शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-59
(Desi Kahani) 14
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थककर हाफ़िज़ ने अपना लंड बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गया.. हाफ़िज़ की विशाल छाती पर शीला भी लाश की तरह ढेर हो गई.. उसके मदमस्त बॉल हाफ़िज़ की छाती से दबकर चपटे हो गए थे.. उसकी दाढ़ी पर अपने कोमल गालों को रगड़ते हुए शीला उसे चूमने लगी.. नशा उसका सर पर इस कदर सवार था की उसे यह भी एहसास नही हो रहा था की वो किसी मामूली से ड्राइवर से चुदकर लेटी हुई थी.. हाफ़िज़ के खुरदरे हाथ शीला की चिकनी गोरी पीठ को सहला रहे थे.. पीठ से होते हुए उसके हाथ शीला के कूल्हों तक जा पहुंचे.. और अपनी उंगली से वो शीला की गांड के छेद को कुरेदने लगा.. गांड पर स्पर्श होते ही शीला को संजय की याद आ गई.. कहाँ गया होगा वो चूतिया? मुझे यूं अकेले छोड़कर न गया होता तो मुझे इस कमबख्त हाफ़िज़ से चुदना न पड़ता.. खैर जो भी हुआ अच्छा ही हुआ.. मज़ा तो बहोत आया.. और संजय को कहाँ पता चलने वाला था की मैंने हाफ़िज़ से चुदवाया है!! लेकिन संजय के आने से पहले मुझे इस भड़वे को रवाना करना होगा.. वैसे भी ये मादरचोद गांड का मुआयना कर रहा है.. उसकी नियत बिगड़े उससे पहले ही इससे छुटकारा पाना होगा.. ये मेरी गांड में डालेगा तो यही गोवा में मेरी लाश गिर जाएगी..
शीला ने तुरंत हाफ़िज़ के गाल को थपथपाकर उसे जगाया “हाफ़िज़.. तू अब निकल.. तेरे साहब आ जाएंगे तो मुसीबत हो जाएगी.. और हाँ.. गलती से भी उन्हे मत बताना.. हमारे बीच जो कुछ भी हुआ उसके बारे में.. ”
हाफ़िज़ ने शीला को अपनी बाहों की गिरफ्त से मुक्त किया.. “नही पता चलेगा.. फिकर मत कीजिए.. आप के साथ जो मज़ा आया न मैडम.. वो आज से पहले कभी नही आया.. यहाँ तक की मेरी बीवी के साथ भी इतना मज़ा नही लूटा था मैंने.. वो तो आप से उम्र में भी आधी है.. और उसकी चूत भी आपसे काफी टाइट है.. लेकिन पता नही क्यों आपकी चूत ने जिस तरह मेरा लंड को जकड़ा था.. वो उसकी चूत नही कर पाती.. और आपका सीना भी कितना गजब है.. ये बड़े बड़े है आपके.. मैं तो आज का दिन जिंदगी भर नही भूलूँगा.. दोबारा कभी मौका मिला तो करने दोगी ना.. !!”
“हाँ हाँ.. करने दूँगी.. मगर अब तू यहाँ से निकल मेरे बाप.. ” हाफ़िज़ के मुरझाए लंड को प्यार से थपकी लगाते हुए शीला ने कहा
“अरे मैडम.. क्यों फिर से जगाती हो उसे? फिर से करना पड़ेगा !!” हाफ़िज़ ने शीला को अपनी बाहों में दबा लिया.. “ओह्ह आपके ये रसीले होंठ.. ये सेक्सी बदन.. भेनचोद जी करता है की एक बार फिर से पटक कर चोद दूँ”
शीला घबरा गई.. मैंने क्यों इस हरामी के लंड को छेड दिया.. !!! कहीं संजय आ टपका तो गजब हो जाएगा.. कैसे भगाऊ ईसे.. एक बार चोद लिया फिर भी मन नही भरा इस चूतिये का..
शीला: “देख हाफ़िज़.. मुझे भी तेरा तगड़ा लंड बहोत पसंद आया.. मेरे दामाद के लंड से भी बेहतर है तेरा.. मैं भी इससे बार बार चुदवाना चाहती हूँ.. एक बार से तो मेरा मन भी नही भरता.. मगर इस वक्त तू यहाँ से निकल जा.. घर जाने के बाद मैं तुझे बुलाऊँगी.. और तुझे अपनी मनमानी करने दूँगी.. ठीक है.. !!!” कहते हुए शीला ने उसे प्यार से चूमा और रवाना कर दिया
शीला का दिमाग अब कुछ शांत हुआ और विचार चलने लगे.. मैंने एक ड्राइवर के साथ!! शीला तो इतनी गिरी हुई कब से हो गई? कितनी संस्कारी थी तू और अब देखो? तभी उसकी नजर अपने टॉप पर पड़ी.. जो हाफिज ने खींचकर फाड़ दिया था.. बाप रे!! अब क्या करूँ?? साड़ी के अलावा और कोई कपड़े तो है नही.. संजय ये देखकर पूछेगा तो क्या जवाब दूँगी.. ??
तभी डोरबेल बजने की आवाज आई.. शीला ने जल्दी जल्दी बेग से काली नेट वाली ब्रा निकालकर पहन ली.. और नीचे संजय ने दिलाई शॉर्ट्स चढ़ा दी.. फिर दरवाजा खोला.. वो संजय ही था.. उसके हाथ में किंग एडवर्ड सिगार का पैकेट था.. देखते ही शीला खुश हो गई.. जॉन और चार्ली की याद आ गई उसे.. खासकर जॉन का गोरा लंड और गुलाबी सुपाड़ा.. !!
नशे में लहराती आवाज में शीला ने कहा “ये बड़ा अच्छा काम किया तूने बेटा.. ये सिगार मुझे बहोत पसंद आ गई है.. अब खाने का कुछ करें!!! जोरों की भूख लगी है मुझे.. ”
“हाँ मम्मी जी.. चलिए बाहर जाकर कुछ खाते है.. यहाँ आने के बाद हम बाहर घूमे ही नही है !! कितने घंटों से हम बस कमरे में ही बंद बैठे है ”
“कोई बात नही.. वैसे गोवा हो या गुवाहाटी.. बाजार सब जगह एक जैसा ही होता है.. हमे उन अंग्रेजों से मजे करने का मौका मिल गया वो क्या कम था!!”
“हाँ वो तो है मम्मी जी.. चार्ली की चूत का स्वाद अब भी मेरी जुबान पर है.. क्या चीज थी वो.. !! मम्मी जी उसकी गांड का छेद गुलाब जैसे कोमल और लाल था.. देखकर मन हो रहा था की बस उसे चाटता ही रहूँ.. ” शॉर्ट्स के ऊपर से अपने लंड को दबाते हुए संजय ने कहा
शीला समझ गई की उसके दामाद का लंड भी भूखा था.. अगर उसे खिलाने गई तो वह भूखी रह जाएगी..
शीला: “संजय बेटा.. पहले बाहर जाकर खाना खा लेते है.. थोड़ी देर और रुके तो तेरे इसको शांत करने में और एक घंटा निकल जाएगा” हँसकर संजय के लंड की ओर इशारा करते हुए उसने कहा
दोनों आजाद पंछी की तरह हाथ में हाथ डालकर गोवा की गलियों में घूमने लगे.. देखकर किसी को भी अंदाजा न हो की दोनों सास-दामाद थे.. नव-विवाहित कपल की तरह दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए चल रहे थे.. चलते चलते एक रेस्टोरेंट पसंद आई.. दोनों अंदर गए और खाना खाते वक्त एक दूसरे को छेड़ते रहे.. शीला अपनी काली ब्रा पहन कर ही बाहर आई थी.. रेस्टोरेंट में बैठे सारे लोग उसे घूर रहे थे.. सब के आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी शीला.. और स्वाभाविक भी था.. इतने बड़े बड़े गदराए स्तनों की मालकिन.. सिर्फ नेट वाली ब्रा पहन कर बाहर निकले तो लोगों की नजर पड़ना जायज थी.. शीला की निप्पल की आकृति भी ब्रा से साफ नजर आ रही थी..
दोनों खाना खाने में मगन थे तभी केमेरे की फ्लेश ने उन्हे चोंका दिया.. एक शख्स उनके बगल वाले टेबल पर बैठकर शीला की तस्वीरे ले रहा था
“अबे ओय.. क्या कर रहा है तू??” संजय उठ खड़ा हुआ..
उस आदमी ने अपनी जेब से आई-कार्ड निकालकर दिखाते हुए कहा “मैं जर्नलिस्ट हूँ सर.. गोवा को कवर करने आया हूँ.. आप फिकर मत कीजिए.. मैं तो फ्रंट पेज पर डालने के लिए किसी आकर्षक सुंदरी की तलाश में था.. आप लोग मुझे परफेक्ट कपल लगे इसलिए तस्वीर ले रहा हूँ.. फ्रंट पेज पर छपेगी.. आप फेमस हो जाओगे”
“अरे हमें नही आना तेरे फ्रंट पेज पर.. समझा.. !! चल डिलीट कर अभी के अभी.. ” संजय ने उसे धमकाते हुए कहा.. मन ही मन वो और शीला दोनों डर गए थे.. शीला ने उसके हाथ से केमेरा छिन लिया.. उसे आता नही था फिर भी जो मन में आए वो स्विच दबाने लगी.. संजय से ज्यादा चिंता शीला को थी.. संजय को क्यों ज्यादा फिक्र होती.. नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या..!!! लेकिन शीला के लिए ये बड़ा खतरा था.. जब चारित्र की बात आती है तब लोग मर्द से ज्यादा औरत पर ही उंगली उठाते है.. इसी कारण से तो औरतें मर्दों जितनी बिंदास होकर मजे नही करती.. !!
संजय ने उस फोटोग्राफर का गिरहबान पकड़ लिया.. और उसे एक घुसा मारते हुए कहा “बिना इजाजत हमारी तस्वीर लेने की तेरी हिम्मत कैसे हुई बे, मादरचोद?? ” संजय इतनी जोर से गाली बोला की मेनेजर दौड़ते हुए उनके पास आ गया..
मेनेजर: “ओ मिस्टर.. अपनी जबान पर लगाम दीजिए.. आप लोगों का जो भी झगड़ा है वो बाहर जाकर निपटाइए.. चलिए.. गेट आउट.. !! वरना मैं अभी पुलिस को फोन करके बुलाता हूँ.. !!”
बात को बिगड़ते देख शीला ने मेनेजर से सॉरी कहा.. अपनी पलकें झपकाकर इतने प्यार से उसने माफी मांगी की मेनेजर भी पिघल गया.. यही तो होता है चूत और स्तनों का प्रभाव.. !! शीला की ब्लेक नेट वाली ब्रा.. उभरते हुए स्तन.. नजर आ रही गुलाबी निप्पल.. गोरा पेट.. सुंदर चेहरा और ऊपर से वोड्का का नशा.. देखने वालों की नजर को एक पल में कैद कर देती थी शीला..
शीला: “देखिए मेनेजर साहब.. आदमी गुस्सा तभी करता है जब उसके साथ कुछ गलत होता है.. आप मेरे पार्टनर को क्यों धमका रहे हो? आप को उस आदमी को धमकाना चाहिए जो बिना इजाजत आपके कस्टमरों की तस्वीरें खींच रहा है.. ” शीला के प्रभावशाली आवाज और अद्भुत सुंदरता से खींचकर वहाँ बैठे और मर्द भी इकट्ठा हो गए.. इस अबला नारी के बचाव के लिए.. कुछ तो बस शीला के स्तनों को नजदीक से देखने के लिए ही आए थे..
सब ने साथ में कहा “ऐसे कैसे बिना पर्मिशन के कोई तस्वीर ले सकता है?? और वो भी लेडिज की.. ये तो गलत है.. कम से कम पूछ तो लेना चाहिए था..” संजय कुछ बोलने गया पर शीला ने उसे इशारे से चुप रहने को कहा.. साले संजय तू चुप मर अभी.. एक गाली बक दी तो बीस लोग इकट्ठा हो गए.. और कुछ बोला और पुलिस आ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे.. !! संजय ने सिगरेट जलाई और कोने में खड़े होकर फूंकने लगा.. और बीस लोगों के बीच खड़ी शीला.. ब्रा और छोटी सी शॉर्ट्स पहने अपने जिस्म की नुमाइश करते हुए इस समस्या का समाधान लाने की कोशिश कर रही थी.. किसी भी हाल में वो ऐसा कोई सबूत छोड़ना नही चाहती थी.. आसपास खड़े लोगों के सहयोग से शीला ने केमेरे की सारी तस्वीरें डिलीट करवा दी.. तब जाके उसे तसल्ली हुई..
सारा मामला निपटाकर उसने आवाज देकर संजय को बुलाया.. फटाफट बिल देकर वो दोनों बाहर निकल गए.. और तेजी से चलते हुए अपने रूम पर पहुँच गए.. शीला काफी डर गई थी “संजय.. यहाँ रुकने में भी मुझे तो डर लग रहा है.. हमे अब गोवा छोड़ देना चाहिए.. इससे पहले की कोई ओर मुसीबत आ जाए.. तू चेकआउट करने की तैयारी कर.. ”
“ठीक है मम्मी जी.. जैसा आप कहें.. हम चले जाएंगे.. लेकिन जाने से पहले एक जबरदस्त चुदाई तो बनती है ” अपनी शॉर्ट्स की साइड से लंड बाहर निकालकर दिखाते हुए संजय ने कहा.. “ईसे आपके स्तनों के बीच रगड़ने की ख्वाहिश भी तो पूरी करनी है.. देखिए ये बेचारा कितना उदास है !!”
अपने दामाद का नरम लंड पकड़ते हुए शीला ने कहा “बेटा.. बिना चुदे तो मैं भी जाना नही चाहती.. दिल भरकर तेरे धक्के खाने है.. मेरी चूत को तेरे लंड से पावन करने के बाद ही हम गोवा छोड़ेंगे.. !! अब देर मत कर.. और अपनी मम्मी जी की चूत चाटने की सेवा शुरू कर दे.. ”
“आह्ह मम्मी जी.. आपकी तो बातें सुनकर ही मेरा लंड कहीं पिचकारी न छोड़ दे.. ” कहते हुए संजय ने शीला को अपनी बाहों में भर लियाया.. छोटे बच्चे की तरह वो शीला के स्तन से चिपक गया.. और नेट वाली ब्रा से एक स्तन को बाहर निकालकर चूसने लगा..
“आह्ह बेटा.. मज़ा आ रहा है.. तेरी जीभ की गर्मी मेरी निप्पल से होते हुए पूरे शरीर में फैल रही है.. देख.. तेरा लंड भी सख्त होकर तैयार हो गया.. इतने सुंदर लंड से चुदने के लिए वैशाली क्यों राजी नही होती ये मुझे समझ में नही आता.. इसे खड़ा हुआ देखकर भी वो कोई रिस्पॉन्स नही देती?”
“रिस्पॉन्स देती है ना.. क्यों नही देती.. मेरे लंड को देखकर ही वो करवट बदल कर सो जाती है”
“पागल है मेरी बेटी.. ” कहते हुए शीला घुटनों पर बैठ गई और संजय के गन्ने जैसे सख्त लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.. शॉर्ट्स की साइड से लंड को चूसने में मज़ा नही आ रहा था.. इसलिए उसने खींचकर संजय की शॉर्ट्स जिस्म से अलग कर दी.. और अपनी ब्रा और चड्डी उतारकर फिर से एक बार स्खलित होने के लिए तैयार हो गई.. उसके चेहरे पर उत्तेजना साफ साफ छलक रही थी..
दोनों नंगे होकर एक दूसरे को चूमने और चाटने में व्यस्त हो गए.. संजय ने शीला की चूत पर अपना हाथ जमा दिया और शीला ने संजय के लंड को गिरफ्त में ले लिया..
“मम्मी जी.. अब मुझे अपने दोनों स्तनों के बीच में लंड घुसेड़ने दो.. ”
“हाँ हाँ.. घुसा दे.. मैंने कब मना किया तुझे!! आज ये आखिरी चुदाई होगी हमारी.. जो मन करे तेरा.. वो कर ले.. मैं कुछ नही बोलूँगी”
“मम्मी जी.. आपके मन में भी ऐसी कोई विकृत इच्छा हो तो बता दीजिए… गोवा की ट्रिप यादगार बनानी है हमें.. !!”
वैशाली और राजेश सर माउंट आबू में.. रेणुका की बर्थडे पार्टी में बियर की चुसकियाँ लेते हुए सिगरेट पर सिगरेट फूँक रहे थे.. राजेश के स्वभाव और पर्सनैलिटी से वैशाली बेहद आकर्षित हो गई थी.. उसने शारीरिक संबंधों के लिए पहले ही मना कर दिया था पर फिर भी राजेश ने बुरा नही माना था.. वैशाली को ये बात बहोत अच्छी लगी राजेश की..
लगभग ग्यारह बज रहे थे.. हर कोई नशे में चूर होकर ट्रिप के मजे ले रहा था.. वैशाली की आँखें भी बियर के नशे में सुरूर से भर रही थी.. इतनी बियर पीने के बाद उसे बड़ी जोर से पेशाब लगी थी.. आखिर जब बात बर्दाश्त से पार हो गई तब वह उठी और राजेश से कहा “एक्स्क्यूज़ मी.. मुझे जाना होगा.. फ्रेश होकर आती हूँ.. आप मेरा वैट करना.. ”
“जाना तो मुझे भी है.. चलो मैं भी साथ चलता हूँ.. कहीं तुम्हारे कदम लड़खड़ा गए तो कोई तो चाहिए सहारा देने वाला.. ” राजेश ने कहा.. वैशाली शरमा गई.. और नीचे देखने लगी..
“अरे घबराइए नही.. मैं तो जेन्ट्स टॉइलेट में ही जाऊंगा.. तुम्हारे साथ थोड़े ही आने वाला हूँ” हँसते हँसते राजेश ने कहा
“वो तो मुझे भी पता है सर की आप मेरे साथ टॉइलेट में नही आओगे.. चलिए चलते है” वैशाली आगे चाय और राजेश उसके पीछे पीछे.. वैशाली की मटकती गांड को देखकर राजेश की नियत में खोट आने लगी थी.. राजेश की नशीली आँखों में वैशाली की गांड का नशा अलग से जुड़ गया..
पेसेज के आखिर में लेडिज और जेन्ट्स के टॉइलेट अगल बगल में ही थे.. चलते चलते वैशाली के कदम डगमगा गए.. और उसे संभालने के चक्कर में राजेश भी लड़खड़ा गया.. एक दूसरे को संभालते हुए दोनों दीवार का सहारा लेकर खड़े हो गए.. वैशाली के स्तन एक पल के लिए राजेश के हाथों से दब गए.. दोनों एक दूसरे को सॉरी कहने लगे.. और हंस पड़े..
टॉइलेट के पेसेज में दोनों अकेले थे.. हल्की सी रोशनी थी..
“वैशाली, यू आर सो हॉट.. प्लीज एलाऊ मी टू टच योर बूब्स.. सिर्फ एक बार.. मेरी रीक्वेस्ट है.. प्लीज”
“नही सर.. आई कांट डू धिस.. सॉरी.. ” वैशाली ने नशे की हालत में भी अपना संयम नही छोड़ा था.. वह दरवाजा खोलकर लेडिज टॉइलेट में घुस गई.. राजेश भी जेन्ट्स टॉइलेट में चला गया.. वह पेशाब करके बाहर निकला और लेडिज टॉइलेट के दरवाजे के बाहर वैशाली का इंतज़ार करने लगा.. तभी लेडिज टॉइलेट का दरवाजा खुला.. एक हाथ बाहर आया और उसने राजेश को अंदर खींच लिया.. एक सेकंड में ही ये सब हो गया..
राजेश कुछ समझ या सोच सके उससे पहले ही वैशाली ने उसे चूम लिया.. उसके मदमस्त उरोज राजेश की छाती से रगड़ रहे थे.. वैशाली इतनी उत्तेजित हो गई थी की राजेश कुछ करे उससे पहले ही उसने हाथ नीचे डालकर उसका लंड पकड़ लिया और धीमे से कान में बोली
“कुछ मत बोलीये.. किसी को पता नही चलना चाहिए की इस क्यूबिकल में हम दोनों है.. एकदम शांत रहिए” वैशाली ने अपना टीशर्ट ऊपर कर दिया और अपने दोनों खिलौने राजेश को खेलने के लिए दे दिए.. मर्द का हाथ उसके स्तनों को स्पर्शते ही वैशाली के चेहरे पर खुमार छाने लगा.. बियर का नशा अपना काम कर रहा था और राजेश का हाथ भी..
राजेश का हाथ वैशाली की गीली पुच्ची तक कब पहुँच गया इसका दोनों को पता ही नही चला.. टॉइलेट की संकरी जगह में वैशाली और राजेश सर दोनों को तकलीफ हो रही थी.. पर दोनों इतने उत्तेजित थे.. जैसे एक दूसरे के जिस्मों को नोच खाना चाहते हो.. राजेश को कब से ललचा रहे वैशाली के बड़े बड़े तंदुरुस्त उरोज.. राजेश ने दोनों हाथों से पकड़कर अनगिनत बार चूम, चाट और काट लिए.. वैशाली को दर्द हो रहा था फिर भी वह चुप थी क्यों की जरा सी भी आवाज उनका भांडा फोड़ सकती थी.. दोनों फटाफट अपनी वासना को तृप्त करने की फिराक में एक छोटा पर रसीला प्रोग्राम कर देना चाहते थे.. जल्द से जल्द हॉल में पहुँचना भी जरूरी थी.. वरना लोगों को शक होने की गुंजाइश थी..
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