….

 

“आह्ह.. बापू.. आप तो कैसे चूस रहे है.. ऊईई.. ओह्ह” रूखी ने अपनी निप्पल को ससुर के मुंह में दबा दिया.. वो बूढ़ा भी ऐसे चूस रहा था जैसे दुनिया का सबसे बढ़िया हेल्थ ड्रिंक पी रहा हो.. थोड़ी देर तक चूसने के बाद वह बोला

 

“बेटा.. गाय के थन जैसी छाती है तेरी.. थोड़ा सा ही चूसने पर पूरा मुंह दूध से भर गया मेरा.. बेचारा लल्ला इतना सारा दूध कहाँ से पी पाएगा!! इतना दूध है की पूरे घर के लिए काफी है.. काश हमारे खेत भी तेरी इन छातियों जीतने उपजाऊ होते”

 

“ओह्ह बापू.. क्या कर दिया आपने!! मुझे तो कुछ कुछ हो रहा है.. आह्ह.. ” रूखी का पूरा जिस्म हवस की आग में झुलसने लगा था। उसका एक हाथ ससुर के सिर पर था और दूसरे हाथ से उसने अपनी भोस सहलाना शुरू कर दिया..

 

“आह्ह बापू.. धीरे धीरे.. काटिए मत.. ऊईई माँ.. बस बस बहुत हो गया.. थोड़ा सा लल्ला के लिए भी छोड़ दीजिए.. अभी वो जाग गया तो उसे क्या पिलाऊँगी.. ” रूखी और उसके ससुर का यह कामुक मिलन देखते हुए.. शीला ने अपने दोनों स्तन ब्लाउस से बाहर निकाल लिए थे और पागलों की तरह अपनी निप्पलों को मसल रही थी। शीला ने पास पड़े हँसिये को उठाकर उसके लकड़े से बने हेंडल को अपनी चुत पर रगड़ना शुरू कर दिया था। उन दोनों का खेल देखकर शीला का मन कर रहा था की वो भी उस खटिया में जाकर उस बूढ़े से लिपट पड़े.. पर फिलहाल ऐसा करना मुमकिन नहीं था

 

“तेरी छातियाँ तो रसिक की अम्मा से भी बड़ी बड़ी है.. ” आखिर ससुर ने रूखी की निप्पलों को छोड़ दिया

 

“आपने तो सारा दूध खतम कर दिया बापू” उस बूढ़े के पीठ पर हाथ पसारते हुए रूखी ने कहा.. वह अपने ससुर को ऐसे सहला रही थी जैसे कसाई हलाल करने से पहले बकरे को सहलाता है..

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