शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-6
(Desi Kahani) 4
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लंड को चुत की और चुत को लंड की जरूरत तब से पड़ती आई है जब से मानवजात का इस पृथ्वी पर अवतरण हुआ.. शीला बस यही खयालों में थी की कब रात हो और जीवा का मूसल जैसा लंड देखने को मिले!!
शीला की पुत्ती में फिर से खाज होने लगी..
जैसे तैसे समय बिताते हुए शाम के ७:०० बज गए.. उसने फटाफट शाम का खाना निपटा लिया और बेडरूम में पानी का एक जग रख दिया। आने वाले मेहमान की खातिरदारी करने के लिए वह तैयार होने लगी… बाथरूम में जाकर उसने अपनी चुत के बाल रेज़र से साफ कर दिए और उसपर क्रीम लगाकर मक्खन जैसी कोमल बना दिया.. जीवा ने आज तक उस गंवार रूखी के झांटेदार भोसड़े को देखा है.. आज जब वो शीला की मुलायम रेशम जैसी चुत को देखेगा तो उसके होश उड़ जाएंगे…
जैसे जैसे समय बीतता गया.. शीला की धड़कनें तेज होने लगी.. शीला बेडरूम में गई और अपनी साड़ी और ब्लाउस को उतार फेंका.. मदन ने सिंगापोर से जो जाली वाली ब्रा भेजी थी… वह पहन ली.. उस ब्रा की छोटी सी कटोरियों में शीला के खरबूजे जैसे स्तन कैसे समाते भला!! जैसे तैसे दबा दबाकर उसने अपने स्तनों को ब्रा के अंदर ठूंस दिया.. जैसे रिक्शा वाले ३ के बदले ५ पेसेन्जर भरते है वैसे…
उस छोटी सी ब्रा से उसके स्तन उभर कर बाहर झांक रहे थे.. आहाहाहा क्या लग रही थी शीला!! इस मस्त महंगी वाली ब्रा से शीला का सौन्दर्य झलक रहा था.. आईने में खुद के सौन्दर्य को देखकर वह अपनी चुत खुजाने लगी.. और मन ही मन बोलने लगी
“जीवा, आज तो तू गया काम से.. आज तुझे रूखी को भुला न दिया तो मेरा नाम शीला नही.. आज की रात तुझे मरते दम तक याद रहेगी.. तुझे अगर तेरे खूँटे जैसे लंड पर गुमान है तो में भी तुझसे कम नही हूँ… आ जा रात को फिर देख इस शीला के जलवे…”
शीला ने अपने पति मदन का सफेद शर्ट निकाला.. बहोत टाइट था उसके लिए पर फिर भी पहन लिया… और नीचे मस्त काले रंग का बेलबॉटम पेन्ट पहनकर उलटी घूम गई और अपने आप को आईने में देखने लगी.. बाप रे बाप.. इस पेन्ट में उसके कूल्हे क्या कातिल नजर आ रहे थे!! वाह!! अपने कूल्हों को खुद ही थपकाकर फिर उसने मरून कलर की लिप्स्टिक से अपने होंठ पोत लिए.. “यह सारी लाली तेरे लंड पर चिपक जाने वाली है जीवा… जब में तेरा… अफ़ग़ानिस्तानी केले जैसे लंड को पूरा मुंह में लेकर चुसूँगी.. ”
उसने कटोरी में थोड़ा सा तेल भी निकाल कर रख दिया.. कहीं गांड मरवाने का मौका मिल जाए तो… तैयारी पूरी होनी चाहिए.. जब आग लगे तब कुआं खोदने क्यों जाना!! अलमारी से उसने महंगी शराब की बोतल निकाली जो मदन ने अपने दोस्त के हाथों भिजवाई थी.. अभी जीवा आया नही था इसलिए उसने तुरंत किचन में जाकर थोड़े काजू फ्राई कर लिए.. और ५५५ सिगरेट का पैकेट भी सजाकर टेबल पर रख दिया।
आज के भव्य चुदाई प्रसंग को शीला चार चाँद लगा देना चाहती थी… आज रात को.. न कोई डर होगा.. और ना ही कोई शर्म.. सारी हिचकिचाहट को छोड़कर आज तो मन भरकर चुदवाना था बस्स.. !!!
घड़ी का कांटा ८ बजे का समय दिखा रहा था। जीवा तो १० बजे आने वाला था.. अब दो घंटे बैठे बैठे क्या करूँ?? चलो कोई मस्त बीपी की डीवीडी चला देती हूँ… मस्त मस्त.. नंगी चुदाई वाली इतनी सारी डीवीडी पड़ी हुई है.. वो तो में भूल ही गई..!! जीवा को भी दिखाऊँगी.. की चुत कैसे चाटते है!! साले ये बीपी वाले बड़ा मस्त चुत चाटते है.. काश किसी गोरे से पाला पड जाएँ.. तो मज़ा आ जाएँ चुदवाने का!!
शीला ने ८-१० डीवीडी निकाली.. और एक के बाद एक सब लगाकर देख ली.. उसमे से एक जबरदस्त वाली फिल्म को चुना.. हाँ, ये वाली बड़ी मस्त है.. यही दिखाऊँगी जीवा को.. चूतिया पागल हो जाएगा देखके..
जैसे साज-शृंगार में कमी रह गई हो, शीला वापस बेडरूम में गई और शर्ट के बटन खोलकर अपनी काँखों पर परफ्यूम छिड़क दिया.. और आईने में फिर से अपने आप को देखने लगी.. कुछ बाकी तो नही रह गया ना!!
घड़ी में अब दस बज चुके थे.. घड़ी के पेंडुलम को देखकर वह सोचने लगी की जीवा का लंड भी उसके पतलून में ऐसे ही झूलता होगा!! जीवा.. जीवा.. कब आएगा रे तू!! हमारे देश में किसी को समय की पड़ी ही नही है!! और किसी काम के लिए देर से पहुंचना तो फिर भी समझ में आता है.. पर चुत चोदने के मौके के लिए भी लोग समय पर नही पहुँच पाते!!
शीला की चुत अब व्याकुल हो चली थी। आखिर थककर उसने रूखी को फोन लगाया.. रूखी ने जीवा के बारे में पूछकर वापिस फोन करने के लिए कहा.. वह भी तनाव में आ गई.. क्योंकी सुबह ४ बजे के बाद उसे भी तो जीवा से चुदवाना था.. !!
थोड़ी देर में रूखी का फोन आया और उसने शीला को बताया की वह शीला के घर अकेले आने से डर रहा था.. जीवा ने रूखी से कहा था की आजकल ऐसी कई घटनाएं घटी थी जिसमे चोदने के बहाने बुलाते थे और फिर बलात्कार केस की धमकी देकर पैसे मांगते थे!! इसी कारण वह डर रहा था। उसने रूखी से कहा की अगर शीला को एतराज न हो तो वह अपने दोस्त रघु को लेकर आ सकता है.. वरना वो नही आएगा!!
बहनचोद, आखिरी मौके पर अब यह नई समस्या आ गई.. जीवा तुरंत जवाब मांग रहा था की क्या करें!! अगर शीला मना करे तो सारी तैयारियों की माँ चुद जाएगी.. रूखी ने फोन पर कहा “भाभी जल्दी जवाब दीजिए.. वो आपकी गली के नुक्कड़ पर इंतज़ार कर रहा है.. आप कहो तो वो रघु के साथ आए वरना वापिस लौट जाएगा”
शीला ने सोचा.. बाप रे.. दो दो लोडे.. !!! उसने रूखी को बोल दिया “तू हाँ कह दे जीवा को.. बोल उसे की आ जाएँ.. जो होगा देखा जाएगा”
रूखी ने कहा “आप दरवाजे पर खड़े रहना.. वह बाइक पर आएगा.. हरा शर्ट पहना है उसने.. जैसे ही वो आए.. उसकी बाइक अंदर कंपाउंड में रखवा देना ताकि किसीको शक न हो!!”
“हाँ भाई हाँ.. अब तू फोन रख.. और सुबह जब रसिक घर से निकले तब मुझे फोन करके बता देना.. ताकि में जीवा और रघु को तेरे घर भेज सकु”
फोन रखकर शीला तुरंत दरवाजे पर जाकर खड़ी हो गई.. २ मिनट के बाद एक बाइक आया.. शीला ने दौड़कर कंपाउंड का लोहे का दरवाजा खोल दिया.. बाइक अंदर आ गया.. चारों तरफ अंधेरा था.. और हल्की हल्की बारिश भी हो रही थी… इसलिए आजू बाजू के घरवाले सब घर बंद कर बैठे थे.. वह दोनों तुरंत घर के अंदर घुस गए और शीला ने भी अंदर आकर दरवाजा लॉक कर दिया..
शीला तुरंत किचन से दो ग्लास पानी लेकर आई.. ग्लास देखते वक्त वह इन दोनों को देख रही थी “इन दोनों में से जीवा कौन और रघु कौन? पतलून उतरे तो लंड का नाप देखकर ही पता चलेगा.. ”
ग्लास से पानी पीते पीते दोनों शीला के गदराए जिस्म को घूर रहे थे। शीला को ग्लास वापिस देते वक्त जीवा ने उसे कलाई से पकड़ लिया और अपनी ओर खींच लिया.. शीला अपना संतुलन गँवाकर जीवा की गोद में आ गिरी..
शीला का जबरदस्त गदराया जिस्म.. जीवा उसे आग़ोश में भरकर चूमने लगा..
“अरे रघु.. बहनचोद कातिल माल है ये.. जबरदस्त सेक्सी है ये तो!!”
:हाँ जीवा.. ऐसे तो सीधे सीधे चोदने में मज़ा नही आएगा.. लेकर चलते है इस छिनाल को खेत पर कुएं के पास.. वही पर दारू पीकर इसे खुले में चोदेंगे.. इतने छोटे से कमरे में क्या ही मज़ा आएगा!!” रघु ने कहा
इनकी बातें सुनकर शीला घबरा गई.. उसने कहा
“दारू तो यहाँ तैयार है.. और वो भी इंग्लिश.. मैं तुम लोगों के साथ किसी खेत-वेत में नही आने वाली.. जो भी करना है वो यहाँ मेरे घर पर ही होगा.. मैं बाहर नही आने वाली”
इस दौरान जीवा ने शीला के शर्ट के ऊपर से ही उसके बड़े बड़े स्तनों को मसलना शुरू कर दिया था.. रघु भी नजदीक आ गया और वह शीला की जांघों को सहलाने लगा.. उफ्फ़.. एक साथ दो मर्दों का स्पर्श होते ही शीला को जैसे करंट सा लग गया.. सिसकियाँ भरते हुए शीला ने आँखें बंद कर ली
जीवा का लंड शीला के नितंबों तले दबा हुआ था.. रघु शीला की जांघों को सहलाते हुए उसकी चुत तक पहुँच गया.. दूसरी तरफ जीवा ने शीला के शर्ट के ऊपरी दो बटन खोल दिए और अंदर हाथ डालकर उसकी मम्मों को मसल के रख दिया।
“आहहह.. जरा धीरे से.. तोड़ दोगे क्या!!” शीला अपने दोनों हाथों को पीछे की ओर ले गई और जीवा की गर्दन और बालों को सहलाने लगी।
जीवा ने शीला की जालीदार ब्रा में से उसके दोनों स्तनों को बाहर खींच निकाला.. और उसकी निप्पलों को मरोड़ते हुए शीला के गाल पर हल्के से काट लिया..
“कमीने.. मुझे खा जाएगा क्या तू!!” कहते हुए शीला खड़ी हो गई.. “रुको एक मिनट” कहते हुए उसने डीवीडी प्लेयर को रिमोट से चालू कर दिया “मस्त ब्लू फिल्म है.. देखोगे तो मन खुश हो जाएगा” कहते हुए वह जीवा के पास आकर लेट गई..
रघु ने पास पड़ी शराब की बोतल का ढक्कन खोला और शीला के जिस्म पर शराब गिराने लगा.. पूरा कमरा शराब की गंध से भर गया.. शीला का शर्ट शराब से भीग गया था जिसे यह दोनों चाटने लगे.. उसके स्तनों को चाटकर शीला की चुत और जांघों पर हाथ फेरते हुए रघु ने शीला का हाथ अपने लंड पर रख दिया.. पेन्ट के ऊपर से ही रघु के गन्ने जैसे लंड को सहलाने लगी शीला.. टीवी के स्क्रीन पर “ओ यस.. ओह येह.. फक मी” जैसी आवाजों के साथ फिरंगी रंडियाँ चुदाई में व्यस्त थी.. उन आवाजों से पूरा कमरा गूंज रहा था..
दो साल से खाली पड़े शीला के घर में आज काम-उत्सव शुरू हो गया था.. एक ही झटके में खींचकर जीवा ने शीला के शर्ट के बाकी के बटनों को तोड़ दिया और उसकी विदेशी ब्रा भी फाड़ दी.. शराब से लथपथ शर्ट और ब्रा को कोने में फेंक कर रघु और जीवा, शीला पर टूट पड़े।
भादों के महीने में गरम कुत्तिया पर जब एक कुत्ता चढ़ा हुआ हो और दो-तीन और कुत्ते ऊपर चढ़ने के बेकार कोशिश कर रहे हो.. वैसा द्रश्य था।
दोनों ने आपस में शीला का एक एक स्तन बाँट लिया.. और उसे चूसने लगे.. उसकी गुलाबी निप्पलों पर दो दो जीभ एक साथ चल जाने पर शीला सिसकने लगी.. उसके एक हाथ से वह अपने बेलबॉटम पेन्ट के ऊपर से अपनी चुत खुजा रही थी और दूसरे हाथ से रघु के लंड को पतलून के ऊपर से सहला रही थी.. खेल खेल में उसने रघु के पेन्ट की चैन खोल दी.. शीला का जिस्म अब हवस की आग से झुलस रहा था।
अब शीला का पेन्ट भी उतर चुका था.. और पेन्टी तो कहाँ फट कर गिर गई उसका पता ही नही चला.. उसके भोसड़े पर जीवा का हाथ छूते ही शीला की भोस से कामरस टपकने लगा.. रघु ने थोड़ी सी शराब शीला की चुत पर गिराई और बोतल का मुंह शीला की चुत में डाल दिया..
“बहुत महंगी दारू है.. क्यों बर्बाद कर रहे हो? उससे अच्छा तो इसे आराम से पी लो तुम दोनों” शीला ने कहा
“पहले तुझे ठीक से गीली कर लेते है.. फिर पियेंगे” जीवा ने और थोड़ा दबाव बनाकर शीला की चुत में बोतल घुसाई
“ऊई माँ.. मुझे जल रहा है.. निकालो बाहर इसे.. मर गई मैं.. आहह.. मुझे पेशाब लगी है.. में बाथरूम में होकर आती हूँ ”
टीवी की ओर इशारा करते हुए रघु बोला “वो देख.. कैसे चूस रही है.. ले तू भी इसी तरह मेरा लंड चूस”
“तुम पेन्ट से लोडा बाहर निकालोगे तभी तो चुसूँगी ना… ” शीला ने अपनी समस्या बताई “और टीवी में जो भी देखोगे.. वो सब कुछ हम थोड़ी ही करेंगे?”
“और क्या!! आज तो जैसा हम कहेंगे वैसा तुम्हें करना पड़ेगा… ले अब.. मेरे लोडे को सिगार समझकर मुंह में ले ले.. ” चैन खुलते ही रॉयल एनफील्ड के जम्पर जैसा सख्त लंबा लंड स्प्रिंग की तरह उछलकर बाहर निकला..
“ईशशश… ” रघु का बरकती लंड देखकर शीला पागल सी हो गई.. उसने झुककर रघु के लंड को चूम लिया.. रघु अब पगलाये सांड जैसा हो गया था.. शीला ने उसके टट्टे कसकर पकड़े और बच बच आवाज के साथ चूसना चालू कर दिया..
जीवा ने भी शीला के भोंसड़े में आधी बोतल घुसा दी.. और फिर अपना पतलून और कच्छा उतार फेंका.. शीला के गूँदाज स्तनों को मसलते हुए अपना मुंह शीला के मुंह के करीब ले गया और फिर बोला “अब मूत बोतल के अंदर मादरचोद.. जितना दारू कम हुआ है.. उतना फिर से भर दे..”
बिस्तर तो पहले से ही शराब गिरने से गीला था.. जीवा ने शीला के होंठों पर अपने होंठ रख दिया और जबरदस्त उत्तेजित होकर चूसने लगा.. शीला भी इस चुंबन का प्रति-उत्तर देते हुए… जीवा के होंठ चूसने लगी.. शीला को चूमते हुए जीवा अब भी उसके भोसड़े में शराब की बोतल अंदर बाहर किए जा रहा था.. शीला भी उत्तेजित होकर अपनी गांड को गोलाकार में घुमाते हुए बोतल से चुदने का मज़ा ले रही थी…
“आहहह.. ऊँहह.. हाय जीवा… अब रहा नही जाता… घुसेड़ दे बोतल पूरी की पूरी अंदर…फाड़ दो इसे” शीला बेकाबू होकर बकवास किए जा रही थी।
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