शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-20

(Desi Kahani) 3

redwalker69 2026-05-08 Comments

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अनुमौसी ने एक पतला बेलन हाथ में लिया.. और चेक कर वापिस रख दिया.. “ये वाला ठीक नहीं लगता.. मुझे तो मोटा बेलन ही पसंद है”

 

दुकान वाला शीला के उन्नत स्तनों के बीच की दरार को देखते हुए मुस्कुराकर बोला ” हाँ मौसी.. मेरी पत्नी को भी मोटा बेलन ही भाता है.. मेरे घर तो पतला बेलन भी है.. पर वो हमेशा मोटे वाले से ही रोटियाँ बेलती है.. ”

 

इन द्विअर्थी संवाद को सुनते ही शीला की चुत का वो हाल हुआ.. जो गरम तेल में पानी डालने पर होता है.. छम्म छम्म छम्म होने लगा.. अपने आप दोनों जांघें एक दूसरे सट गई.. अपनी चुत को खुजाते हुए शीला ने अनु मौसी से कहा “मुझे भी मोटा बेलन ही पसंद है मौसी.. आप ये मोटा वाला खरीद लीजिए.. ये बढ़िया है.. मोटा और चिकना.. ”

 

अनुमौसी ने बेलन लेकर थैली में रख दिया.. और अपने ब्लाउस में हाथ डालकर पर्स निकाला और ५० का नोट दुकानवाले को देते हुए बोली “आप बड़ा महंगा बेचते हो.. बेलन मोटा है तो इतना भाव थोड़ी होता है!!”

 

दुकानदार: “मौसी.. बेलन पतला हो या मोटा.. तैयार करने में मेहनत तो लगती है ना!! और मैं बिल्कुल वाजिब दाम में बेचता हूँ.. आप एक बार मेरा बेलन इस्तेमाल करके तो देखिए.. मुझे रोज याद करोगी.. जीतने भी ग्राहक बेलन लेकर जाते है वो फिर से मेरी दुकान जरूर आते है.. मेरा बेलन है ही कमाल का!!”

 

शीला: “भैया हमे तो जो भी बेलन मिल जाता है उसी से काम चला लेते है” शीला ने मोटे बेलन की नोक पर ऐसे उँगलियाँ फेरी जैसे लंड पकड़ कर मूठ मार रही हो.. दुकानवाले के पसीने छूट गए ये देखकर.. शीला के इस कातिल यॉर्कर से दुकानवाले के स्टम्प उखड़ गए.. अनुमौसी शीला की इस हरकत को देखकर शर्मा गई और हँसते हँसते शीला का हाथ पकड़कर खींचते हुए बोली “अब चल भी.. यहीं रोटियाँ बेलने बैठेगी क्या तू? बड़ी नालायक है तू शीला.. !!”

 

शीला हँसते हुए दुकान से बाहर निकली और दोनों चलते हुए बस तक पहुंचे.. सब अंदर बैठ गए पर ड्राइवर कहीं नजर नहीं आ रहा था.. सब औरतों को शीला बेलन दिखाते हुए उसपर ऐसे हाथ घुमा रही थी जैसे लंड को सहला रही हो.. शीला का पल्लू हटकर नीचे गिर गया और उसकी उत्तुंग पहाड़ियों को सारी महिलायें देखती ही रह गई.. सारी औरतें ही थी इसलिए शर्म की कोई बात नहीं थी.. शीला भी बेफिक्र होकर जीव के मूसल लंड को याद करते हुए बेलन से खेल रही थी..

 

एक बूढ़ी औरत ने शीला और अनुमौसी से पूछा ” अच्छा.. तो तुम दोनों ऐसा मोटा बेलन ढूँढने गई थी बाजार में.. ”

 

अनुमौसी: “क्या चम्पा बहन आप भी!! मोटे बेलन की जरूरत तो सब को पड़ती है.. आप तो ऐसे बोल रही है जैसे आपको मोटा पसंद ही नहीं है”

 

चम्पा मौसी: “मेरे घर तो कपड़े धोने की बढ़िया सी मोटी थप्पी है इसलिए मुझे तो बेलन की जरूरत ही नहीं पड़ती” शरारती मुस्कान के साथ उस बुढ़िया ने कहा

 

तभी एक जवान औरत ने कहा “हमारे घर तो हमारे पतिदेव ही काफी है.. इसलिए थप्पी या बेलन की जरूरत ही नहीं पड़ती” शीला ने तुरंत उस औरत का नाम पूछ लिया

 

उस औरत ने शीला के स्तनों को तांकते हुए बड़े कामुक स्वर में अपना नाम बताया “रेणुका.. ”

 

वापिस आते हुए रास्ते में शीला ने रेणुका के साथ दोस्ती कर ली और उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया.. रेणुका करीब ३२ की उम्र की गोरी चीट्टी दो बच्चों की माँ थी.. शीला ने बाकी औरतों पर नजर घुमाई.. पर एक भी उसे अपने लायक नहीं लगी..

 

शहर से बाहर बस पहुंची.. एक पीपल के पेड़ की छाँव के नीचे ड्राइवर ने बस रोक दी.. सारी महिलायें नीचे उतरी.. और चटाई बिछाकर खाना खाने बैठ गई.. सब ने मिलकर घर से लाए भोजन को बाँट के खाया.. और तृप्त होकर वहीं चटाई पर लेट गई.. औरतों को दोपहर की नींद, रात के सेक्स जितनी ही पसंद होती है.. कुछ औरतें तो दोपहर को इसलिए सो जाती है ताकि रात को देर तक जागकर चुदवा सकें..

 

एक घंटा सोने के बाद सब जाग गए.. पास ही की एक टपरी पर सबने मसालेदार चाय का लुत्फ उठाया.. तभी रोड के किनारे पर बहते झरने को देखकर.. कुछ जवान औरतों का मन कर गया की पानी में थोड़ी से छब छब की जाएँ.. शीला, रेणुका और उनके साथ कुछ औरतें झरने के किनारे पर जा पहुंची.. नहाने के लिए अलग से कपड़े तो थे नहीं.. और आजूबाजू कोई नजर नहीं आ रहा था.. इसलिए वो औरतें अपनी साड़ी उतारकर.. ब्लाउस और पेटीकोट में ही घुटनों तक गहरे पानी में कूदने के लिए तैयार होने लगी..

एक घंटा सोने के बाद सब जाग गए.. पास ही की एक टपरी पर सबने मसालेदार चाय का लुत्फ उठाया.. तभी रोड के किनारे पर बहते झरने को देखकर.. कुछ जवान औरतों का मन कर गया की पानी में थोड़ी से छब छब की जाएँ.. शीला, रेणुका और उनके साथ कुछ औरतें झरने के किनारे पर जा पहुंची.. नहाने के लिए अलग से कपड़े तो थे नहीं.. और आजूबाजू कोई नजर नहीं आ रहा था.. इसलिए वो औरतें अपनी साड़ी उतारकर.. ब्लाउस और पेटीकोट में ही घुटनों तक गहरे पानी में कूदने के लिए तैयार होने लगी..

 

रेणुका ने साड़ी का पल्लू हटाकर सबसे पहले अपनी अद्भुत जवानी की झलक दिखाई.. मध्यम उम्र का जिस्म.. गदराए गोरे स्तन और ब्रा की पट्टी ब्लाउस से नजर आ रहे थे.. उन स्तनों को देखते ही शीला आकर्षित हो गई.. रेणुका की सख्त निप्पल थोड़ी सी लंबी थी.. उसकी गहरी नाभि देखकर शीला की चुत में झटके लगने शुरू हो गए.. हल्की चर्बी वाला गोरा गोरा पेट और कमर.. चेतना से करीब ५ साल छोटी थी रेणुका.. पर बेहद आकर्षक थी.. रेणुका के जिस्म के पूरे भूगोल का मुआयना करने के बाद शीला ने कहा

 

“दो बच्चों के बावजूद आपने बॉडी को अच्छा मैन्टैन किया हुआ है.. ” रेणुका हंसने लगी पर कुछ बोली नहीं

 

चम्पा मौसी: “उसने मैन्टैन नहीं किया.. पर उसके पति ने करवाया है.. बहोत खयाल रखता हो वो रेणुका का.. क्यों ठीक कहा ना मैंने??”

 

रेणुका ने चम्पा मौसी के कूल्हों पर हल्की सी चपेट लगाते हुए कहा “अब चुप भी करो मौसी.. नहीं तो मैं आपका भी वस्त्राहरण कर दूँगी.. ” कहकर वो दुशासन की तरह चम्पा मौसी की साड़ी खींचने लगी..

 

सारी औरतें मस्ती करते हुए पानी में उतरने लगी.. पानी को देखते ही हर कोई बच्चा बन जाता है.. रेणुका का घाघरा गीला होकर उसकी गांड की दरार में घुस गया था.. गहरे पानी में कमर तक उतर चुकी शीला ने रेणुका के चूतड़ों का आकार देखकर.. पानी के अंदर ही अपने भोसड़े के बेर को घिसकर ठंडा करने की कोशिश की.. सिसकियाँ भरते हुए वो रसिक, जीवा और रघु के लंड को याद करने लगी ताकि उसके भोसड़े का जल्दी छुटकारा हो.. आखिर उसकी चुत ने झरने के पानी को पवित्र कर ही दिया..

 

नहाते हुए पानी उछालते रेणुका शीला के करीब आई.. शीला के भीगे हुए पतले कॉटन ब्लाउस में दोनों स्तन एकदम तंग थे.. वो भी बिना ब्रा के.. रेणुका बस देखती ही रह गई.. शीला ने रेणुका के मुँह पर पानी उछालकर उसकी समाधि भंग की “क्या देख रही है यार!!”

 

रेणुका शर्मा गई.. फिर हिम्मत करते हुए वो शीला के करीब आई और धीमे से उसके कान में फुसफुसाई.. “बड़ी कातिल लग रही हो तुम शीला”

 

शीला के लिए अपनी तारीफ सुनना कोई नई बात नहीं थी.. पर फिर भी उसे सुनकर अच्छा लगा.. उसने रेणुका के चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए कहा

 

“तू भी कुछ कम नहीं है रेणुका.. ” दोनों कमर तक पानी के अंदर थी.. इसलिए उनकी हरकत सबकी आँखों से छुपी हुई थी.. सब अपनी मस्ती में मस्त थी.. शीला अभी भी रेणुका के कूल्हों से खेल रही थी.. और रेणुका भी मजे लेकर शीला के साथ अपनी दोस्ती को गाढ़ा करने में जुट गई।

 

दिन के उजाले में.. भरी दोपहर में.. शीला रेणुका के चूतड़ों के दरार में उंगली फेरते हुए अपने पासे फेंक रही थी

 

शीला: “ये बता रेणुका.. मेरे घर कब आओगी?”

 

रेणुका: “जब तुम बुलाओ.. मेरे वो ऑफिस के लिए निकले उसके बाद मैं फ्री होती हूँ.. तुम आ जाओ मेरे घर पर”

 

शीला: “जरूर आऊँगी.. पर पहले तुम मेरे घर आओ.. ”

 

रेणुका: “अब बस भी करो शीला.. तुम्हारा हाथ जरूरत से कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गया है”

 

शीला की उँगलियाँ दरार से आगे निकल कर रेणुका की गांड के छेद तक पहुँच गई थी।

 

शीला: “क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लगा?”

 

रेणुका: “अच्छा क्यों नहीं लगेगा भला.. !! पर आजू बाजू देखो तो सही.. सब यहाँ मौजूद है.. हम अकेले थोड़ी है”

 

शीला: “हाँ वो तो मैं भूल ही गई.. एक बात कहूँ.. तुम बहोत सुंदर हो रेणुका”

 

रेणुका: “जिसे कदर होनी चाहिए वो ही तारीफ ना करे तो ये सुंदरता किस काम की!!”

 

शीला: “ऐसा क्यों बोल रही है? तेरे पति तुझे प्यार नहीं करते क्या?”

 

रेणुका: “उन्हे टाइम ही कहाँ मिलता है.।!! बिजनेस से फुरसत मिले तो मुझे प्यार करे ना!! रात को देर से आकर टीवी देखते देखते सो जाते है.. कभी उनका मूड हो तब मैं थकी हुई रहती हूँ, इसलिए कुछ नहीं हो पाता.. अपने ही घर में हमारी जरूरतों को ही नजर अंदाज किया जा रहा है”

 

पीछे खड़ी अनुमौसी इन दोनों के संवाद को बड़े चाव से सुन रही थी.. उनसे रहा नहीं गया और बोल पड़ी

 

अनुमौसी: “शुरू शुरू में ये मर्द हमे सब कुछ सीखा सीखा कर बिगाड़ते है.. और फिर वही सब हम करना चाहे तो कहते है “कैसी गंदी गंदी चीजें करने को कह रही हो” अब बोलो.. क्या करें इनका.. ”

 

रेणुका: “बिल्कुल सच कह रही हो मौसी.. मुझसे तो कहा भी नहीं जाता और सहा भी नहीं जाता.. बुरी फंसी हूँ मैं.. ”

 

शीला: “मौसी मेरे पास इन सारी समस्याओं का हल है.. पर आप मेरे बारे में गलत सोचेगी ये सोचकर कुछ बोलती नहीं मैं”

 

अनुमौसी: “अरे शीला.. मैं क्यों तेरे बारे में गलत सोचूँगी.. !! तू भी मदन के बिना २ सालों से तड़प रही है.. मैं समझ सकती हूँ”

 

रेणुका: “क्या बात कर रही हो!! २ साल से अकेली है तू शीला?? बाप रे!! मुझे तो एक हफ्ता बीत जाएँ तो ऐसा लगता है जैसे सालों हो गयें..तुम तुम्हारी रातें अकेले कैसे बिताती हो??”

 

शीला: “ये सब बातें करके मेरा दिमाग खराब मत करो तुम सब.. चलो.. बहोत देर हो गई है.. कब तक नहाते रहेंगे!!”

 

रेणुका: “घर जाकर भी क्या करना है!! वहीं सब झाड़ू-पोंछा, सफाई, खाना पकाना.. और पति का इंतज़ार करना.. इससे अच्छा यहीं पानी में पड़े रहते है.. कम से कम नीचे ठंडक तो मिल रही है.. घर में तो दिमाग खराब हो जाता है मेरा!!”

 

रेणुका की आवाज का दर्द शीला महसूस कर सकती थी.. कमर तक डूबी हुई रेणुका का हाथ पकड़ लिया उसने.. पानी के अंदर किसी को ये नजर नहीं आ रहा था.. रेणुका का हाथ खींचकर शीला ने घाघरे के नीचे अपनी भोस पर रख दिया.. चुत का स्पर्श होते ही रेणुका स्तब्ध रह गई

 

रेणुका: “ये क्या कर रही हो शीला?? कुछ तो शर्म करो.. !!”

 

शीला: “मैं तुम्हें ये बताना चाहती हूँ की पानी में रहने से ये ठंडी नहीं होती.. देखो.. कैसे तप रही है!!”

 

अनुमौसी: “अरे नासपीटी शीला.. शर्म बेच खाई है क्या तूने!! कब सुधरेगी तू!!??”

 

शीला: “इसमें मैंने क्या गलत क्या मौसी? ये रेणुका बोल रही थी की पानी में रहने से नीचे ठंडक मिलती है.. कुछ ठंडक नहीं मिलती.. ठंडक के लिए कुछ जुगाड़ लगाना पड़ता है.. सिर्फ उँगलियाँ अंदर डालने से बच्चे पैदा नहीं होते.. जहां जिस चीज की जरूरत हो वहाँ वो ही चीज काम करती है.. समझे!!” तीनों एक दूसरे के करीब खड़े गुसपुस कर रही थी.. और साथ ही अपने जीवन के सबसे जटिल प्रश्न का हल ढूँढने का प्रयत्न कर रही थी

 

ड्राइवर के बार बार हॉर्न बजाने पर सारी औरतें बाहर निकली.. पेड़ के तने के पीछे जाकर कपड़े निचोड़कर सुखाए.. और फिर मज़ाक मस्ती करते हुए बस में बैठ गए.. अनुमौसी, रेणुका और शीला एक साथ बैठे थे। अनुमौसी कुछ कहना चाहती थी पर हिचक रही थी.. ऐसा लगा शीला को.. पर वो कुछ बोली नहीं.. रेणुका शीला के साथ अपनी दोस्ती को ओर घनिष्ठ करने लगी.. शीला भी रेणुका से करीब होती चली..

 

जब बस अनुमौसी के घर के बाहर आकर रुकी तब तक रेणुका और शीला अच्छी सहेलियाँ बन चुकी थी.. घर जाने से पहले रेणुका शीला के गले लगी और बोली “कल फोन करना मुझे.. भूल मत जाना.. ” रेणुका के जिस्म की भूख शीला अच्छी तरह से महसूस कर पा रही थी

 

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