शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-57

(Desi Kahani) 2

redwalker69 2026-05-25 Comments

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वैशाली के विचारों को अपने दिमाग से निकालकर संजय ने शीला की गांड के उस टाइट छेद में.. अपनी गीली उंगली डालने का प्रयास किया.. बेहद टाइट था वो होल.. !! और क्यों न हो!! मदन के जाने के बाद किसी ने शीला के इस छेद को छेड़ा नही था.. !! अपनी गांड में घुसी दामदजी की उंगली आनंद दे रही थी शीला को.. चार्ली से किस कर रही शीला ने उसे मुक्त किया और बोली

 

“संजय बेटा.. उंगली छोड़.. अंगूठा डाल.. बड़ी तेज खुजली हो रही है अंदर” शीला की इस बात से उत्साहित होकर संजय ने अंगूठा अंदर डाल दिया.. अंगूठा अंदर घुसते ही शीला बेकाबू हो गई और उसने चार्ली की चूत में एक साथ तीन उँगलियाँ डाल दी..

 

“Ohh my god…it is paining..please remove the fingers, Shila!!” चार्ली की फट गई.. शीला ने उसकी चूत से एक उंगली निकाली और उसकी गांड में डाल दी.. चार्ली की चुत चाटते हुए शीला उसकी नाभि तक पहुँच गई.. और उसके सपाट पेट के गोरे हिस्सों को चाटने लगी.. वह और ऊपर की तरफ आई.. अब दोनों के स्तन एक के ऊपर एक हो गए थे.. निप्पलों के बीच छेड़खानियाँ हो रही थी.. शीला की वासना ज्वार की लहरों की तरह उछलने लगी.. शीला की भरावदार छाती के तले चार्ली के छोटे स्तन दबकर रह गए.. इतना अद्भुत सीन था की देखते ही किसी का भी पानी छूट जाए..

 

शीला के तंदूरस्त स्तनों का सौन्दर्य.. और चार्ली के जवान सख्त उरोज जब एक हो जाएँ.. तो कितना अनोखा द्रश्य होगा!! संजय ने अब दूसरे हाथ का अंगूठा भी शीला की गांड में डाल दिया था.. दर्द और आनंद के मिश्रण से शीला की गांड गोल गोल घूम रही थी.. शीला फिर से नीचे की ओर आई और अपनी जीभ से चार्ली की नाजुक चुत को टटोलने लगी.. चार्ली की चुत काफी तंग थी.. ज्यादा इस्तेमाल नही हुई थी शायद.. हाथ ऊपर ले जाकर शीला उसके सख्त उरोजों को मसल रही थी.. चार्ली ने भी उत्तेजना से शीला के हाथों को पकड़कर अपने स्तनों आर दबाए रखा था.. संजय अपनी सासुमा के पीछे के छेद को कुरेदने में व्यस्त था.. अपनी सास के इस खास अंग को बड़ी उत्सुकता और उत्तेजना से देखते हुए संजय का लंड झटके कहा रहा था.. इतना सख्त हो चुका था की संजय से रहा नही जा रहा था..

 

दोनों अंगूठे बाहर निकालकर संजय ने अपने सुपाड़े पर थोड़ा सा थूक लगाया और टोपे को शीला की गांड के छेद पर टीका दिया.. थोड़ी देर तक सुपाड़े से छेद को रगड़ने के बाद उसने बिल्कुल मध्य में रखकर दबाया..

 

शीला: “आह्ह बेटा.. नही जाएगा अंदर.. !!” संजय ने फिर से थोड़ा सा दबाव दिया.. बड़ी मुसीबत से केवल उसका आधा सुपाड़ा छेद के अंदर जा पाया.. शीला का पूरा बदन कांपने लगा “ओह बेटा.. निकाल दे बाहर.. और आगे डाल दे.. ज्यादा मज़ा आएगा” शीला कराहने लगी

 

संजय ने एक न सुनी और थोड़ा सा और दबाया.. इस बार उसका टमाटर जैसा सुपाड़ा टाइट छेद के अंदर चला गया

 

शीला: “संजु.. आह्ह.. मर गई बेटा.. बहोत दर्द हो रहा है मुझे.. प्लीज बाहर निकाल ले”

 

संजय: “ओहह मम्मी जी.. कितनी टाइट और मस्त है आपकी गांड.. मेरे लंड पर जबरदस्त दबाव बना रहा है आपका छेद.. बहोत मज़ा आ रहा है.. प्लीज एक बार मुझे आपकी गांड मार लेने दीजिए.. जब जब आपके गदराए जिस्म की याद आती थी तब तब मैं वैशाली की गांड मारकर अपनी इच्छा को शांत कर लेता था.. प्लीज आज मना मत करना.. आपकी चूत से ज्यादा तो गांड में गर्मी है मम्मी जी.. ओहहह आह्ह.. ” काफी दबाने के बाद मुश्किल से आधा ही लंड घुसा पाया अंदर

 

शीला को अब जबरदस्त दर्द हो रहा था.. ए.सी. कमरे में भी उसके पसीने छूट रहे थे..उसके दोनों लटकते हुए स्तन चार्ली के घुटनों से टकरा रहे थे.. शीला ने चार्ली की चुत चाटना छोड़कर अपनी गांद के दर्द पर ही ध्यान केंद्रित किया.. चार्ली शीला के नीचे से निकल कर बाहर आई और सीधे जॉन के पास पहुँच गई.. जॉन तो केवल दर्शक बनकर यह सारा खेल देख रहा था.. संजय और शीला की इस असाधारण मुहिम को बड़ी ही दिलचस्पी से देख रहा था.. धीरे धीरे उसका लंड हरकत करने लगा.. आधे-सख्त हुए उस लंड को चार्ली ने पकड़कर कहा “John, fuck me now.. Shila sucked my cunt really good..I enjoyed like never before..Now I need a cock deep in my pussy..please fuck me hard” कहते हुए वह जॉन के लंड को चूसकर पूरा सख्त करने में जुट गई.. दो ही मिनट में जॉन का लंड कडा हो गया..

 

चार्ली अब नीचे लेट गई और बोली “Don’t waste time..now climb on me..and fuck the shit out of my pussy”

 

जॉन ने चार्ली के पास से हटकर खड़ा हो गया और बिस्तर पर आ गया.. संजय अपना आधा लंड शीला की गांड में डालकर दर्द कम होने का इंतज़ार कर रहा था.. घोड़ी बनी शीला के नीचे जॉन संभलकर घुस गया और शीला के नीचे अपने आपको सेट कर लिया.. धीरे से उसने अपने लंड को नीचे से ही शीला की चूत के छेद पर सेट किया.. और अपनी कमर उठाकर एक धक्का लगाया.. शीला की चूत तो कब से बेकरार थी.. लंड को एक पल में ही निगल गई.. !!!

 

दो दो लंडों के एक साथ हुए हमले से शीला उत्तेजित हो गई.. सिर्फ ब्लू-फिल्मों में ही देखे इस द्रश्य को आज वह वाकई अनुभावित कर रही थी.. संजय अभी भी स्थिर था.. लेकिन जॉन ने नीचे से हुचक हुचक कर शॉट लगाने शुरू कर दिए थे.. चिपचिपे भोसड़े में लंड का स्पर्श इतना सुहाना लग रहा था की शीला सिहरने लगी.. चार्ली भी अब बेड पर आ गई.. और शीला की पीठ पर सवारी करते हुए वह संजय के बिलकूल सामने आ गई.. और संजय को चूमने लगी.. लिप किस करते हुए संजय चार्ली के स्तनों को भी दबाने लगा था.. दबाते हुए वह इतना गरम हो गया की उसने एक जोरदार धक्का लगाते हुए अपना पूरा लंड शीला की गांड में घुसेड़ दिया !!!

 

शीला: “ओहह माँ.. मर गई.. फट गई मेरी तो.. बाहर निकाल संजय.. ऊईई माँ.. !!” शीला को एक पल के लिए ऐसा लगा की उसकी जान ही निकल गई थी.. इतना दर्द हो रहा था.. लेकिन संजय और जॉन.. शीला की चीखो को नजर अंदाज करते हुए ऐसे शॉट लगा रहे थे जैसे शीला की इस ट्रिप को यादगार बना देना चाहते हो.. एक साथ दो दो जानदार लंडों से युद्ध खेल रही शीला को शुरुआत में भयंकर दर्द हुआ.. पर धीरे धीरे गांड की मांसपेशियाँ ढीली पड़ने लगी और दर्द काम होते ही उसे मज़ा आने लगा.. नीचे चूत में हो रही अंधाधुन चुदाई से मिल रहे आनंद के कारण भी उसका दर्द कम हो रहा था

 

दोनों लंड एक साथ अंदर डालना कठिन था.. जब संजय गांड में डालता तब जॉन चूत से बाहर निकालता और जब उसके अंदर डालते ही संजय खींच लेता.. एक अनोखी लय बना ली थी दोनों ने शीला को चोदते हुए.. एक उस्ताद तबलची जैसे दोनों तबलों को लय और सुर में एक साथ बजाता है वैसे ही अनुभवी शीला इन दोनों मर्दों के दमदार हथियारों को अपने दोनों छेदों में लेते हुए मस्त होकर चुद रही थी..

 

शीला की गांड मारते हुए संजय.. शीला पर घोड़ी बनकर बैठी हुई चार्ली की निप्पलों को चूस रहा था.. चूसचूसकर उन गुलाबी निप्पलों का रंग लाल हो गया था.. चार्ली के स्तनों पर कई जगह संजय के काटने से निशान भी पड़ गए थे.. शीला के नीचे लेटा हुआ जॉन.. आगे पीछे हो रही शीला के हिल रहे मदमस्त चूचों को बस देखता ही जा रहा था.. दोनों हाथों से उन स्तनों को पकड़ना मुमकिन नही था.. इतने गदराए मांसल बड़े बड़े स्तनों को अपने ऊपर झूलता हुआ देख वह वासना की आग में अपने आप को समर्पित कर रहा था

 

सासुमाँ की चूत चोदने का ख्वाब देख रहे संजय को चुत से पहले उनकी गांड मिल गई.. अपने आप को खुशकिस्मत समझ रहा था वोह.. वैशाली की जब गांड मारने की वह कोशिश करता तब उसे मनाने में ही एक घंटा निकल जाता.. तकिये पर उसका मुंह दबाकर फिर गांड में डालना पड़ता वरना उसकी चीखें सुनकर पूरा मोहल्ला इकठ्ठा हो जाने का डर रहता.. अंदर डालने के बाद एक मिनट से ज्यादा मारने नही देती थी वैशाली.. और एक बार गांड मारने के बाद तीन से चार दिन तक अपने नजदीक भी नही आने देती थी.. और उसकी माँ को देखो.. खुशी खुशी एक साथ गांड और चूत मरवा रही है.. !!

 

शीला: “अब दर्द एकदम कम हो गया.. जरा जोर से धक्के मार.. आज तो फाड़ ही दे मेरी.. बहोत मज़ा आ रहा है मुझे.. छील रही है मेरी गांड फिर भी मज़ा आ रहा है.. आह्ह ओहह देख क्या रहा है भड़वे.. चोद मेरी गांड.. लगा ताकत!! इतना जल्दी थक गया क्या साले!!” ऑर्गजम करीब आते ही शीला हिंसक होने लगी.. वह ढीले धक्कों को बर्दाश्त नही कर पा रही थी.. नाव को किनारे पर पहुंचना हो तो पतवार तेज लगानी पड़ती है.. थका हुआ माँजी की नाव को किनारे नही लगा सकता..

 

“ओहह मम्मी जी.. मेरा निकलने को है.. ” संजय ने अपना इस्तीफा तैयार कर लिया.. शीला के कूल्हों से संजय की जांघें टकराकर पक्क पक्क की मस्त आवाज़े आ रही थी.. इतना ही नही.. नीचे से धक्के लगा रहे जॉन और संजय के गीले आँड टकराने से भी आवाज आ रही थी.. शीला की गांड में अचानक गरम गरम लावारस छूटा.. संजय ने धक्के लगाना बंद कर दिया.. और एक आखिरी बार जोर लगाते हुए अपने लंड को शीला की गांड की खाई में गाड़ दिया.. संजय ठंडा हो गया.. लेकिन शीला अभी भी पाँवभाजी के तवे की तरह गरम थी..

 

एक साथ दो तंदूरस्त जानदार लंड के धक्के खाते हुए शीला की हवस उफान पर चढ़ी हुई थी.. उसने कभी नही सोचा था की बी.पी. में देखी हुई हरकतें उसे वाकई अपने जिस्म के साथ करने का मौका मिलेगा.. शीला के भोसड़े की गर्मी से जॉन का लंड ढीला पड़ने लगा था.. उसके धक्कों में अब जान नही बची थी.. गांड में वीर्यस्त्राव हो जाने के बाद वह छेद एकदम लसलसित हो गया था.. संजय अपने आधे मुरझाए लंड से भी आसानी से धक्के लगाए जा रहा था.. शीला भी अपने दामाद के संग गोवा की इस ट्रिप का पूरा लाभ उठा रही थी..

 

एक घंटे के भीषण एनकाउंटर के बाद.. कमरे में सन्नाटा छा गया था.. जॉन और संजय लाश की तरह बिस्तर की एक तरफ पड़े हुए थे.. चार्ली नाम की चिड़िया.. शीला की पुख्त भुजाओं में सिमटकर छोटे बच्चे की तरह आराम से सो रही थी.. शीला की गांड में जलन हो रही थी.. नजदीक पड़े सिगार का पैकेट खोला तो वह खाली था.. शीला ने.. अकेले ही.. अपने बलबूते पर.. जॉन, संजय, चार्ली और सिगार.. सब को खाली कर दिया था.. आराम करते हुए एकाध घंटा और बीत गया..

 

रात के लगभग साढ़े आठ बज चुके थे.. शीला की सुस्ती अब भी कम नही हो रही थी.. संजय कपड़े पहन कर अपनी पसंद की सिगरेट लेने बाहर गया.. और जॉन बाथरूम में नहाने चला गया था.. चार्ली नंगे बदन सो रही थी.. उसकी साँसों के साथ स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे.. देखते ही शीला को अपनी जवानी के दिनों की याद आ गई.. तब उसके स्तन भी ऐसी मध्यम कद के और सख्त थे.. निप्पल तो जैसे थी ही नही.. कुंवारी लड़कियों के स्तन बड़े नाजुक होते है.. मर्द का हाथ पड़ते ही उसका आकार बदलने लगता है..

 

मदन के साथ जब उसकी सगाई हुई.. उससे पहले शीला के स्तन बिल्कुल अनछुए थे.. जब वह स्कूल में पढ़ती थी तब उसके स्तन सब से बड़े थे.. सारे लड़के टकटकी लगाकर देखते तब उसे बहोत शर्म आती थी.. अपने स्तनों की सुंदरता से आज तक उसने कई मर्दों को अपनी उंगलियों पर नचाया था.. शीला के स्कूल के शिक्षक भी मौका मिलते ही शीला के कुँवारे उरोजों को तांकते रहते.. ये सब बातें याद आते ही मुस्कुराने लगी शीला..

 

तभी चार्ली ने आँखें खोली.. शीला के नग्न नरम उभारों पर हाथ फेरते हुए उसने शीला की गर्दन पर किस कर दी.. शीला ने भी चार्ली के स्तनों को मसल दिया.. दोनों एक दूसरे के साथ खेलते हुए खड़े हुए.. तभी जॉन बाथरूम से नहाकर नंगा बाहर निकला.. उसके पिचके हुए नरम लंड को तिरस्कार भरी नज़रों से देख रही थी शीला.. शीला को सिर्फ सख्त लंड पसंद थे..

 

चार्ली ने जॉन से पूछा.. “Honey..did you enjoy it or not? I loved fucking with Sanjay.. I like Indian cocks.. They are quite hard and strong..much harder than your cock..!!”

 

“Yeah darling.. Indian pussy is also too hot to handle definately.. This has been the most memorable fucking experience, I ever had”

 

तभी हाथ में सिगरेट का पैकेट लिए हुए संजय कमरे के अंदर आया.. सिगरेट के साथ साथ वह वोड्का की बोतल भी साथ ले आया था.. साथ में बाइटिंग के लिए कुछ सामान भी था.. उसने फोन करके ४ ग्लास मँगवाए.. और सब का लाइट पेग बनाया.. चारों लोग आराम से पीने लगे और उस पेग को खतम किया.. अब अलग होने का समय आ चुका था.. शीला ने अपने कपड़े पहने.. और बड़े प्यार से उसने जॉन और चार्ली को एक किस करते हुए अलविदा कहा..

 

होटल से बाहर निकलकर चलते चलते वह दोनों अपने होटल के कमरे में पहुंचे.. थककर संजय ने अपना पेंट उतारा और बिस्तर पर बैठ गया और शीला उसकी गोद में..

 

शीला: “राजा.. आज तो तेरी सुहागरात है.. अपनी सास के संग इस रात को यादगार बना देना.. मुझे इतना चोद.. इतना चोद की मेरी जन्मों की प्यास बुझ जाएँ.. मैं बहोत तरसी हूँ बेटा..!!”

 

संजय: “मम्मी जी, आपकी प्यास का तो मुझे उसी दिन पता चल गया था जिस दिन मैंने आपको पेड़ के तने से चूत रगड़ते हुए देखा था.. तभी में समझ गया था की पापा जी की गैर मौजूदगी में आप कितना तड़प रही थी”

 

शीला ने चोंककर कहा “अच्छा.. !! अब समझी!! तो उस रात वो तुम ही थे.. जिस ने मुझे अंधेरे में पीछे से चोद दिया था.. मुझे शक तो था ही.. की ऐसा काम तुम्हारे अलावा और कोई नही कर सकता.. पर इतना बड़ा रिस्क तूने कैसे लिया संजय? तुझे डर नही लगा था क्या?”

 

संजय: “अरे मम्मी जी, आपकी हालत तब इतनी खराब थी की पीछे से कोई कुत्ता आकर चोद जाता तो भी आप मना नही करती.. बहोत उत्तेजित थी आप.. इसीलिए तो मैंने मौका देखकर अपना लंड घुसा दिया सीधा.. पर सच बताना.. कैसा लगा था आपको उस रात?”

 

शीला: “मुझे तो बहोत मज़ा आया था.. लंड के लिए तड़प रही थी तभी चूत में लंड घुस गया.. उससे ज्यादा क्या चाहिए!! संजय.. अच्छा हुआ जो तू मुझे गोवा लेकर आया.. हम साथ में मजे तो करेंगे ही.. पर यहाँ आने से उन दो फिरंगियों के साथ मज़ा करने का जबरदस्त मौका मिल गया ”

 

संजय: “मम्मी जी, उस चार्ली की चूत बड़ी ही टाइट थी.. वैशाली को पहली बार चोदा था उससे भी टाइट.. !! मुझे लगता है की जॉन ने उसे ज्यादा रगड़ा नही होगा अब तक”

 

शीला: “मुझे तो ऐसा नही लगता.. जॉन के साथ चार्ली यहाँ गोवा तक आई है तो चुदाई में तो कोई कसर नही छोड़ी होगी दोनों ने.. मेरे हिसाब से तो चार्ली भी एक नंबर की चुदक्कड़ ही थी.. हाँ.. उसकी चुत बेशक काफी मुलायम और टाइट थी..” साथ लेकर आए बोतल से संजय को घूंट पिलाते हुए शीला ने नीचे हाथ डालकर संजय के लंड से खेलना शुरू कर दिया था.. संजय का लंड एकदम गन्ने जैसा सख्त हो गया था.. गोद में बैठी शीला के स्तन हल्के हल्के मसल रहा था संजय..

 

संजय के हाथ में सिगरेट थी.. शीला ने सिगरेट उसके हाथ से लेकर एक कश लगाया.. धुआँ छोड़ते हुए उसने संजय के लंड को पकड़कर उससे पूछा “तैयार हो गया क्या, बेटा..?”

 

संजय-शीला के रूम की बालकनी से समंदर का किनारा नजर आ रहा था.. वोड्का का हल्का नशा दोनों के जिस्मों को गरम कर रहा था..

 

संजय: “तुम्हारा हाथ पड़े और ये तैयार न हो ऐसा कभी हो सकता है क्या!!” शीला की मांसल जांघों पर हाथ फेरते हुए उसने उसकी गर्दन को काट लीया “अगर तुम मेरी सास न होती तो तो मैं तुम्हें भगाकर ले जाता.. तुम्हारे जैसा गदराया माल मैंने आज तक नही देखा.. एक दो बार चोद कर मन नही भरेगा मेरा.. दिल करता है की एक हफ्ते तक तुम्हें बिस्तर पर लेकर पड़ा रहूँ तब जाकर मेरे लंड को तसल्ली मिलेगी” कहते हुए संजय ने शीला के दोनों बबलों को रगड़ दिया

 

शीला: “चार्ली के साथ अनुभव कैसा रहा?”

 

संजय: ” अरे गजब का अनुभव था.. साली इतना कडक माल थी.. मेरा तो जी करता है की आज की पूरी रात अगर उन दोनों के साथ बिताने का मौका मिलता तो मज़ा आ जाता.. सच सच बताना..तुम्हें भी जॉन के गोरे लंड की याद आ रही है ना ??”

 

शीला: “हाँ बेटा.. जॉन के लंड को याद करते हुए अभी भी मेरे दो पैरों के बीच की परी🧚🏻‍♀️ पागल हो जाती है.. एक बात तो है बेटा.. चुदाई के लिए जब कोई नया साथी मिले तब मज़ा और उत्तेजना दोनों दोगुने हो जाते है.. इसका क्या कारण होगा?”

 

संजय: “तुम्हारी बात बिल्कुल सही है.. नए साथी के संग चुदाई करने का मज़ा ही कुछ अलग होता है.. चार्ली के छेद में घुसाने का बड़ा मज़ा आया मुझे.. साली फिर से मिल जाएँ तो जीवन सार्थक हो जाए मेरा.. ”

 

शीला संजय के लंड को पकड़कर खींचते हुए बोली “संजय, जॉन और चार्ली को बुला कर ला.. होटल तो उनका नजदीक ही है.. वो लोग वहीं होंगे.. फिर से हम चारों मिलकर चुदाई करते है”

 

संजय: “अभी तो मैं तुम्हें मन भरकर चोदना चाहता हूँ.. घर लौटने के बाद तो वापिस तुम्हें “आप” कहना पड़ेगा.. इतनी आसानी से तुम मिलोगी भी नही मुझे.. प्लीज.. अब और कोई हम दोनों के बीच नही आएगा.. जो भी करना है हम दोनों ही करेंगे.. ” संजय ने शीला को बेड पर लैटा दिया.. बगल में पड़ा वोड्का का खाली ग्लास गिर गया.. जो गिने चुने कपड़े उन दोनों ने पहन रखे थे वो उतार दिए..

 

संजय के फुँकारते नाग जैसे लंड को शीला ने बड़े ही प्यार से हाथ में पकड़कर चूम लिया “घर लौटने के बाद इसकी बहोत याद आएगी मुझे.. मैंने कभी सपने भी नही सोचा था की अपने दामाद के साथ करने का मौका मिलेगा मुझे.. औरतों को पटाने में तू मास्टर है.. सच सच बता.. चेतना को कितनी बार चोदा है तूने? “शीला का दिमाग पुरानी बातें भुला नही था

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