बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य)

(Family Sex Stories) 137

redwalker69 2026-05-24 Comments

बात 1999 की है जब मैं 12वीं में पढ़ता था। हम एक छोटे शहर में रहते थे और हमारा एक छोटा सा परिवार था। मुझे मिलाकर घर में कुल 4 लोग थे। पहले घर के बड़े मेरी मम्मी, जिनकी उम्र 48 साल थी। पापा , जिनकी उम्र 55 साल थी । फिर मेरी एकलौती बहन रश्मि , जिसकी उम्र 19 साल और सबसे छोटा मैं मोनू , जिसकी उम्र 18 साल थी 

मेरी बहन रश्मि बहुत ही खूबसूरत है। दीदी की हाईट 5’5”, स्लिम, दूधिया रंग और जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद है, उनके रेशमी लम्बे काले बाल जो उनकी कमर के नीचे तक आते हैं। कुल मिलाकर रश्मि दीदी किसी फिल्म एक्ट्रेस से कम नहीं लगती थी। दीदी B.Com कर रही थी और उनकी मैथ बहुत अच्छी थी और मुझे वही मैथ पढ़ाती थी।   

10वीं के बाद मेरा स्कूल बदल गया था। और इस कारण नए स्कूल में मेरे ज्यादा दोस्त नहीं थे, बस दो-तीन गिने चुने दोस्त थे। उन्हीं में से एक दोस्त है ऋषि । जब मैं नया-नया इस स्कूल में आया था तो कुछ लड़कों ने मेरी रैगिंग करने की कोशिश की थी, तब ऋषि ने मुझे बचाया था। तब वो 12वीं में था और दो साल से फेल हो रहा था। अब वो तीसरी बार फेल होकर मेरा क्लास फैलो हो गया है। 

 

दरअसल ऋषि की माूँ और मेरी मम्मी पुराने दोस्त हैं, मैं किरण आंटी (ऋषि की मम्मी) को तो अच्छे से 

जानता हूँ क्योंकि वो अक्सर मेरे घर आती हैं और मम्मी और दीदी के साथ घंटों बातें करती रहती हैं। लेकिन ऋषि कभी मेरे घर नहीं आया, पर उसने मुझे किसी फंक्शन में मेरी मम्मी के साथ देखा था तो वो मुझे जानता था, इसीलिए उसने मुझे रैगिंग से बचाया था। क्योंकि वो 5-6 साल से इसी स्कूल में था और वो गुंडागदी ज्यादा करता था, पढ़ाई कम। इसीलिए सब उससे डरते थे। तभी से मैंने उससे दोस्ती कर ली ताकी मुझे स्कूल में कोई परेशान न करे।   

मेरा स्कूल एक सरकारी स्कूल था, जिसमें सिर्फ लड़के पढ़ते थे। एक दिन लंच टाइम में ऋषि मेरे पास आयाऔर बोला- “अबे अकेले-अकेले क्या खा रहा है?”  

 

मैंने बोला भाई- “आप भी खा लो…”  

 

वो हूँसने लगा और बोला- “जल्दी से खा ले, तुझे एक चीज दिखानी है…”  

 

मैंने जल्दी-जल्दी खाना खाया और ऋषि से बोला- “हां भाई, क्या चीज दिखानी थी?”  

ररि मुझे क्लास के पीछे मैदान में ले गया जहां कोई और नहीं था और अपनी जेब के अनदर से एक किताब निकलकर मुझे दिखाई उस किताब में नंगी लड़कियों की फोटो बनी थी। ऋषि का चेहरा चमक रहा था और पहली बार नंगी लड़की का फोटो देखकर मेरा चेहरा उत्तेजना और शर्म से लाल हो गया था।  

 

मेरा चेहरा देखकर ऋषि बोला- अबे चूतिये क्या हुआ? तेरी गाण्ड क्यों फट रही है?  

 

मैंने कहा- ऋषि भाई, कोई देख लेगा। अगर किसीं ने पकड़ लिया तो बहुत पिटाई होगी।  

ऋषि बोला- अबे साले फट्टू । इतनी मुश्किल से तो ये किताब का जुगाड़ किया है मैंने। पता है दिल्ली से मंगवाई है। यहा नहीं मिलती…” और वो किताब के पनने पलटने लगा।   

उस किताब के पन्नों में लड़कियों के साथ नंगे लड़कों की भी तस्वीरें थीं और कुछ तो चुदाई की भी थीं। जिंदगी में पहली बार मैंने ये सब देखा था। मुझे डर भी लग रहा था और देखने की इच्छा भी हो रही थी। तभी बेल बजी और हम दोनों वापस क्लास में आ गये और मास्टर भी क्लास में आ गए थे। पर मेरा मन अब भी बाकी की तस्वीरों को देखने का हो रहा था।  

उस दिन जब मैं घर गया तो घर पर सिर्फ मम्मी ही थीं। पापा आफिस से 7:00 बजे तक वापस आते थे और दीदी 4:00 बजे कालेज से आती थी। खैर, मैं खाना खाकर अपने कमरे में आराम करने चला गया। मैं आपको ये बता दूं की मेरा और दीदी का कमरा एक ही है, बस बेड अलग-अलग हैं।  

 

मार्च का महीना था ज्यादा गमी नहीं थी तो मुझे जल्दी ही नींद आ गई। मुझे सपने में भी वोही नंगी लड़कियां उनकी चूचियां नजर आ रही थीं। तभी अचानक मेरी आूँख किसी वजह से खुल गई। सामने बेड पर दीदी की किताब पड़ी थीं, यानी वो कालेज से लौट आई थी। सपनों की वजह से मेरे पैजामे में टेंट बना हुआ था। वो तो मैं उल्टा सो रहा था, वरना दीदी को भी दिख जाता। मैं अपना लण्ड पैजामे में एडजस्ट कर ही रहा था की रश्मि दीदी रूम में आ गई, उनहोंने पिंक कुरता और ब्लैक चूड़ीदार पहना हुआ था। 

“और मर। जाग गए, कितना सोते हो?” दीदी ने अपना दुपट्टा स्टडी टेबल पर रखते हुए कहा।  

 

अभी भी मैं थोड़ा खुमारी में था। दुपट्टा हटने से रश्मि दीदी की चूचियां उभरकर आ गईं और मेरी नजर उनसे चिपक गई। पहले भी मैं दीदी को कई बार बिना दुपट्टे के देख चुका हूँ, पर पता नहीं क्यों उस दिन उनके दुपट्टा हटाते ही मुझे वो नंगी तस्वीरों की याद आ गई और मैं उन लड़कियों की चूचियों की तुलना दीदी की चूचियों से करने लगा।   

तभी दीदी अपने बेड पर बैठ गई और अपने जुड़े को खोल दिया और उनके सेक्सी बाल उनके कंधों पर लहरा गए और मेरे लण्ड ने एक झटका लिया ।   

“क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहा है?” दीदी ने मुझसे कहा।  

 

मुझे ऐसे लगा की मेरी चोरी पकड़ी गई है। घबराकर मैं बोला- “वो वो कुछ नहीं… आपके बाल…” मेरा गला सुख रहा था।   

तभी दीदी हूँसते हुए मेरे बगल में आकर बैठ गई। मुझे उनके बदन से डी यो की भीनी-भीनी खुिब आ रही थी और साथ ही डर भी लग रहा था की कहीं दीदी मेरे पैजामे की तरफ न देख ले। पर दीदी ने मेरे गाल पर एक प्यार भरी चपत लगाई और बाहर जाने लगी। उनके लम्बे बाल उनके कंधों पर बड़े ही सेक्सी तरीके से लहरा कर मुझे मुूँह चिढ़ा रहे थे।  

 

अगले दिन ऋषि मुझे क्लास में छेड़ते हुए बोला- “अबे, वो किताब कैसी लगी तुझे? मजा आया था?” हम क्लास में पिछले डेस्क में बैठे थे।  

ऋषि फिर बोला- “कितनी बार मुठ मारा तूने? बोल-बोल भाई से कैसी शर्म?”  

 

“मैंने ऐसा कुछ नहीं किया…” मैंने चिढ़ते हुए कहा। 

 

ऋषि – “अबे चूतिये, सिर्फ फोटो देखकर तेरा ये हाल है, तो अगर तुझे फिल्म दिखा दी तो क्या होगा? बोल देखेगा नंगी लड़कियों की फिल्म?” 

 

ये सुनकर मेरे लण्ड में हरकत होने लगी और न चाहते हुए भी मेरे मुूँह से निकल – कऽकऽकहां देखेंगे? 

 

ऋषि- “वो मुझ पर छोड़ दे, बस छुट्टी के बाद मेरे साथ चलना…” और छुट्टी के बाद वो मुझे स्कूल के पास वाले साइबर कैफे में ले गया।   

 

कैफे वाला ऋषि को पहचानता था उसने हमें कोने का एक केबिन दे दिया। कंप्यूटर ऋषि आपरेट कर रहा था। देखकर लग रहा था की वो काफी एक्सपर्ट है। तभी उसने एक साईट खोल करके एक लिंक पर क्लिक किया और कुछ सेकेंड बाद एक क्लिप चलने लगी, जिसमें एक आदमी एक लड़की के ऊपर चढ़ा था, लड़की झुकी हुई थी और वो आदमी जोर-जोर से झटके लगा रहा था। 

ये देखकर मेरा लण्ड एकदम तनकर खड़ा हो गया।   

 

ऋषि बोला- “इसको चुदाई कहते हैं, मेरे लाल। देख कैसे चोद रहा है लड़की की योनि को?”   

मै कुछ बोल नहीं रहा था बस कंप्यूटर स्क्रीन को घूरे जा रहा था। मेरा गला सुख रहा था और दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। डर भी लग रहा था की कहीं कोई पकड़ न ले। अचानक मेरी आँखें नीचे गईं तो मैंने देखा की ऋषि की पैंट का टेंट मेरे टेंट से काफी बड़ा था। मैंने फिर से कंप्यूटर की तरफ देखा अब एक दूसरी क्लिप चल रही थी, जिसमें दो काले आदमी एक गोरी लड़की को बड़ी बेरहमी से चोद रहे थे। ये देखकर मेरा लण्ड और अकड़ गया। क्लिप छोटी-छोटी ही थी पर उनसे मेरे अंदर बड़ी-बड़ी उमंगें जाग गई थीं। हम लोग एक घंटे के बाद अपने-अपने घर चला आया

आह्ह… फक मी आह्ह…” लड़की चिल्ला रही थी। ये वोही लड़की थी जिसे मैंने दोपहर को फिल्म में देखा था बस अंतर इतना था की काले आदमी की जगह अब उसे मैं चोद रहा था।  

“फक मी आह्ह… यस आह्ह…” मेरी आँखें बंद थी तभी मुझे कुछ गीला-गीला लगा मेरी आँखें खुल चुकी थी और मेरा सपना टूट गया था पर मेरे लण्ड ने सपना देखते-देखते ही पानी छोड़ दिया था। सामने घड़ी में रात के दो बज रहे थे। नाईट बल्ब की लाल रोशनी कमरे में फैली हुई थी और सामने के बेड पर रश्मि दीदी सो रही थी।दीदी सीधी लेटी हुई थी। उनकी चूचियां बिल्कुल सीधे तनी हुई थीं, और उनकी सांसों के साथ जुगलबंदी कर रही थीं।  

 

मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए और मेरी नजरें उन उभारों पर जम गई और मेरे पैजामे में फिर से वोही हलचल होने लगी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था की अपनी बहन को देखकर क्यों मुझे ऐसा हो रहा है।? मैं गिल्ट महसूस करने लगा और उठकर बाथरूम चला गया और लौटकर नाईट बल्ब बंद करके सो गया।   

अगली सुबह मेरी आँख 8:00 बजे खुली तो मैंने देखा की दीदी का बैग टेबल पर रखा है मतलब दीदी कालेज नहीं गई थी। मैं फ्री हुआ और नीचे ड्राइंग रूम में चला गया। रश्मि दीदी सोफे पर बैठकर टीवी पर कुछ देख रही थीं। मुझे फिर रात की बात याद आ गई और फिर से मुझे गिल्ट महसूस होने लगा।  

 

“अरे तू जाग गया। आ बैठ…” दीदी मुमकुराते हुए बोली। 

 

“आप कालेज नहीं गई दीदी?” मैंने पूछा। 

 

“लो कर लो बात। कहां दिमाग रहता है तेरा? अरे सनडे को कालेज कब से खुलने लगा भाई?”  

 

“अरे हा आज तो सनडे है। मम्मी और पापा कहां हैं?” मैंने पूछा और मन में सोचा की ऋषि के साथ रहते हुए मैं भी कैसा होता जा रहा हूँ। 

 

“वो तो बुआ के यहा गए हैं, शाम तक आएंगे…” दीदी टीवी देखते हुए बोली। मम्मी नाश्ता और खाना बनाकर गई है। चाहिए तो मांगना मैं दे दूँगी। मैंने भी अभी नाश्ता नहीं खाया है। 

 

मैंने कहा- “दे दो…”  

 

दीदी किचेन में चली गई और मैं रिमोट लेकर चैनेल बदलने लगा, पर रिमोट के सेल वीक हो गए थे और कई बार बटन दबाने के बाद बड़ी मुश्किल से एक चैनेल लगा जिसमें जानवरों के बारे में बता रहे थे तो मैं वही देखने लगा। थोड़ी देर में दीदी नाश्ता ले आई और हम दोनों नाश्ता करने लगे।  

“तू बड़ा होकर जरूर जानवरों का डाक्ट्टर बनेगा…” दीदी हूँसते हुए बोली।   

“क्यों दीदी?” मैं बोला। 

 

“सारा दिन टीवी पर जानवरों को जो देखता रहता है…” दीदी अपने रेशमी बालों को खोलकर अपने सीने पर डालते हुए बोली।  

 

मेरा तो बुरा हाल हो गया। एक तो दीदी इतनी खूबसूरत और उसपर जब वो अपने बाल खोल लेती हैं तो बॉलीवुड क्या हॉलीवुड भी फेल हो जाता है। 

 

“ला अपना बाया हाथ दे मैं तेरा फ्यूचर बताती हूँ…” कहते हुए दीदी ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया।  

 

क्या मुलायम हाथ था उनके हाथों में मेरा हाथ एकदम काला नजर आ रहा था।  

 

“हा तो त बड़ा होकर एक बहुत बड़ा… हा जोकर बनेगा…” दीदी मेरा मजाक बनाकर हस रही थी। पर मैं उनकी खूबसूरती को निहार रहा था। 

थोड़ा हंसी मजाक के बाद हम फिर से टीवी देखने लगे। फिर कुछ ऐसा हुआ की मेरी ही नहीं दीदी की भी हंसी रुक गई। दरअसल टीवी पर कुछ जेब्रा दिखाए जा रहे थे की अचानक एक मेल जेब्रा फीमेल जेब्रा को पीछे से सूंघने लगा और चाटने लगा। चैनेल के कैमरामैन का पूरा फोकस अब वहीं पर था। फिर कैमरे का फोकस जेब्रा की टांगों की तरफ हुआ और अब उसका लण्ड पूरा लाल होकर विशालकाय रूप ले चुका था। उसका लण्ड देखकर ही हम दोनों की हंसी रुक गई थी और आवाज बंद हो गई थी।  

 

मैंने दीदी की तरफ देखा वो बिना पलकें झपकाए एकटक टीवी देख रही थी। उनके सीने के उभार कुछ और बढ़ गए थे। उनकी सांस भी कुछ तेज चल रही थी। अचानक उनहोंने मुझे देखा और उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया और उन्होंने बिना कुछ बोले रिमोट उठाया और चैनेल चेंज करने की कोशिश करने लगी। पर बैटरी वीक होने की वजह से चैनेल नहीं बदला और वो जेब्रा फीमेल जेब्रा पर चढ़ गया।  

मेरा हाथ अभी भी दीदी के हाथ में था जो उनकी जांघ पर रखा था। उनकी कोमल त्वचा का एहसास मुझे उनके पैजामे के ऊपर से भी हो रहा था। तभी जेब्रा ने एक ही झटके में अपना विशाल लण्डफीमेल जेब्रा की योनि में घुसा दिया और दीदी ने उस पहले झटके के साथ ही मेरा हाथ कस के भींच लिया। मेरी हालत बहुत बुरी हो गई थी, ऐसा लग रहा था की मैं दीदी के साथ बैठकर ब्लू फिल्म  देख रहा हूँ। मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो गया था और उधर जेब्रा लगातार झटके मार रहा था।   

मुझ पर सेक्स का नशा चढ़ता जा रहा था और अब दीदी भी चैनेल बदलने की कोशिश नहीं कर रही थी। कुछ तो उन जानवरों का सेक्स देखकर और कुछ दीदी की नरम जांघ की गमी, मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपने हाथों को थोड़ा खोला और दीदी की राईट जांघ, जिस पर मेरा हाथ था, को कसकर दबा दिया। बस मेरे लिए इतना ही काफी था और मेरे लण्ड ने पानी छोड़ हदया। 

तभी फोन की रिंग बजी और दीदी जैसे नींद से जागी और फोन उठाने के लिए चली गई और मैं बाथरूम की तरफ। 

 

बस उस दिन और कुछ खास नहीं हुआ। बस हम दोनों के बीच ज्यादा बात नहीं हुई और धीरे – धीरे एक हफ्ता बीत गया। मैं ऋषि के साथ एक दो बार साइबर कैफे भी हो आया और ऋषि के साथ अब मैं खुलकर सेक्स के बारे में बात करने लगा। उसकी सेक्स की नालेज सिर्फ बुक और फिल्म तक ही नहीं थी बल्कि उसकी बातों से 

लगता था की उसने कई बार प्रैक्टिकल भी किया था पर किसके साथ? ये उसने मुझे नहीं बताया।  

 

कुछ दिनों बाद पापा दीदी के लिए घर में ही कंप्यूटर ले आये थे और मैं अक्सर उसपर गेम खेलता रहता था। 

मेरे पेपर हो गए थे और हम रिजल्ट का इंतेजार कर रहे थे। गमी की छुट्हटया शुरू हो गई थी। उस दिन भी मैं गेम खेल रहा था। फ्राइडे का दिन था।  

 

दीदी मेरे पास आकर बोली- चलो कंप्यूटर बंद करो और मेरे साथ बैंक चलो। 

 

क्यों दीदी क्या हुआ?  

 

अरे मुझे एक फॉर्म के साथ ड्राफ्ट भी लगाना है जल्दी से तैयार हो जा। 

 

जब मैं तैयार होकर नीचे पहुंचा तो दीदी ने भी ड्रेस चेंज करके एक ग्रीन कलर का कुरता और ब्लैक चूड़ीदार पहन लिया था और अपने रेशमी बालों की एक लम्बी पोनी बनाई हुई थी।   

“जल्दी कर मोनू बैंक बंद होने वाला होगा। आज मेरे को ड्राफ्ट बनवाना ही है। कल फॉर्म भरने की लास्ट डेट है…” बोलते-बोलते दीदी सैंडल पहनने के लिए झुकी तो उनके कुरते के अनदर कैद वो गोरे-गोरे उभार मुझे नजर आ गए। मेरा दिल फिर से डोल गया और हम बैंक की तरफ चल पड़े।

 

मैंने महसूस किया की लगभग हर उम्र का आदमी दीदी को हवस भरी नजरों से घूर रहा था। पर दीदी उनपर ध्यान न देते हुए चलती जा रही थी। मुझे अपने ऊपर बड़ा फख्र हुआ की मैं इतनी खूबसूरत लड़की के साथ चल रहा था, भले ही वो मेरी बहन है। हम 15 मिनट में बैंक पहुूँच गए, पर उस दिन बैंक में बहुत भीड़ थी। ड्राफ्वाली लाइन एकदम कोने में थी और उसके आस-पास कोई और लाइन नहीं थी। शुक्र था की वहां ज्यादा भीड़ नहीं थी।   

“मोनू तू यहाँ बैठ जा और ये पेपर पकड़ ले मैं लाइन में लगती हूँ…” दीदी बैग से कुछ पेपर निकलते हुए बोली।   

मैं वहीं साइड पर रखी बेंच पर बैठ गया और दीदी कोने में जाकर लाइन में लग गई। मैं बैठा देख रहा था की बैंक की ईमारत की हालत खस्ता थी। एक बड़ा हाल जिसमें हम लोग बैठे थे। और बाकी तीन तरफ कुछ कमरे बने थे। कुछ खुले थे कुछ में ताला लगा था। जिस जगह मैं बैठा था उसके पीछे के कमरे में तो सिर्फ टूटा फर्नीचर ही भरा था।   

खैर, ये तो उस समय के हर सरकारी बैंक का हाल था। जहाँ दीदी खड़ी थी उस जगह तो ट्यूबलाइट भी नहीं जल रही थी, अंधेरा सा था। दीदी मेरी तरफ देख रही थी और मुझसे नजर मिलने पर उनहोंने एक हल्की सी तिरछी स्माइल दी जैसे कह रही हो ये कहा फूँस गए हम।   

तभी दीदी के पीछे एक आदमी और लाइन में लग गया, जिसकी उम्र करीब 35 साल होगी। वो गुटका खा रहा था। उसने एकदम पुराने कसे हुए से कपड़े पहने थे। एकदम काले तवे जैसा उसका रंग था। गमी भी काफी हो रही थी।   

“कितनी भीड़ है बहेनचोद…” उसने गुटका थूकते हुए कहा।   

तभी उसका फोन बजा मैं तो अचंभे में पड़ गया की ऐसे आदमी के पास मोबाइल फोन कैसे आ गया? उस वक़्त मोबाइल रखना एक बहुत बड़ी बात थी वो भी हमारे छोटे से शहर में। फोन उठाते ही वो सामने वाले को गालियां देने लगा- “बहन के लौड़े तेरी माूँ चोद दूंगा वगैरह…” 

दीदी भी ये सब सुन रही थी पर क्या कर सकती थी? उस आदमी को भी कोई शरम नहीं थी की सामने लड़की है । वो और भी गालियां दिये जा रहा था। मुझे गुस्सा आ रहा था पर तभी उसने फोन काट दिया।   

5 मिनट के बाद मैंने देखा तो मुझे लगा की जैसे वो आदमी दीदी से चिपक के खड़ा है। उसका और दीदी का कद बराबर था और उसने अपनी पैंट का उभरा हुआ हिस्सा ठीक दीदी के चूतड़ों पर लगा रखा था। मेरी तो दिल की धड़कन ही रुकने लगी। वो आदमी दीदी की शक्ल को घूर रहा था और दीदी के कुरते से उनकी पीठ कुछ ज्यादा ही नजर आ रही थी। मुझे लगा वो अपनी सांसें दीदी की खुली पीठ पर छोड़ रहा था।  

दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैं दूसरी तरफ देखने लगा, जिससे दीदी को लगा मैंने कुछ नहीं देखा और दीदी थोड़ा आगे हुई तो मैंने देखा उस आदमी के पैंट में टेंट बना हुआ था। उसने अपने हाथ से अपना लण्ड एडजस्ट किया, इधर – उधर देखा और फिर से आगे बढ़कर दीदी से चिपक गया। अब उसकी पैंट का विशाल उभार दीदी के उभरे हुए चूतड़ों के बीच में कहीं खो गया। दीदी का चेहरा लाल हो गया था जिससे पता चल रहा था की दीदी के साथ जो वो आदमी कर रहा था, उसको वो अच्छे से महसूस कर रही थी। एक बार को मेरा मन हुआ की जाकर उस आदमी को चांटा मार दूं, पर पता नहीं क्यों मैं वही बैठा रहा और चुपचाप देखता रहा।  

दीदी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होते देखकर उस आदमी का हौसला बढ़ रहा था और वो दीदी से और ज्यादा चिपक गया और उनके बालों में अपनी नाक लगाकर सूंघने लगा। अब दीदी काफी परेशान सी दिख रही थी। 

दीदी की चोटी उस आदमी के बदन से रगड़ खा रही थी। मेरी बेहद खूबसूरत बहन के साथ उस गंदे आदमी को चिपके हुए देखकर मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। तभी उस आदमी ने अपना निचला हिस्सा हिलाना शुरू कर दिया और उसका लण्ड पैंट के अनदर से दीदी के उभरे हुए चूतड़ों पर रगड़ खाने लगा। ये हरकतें करते हुए वो आदमी दीदी के चेहरे के बदलते हुए हाव भाव देखने लगा। 

 

What did you think of this story

Comments