शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-58

(Desi Kahani) 5

redwalker69 2026-05-25 Comments

This story is part of a series:

शीला की बात सुनकर संजय चोंक पड़ा..

 

“कौन चेतना, मम्मी जी?”

 

“भोसड़ी के.. ज्यादा शाणा मत बन.. वही चेतना.. जिसने तुझे उस दिन शाम को पाँच बजे अपने घर बुलाने का मेसेज भेजा था.. मेरे साथ चालाकी मत कर संजय, और सब सच बता दे.. वैसे चेतना ने तो मुझे सब बता ही दिया है.. ” संजय के पास अपना बचाव करने के लिए कुछ भी नही बचा था.. मन ही मन वो चेतना को गालियां दे रहा था.. हरामखोर ने शीला को सब बता दिया!!! इन औरतों के पेट में एक बात नही टिकती.. कितना भी समझाओ, वक्त आने पर तोते की तरह बोलने लगती है..

 

अब शीला के शरण में आए बगैर संजय के पास ओर कोई चारा नही था.. सरेंडर होकर उसने सारी बातें कुबूल कर ली.. उसकी सारे बातें सुनते हुए शीला संजय का लंड सहला रही थी

 

शीला: “संजु बेटा.. तू कहीं भी मुंह मार.. कितने भी मजे कर.. मुझे कोई आपत्ति नही है.. पर तू मेरी बेटी वैशाली को दुख देगा तो वो मैं नही सहूँगी.. मैं क्या कोई भी माँ ये बर्दाश्त नही करेगी.. अब तू मुझे बता.. वैशाली के साथ आगे की ज़िंदगी बिताने का क्या प्लान है तेरा? मैंने सुना है की प्रमिला के साथ साथ किसी रोजी नाम की लड़की के साथ भी तेरा चक्कर है !! तू उसके साथ दिन रात गेस्टहाउस में पड़ा रहेगा तो मेरी वैशाली का क्या होगा??? अगर वो कहीं किसी ओर की तरफ मुड़ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे तुझे”

 

संजय सुनते सुनते हौले हौले शीला के स्तनों को मसल रहा था.. वोड्का के हल्के नशे में वह बोला: “मम्मी जी, वैशाली काफी टाइम से मुझे चोदने नही देती.. जब पत्नी ही आपकी इच्छाओं को पूरा ना करे तो पति आखिर क्या करेगा!! मेरे इस लंड को लेकर में कहाँ जाऊ?? आप ही बताइए.. मुझे दिन में कम से कम एक बार तो सेक्स चाहिए ही चाहिए.. जब तक एक बार वीर्य छूट न जाएँ मुझे नींद ही नही आती.. मैं थोड़ा ज्यादा ही एक्टिव हूँ इस बारे में.. ये तुम भी जान गई हो.. वैशाली मुझे जरा सा भी सहयोग नही देती.. मैं उसके स्तन दबाने जाता हूँ तो बोलती है – मुझसे तो ज्यादा रोजी के बड़े है.. जा उसके जाकर दबा – अब तुम ही बताओ.. ये सब बोलकर वो क्या साबित करना चाहती है.. अरे तुम नही दबाने देती तभी तो मुझे रोजी के पास जाना पड़ा.. इसलिए फिर मैंने भी उस पर ध्यान देना छोड़ ही दिया.. ”

 

संजय ने अपना दुखड़ा तो सुना दिया पर ये नही बताया की वह कुछ काम धंधा नही करता और पूरे दिन चोदने की फिराक में ही रहता है इसलिए वैशाली उसे सहयोग नही देती.. शीला का मन तो किया की वह उसे ये भी बताएं पर वह हर कदम फूँक फूँक कर रखना चाहती थी..

 

शीला: “संजु बेटा.. अगर मैं वैशाली को समझाकर मना लूँ.. तो क्या तुम रोजी को छोड़ दोगे?”

 

संजय: “मम्मी जी, रोजी को तो मैं अब छोड़ नही सकता!!”

 

शीला: “क्यों? कहीं तुम दोनों ने छुपकर शादी तो नही कर ली!!”

 

संजय: “नही मम्मी जी.. बात दरअसल यह है की.. मैंने रोजी के पापा से ४ लाख रुपये ब्याज पर लिए है.. जब तक वो पैसे न लौटा दूँ मैं रोजी को नही छोड़ सकता.. !!”

 

शीला: “अच्छा?? मतलब ४ लाख के ब्याज के बदले वो तुझसे चुदवा रही है.. पर बेटा तू ये भी तो सोच.. तू रोजी को बाहों में भरकर दिन रात चोदता-चाटता रहेगा तो पैसे कैसे लौटाएगा? पैसे कमाने के लिए बिस्तर से उठकर कोई काम धंधा भी करना पड़ेगा ना.. !!”

 

संजय: “मम्मी जी, मैं बस इसी जुगाड़ में हूँ.. इसीलिए तो पंद्रह दिनों से यहाँ पड़ा हुआ हूँ.. ”

 

शीला: “यहाँ आने के बाद तूने काम कम किया और चुदाई ज्यादा की है.. ये बहानेबाजी बहोत हुई.. कुछ ढंग का काम करना शुरू कर नही तो तेरे वैवाहिक जीवन को बर्बाद होने से कोई नही बचा पाएगा.. और वहाँ कलकत्ता में बैठकर कुछ नही होने वाला तेरा.. वहाँ तेरे लफंगे दोस्तों की संगत में तू कुछ नही कर पाएगा.. इससे अच्छा यही होगा की तुम लोग यहीं शिफ्ट हो जाओ”

 

संजय: “शिफ्ट तो मैं अभी हो जाऊँ.. पर फिर मेरे माँ-बाप का ध्यान कौन रखेगा!! इस बुढ़ापे में मैं उन्हे अकेला नही छोड़ सकता”

 

संजय की गोद में ठीक से बैठते हुए उसके लंड को अपनी चूत के सुराख पर सेट कर दिया.. कडक लोड़े को गरम चिपचिपा छेद मिलते ही वो लपक कर अंदर घुस गया.. जैसे सांप अपने बिल में घुस जाता है.. पूरा लंड हजम करने के बाद शीला अपनी गांड हिलाते और रगड़ते हुए बात को आगे बढ़ाने लगी

 

“ये बात तो तेरी सही है बेटा.. लेकिन अगर उनकी इतनी चिंता है तो उन्हे भी यहाँ साथ ले आ.. हम सब मिलकर तेरे और वैशाली के लीये कुछ सोचेंगे और तुम्हारी ज़िंदगी को वापिस पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे.. माँ-बाप की चिंता होना स्वाभाविक है.. पर क्या तूने कभी ये सोचा है की इस उम्र में तेरी इस आवारागर्दी के चलते उन्हे तुम्हारी कितनी फिक्र हो रही होगी?? पंद्रह दिनों से तुम और वैशाली यहाँ हो.. तो उनका ध्यान कौन रख रहा होगा? तू महीनों तक बाहर घूमता रहता है.. घर पर फूटी कौड़ी तक नही देता.. तो तेरी सारी कमाई जाती कहाँ है? और ऐसा तू क्या करता है जो लोगों से ब्याज पर उधार पैसे लेने की जरूरत पड़ती है??”

 

शीला की सीधी बात सुनकर संजय चुप हो गया.. फिलहाल जिस स्थिति में वह दोनों थे.. वह ऐसी गंभीर चर्चा के लिए अनुकूल नही थी.. लेकिन शीला की बात का न जाने क्या असर हुआ संजय पर.. उसने अपना लंड शीला के भोसड़े के बाहर निकाला और शीला को खड़ी करते हुए खुद भी खड़ा हो गया.. अपने कपड़े पहन कर वह बोला “मैं थोड़ी देर में आता हूँ, मम्मी जी” और निकल गया

 

रात को नौ बज चुके थे.. शीला को बड़ी जोर की भूख लगी थी.. वोड्का का नशा भी काफी चढ़ चुका था.. शीला ने खड़े होने का प्रयास किया लेकिन उसके कदम नशे के कारण डगमगा रहे थे.. वो सोच में पड़ गई.. कहाँ गया होगा संजय? कहीं उसे मेरी बातों का बुरा तो नही लगा होगा? नाराज होकर अगर वो मुझे यहीं छोड़कर चला गया तो मैं वापिस कैसे लौटूँगी? मदन को लौटने में अब ज्यादा दिन नही बचे थे.. उसके आने के बाद संजय कुछ हंगामा न कर दे.. बाप रे.. मैं क्यों इस संजय के साथ इतने दूर चली आई? शीला मन ही मन कांप उठी..

 

कुछ भी करके संजय को मनाना पड़ेगा.. एक बार घर पहुँच कर भी तो ये सारी बातें की जा सकती थी.. !!

 

शीला ने खड़ी होकर.. संजय ने दिलाया था वह छोटा सा टॉप पहन लिया.. बिना पेन्टी के उसने वह छोटी सी शॉर्ट्स भी पहन ली..

 

वो कमरे से बाहर निकली और सीढ़ियाँ उतरते हुए उसने देखा की संजय ड्राइवर के साथ कुछ बात करके निकल गया..

 

बहकती चाल से चलते हुए वह गाड़ी तक आई.. बिना ब्रा के उछल रहे उसके स्तनों को लॉबी में खड़े सारे मर्द देख रहे थे.. शीला ड्राइवर के पास आई

 

शीला: “क्या नाम है तुम्हारा? और कहाँ गए तुम्हारे साहब? ”

 

ड्राइवर: “जी, मेरा नाम हाफ़िज़ है.. और संजय साहब अभी आ रहें है.. जब तक वो न लौटे तब तक आपका खयाल रखने को कहा है मुझे.. मैडम आप अभी नशे में है.. लोग देख रहे है.. चलिए मैं आपको आपके कमरे तक पहुंचा दु.. ” शीला को कंधे से सहारा देते हुए हाफ़िज़ उसे कमरे तक जाने में मदद करने लगा.. “आपका कमरा कहाँ है मैडम?”

 

नशे की हालत में शीला ने कहा “ऊपर के माले पर कोने वाला कमरा है” उसके कदम लड़खड़ा रहे थे.. वह हाफ़िज़ के जिस्म पर लगभग लटक ही रही थी..

 

कमरा खोलकर हाफ़िज़ ने शीला को सहारा देते हुए बेड पर लैटाया.. शीला को छोटा सा टॉप ऊपर चढ़ गया था.. और स्तनों का निचला हिस्सा टॉप के बाहर झलक रहा था.. शीला की छोटी सी शॉर्ट्स इतनी तंग थी की उसकी दोनों जांघें ऊपर तक खुली हुई थी.. हाफ़िज़ बस उसे देखता ही रहा

 

हाफ़िज़ ने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा “क्या गदराया जिस्म है आपका मैडम.. !! आपको ऐसे देखकर मेरा भी मन कर रहा है.. संजय साहब के आने से पहले मुझे भी चांस दीजिए.. ” कहते हुए हाफ़िज ने शीला के टॉप के नीचे से हाथ डालकर दोनों स्तनों को दबाकर मसल दिया..

 

“एयय.. छोड़ मुझे.. रासकल.. छोड़.. साले तेरी औकात ही क्या है मुझे हाथ लगाने की.. !!” शराब का नशा अब शीला के सर चढ़कर बोलने लगा था.. लहराती आवाज में उसने बोलकर हाफ़िज़ के हाथों से खुदको छुड़ाते हुए शीला ने कहा “जा.. जाकर अपनी माँ के दबा.. ”

 

सुनकर हाफ़िज़ गुस्से से तिलमिलाने लगा.. शीला के ऊपर वो सवार हो गया और बोला “भेनचोद.. मेरी औकात की बात करती है.. अभी तुझे दिखाता हूँ मेरी औकात.. तेरी माँ को चोदू, हरामजादी.. अपने दामाद का लोडा गाड़ी में चूसते वक्त तुझे तेरी औकात याद नही आई थी क्या.. साली रांड!!” कहते हुए गुस्से से उसने अपने दोनों हाथों से शीला का टॉप फाड़ दिया.. शीला के गोरे गोरे स्तन खुले हो गए..

 

हाफ़िज़ शीला के ऊपर अपना सारा वज़न डालकर चढ़ गया और उसके होंठों को चाटने लगा.. शीला छूटने के लिए छटपटाने लगी.. पर हाफ़िज़ की मजबूत पकड़ के आगे वो लाचार थी.. ऊपर से वो नशे में भी थी.. शीला चिल्लाने लगी.. हाफ़िज़ ने उसके गाल पर दो कडक तमाचे रसीद करते हुए उसे चुप करा दिया..

 

“साली रंडी.. अगर फिर से चिल्लाई तो तेरे घरवालों को सब बता दूंगा..घर तो तेरा मैंने देख ही रखा है.. किसी को मुंह दिखाने के लायक नही छोड़ूँगा तुझे.. याद रखना.. अब चुपचाप मुझे जो करना है वो कर लेने दे.. समझी!!” सुनकर शीला की गांड ही फट गई.. अपने हथियार डालकर उसने आँखें बंद कर ली.. और अपने बदन को ढीला छोड़ दिया..

 

हाफ़िज़ ने शीला की चड्डी उतारकर उसकी चूत पर हाथ फेरते हुए कहा “साली.. बहोत गरम चीज है तू” कहते हुए हाफ़िज़ ने अपने पेंट की चैन खोल दी.. आँखें बंद कर पड़ी हुई शीला ने चैन खुलने की आवाज सुनी.. अनजाने में ही उससे आँखें खुल गई.. पेंट उतार रहे हाफ़िज़ के लंड को देखने की लालच वह रोक नही पाई.. पेंट उतरते ही उसने देखा की हाफ़िज़ के अंडरवेर में इतना बड़ा उभार था.. डंडे जैसा !!! वह फुला हुआ हिस्सा देखककर शीला मन ही मन हिल गई..

 

अपने लंड वाला हिस्सा शीला के करीब ले जाकर बोला “ले मादरचोद.. निकाल बाहर अपने बाप का लंड.. और देख.. की यह तेरे भोसड़े के परखच्चे उड़ाने के काबिल है भी या नही.. !!” शीला ने अब विरोध करना छोड़ ही दिया था.. हाफ़िज़ की धमकी सुनने के बाद उस में हिम्मत ही नही बची थी.. कहीं ये कमीना आकर मदन को सब कुछ बता देगा तो क्या हाल होगा!!!

 

चुपचाप शीला ने हाफ़िज़ के अंडरवेर में बने उभार पर हाथ रख दिया.. “तुरंत बाहर मत निकाल ईसे मेरी जान.. पहले थोड़ा हाथों से सहला.. ताकि ये और भी सख्त हो जाए.. फिर बाहर निकालना.. समझ गई!!” शीला की निप्पलों को खींचते हुए हाफ़िज़ ने कहा “कसम से.. गजब का माल है तू.. ” शीला की नाभि के अंदर उंगली करने के बाद उसने झुककर उसके भोसड़े में तीन उँगलियाँ एक साथ डाल दी.. और शीला की काँखों को चाटने लगा..

 

४४० वॉल्ट का करंट लगा शीला को.. हाफ़िज़ उसकी काँख को ऐसे चाट रहा था जैसे चूत चाट रहा हो.. उत्तेजित होकर भारी सांसें लेते हुए उसने हाफ़िज़ के लंड को अंडरवेर के ऊपर से ही दबाया..

 

शीला के मन में ही संवाद चलने लगा.. “तू क्या कर रही है उसका पता भी है तुझे?? “लेकिन वोड्का का नशा और चूत की खुजली.. दोनों ने मिलकर शीला के होश छीन लिए थे.. इच्छा न होने के बावजूद वह हाफ़िज़ के लंड को बाहर से ही सहलाते हुए सिसक रही थी.. जांघिये के अंदर लंड ने तंबू बना दिया था.. उसे उतारकर शीला ने लंड बाहर खींचा.. स्प्रिंग की तरह उछल कर बाहर निकला हाफ़िज़ का लोडा.. एकदम काला.. ब्लेक कोब्रा जैसा.. और इतना मोटा.. शीला को जीवा के लंड की याद आ गई.. हाफ़िज़ ने अपना झूलता हुआ लंड शीला के मुंह के आगे रख दिया.. शीला ने एक आखिरी बार शर्माने का नाटक किया.. और अपनी नजरें फेर ली..

 

हाफ़िज़ ने खींचकर एक तमाचा लगा दिया शीला के गाल पर.. और उसे धमकाते हुए कहा “मादरचोद.. नजर क्यों फेर ली? टाइम खराब मत कर.. पकड़ ईसे और मुंह में ले चल.. जैसे अपना दामाद का लिया था.. ” हाफ़िज़ के मुंह से गालियां सुनकर.. पता नही क्यों पर शीला को अच्छा लगा.. उसकी चूत ने रस की एक धारा छोड़ दी.. हाफ़िज़ नीचे झुककर शीला के गुब्बारों को चूसने लगा..

 

शीला हाफ़िज़ के विकराल लंड को हाथ में लेकर खेलने लगी.. उसके शरीर में वासना का भूत नाचने लगा.. उसके भोसड़े ने कडक लंड की गंध परख ली थी.. और वो बेसब्र हो रहा था.. हाफ़िज़ ने शीला की काँखों के बीच लंड को दो बार अंदर बाहर किया… गदराई काँखों में लंड घुसते ही उत्तेजना से हाफ़िज़ का थोड़ा सा वीर्य छूट गया और शीला के बबलों पर जा गिरा

 

“साली रंडी.. तेरी बगल भी भोसड़े जैसी गरम है.. क्या बात है.. कहाँ से सीखा ये सब.. जरा मुझे भी बता.. !!” शीला ने जवाब नही दिया.. वह उसके आँड़ों को सहलाती रही.. शीला की काँख से लंड निकालकर वापिस अंदर डाला हाफ़िज़ ने.. और उसकी काँख को ही चोदने लगा.. हाफ़िज़ की इस हरकत ने शीला को पागल कर दिया.. अपनी काँख से लंड निकालकर उसने मुंह में ले लिया.. और अपनी लार से गीला करते हुए चूसने लगी.. मुंह के अंदर उसने लंड पर इतना दबाव बनाया की उसे डर लगने लगा की कहीं हाफ़िज़ उसके मुंह में ही वीर्यस्त्राव न कर बैठे.. !!

 

हाफ़िज़ जोर से चिल्लाया “अरे मादरचोद.. खा जाएगी क्या मेरा लंड?? छोड़ दे भेनचोद.. तेरे बाप का पानी छूट जाएगा” शीला के मुंह से हाफ़िज़ ने लंड बाहर खींच लिया..

 

शराब के नशे में शीला ने कहा “साले.. चूसने दे ना.. क्यों मेरा मज़ा खराब कर रहा है? पानी गिरता तो मेरे मुंह में गिरता उसमें तेरे बाप का क्या जा रहा था.. भोसड़ी के चूतिये!!” हाफ़िज़ अब शीला के स्तनों पर अपने लंड से थपकियाँ लगाने लगा.. सख्त लंड की थपकियों से शीला को दर्द हो रहा था.. लंड की मोटाई देखकर शीला मन ही मन रघु और जीवा को याद कर रही थी.. घर जाने के बाद एक बार उन दोनों से चुदवाने का मन बना लिया उसने..

 

हाफ़िज़: “शीला तेरी जवानी तो बड़ी ही कातिल है मेरी जान.. चल.. मेरा लंड अपनी चूत में लेने के लिए तैयार हो जा.. कुत्तिया बनाकर चोदूँगा.. चार पैर पर हो जा.. ” कहते हुए उसने शीला की जांघ पर काट लिया..

 

शीला: “आह्ह साले.. क्या कर रहा है? भड़वे अपनी माँ को भी कुत्तिया बनाकर चोदता है क्या? और तमीज़ से बात कर.. मैं तेरी मालकिन हूँ.. कोई रंडी नही.. ड्राइवर है तू.. मेरा शोहर नही.. जो करने आया है वो कर और निकल यहाँ से.. ले डाल अपना लोडा.. और देख.. भूल कर भी पीछे के छेद में डालने की कोशिश मत करना.. वरना चिल्ला चिल्लाकर माँ चोद दूँगी तेरी.. समझा.. !!! आगे के छेद में जितना मर्जी डाल ले.. ”

 

शीला घोड़ी बनकर हाफ़िज़ का लंड अपने भोसड़े में लेने के लिए तैयार हो गई.. उत्तेजना इतनी प्रबल थी की उसके दिलोदिमाग पर सुरूर सा छा गया था.. शराब से कई ज्यादा नशा सेक्स में होता है.. और शीला के सर पर फिलहाल दोनों नशे हावी हो चुके थे.. उसका शरीर वासना से तप रहा था..

 

लंड का सुपाड़ा अंदर जाते ही शीला ने कहा “जरा धीरे से हाफ़िज़.. दर्द हो रहा है.. ” हाफ़िज़ का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था.. लेकिन शीला का भोसड़ा भी कुछ कम नही था.. दो दमदार धक्कों में ही हाफ़िज़ का लंड निगल लिया उस भोसड़े ने.. इतना मोटा था की शीला का पूरा भोसड़ा भर गया.. मज़ा आ गया शीला को.. खुजली से तिलमिलाती चूत में एक अजीब सी ठंडक मिली..

हाफ़िज़ आनन-फानन में धक्के लगाने लगा.. शीला गांड उछाल उछाल कर चुदने लगी… इस युद्ध में कौन जीतेगा ये कहना बड़ा ही मुश्किल था..

 

“ओह्ह भेनचोद.. क्या लोडा है तेरा!! मज़ा आ गया.. चोद दे.. चोद दे अपनी मैया की चूत.. ठोक जोर से.. हाफ़िज़.. हाँ और जोर से.. लगा धक्के साले.. आह्ह आह्ह आह्ह अहह.. ऐसे ही.. यस्स.. क्या ताकत है तुझ में भोसड़ी के.. सच में असली मर्द है तू.. साले.. लगा दम.. दिखा अपना जोर.. कोई कसर मत छोड़ना.. अपने गधे जैसे लंड से फाड़ दे मेरा भोसड़ा..आह्ह.. !!” हाफ़िज़ के पसीने छूट गए.. शीला की कमर और कूल्हों पर तमाचे लगाते हुए वह लगातार धक्के लगा रहा था.. “आह्ह आह्ह ओह्ह ओह्ह” की आवाजों से पूरा कमरा गूंज उठा था.. शीला ने अपनी चूत की मांसपेशियों से कसकर पकड़ रखा था हाफ़िज़ का लंड.. उसके दोनों वर्टिकल होंठों के बीच फंस चुका था हाफ़िज़ का लंड.. धक्के खा खा कर लाल हो गई थी शीला की चूत..

 

पूरे पंद्रह मिनट की भीषण चुदाई के बाद शीला का जबरदस्त ऑर्गजम हो गया.. हाफ़िज़ के जानदार लोड़े की वो कायल हो गई.. शीला के कूल्हों को थप्पड़ लगाते हुए हाफ़िज़ ने अपने लंड से पावरफूल पिचकारी दे मारी.. गरम गरम वीर्य की बौछार होते ही शीला का भोसड़ा तृप्त हो रहा था..

 

 

 

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