शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-45

(Desi Kahani) 8

redwalker69 2026-05-22 Comments

This story is part of a series:

तभी पीयूष के मोबाइल पर मिसकोल आया.. वैशाली ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए किया था.. पीयूष ने उसकी ओर देखा.. वैशाली के मांसल जिस्म को रेत के ढेर में फैलाकर जिस तरह चोदा था वह याद आते ही पीयूष का उस्ताद हरकत में आ गया..

 

बस तेज गति से सड़क पर सरपट दौड़ रही थी.. गति और स्मृति के बीच जरूर कोई गहरा संबंध है.. ऐसा क्यों होता है की बस या ट्रेन के सफर में ही सारी गुजरी बातें याद आने लगती है ???

 

मौसम और फाल्गुनी के साथ बैठकर गप्पे लड़ा रही कविता का सारा ध्यान अपने बंदर जैसे शरारती पति के ऊपर ही था.. वो देख रही थी कैसे पीयूष कभी रेणुका को देखकर मुसकुराता तो कभी वैशाली की गांड को देखकर अपनी लार टपकाता.. बहोत गुस्सा आ रहा था कविता को.. तभी उसने पिंटू को देखा.. गोरे चिट्टे क्लीन शेव पिंटू को देखकर उसके गालों को चूमने का मन कर रहा था कविता को.. काश अगर यहाँ शीला भाभी होती.. तो पिंटू के साथ उसका कुछ न कुछ सेटिंग जरूर करवा देती.. बहोत प्रेक्टिकल थी शीला भाभी.. कविता के ह्रदय में अपनी प्रेमी को लेकर ख्वाहिशें जागने लगी.. काश कभी मुझे और पिंटू को अकेले घूमने जाने का चांस मिल जाएँ .. !! एक सीट पर साथ साथ बैठकर.. हाथों में हाथ डालकर.. उसके कंधे पर सर रखकर सोने की कल्पना करते हुई कविता भारी सांसें लेने लगी.. कितना क्यूट लग रहा था पिंटू..!!

 

हाइवे पर सरपट दौड़ती बस एक होटल पर आकर रुक गई “हम सब थोड़ी देर रुकेंगे.. जिन्हे फ्रेश होना हो वह जल्दी निपटाए.. हम चाय पीकर तुरंत निकल जाएंगे ताकि पहुँचने में देरी न हो.. आगे थोड़ा सा ट्राफिक भी होगा”

 

सब फटाफट वॉशरूम में घुस गए.. मौसम और कविता लेडिज टॉइलेट में चले गए.. इन हाइवे हॉटेलों के टॉइलेट में कैसी गंदी गंदी बातें लिखी हुई होती है!!! मौसम पेशाब करते हुए सब पढ़ रही थी.. एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था और उसके नीचे लिखा था “पूरी रात चूत चटवाने के लिए मुझे कॉल करे.. ” एक दूसरा वाक्य ऐसा था “मस्त चूत है आपकी.. मेरा लंड लोगी क्या?”

 

मौसम ने पहली दफा ऐसा सब पढ़ा था.. “लंड” शब्द बार बार पढ़ने का दिल कर रहा था उसका.. पेशाब कर लेने के बाद उसने बाकी सारी लिखाई भी पढ़ ली.. पूरे जिस्म में सुरसुरी चलने लगी उसके.. वो वापिस आकर बस में बैठ गई.. थोड़ी देर बाद फाल्गुनी भी आकर उसके पास बैठ गई.. पूरी बस खाली थी.. बस मौसम और फाल्गुनी ही थे बस में..

 

फाल्गुनी: “यार, लोगों में तमीज़ नाम की कोई चीज ही नहीं है.. !!”

 

मौसम: “क्यों? क्या हुआ?”

 

फाल्गुनी: “अरे बाथरूम गई तो रास्ते में एक आदमी बाहर खड़ा खड़ा ही पेशाब कर रहा था.. छोटा सा रास्ता था, मैं कैसे जाती? यार ये मर्द लोग न.. बिल्कुल बेशर्म होते है”

 

मौसम: “हाँ यार.. मैं भी अभी बाथरूम गई तब ऐसी गंदी गंदी बातें पढ़ी.. दीवार पर लिखी हुई”

 

तभी वैशाली आई और बातों में शामिल हो गई

 

वैशाली: “क्या हुआ? कौनसी गंदी बातों की बात चल रही है?”

 

मौसम और फाल्गुनी ने अपने अनुभवों के बारे में बताया.. वैशाली हंस पड़ी

 

वैशाली: “जो शब्द अभी तुम्हें गंदे लगते है.. वहीं शब्द बाद में तुम्हें बहोत रोमेन्टीक लगेंगे.. देखना तुम दोनों.. !! और फाल्गुनी.. तूने उस आदमी का देखा की नहीं?”

 

फाल्गुनी भोली बनकर बोली: “क्या देखा?”

 

वैशाली: “अरे उसका लंड यार.. और क्या? मर्दों की दोनों जांघों के बीच और क्या लटकता है?”

 

फाल्गुनी शर्मा गई “क्या दीदी आप भी.. !!”

 

गंदी गंदी बातें सुनकर मौसम और फाल्गुनी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था.. जीवन में पहली बार ये सब बातें सुन रही थी वह दोनों.. वैशाली ने अपने अनुभव का ज्ञान उन दोनों के बीच बांटा..

 

वैशाली: “तुम दोनों अभी नादान हो.. पर एक बार लंड के संपर्क में आने के बाद उससे दूर नहीं रह पाओगी”

 

मौसम: “लगता है दीदी को जीजु की याद आ रही है”

 

फाल्गुनी हँसते हुए “हाँ दीदी.. अब क्या करोगी?”

 

वैशाली: “माउंट आबू जाकर कोई नया जीजु ढूंढ लूँगी.. और क्या.. हा हा हा हा हा.. !!”

 

थोड़ी देर में सब बस में वापिस आने लगे.. सब से पहले पीयूष आया.. उसे देखते ही वैशाली का मन ललचा गया.. उसके पीछे पीछे रेणुका बस में चढ़ी.. बस की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए रेणुका की चूचियाँ पीयूष की पीठ से दबकर रह गई.. पीयूष का दिल बाग बाग हो गया.. औरत के जिस्म का गरम स्पर्श.. और वो भी स्तनों का.. रेणुका ने पीयूष को सृष्टि का सबसे अप्रतिम सुख देकर मालामाल कर दिया था.. बस में बैठे किसी को भी इन दोनों के खेल के बारे में जरा सा भी अंदाजा नहीं था..

 

कविता पिंटू से बात करने का मौका ढूंढ रही थी.. यह ध्यान रखते हुए की पीयूष को उसके और पिंटू के बारे में भनक न लगे.. आज अगर शीला भाभी साथ होती.. तो अब तक उसकी और पिंटू की कोई न कोई सेटिंग तो करवा ही देती.. क्या करू? पिंटू अकेले घूम रहा है.. और मैं उसके साथ होने के लिए मर रही हूँ.. कल रात पीयूष ने दिमाग खराब कर दिया.. और अब ये समाज की लक्ष्मणरेखा मुझे पिंटू से दूर रखे हुए है.. मैं यहाँ नहीं आई होती तो अच्छा होता.. कम से कम पिंटू को सामने देखकर भी बात न कर पाने का दुख तो नहीं होता!!! प्रेमी के करीब होते हुए भी दूरी बनाए रखने की मजबूरी से बड़ा दुख कोई नहीं होता.. बस में सब मजे कर रहे थे.. सिर्फ कविता को छोड़कर.. पिछली सीट पर बैठे बैठे वैशाली.. मौसम और फाल्गुनी को सेक्स एज्युकेशन दे रही थी..

शीला घर पर अकेली थी.. एकांत मिलते ही उसके दिल में गुदगुदी सी होने लगती थी.. संजय सुबह ९ बजे तैयार होकर घर से निकला उसके बाद शीला ने सब से पहला फोन जीवा को किया.. पर हाय रे किस्मत.. !! जीवा काम से दूसरे शहर गया हुआ था.. शीला ने दूसरा फोन रूखी को किया.. रूखी शीला की आवाज सुनकर बहोत खुश हो गई..

 

रूखी: “कितने दिनों के बाद याद किया आपने भाभी.. आप तो जैसे मुझे भूल ही गए”

 

शीला: “ऐसा नहीं है रूखी.. मैं तो तुझे रोज याद करती हूँ.. पर घर पर सेटिंग भी तो होना चाहिए.. !! रूखी, मेरी हालत बहोत खराब है.. घर में इतने सारे झमेले है की क्या बताऊ!! अभी चार दिन का वक्त मिला है इसलिए तुझे फोन किया.. जीवा तो शहर से बाहर है.. मैं ये मौका गंवाना नहीं चाहती.. कोई दूसरा है तेरे ध्यान में?”

 

रूखी: “भाभी, अगर आप चाहे तो रसिक के बाबूजी के साथ.. ”

 

शीला चोंक गई “तेरे ससुर के साथ.. ???”

 

रूखी: “हाँ हाँ.. रसिक का बाप मतलब मेरा ससुर ही.. और कौन!! मेरी और उनकी गाड़ी अब पूरे जोश के साथ निकल पड़ी ही.. जब घर में ही खूंटा मिल जाए तब भला बाहर ढूँढने की क्या जरूरत!!”

 

शीला: “रूखी नालायक.. एक नंबर की रंडी निकली तू तो.. अपने ससुर के साथ ही शुरू हो गई!! जीवा और रघु के लंड से जी नहीं भरता क्या तेरा??”

 

रुखी: “एक लोचा हो गया है भाभी.. मेरी सास कुछ दिनों के लिए बाहर गई हुई है.. मेरे ससुर उनके दोस्त के बेटे की शादी में गए हुए थे.. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने जीवा को फोन करके बुला लिया.. मैं टांगें खोलकर जीवा के लंड के धक्के ले रही थी तभी बूढ़ा आ टपका और हम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया उस चूतिये ने.. !!!”

 

शीला: “फिर क्या हुआ.. ??”

 

रूखी: “फिर क्या होना था.. जीवा को तो मैंने जैसे तैसे रवाना कर दिया.. पर बूढ़े ने कहा की मुझे चोदने दे.. वरना तेरा भंडा फोड़ दूंगा.. मैंने बहोत मना किया पर वो माना ही नहीं.. पर एक बात कहूँ भाभी.. बाहर के मर्दों को घर बुलाने में खतरा तो है.. आस-पड़ोस वाले देख लेते है.. हजार बातें होती है.. उससे अच्छा तो घर में ही जुगाड़ हो जाए वही बेहतर है.. ससुर बूढ़ा है पर है कमीना ताकतवर.. असली घी के जो बड़ा हुआ है”

 

शीला का गला सूखने लगा रूखी की बातें सुनकर.. “फिर क्या हुआ? बूढ़े के साथ मज़ा आया तुझे? जीवा जैसा मज़ा तो नहीं आया होगा !!”

 

रूखी: “भाभी, थोड़ा बहोत ऊपर नीचे चलता है.. पर इसमे पकड़े जाने का कोई डर नहीं.. पूरा दिन घर में जैसे मर्जी, जितनी मर्जी बस चुदवाते रहो.. कल तो मेरे ससुर ने पूरा दिन मुझे कपड़े ही नहीं पहनने दिए.. मुझे कहता है की “रूखी, तुझे नंगी देखना बहोत अच्छा लगता है.. कपड़े तेरे शरीर पर जचते ही नहीं है.. ” और तो और भाभी, पूरा दिन जब में घर का काम करता हूँ तब वो यहाँ वहाँ उंगली करता रहता था.. सच कहूँ भाभी.. मुझे तो बहोत मज़ा आया”

 

शीला: “ये सब अभी के लिए तो ठीक है.. पर जब तेरी सास वापिस आ जाएगी फिर क्या करोगे तुम दोनों?”

 

रूखी: “अरे मेरी सास तो सुबह २ घंटे मंदिर जाती है तब मैं मेरे ससुर के साथ निपटा लूँगी.. ये सब करने के लिए वक्त चाहिए कितना.. एक घंटा तो बहोत हो गया मेरे लिए”

 

रूखी की बातें सुनकर शीला की चूत में खुजली होने लगी..

 

शीला: “यार रूखी, मुझे तो तुम दोनों को चोदते हुए देखना है.. अभी तेरा ससुर घर पर है क्या? मैं देखना चाहती हूँ.. ससुर और बहु के बीच का सेक्स.. करते हुए तुझे शर्म नहीं आई थी क्या?”

 

रूखी: “भाभी, वो अभी बाहर बीड़ी का बंडल लेने गया है.. आता ही होगा.. बीड़ी पीते पीते अपना लंड मेरे हाथ में दे देगा”

 

शीला: “मैं एक काम करती हूँ.. अभी तेरे घर पर आती हूँ.. जैसे ही तुम दोनों का कार्यक्रम शुरू हो जाए, तू मुझे मिसकोल कर देना.. और हाँ दरवाजा सिर्फ अटकाकर ही रखना.. कुंडी मत लगाना.. और तेरे ससुर को पूरा नंगा कर देना.. मैं अचानक दरवाजा खोलकर आऊँगी.. और तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लूँगी.. और फिर शामिल हो जाऊँगी.. जो दांव उसने तेरे और जीवा पर आजमाया वहीं दांव से हम बूढ़े को फँसायाएंगे”

 

रूखी: “मुझे कोई दिक्कत नहीं है भाभी.. आप आ जाइए”

 

शीला: “अरे मैंने तो घर को ताला भी लगा दिया.. थोड़ी ही देर में पहुँच जाऊँगी” शीला ने हाथ ऊपर कर रिक्शा को रोका और अंदर बैठ गई.. रिक्शा में बैठे बैठे उसने अपनी सुलगती चूत को घाघरे के ऊपर से ही मुठ्ठी में भरकर दबा दिया.. तब जाकर वह थोड़ी शांत हुई.. इतनी तेज खुजली हो रही थी.. रहा नहीं जा रहा था शीला से..

 

तभी रूखी का कॉल आया

 

रूखी: “भाभी, वो आ गए.. फोन रखती हूँ.. मेरा मिसकोल देखते ही आप अंदर चले आना”

 

अगले दस मिनट में शीला रूखी के घर के बाहर खड़ी थी.. उसने धीरे से दरवाजा खोला.. रूखी का मिसकोल अभी आया नहीं था.. पर शीला से रहा ही नहीं जा रहा था.. मुख्य कमरे से गुजरते हुए वह दूसरे कमरे के दरवाजे के पीछे सटकर अंदर का नजारा देखने की कोशिश करने लगी.. अंदर का द्रश्य देखकर शीला के भोसड़े में १०००० वॉल्ट का झटका लगा..

 

अगले दस मिनट में शीला रूखी के घर के बाहर खड़ी थी.. उसने धीरे से दरवाजा खोला.. रूखी का मिसकोल अभी आया नहीं था.. पर शीला से रहा ही नहीं जा रहा था.. मुख्य कमरे से गुजरते हुए वह दूसरे कमरे के दरवाजे के पीछे सटकर अंदर का नजारा देखने की कोशिश करने लगी.. अंदर का द्रश्य देखकर शीला के भोसड़े में १०००० वॉल्ट का झटका लगा..

 

रूखी का ससुर और रूखी दोनों ही खटिया पर नंगे थे.. वो बूढ़ा रूखी के मदमस्त बबले पकड़कर दबाते हुए रूखी से कुछ बात कर रहा था.. रूखी धोती के ऊपर से अपने ससुर के लंड से खेल रही थी.. दोनों सारी लाज-शर्म त्याग चुके थे.. रूखी ने ससुर को अपने ऊपर खींच लिया और बाहों में दबा दिया..

 

ससुर: “अरे बहु.. दरवाजा तो ठीक से बंद कर लेती.. बड़ी जल्दी है तुझे तो.. रुक.. मुझे दरवाजा बंद करने दे.. ” वो उठकर दरवाजा बंद करने आया.. शीला साइड में छुप गई.. उसी वक्त रूखी ने शीला को मिसकोल किया.. शीला को यकीन था की जैसे ही बूढ़ा खटिया पर लेटेगा, रूखी किसी न किसी बहाने से दरवाजा खोल ही देगी..

 

रूखी: “बाबूजी, मैं जरा पानी पीकर आती हूँ” पानी पीने के बहाने वो उठी और उसने दरवाजे की कुंडी खोल दी.. और फिर ससुर के साथ खटिया में लेट गई..

 

रूखी: “बाबूजी, दरवाजे की कुंडी खराब हो गई है.. ठीक से बंद ही नहीं होती.. कोई जोर से धक्का दे तो भी खुल जाती है.. उसे ठीक करवा दीजिए”

 

रूखी के ५-५ किलो को चुचे दबाते हुए बूढ़ा बोला “अरे जो होगा देखा जाएगा बेटा.. अभी यहाँ कौन आने वाला है.. आह्ह रूखी बेटा.. ये तेरा जोबन.. वाहह.. देख तो.. कितना कडक हो गया मेरा.. जवानी में भी ऐसा सख्त नहीं होता था.. क्या जादू है तेरे जोबन का मेरी बहुरानी.. !!”​

 

काले नाग की तरह खड़ा होकर फुँकार रहा था बूढ़े का लंड.. रूखी ने अपने हाथों से भेस के थन की तरह ससुर का लंड पकड़ा.. उसे ऐसा लगा मानों लोहे का गरम सरिया हाथ में ले लिया हो.. शीला को अब तक दरवाजा खोलकर अंदर आ जाना चाहिए था पर वह भी इस बूढ़े का लंड देखती ही रह गई..

 

ससुर: “बहु.. तू बड़ा मस्त चूसती है.. चल मुंह में लेकर चूस दे.. ” रूखी ने ससुर के लंड का सुपाड़ा मुँह में लिया ही था की तभी..

 

“रूखी घर में है???” शीला बाहर से चिल्लाई.. और दरवाजे को धक्का देकर अंदर चली आई

 

“अरे बाप रे.. !!” ससुर ने बस इतना ही कहा.. वह आजू बाजू चादर ढूँढने लगा.. पर रूखी का आयोजन एकदम सटीक था..सारे कपड़े उसने दूर रख दिए था.. थोड़ी सी दूरी से शीला को बूढ़े का झांटों से भरा हुआ खूँटे जैसा लंड दिखने लगा.. शीला ने शर्माने की एक्टिंग की और बोली

 

शीला: “हाय माँ.. ये क्या कर रही है तू रूखी?? कुछ शर्म हया है या नहीं तुझे?? अपने सगे ससुर के साथ ही..!!!! ”

 

रूखी: “अरे भाभी.. आप यहाँ? फोन करके आना चाहिए था आपको.. ”

 

बूढ़े के हाथ अभी भी रूखी के स्तनों पर ही थे.. उसका दिमाग काम ही नहीं कर रहा था.. वह स्तब्ध होकर शीला की ओर देख रहा था.. रूखी तो एक्टिंग कर रही थी.. पर बूढ़े की गांड फटकार दरवाजा हो गई थी..

 

शीला: “हाँ.. अब तो मुझे भी लगता है की फोन करके ही आना चाहिए था.. आप लोगों के रंग में भंग तो नहीं पड़ता.. !!”

 

रूखी: “भाभी आप रसोईघर में जाइए.. मैं आती हूँ अभी”

 

शीला: “नहीं रूखी.. मैं अब यहाँ एक पल भी नहीं रुकने वाली” शीला वापिस चलने लगी

 

ससुर: “अरे एक मिनट.. मेरी बात तो सुनिए आप.. !!” शीला रुक गई तो ससुर आगे बोला “आप कृपा करके किसीको ये बात मत बताना.. वरना हमारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी” दो हाथ जोड़कर नंगे खड़े ससुर ने शीला से विनती की.. शीला शर्मा गई.. आँखें झुकाकर शीला उस बूढ़े के लटक रहे लंबे लंड को निहार रही थी.. पहले के मुकाबले लंड सिकुड़ चुका था.. डर के कारण.. रूखी का नंगा जिस्म इतना सेक्सी लग रहा था की देखते ही शीला को कुछ होने लगा.. बेचारे ससुर का क्या दोष?

 

शीला को अपने लंड को तांकते देख बूढ़ा दौड़कर अपनी धोती ले आया.. और कमर पर जैसे तैसे बांध ली.. खटिया पर बैठकर उसने रूखी की ओर देखा और बोला

 

ससुर: “बहु, तुम अपनी सहेली को जरा समझाओ.. ये अगर किसी को बता देगी तो हम किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं बचेंगे”

 

रूखी ने इशारा कर अपने ससुर को चुप रहने के लिए बताया.. फिर वो शीला के पास आई और उसे कोने में ले जाकर बोली

 

रूखी: “भाभी अब क्या करना है.. ? आपने जैसा कहा था वैसा ही मैंने किया.. ”

 

शीला ने रूखी के कान में कहा “तेरे ससुर को समझा की अगर ईसे चुप करवाना हो तो किसी भी तरह हमारे साथ शामिल करना पड़ेगा.. मैं मना करती रहूँगी.. पर तुम दोनों अड़े रहना.. ”

 

रूखी अपने ससुर के पास आई और शीला सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गई.. रूखी ने अपने ससुर को वैसे ही समझाया.. ससुर थोड़ा सा झिझक रहा था पर मानने के अलावा ओर कोई चारा भी तो नहीं था.. आखिर इज्जत का सवाल था.. एक बुरे काम को छुपाने के लिए ओर दस बुरे काम करने पड़ते है..

 

बूढ़ा खड़ा हुआ.. और कुर्सी के पीछे जाकर शीला से लिपट कर उसके स्तन मसलने लग गया

 

शीला घबराने का अभिनय करते हुए “अरे ये क्या कर रहे है आप?? आपकी बेटी की उम्र की हूँ मैं.. कुछ शर्म है की नहीं आपको.. रूखी जरा समझा इनको”

 

ससुर ने शीला की निप्पलों को ब्लाउस के ऊपर से ही मरोड़ते हुए कहा ” बाप जैसा हूँ.. पर बाप तो नहीं हूँ ना.. तू भी एक बार चुदवा ले.. फिर देख.. रोज मेरे पास आएगी.. तू भी रूखी से कम नहीं है.. आह्ह” शीला के दोनों पपीतों को हथेलियों से सहलाते हुए बूढ़ा बोला

 

शीला: “छोड़ दीजिए मुझे वरना मैं चिल्लाऊँगी” शीला ने अपने आप को छुड़वाने की नाकाम कोशिश की

 

अब रूखी करीब आई और उसने शीला का पल्लू हटा लिया और बोली

 

रूखी: “उन्हे कर लेने दीजिए भाभी.. आपके छेद में थोड़ा सा अंदर बाहर कर लेंगे उसमें आपका क्या बिगड़ जाएगा?? वैसे भी आपके पति है नहीं.. आपको भी थोड़ा सा मज़ा मिल जाएगा.. बाबूजी आप कीजिए.. मैं भी देखती हूँ कैसे मना करती है ये”

 

छूटने के लिए शीला जानबूझकर कमजोर प्रयास कर रही थी.. और रूखी का ससुर शीला पर टूट पड़ा.. पर हुआ यह की इस सारी घटना के कारण बुढ़ऊ का लंड खड़ा ही नहीं हो पा रहा था.. अपने ससुर का मुरझाया लंड देखकर रूखी बोली

 

“ईसे खड़ा तो कीजिए बाबूजी.. !!! वरना आप भाभी को कैसे चोदोगे?”

 

ससुर: “तुझे पता तो है बहु.. बिना चूसे ये खड़ा ही नहीं होता.. और इन्हे देखकर ये शर्मा गया है.. इनसे कहो की ये ही कुछ करे ईसे जगाने के लिए”

 

शीला का हाथ पकड़कर रूखी ने बूढ़े ससुर के लंड पर रख दिया.. शीला शर्माने का नाटक करने लगी.. “ये सब ठीक नहीं हो रहा रूखी.. किसी को पता चल गया तो?”

 

रूखी ने शीला के ब्लाउस के हुक खोल दिए और ब्रा ऊपर कर दी.. दोनों पपीते बाहर झूलने लगे.. शीला के मदमस्त चुचे देखते ही बूढ़े के लंड में जान आने लगी.. थोड़ी ही देर में उस सुस्त लंड ने घातक स्वरूप धारण कर लिया

 

रूखी घुटनों के बल बैठ गई और शीला के हाथ से लंड ले लिया.. और चटकारे लेकर चूसने लगी.. बूढ़ा शीला के स्तनों को मसले जा रहा था.. थोड़ी देर लंड चूसकर रूखी खड़ी हो गई.. और बोली “बाबूजी, भाभी की चुत चाटिए.. तो वो जल्दी मान जाएगी.. जैसे मेरी चाटते हो बिल्कुल वैसे ही चाटना.. ” शीला के घाघरे का नाड़ा खींच लिया रूखी ने

 

ससुर: “अच्छा ऐसी बात है.. तो अभी मना लेता हूँ ईसे.. ”

 

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