शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-46

(Desi Kahani) 10

redwalker69 2026-05-22 Comments

This story is part of a series:

घाघरा उतरते ही मदमस्त हथनी जैसी जांघों के बीच बिना बालों वाली रसीली चूत को एकटक देखने लगा बूढ़ा.. रूखी ने शीला के भोसड़े के दोनों होंठ अपनी उंगलियों से चौड़े कीये.. और अंदर का गुलाब सौन्दर्य दिखाने लगी अपने ससुर को.. रूखी का ससुर उकड़ूँ बैठकर शीला की चूत के करीब आया.. पहले तो उसने चूत को प्यार से चूमा.. शीला की सिसकी निकल गई.. “आआआआह्ह.. !!!”

 

रूखी ने हस्तक्षेप किया.. शीला का हाथ पकड़कर उसे खटिया पर लिटा दिया.. ससुर भी कूदकर शीला की दोनों जांघों के बीच बैठ गया.. रूखी ने शीला की कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया.. बूढ़े ने शीला के भोसड़े को अब बड़ी ही मस्ती से चाटना शुरू कर दिया.. ​

 

अब रूखी और शीला दोनों निश्चिंत हो गए.. सब कुछ प्लान के मुताबिक हो रहा था.. शीला ने बूढ़े का सर अपने दोनों हाथों से पकड़कर चूत पर दबा दिया..

 

शीला: “आह्ह रूखी.. तेरा ससुर क्या मस्त चाटता है.. ऊई.. ओह्ह.. अमममम.. !!”

 

रूखी अपने दोनों पैर शीला के चेहरे के इर्दगिर्द जमाकर बैठ गई और अपनी झांटेदायर चुत को शीला के नाके के साथ रगड़ने लगी..

 

शीला: “उफ्फ़ रूखी.. तू ये बाल साफ क्यों नहीं करती? जंगल जैसा हो गया है पूरा”

 

शीला के स्तनों को अपने कूल्हों से रगड़ते हुए रूखी ने कहा “भाभी, बाबूजी को झांटों वाली पसंद है इसलिए.. ”

 

बूढ़ा चाटते हुए बोला “वैसे बिना बालों वाली भी बहोत सुंदर लगती है.. ” वो फिर से शीला के भोसड़े की गहराइयों में खो गया.. उसका लंड अभी भी लटक रहा था.. शीला ने आखिर रूखी की लकीर में अपनी जीभ घुसा ही दी.. साथ ही साथ वो रूखी के मटके जैसे बड़े स्तनों को दबा रही थी.. बूढ़े की जीभ उसके भोसड़े में ऐसा कहर ढा रही थी.. शीला उत्तेजित होकर रूखी की चूत चाट रही थी.. काफी देर तक ये सिलसिला चलता रहा

 

फिर रूखी शीला के ऊपर से उतर गई.. और अपने ससुर के सर के बाल खींचकर उन्हे शीला की चूत से अलग किया

 

रूखी: “क्या बाबूजी.. आपको नई वाली मिल गई तो मुझे भूल गए? मेरी भी चाटिए ना.. ”

 

ससुर: “अरे बहु.. तुम्हारी तो रोज चाटता हूँ.. आज मेहमान आए है तो पहले उन्हे तो खुश करने दो.. ” रूखी ने एक ना सुनी और ससुर का चेहरा खींचकर अपनी चूत पर लगा दिया.. शीला उठकर बूढ़े के लंड को सहलाने लगी.. रूखी की चुत थोड़ी देर चूसकर वह बूढ़ा फिर से शीला की ओर बढ़ा.. शीला की गोरी लचकदार चूचियों के ऊपर टूट पड़ा.. उन मदमस्त उरोजों को वह दोनों हाथों से मसलने लगा.. शीला उस बूढ़े के खड़े लंड की चमड़ी आगे पीछे कर रही थी.. बूढ़े ने उंगली और अंगूठे के बीच शीला की निप्पल को दबा दिया.. शीला की चीख निकल गई.. उसने बूढ़े को धक्का देकर खटिया पर सुला दिया और उसके लंड को मस्ती से चूसने लग गई

 

रूखी अपने ससुर के मुंह पर सवार हो गई.. ससुर अपनी बहु की चुत चाट रहा था और शीला उसका लंड चूस रही थी.. शीला का चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था.. थोड़ा सा चूसने के बाद शीला से ओर रहा नहीं गया.. उसने अपने चूत के होंठ फैलाए और बूढ़े के लंड के ऊपर बैठ गई..

 

ऊपर नीचे करते हुए उसने गति बढ़ाई.. बूढ़े के मुंह पर रूखी की चूत थी और लंड पर शीला चढ़ी हुई थी.. थोड़ी देर कूदने पर ही शीला की चूत ने पानी छोड़ दिया.. भोसड़ा एकदम सिकुड़ गया.. और उसके अंदर फंसे लंड का गला घोंट दिया.. बूढ़ा ससुर भी आनंद से कराहने लगा..

 

शीला: “बहोत मज़ा आ रहा है आह्ह आह्ह आह्ह” अपने स्तन दबाते हुए वह अब अभी आखिरी धक्के लगा रही थी

 

रूखी के चुत ने भी रस छोड़ दिया.. अपनी जीभ और लंड से उस बूढ़े ससुर ने दो दो औरतों को एक साथ तृप्त कर दिया था.. सिसकियाँ भरते हुए रूखी अपनी चुत के होंठ ससुर के मुंह पर रगड़े जा रही थी.. स्खलित होते हुए वह कराह रही थी.. उसके ससुर ने रूखी के स्तनों को इतनी जोर से दबाया की दूध की पिचकारी से उनका पूरा सर गीला हो गया.. शीला ठंडी होकर नीचे उतर गई.. बूढ़े ने अब रूखी को लेटाया और उसपर सवार होकर धक्के लगाने लगा.. थोड़े ही धक्कों के बाद बूढ़ा आउट हो गया.. पर आउट होने से पहले उसने रूखी की चुत से एक बार ओर पानी निकाल दिया.. ध्वस्त होकर वो रूखी के बड़े बड़े स्तनों के बीच गिर गया.. और वहीं पड़ा रहा

 

थोड़ी देर वैसे ही खटिया में पड़े रहने के बाद सबसे पहले शीला खड़ी हुई.. बूढ़े ससुर के लंड पर आभार-सूचक किस करते हुए उसके लाल टोपे पर अपनी जीभ फेर दी.. सुपाड़े की नोक पर लगी वीर्य की बूंद को भी चख लिया.. लंड ने एक बार ठुमक कर शीला को सलामी दी..

 

अपनी बहु के स्तनों से खेलते हुए बूढ़े ने कहा “मज़ा आया तुम दोनों को?”

 

रूखी: “मुझे तो बहोत मज़ा आया.. आप शीला भाभी से पूछिए.. ” रूखी उठकर ब्लाउस पहनने लगी.. उस दौरान शीला अपने कपड़े पहन चूकी थी..

 

रूखी: “आप साड़ी में कितनी खूबसूरत लगती हो भाभी!!! कितना मस्त शरीर है आपका.. एकदम भरा हुआ.. ठीक कहा न मैंने बाबूजी” आखिरी हुक को बड़ी ही मुश्किल से बंद करते हुए रूखी ने कहा.. शीला रूखी के बड़े स्तनों को बस देखती ही रही.. उसकी चूत में नए सिरे से चुनचुनी होने लगी..

 

शीला: “रुखी, मुझसे तो कहीं ज्यादा तुम सुंदर हो.. तुझे पता नहीं है.. अगर फेशनेबल कपड़े पहनकर बाहर निकले तो लोग मूठ मार मारकर मार जाए.. अब मुझे चलना चाहिए.. काफी देर हो गई.. चलिए बाबूजी, मैं चलती हूँ.. फिर कभी आऊँगी.. मुझे भी अपनी बहु ही समझिए आप.. सिर्फ रूखी बहु का ही नहीं.. अब से आपको शीला बहु का भी ध्यान रखना होगा”

 

ससुर: “हाँ हाँ बहु रानी.. जब मन करें तब चली आना.. मैं तैयार हो आपको खुश करने के लिए”

 

शीला: “रूखी, तू मेरे घर पर आकर मुझे मिल.. मेरे पति कुछ दिनों में वापिस लौट आएंगे.. उससे पहले मिलने आ जाना”

 

रूखी: “हाँ भाभी.. जरूर आऊँगी”

 

अपना भोसड़ा ठंडा कर शीला वहाँ से घर की ओर निकल गई.. उसके चेहरे पर संतोष और तृप्तता के भाव थे.. घर पहुँचने की उसे कोई जल्दी नहीं थी.. इसलिए रिक्शा लेने के बजाए वह चलने लगी..

अपने कूल्हें मटकाते हुई शीला रास्ते पर चलती जा रही थी.. बड़े बड़े स्तन, गदराया बदन, कमर से नीचे पहनी हुई साड़ी और मटकों जैसे चूतड़.. ऐसी कोई स्त्री चलते हुए जा रही हो तो स्वाभाविक तौर पर सब की नजर उस पर चिपक जाएगी.. क्या जवान और क्या बूढ़े.. जो भी देखता था.. देखकर ही अपने लंड एडजस्ट करने लगता था.. कुछ साहसी तो मन ही मन मूठ मारने लगे थे.. जिन बूढ़ों से कुछ हो नहीं पा रहा था वह चक्षु-चोदन का आनंद ले रहे थे..

 

घर पहुंचकर शीला बिस्तर पर पड़ी.. सोच रही थी “मदन के आने के बाद ये सब बंद कर देना पड़ेगा.. वैसे मदन के लौटने के बाद इन सब के जरूरत भी नहीं रहेगी.. पर एक बार बाहर का खाने का चस्का लग जाएँ फिर याद तो आएगी ही.. जो होगा देख लेंगे.. जब मौका मिले तब चौका लगा देना ही गनीमत है.. बाकी फिर मदन तो है ही.. !! और इस तरह रूखी के घर जाकर अपना कार्यकरम निपटा लूँ तो मदन को भी पता नहीं चलेगा.. हाँ रूखी की सास का प्रॉब्लेम है.. पर वो बुढ़िया और कितना जिएगी.. ?? जल्दी मर जाएँ तो अच्छा.. झंझट खतम हो.. ”

 

तभी डोरबेल बजने की आवाज आई.. आईने में खुद को ठीक करके शीला बाहर आई और दरवाजा खोला

संजय आया हुआ था..

 

संजय: “चलिए मम्मी जी, मैं आपको लेने आया हूँ”

 

शीला आश्चर्य से “लेने आए हो? पर कहाँ जाना है?”

 

संजय: “आप घर पर अकेली हो.. वैशाली भी चार दिनों बाद लौटेगी.. यहाँ बैठे रहने से तो अच्छा है की आप मेरे साथ चलिए.. मुझे भी कंपनी मिलेगी”

 

शीला: “लेकिन जाना कहाँ है??” शीला असमंजस में थी

 

संजय: “आप तीन दिन के कपड़े पैक कर लो.. कहाँ जाना है ये मैं बाद में बताता हूँ.. आप के लिए सरप्राइज़ है.. अभी नहीं बताऊँगा”

 

शीला: “नहीं.. ऐसे मैं घर छोड़कर नहीं चल सकती.. ”

 

संजय: “मम्मी जी, आपको वैशाली की कसम.. किस बात का डर है आपको?”

 

शीला: “डर नहीं है बेटा.. पर सोचना तो पड़ता है ना.. !!”

 

संजय: “अपने दामाद के साथ चलने में क्या सोचना?? चलिए एक घंटे में निकलना है.. आप कपड़े पेक कीजिए.. अभी गाड़ी आती ही होगी”

 

शीला: “अरे पर मुझे ये तो बताओ की जाना कहाँ है?”

 

संजय: “आपको मुझ पर भरोसा नहीं है? ”

 

शीला मन में सोचने लगी.. “भरोसा तो पूरा है तुझ पर मादरचोद.. की तू एक नंबर का कमीना है.. इसीलिए तो इतना सोचना पड़ रहा है” शीला को पता नहीं चल रहा था की वो क्या करें

 

माउंट आबू पहुंचते ही वहाँ के मदहोश वातावरण को देखकर सब रोमेन्टीक होने लगे.. वैशाली बार बार पीयूष की ओर देख रही थी.. वो सोच रही थी की एक बार अगर आधा घंटा पीयूष के साथ कहीं बाहर निकलने का मौका मिले तो मज़ा आ जाए.. जी भर कर पीयूष के साथ मजे करूंगी अगर ऐसा हुआ तो.. उस दिन रेत के ढेर में पीयूष ने जिस तरह उसके जिस्म को रौंदा था.. आह.. याद करते ही मज़ा आ गया.. वातावरण और विचारों के संगम से वैशाली की चुत में झटके लगने लगे थे.. दूसरी तरफ मौसम के कडक स्तनों को देखकर ठंडी आहें भर रही थी वैशाली.. अभी तक किसी मर्द का हाथ नहीं लगा है.. इसलिए मस्त टाइट है.. एक बार किसी का हाथ लगते ही आकार बिगड़ जाएगा.. वैशाली अपने खुद का भूतकाल याद करने लगी..

 

शुरुआत के समय में जब संजय के साथ सब ठीक चल रहा था तब संजय को उसके स्तन कितने पसंद थे!! जितनी बार वो दोनों अकेले पड़ते थे तब सब से पहले संजय उसके स्तन चूसता था.. कभी कभी किचन में वो काम कर रही हो.. सास ससुर बाहर बैठे हो.. तब भी संजय चुपके से आकर.. उसका टॉप ऊपर करके उसके बबले चूसकर भाग जाता.. वैशाली लाख मना करती पर वो मानता ही नहीं था.. वैशाली सोचती की उसका पति उसे कितना प्यार करता था.. !!! जब कोई अपने पीछे पागल हो तो कितना अच्छा लगता है.. !! वैसा ही वैशाली को महसूस होता था.. तकलीफ तो तब होती थी जब घर पर मेहमान आए हुए हो.. पूरा घर भरा हुआ हो तब संजय को अपनी चुची चुसवा पाना बेहद कठिन हो जाता था.. पर संजय इतना जिद्दी था की उसके बॉल चूसे बगैर हटता ही नहीं था..एक बार तो ज्यादा मेहमान होने की वजह से संजय-वैशाली के बेडरूम में भी ४ लोग सोये हुए थे.. तब भी संजय चादर के नीचे घुसकर वैशाली की निप्पलों को चूसने के बाद ही सोता था.. अपने दांत निप्पल में ऐसे गाड़ देता की दूसरे दिन वैशाली को दर्द होता रहता.. कितने सुहाने दिन थे वोह..!!!

 

पर वो वक्त जल्दी ही खतम हो गया.. संजय अपनी असलियत पर आ गया.. और फिर जो दुख के दिन शुरू हुए वो अब तक चल रहे थे.. संजय की याद आते ही वैशाली के चेहरे पर विषाद के भाव आ गए

 

कविता भी पीयूष को देख रही थी.. पर पीयूष जैसे उसे जानता ही न हो वैसे खिड़की से बाहर.. पहाड़ों के टेढ़े मेढ़े रास्तों को.. और दूर दिख रहे उत्तुंग शिखरों को देखने में व्यस्त था.. ये मर्द हमारे दिल का दर्द कब समझेंगे? पीयूष हमेशा अपने एंगल से ही सोचता है.. कभी उसने मेरे दृष्टिकोण को समझने का प्रयास ही नहीं किया.. मुझे इसीलिए तो पिंटू इतना पसंद है.. पिंटू की बात ही निराली थी.. जब साथ पढ़ाई करते थे तब एक बार पिंटू के मुंह से प्याज की बदबू आ रही थी.. कविता ने उसे टोका.. उसके बाद पिंटू ने कभी प्याज नहीं खाया.. इतना महत्व देता है वो मुझे.. सारे मर्द अगर ऐसे ही हमारी भावनाओं को समझे तो औरत अपना सबकुछ समर्पित कर दे उसे..

 

ऐसा नहीं था की कविता को पीयूष से प्यार नहीं था.. बस ऐसी ही छोटी छोटी बातों को लेकर असंतोष था.. पर ऐसी बातों पर अगर वक्त पर ध्यान न दिया जाएँ तो आगे जाकर यही बातें भयानक स्वरूप धारण कर लेती है..

 

माउंट आबू के नज़ारों का अगर कोई सब से ज्यादा आनंद ले रहा था तो वोह थे.. राजेश, रेणुका, फाल्गुनी और सब की आँखों का तारा.. मौसम !!

 

मौसम के कच्चे कुँवारे बदन को देखकर राजेश का लंड पेंट के अंदर.. सेंसेक्स और निफ्टी की तरह ऊपर उठ रहा था.. मौसम के गालों के डिम्पल देखकर राजेश की हवस जलने लगती थी.. गोरी सुंदर मौसम के टाइट ड्रेस के अंदर छुपे हुए अमरूद साइज़ के स्तन देखकर राजेश के पूरे बदन में घंटियाँ बजने लगती थी.. वो सोच रहा था “कुछ भी करके ईसे पटाना होगा.. ” मन ही मन.. मौसम के जोबन को लूटने के ख्वाब देखते हुए राजेश ने रेणुका से पूछा

 

राजेश: “ये मौसम कहाँ तक पढ़ी है? अगर उसे कंप्युटर चलाना आता हो हमारी ऑफिस में एक जगह खाली है.. तू पूछकर देखना अगर वह नौकरी करना चाहती हो तो ”

 

रेणुका के दिमाग की बत्ती जल गई.. औरतों के पास एक खास छठी इंद्रिय होती है.. जो उन्हे अपने आसपास के मर्दों की नजर के बारे में आगाह कर देती है.. ५० फिट दूर खड़े पुरुष की नजर कहाँ है वह औरतें एक पल में जान लेती है.. कुदरत ने जब औरतों को रूप दिया तो उसको संभालने के लिए ये शक्ति भी साथ ही दी..

 

रेणुका: “तुम चिंता मत करो राजेश.. मैं बात कर लूँगी.. तू एक बार पीयूष को पूछ ले.. मैं मौसम से डाइरेक्ट बात करती हूँ” रेणुका ने एक कुटिल मुस्कान के साथ राजेश को कहा.. राजेश को इस मुस्कुराहट का अर्थ समझ में नहीं आया.. वैसे मर्दों को औरतों की आधी बातें समझ में ही कहाँ आती है !!!

 

इन सब बातों से बेखबर पीयूष.. खिड़की से बाहर नजर आते अप्रतिम कुदरती नज़ारों का आनंद ले रहा था.. चारों तरफ पहाड़ ही पहाड़.. हरे घने जंगल.. पतली सी घुमावदार सड़क.. बादलों से बातें करते हुए शिखर.. आहाहाहा.. देखकर ही मन प्रफुल्लित हो जाता था.. नशा सा हो जाता था देखकर.. अगर इंसान को पीना आता हो.. तो ऐसी कौन सी चीज है जो शराब नहीं है.. !!!

“दोस्तों, दस मिनट में हम माउंट के ऊपर पहुँच जाएंगे.. आपकी पर्सनल शॉपिंग के अलावा जो भी खर्च होगा वो मैडम ही देगी.. इन्जॉय योरसेल्फ पर थोड़ा कंट्रोल भी रखना” हँसते हुए राजेश ने घोषणा की..राजेश का इशारा किस तरफ था वो सब समझ गए.. गुजरात से अधिकतर लोग माउंट आबू शराब पीने ही आते है.. पीने वालों के लिए यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है.. सब का दिल कर रहा था की कब होटल पहुंचे और शराब की महफ़िल जमाए.. राजेश की घोषणा का सबने तालियों से स्वागत किया.. साथ ही सब अपना समान इकठ्ठा करने लगे

 

जैसे ही बस रुकी.. सब धीरे धीरे नीचे उतरे.. पहाड़ की तलहटी पर एक सुंदर आलीशान होटल थी.. माउंट आबू का वातावरण वाकई बेहद उत्तेजक था.. फेशनेबल छोटे छोटे कपड़े पहनी लड़कियां.. अपने टाइट टॉप के ऊपर से आधे स्तन बाहर दिखाती हुई चले जा रही थी.. कुछ फिरंगी टुरिस्ट भी नजर आ रहे थे.. पास ही से गुजर रही एक फिरंगी लड़की की लो-नेक टॉप से नजर आ रही क्लीवेज को देखकर अपना लंड खुजा रहे पिंटू को गुस्से देख रही थी कविता.. वह सोच रही थी.. इन मर्दों को सारी औरतों की छातियों में ऐसा क्या दिख जाता है जो वहीं देखते रहते है.. !! सब के सब साले नालायक!!

रेणुका के कहने पर, मौसम और फाल्गुनी को एक अलग कमरा दे दिया गया.. होटल के तीसरे माले पर सुंदर बालकनी वाला कमरा उन दोनों को देखते ही पसंद आ गया.. फाल्गुनी ने इंटरकॉम पर फोन लगाकर एक कडक कॉफी का ऑर्डर दिया.. मौसम ने अपने लिए चाय बोली.. पहले तो दोनों ने अपने तंग कपड़े उतार दिए और आरामदायक टीशर्ट और शॉर्ट्स पहन लिए.. बाहर बालकनी में खड़े रहकर बादलों को गुजरते देखा जा सकता था उतनी ऊंचाई पर थी होटल.. दोनों लड़कियां खुश होकर बादलों संग खेलने लगी..

 

माउंट आबू का वातावरण इतना अद्भुत है की अगर कोई बीमार यहाँ आकर रहें तो कुछ ही दिनों में ठीक होकर वापिस लौटे.. बालकनी में टेबल पर पैर जमाकर दोनों सहेलियाँ चाय और कॉफी की चुस्की लेने लगी.. मौसम के माउंट आबू पर प्रवेश करते ही जैसे पूरे पर्वत की सुंदरता दोगुनी हो गई थी.. उसे गोरे गालों में पड़ते खड्डों के सामने नक्की लेक की सुंदरता भी फीकी लग रही थी.. उसके मस्त स्तनों के आगे पहाड़ों की उछाइयाँ भी कम पड़ती नजर आ रही थी

 

बालकनी में बैठे दोनों कुंवारी अल्हड़ लड़कियां.. दुनियादारी से बेफिक्र होकर मजे लूट रही थी.. फाल्गुनी अक्सर शांत रहती.. पर अकेले में अपनी सहेली के साथ वह भी खुल गई थी.. उसके चेहरे पर निर्दोषता के साथ साथ एक अजीब सा डर और घबराहट छुपे हुए थे..

दोनों सहेलियाँ अपनी दुनिया में मस्त थी तभी वहाँ पीयूष आया.. पीयूष ने मौसम का चाय का कप उठाया और पीने लगा..

 

पीयूष: “क्यों साली साहेबा!! सब कुछ ठीक है ना!!”

 

मौसम: “अरे जीजू आप मेरी झूठी चाय क्यों पी रहे हो.. कहते है की किसी का झूठा खाएं या पिए तो उनके जैसे बन जाते है”

 

पीयूष: “हा हा हा.. मौसम अगर मैं तेरे जैसा बन गया तो सब से पहले राजेश सर को ही पागल कर दूंगा.. जिससे की मेरी तनख्वाह बढ़ जाए.. ”

 

फाल्गुनी ने हँसते हुए कहा.. “इसका मतलब ये हुआ की मौसम ने राजेश सर को पागल बना दिया है.. सही कहा न मैंने?”

 

पीयूष: “हाँ यार.. बस में वो मौसम को ही देखें जा रहे थे.. मेरे खयाल से वो मौसम पर लाइन मार रहे थे”

 

मौसम: “क्या जीजू आप भी!! कुछ भी उल्टा सीधा बोलते हो.. ” कृत्रिम क्रोध के साथ मौसम ने कहा

 

फाल्गुनी बैठे बैठे साली और बहनोई की शरारती बातों का मज़ा ले रही थी..

 

“क्या बात है पीयूष? अपनी साली को मेरे खिलाफ क्यों भड़का रहा है?” राजेश सर की एंट्री हुई..

 

 

 

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