शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-44

(Desi Kahani) 12

redwalker69 2026-05-22 Comments

This story is part of a series:

पीयूष को दोनों के बीच बैठ देखकर कविता जल कर खाक हो गई.. रेणुका से बात करने के बाद शीला भाभी की जो अच्छी छवि उसके मन में बनी थी वह एक ही पल में ध्वस्त हो गई.. अपने पति के पास बैठकर हंस हँसकर बातें कर रही शीला को देखकर बहोत गुस्सा आया उसे.. बातों बातों म एन वैशाली ने हँसकर पीयूष के हाथ पर ताली दी.. कविता के मन में जल रही आग में जैसे किसी ने पेट्रोल डाल दिया.. कविता की शक्ल रोने जैसी हो गई.. पर वैशाली या शीला.. दोनों में से किसी ने भी कविता की तरफ ध्यान नहीं दिया.. सब अपनी ही मस्ती में मस्त थे.. संजय कोने में बैठकर सिगरेट फूँकते हुए मौसम के नाइट ड्रेस से दिख रही ब्रा की पट्टी को देख रहा था..

 

कविता को इतना गुस्सा आया की उसका बस चलता तो अभी पीयूष को खींचकर घर ले जाती.. पर वो क्या कर सकती थी!!! और हकीकत तो यह थी की शीला उसके बगल में आकर नहीं बैठी थी.. खुद पीयूष ही जाकर उनके पास बैठ गया था.. जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो दूसरों को क्या दोष देना ? कुछ समय से बहोत बिगड़ गया है ये पीयूष.. वैशाली के आने के बाद कुछ ज्यादा ही नखरे बढ़ गए है इसके.. कविता का दिमाग घूम रहा था.. जब दिमाग में शक का कीड़ा एक बार घुस गया तो उसे बाहर निकालना बहोत कठिन हो जाता है.. कविता की मानसिक स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं थी.. लेकिन तभी पीयूष ने कुछ ऐसा कहा जिससे कविता का रोम रोम पुलकित हो उठा.. उदास कविता के मन में जो मुकेश के दर्द भरे नगमे चल रहे थे.. उसके स्थान पर मनहर उधास की रोमेन्टीक ग़ज़ल बजने लगी..

 

पीयूष ने कहा की राजेश सर की वाइफ का बर्थडे आ रहा था और वोह कंपनी के पूरे स्टाफ को टूर पर ले जाना चाहते थे..

 

पीयूष: “मैंने उनसे गुरुवार और शुक्रवार की छुट्टी मांगी तो उन्होंने इस टूर के बारे में बताया और कहा की मैं मौसम और फाल्गुनी को भी साथ ले लूँ.. मैंने हाँ बोल दिया है.. तो हम कल सुबह सात बजे ऑफिस के बाहर मिलने वाले है.. तू साथ चलेगी ना वैशाली?”

 

पीयूष को वैशाली के प्रति आकर्षित होता देख उसे पीटने का मन कर रहा था कविता का.. पर मन ही मन वो रेणुका को थेंक्स बोल रही थी.. उनके कारण ही यह मुमकिन हो पाया.. और अब पिंटू भी शीला भाभी के चंगुल में नहीं फँसेगा.. सब सही हो रहा था.. रेणुका वाकई बड़े काम की चीज है.. चुतकी बजाते मेरा प्रॉब्लेम सॉल्व कर दिया।।

 

कविता: “लेकिन पीयूष, बाहर के लोगों के लिए जगह होगी भी?” वैशाली को नीचा दिखाने का मौका मिल गया कविता को.. लेकिन उसके यह बोलने से वैशाली को कुछ फरक नहीं पड़ा

 

पीयूष ने बड़े उत्साह के साथ कहा.. “अरे, राजेश सर ने बड़ी वाली बस मँगवाई है.. कम से कम १० सीट खाली रहेगी.. अगर शीला भाभी चलना चाहें तो वो भी आ सकती है.. ” पीयूष को दोनों हाथों में लड्डू चाहिए थे.. पर कविता भी कम नहीं थी

 

कविता: “फिर तो हम संजय कुमार को भी साथ ले लेते है.. वह भी हमारे मेहमान है.. हम सब जाएँ और वो यहाँ अकेले रहे तो अच्छा नहीं लगेगा.. ” कविता की इस गुगली के आगे सारे बेटसमेन अपनी विकेट बचाने में लग गए। कविता जानती थी की संजय की मौजूदगी में वैशाली या शीला दोनों अपनी हद में रहेंगे.. और उसके पति को उन दोनों से दूर रख पाएगी.. और अगर नजर बचाकर शीला भाभी थोड़ा बहोत कुछ कर भी लेती है तो कोई हर्ज नहीं है.. मैं भी उस दौरान पिंटू के साथ मजे कर लूँगी.. वैसे भी शीला भाभी अब ५-६ दिन की मेहमान थी.. मदन भाई के लौटने के बाद यह खिलाड़ी रिटायर्ड हर्ट होकर पेवेलियन लौट जाने वाला था.. वाह.. खुद की पीठ थपथपाने का मन हो रहा था कविता को

 

संजय को शामिल करने की बात सुनते ही पीयूष बॉखला गया.. सिर्फ उस आदमी की मौजूदगी से पूरी टूर का सत्यानाश हो जाएगा.. वैशाली और शीला के संग गुलछरों का आनंद लेने का सपना टूटता हुआ दिखा.. वैसे रेणुका भी साथ चलने वाली थी पर राजेश सर के साथ रहते हुए उनके करीब जाने की सोच भी नहीं सकता था पीयूष.. अगले दिन रेणुका की हवस देखकर उतना तो तय था की टूर के दौरान एकाध किस करने या बबले दबाने का मौका तो मिल ही जाएगा उसके साथ..

 

इन सारे प्रपंचों से अनजान मौसम और फाल्गुनी अंताक्षरी खेल रहे थे..

 

मौसम अपनी सुरीली आवाज में गा रही थी “ये दिल तुम बिन.. कहीं.. लगता नहीं, हम क्या करें.. !!” वह इतना सुरीला गा रही थी की बाकी बैठे सब चुप होकर उसके गीत को सुनने लगे.. शीला को मदन की याद आ गई.. सब से नजर बचाते हुए उसने अपने गाल से आँसू पोंछ लिए..

 

सुरीले मुखड़े के बाद मौसम अब अंतरा गा रही थी

 

“बुझा दो, आग दिल की या उसे खुल कर हवा दे दो.. जो उसका मोल दे पाए, उसे अपनी वफ़ा दे दो..

तुम्हारे दिल में क्या है बस, हमे इतना पता दे दो.. के अब तन्हा सफर कटता नहीं, हम क्या करें.. ”

 

गीत खतम होते ही सब ने तालियों से उसे नवाजा.. “वाह वाह मौसम.. बहोत बढ़िया.. कितना अच्छा गाती हो तुम” अपनी छोटी बहन की तारीफ सुनकर कविता गदगद हो गई.. तभी संजय उठकर मौसम के पास आया और वॉलेट से ५०० का नोट निकालकर मौसम को देते हुए बोला

 

संजय: “वाह मौसम वाह.. तेरे कंठ में तो साक्षात सरस्वती बिराजमान है.. बुरा मत मानना.. ये कोई बखशीश नहीं है.. बस देवी के चरण में भक्त की भेंट अर्पण कर रहा हूँ.. ऐसी सुंदर गायकी की कदर तो होनी ही चाहिए”

 

मौसम ने शरमाते हुए कहा “अगर पैसे न लूँ तो आपका अपमान होगा.. लेकिन इस कुदरत की देन का व्यापार करना मुझे ठीक नहीं लगता.. बाकी दीदी जैसा कहेंगी मैं वैसा ही करूंगी”

 

कविता ने सोचकर कहा “देख मौसम, जीवन की पहली कमाई हम परिवार पर खर्च करते है.. हम भी एक परिवार जैसे ही है.. फाल्गुनी, तू भागकर नुक्कड़ की दुकान पर जा और सबके लिए आइसक्रीम लेकर आ.. इन्ही पैसों से हम सब पार्टी करेंगे.. ठीक है ना !!”

 

मौसम और फाल्गुनी दोनों आइसक्रीम लेने गए.. कविता और वैशाली बातें करने लगे.. बरामदे की कुर्सियों पर सब झुंड बनाकर बैठे थे.. सब का ध्यान बातों में था तब पीयूष ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए शीला का हाथ पकड़ लिया.. शीला मदन को याद करते हुए बेचैन हुए जा रही थी और उसे वैसे भी किसी के सहारे की जरूरत थी.. शीला और पीयूष पीछे की कुर्सी पर बैठे थे और बाकी सबकी पीठ उनके तरफ थी इसलिए किसी ने देखा नहीं था.. शीला के हाथों का नरम गरम स्पर्श मिलते ही पीयूष के मन का मोर नाचने लगा.. शीला को भी मज़ा आ रहा था..

 

अचानक पीयूष का हाथ छुड़ाकर शीला खड़ी होकर बोली “ये दोनों आइसक्रीम लेकर आती ही होगी.. मैं बाउल लेकर आती हूँ” पीयूष निराश हो गया.. तभी अंदर से शीला की आवाज सुनाई दी.. “अरे पीयूष.. जरा अंदर आना.. ऊपर से बॉक्स उतारना है.. मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा”

 

“आया भाभी.. ” कहते हुए पीयूष दौड़कर किचन में पहुँच गया.. बॉक्स तो पहले से ही नीचे उतार चूकी थी शीला.. शीला ने पीयूष को अपनी बाहों में भर लिया.. और आठ-दस किस कर दी उसके चेहरे पर.. पीयूष भी अपने पसंदीदा स्तनों को दबाने लगा.. मात्र ५ सेकंड में ये सारा खेल निपट गया.. पीयूष तुरंत भागकर बाहर आ गया ताकि किसी को शक न हो.. शीला भी कांच के बाउल लेकर बाहर आई तब तक मौसम और फाल्गुनी आइसक्रीम लेकर आ चुके थे

 

फेमिली पेक को खोलकर पीयूष ने छोटी छोटी स्लाइस काटकर सब के लिए बाउल तैयार कीये.. सब बातें करते हुए आइसक्रीम का लुत्फ उठाने लगे.. बातों बातों में पीयूष ने शीला से पूछा

 

पीयूष: “आप भी साथ चलोगे न भाभी?” कविता भी कहाँ पीछे रहने वाली थी.. !! उसने संजय को कहा

 

कविता: “जिजू, आपको तो चलना ही होगा.. आप के बगैर मज़ा नहीं आएगा”

 

पीयूष को इतना गुस्सा आया कविता पर.. !! ये कविता मेरे सारे प्लान की माँ चोद रही है.. साला ये संजय कौनसा अपना सगा है जो तुझे उसके बगैर मज़ा नहीं आएगा !!!

 

लेकिन कविता ओर कोई दांव खेल पाती उससे पहले ही शीला ने आने से मना कर दिया और संजय ने भी कह दिया की उसे ऑफिस का काम कभी भी आ सकता था इसलिए वह जुड़ नहीं पाएगा.. वैशाली और पीयूष के चेहरे चाँद की तरह खिल उठे.. कविता भी यह सोचकर खुश हो रही थी की आखिर पीयूष शीला से दूर रहेगा और टूर पर साथ होगा तो कभी न कभी कोई मौका मिल ही जाएगा उसे.. सुबह जल्दी जाना था इसलिए सब अपने घर चले गए

शीला के घर से लौटने के बाद कविता देर तक पॅकिंग करती रही.. और फिर पीयूष की बगल में लेट गई.. पीयूष अभी सोया नहीं था.. अपने मोबाइल पर पॉर्न क्लिप देखते हुए.. चादर के नीचे मूठ लगा रहा था.. कविता ने अंगड़ाई लेकर अपने स्तन पीयूष की छाती पर लाद दिए.. “तेरे सामने मैं हूँ फिर तुझे हिलाने की क्या जरूरत है? यहाँ मर्सिडीज खड़ी है और तू साइकिल क्यों चला रहा है?”

 

पीयूष: “तू भले ही अपने आप को मर्सिडीज समझती रहे.. पर शीला भाभी के आगे तेरा कोई मोल नहीं है” कविता ने जिस तरह प्यार से संजय को न्योता दिया था उसका गुस्सा अब भी पीयूष के सर पर सवार था

 

खुद को महत्व न देते हुए पीयूष ने शीला की जिस तरह तारीफ की.. उससे सुलग गई कविता की.. बेडरूम में पति किसी पराई औरत के गुणगान करे ये कोई पत्नी सहन नहीं करती.. एक सेकंड में कविता के चेहरे का रंग बदल गया.. घूमने जाना हो तब पत्नी कितनी खुश होती है!! मन में ढेर सारे प्लान बन गए होते है.. यहाँ जाएंगे.. वहाँ जाएंगे.. शॉपिंग करेंगे.. फोटोस लेंगे.. अगले तीन चार दिन शायद मौका न मिले इसलिए वो आज पीयूष पर सवारी करके सारी कसर पूरी कर देना चाहती थी.. लेकिन पीयूष के मुंह से यह सुनते ही कविता बेहद गुस्सा हो गई।

 

कविता: “पीयूष, तू पहले ये तय कर की तुझे शीला भाभी ज्यादा पसंद है या वैशाली? बिना पेंदे के लोटे की तरह कभी माँ को दाने डालता है तो कभी बेटी को.. कितना खराब लगता है जब सब के सामने तू उन माँ-बेटी पर लट्टूगिरी करता है.. एक नंबर का चोदू लगता है”

 

पीयूष: “हाँ.. तुझे तो अब में चोदू ही लगूँगा ना.. जब से संजय को देखा है, तेरी भी नियत बदल गई है.. पर संजय ने वैशाली की क्या हालत कर दी है ये तुझे पता नहीं है.. एक नंबर का नालायक आदमी है संजय.. सिर्फ दिखने में हेंडसम है.. बाकी उसके लक्षण तो बंदरों जैसे है.. कभी इस डाल पर तो कभी उस डाल पर.. ”

 

कविता: “सभी मर्द यही करते है.. तू भी कौनसा दूध का धुला है?? पहले अपने गिरहबान में झाँककर देख.. फिर दूसरों की बात करना..!!”

 

संजय: “अरे वाह.. बड़ी वकालत हो रही है संजय की.. कहीं वो भड़वा तुझे पटाने की फिराक में तो नहीं?? मैं पहले ही बता दे रहा हूँ तुझे.. उस संजय से तेरा मेलझोल मुझे जरा भी पसंद नहीं है”

 

कविता: “आखिर बाहर आ ही गया तेरे अंदर का दकियानूसी मर्द.. पुराने खयालों वाले.. तू शीलाभाभी के साथ जो कुछ भी करता है.. उतना तो मैं संजय के साथ कर ही सकती हूँ”

 

पीयूष चोंककर : “मैंने ऐसा क्या गलत किया है शीला भाभी के साथ?”

 

कविता: “पर मैंने कब कहा की तूने कुछ गलत किया भाभी के साथ? मैंने तो बस एक बात कही ”

 

पीयूष डर गया.. कहीं भाभी के साथ छुपा-छुपी खेलने में ऐसा न हो की कविता हाथ से चली जाए.. भाभी तो थोड़े दिनों में अपने पति की बाहों में छुप जाएगी.. मेरी तरफ देखेगी भी नहीं.. फिर कविता ने भी हाथ लगाने नहीं दिया तो ये लंड सिर्फ जड़ीबूटी कूटने के काम आएगा.. लेकिन अभी अगर उसने बात छोड़ दी तो उससे यह साबित हो जाता की उसके और शीला भाभी के बीच कुछ चल रहा है..

 

गुस्से में पीयूष मूठ लगाता रहा.. कविता भी रूठकर उलटी दिशा में करवट लेकर सो गई.. चार दिनों की कसर पूरी करने के खयाल पर पानी फिर गया.. दोनों अब एक दूसरे से कतराने लगे और बात नहीं कर रहे थे

 

रोज सुबह एक आदर्श पत्नी के तरह “गुड मॉर्निंग” कहकर वो पीयूष को जगाती.. पर आज तो उसने पीयूष की तरफ देखा तक नही.. साढ़े पाँच बजे उठकर वो अपने सास-ससुर के लिए चाय और खाना बनाने किचन में चली गई.. साढ़े छ बज गए लेकिन पीयूष अब भी सो रहा था। अनुमौसी को गुस्सा आया.. वह बेडरूम में जाकर पीयूष को झाड़ने लगे “जब कहीं बाहर जाना हो तो समय पर उठना सीख.. जल्दी उठ.. सात बजे तुम्हें पहुंचना है और अभी तक तू बिस्तर पर ही पड़ा है? बहु बेचारी कब से जागकर घर का काम निपटा रही है.. और तू यहाँ कुम्भकरण की तरह खर्राटे ले रहा है? ”

 

मुंह बिगाड़कर पीयूष खड़ा हुआ और बाथरूम में घुस गया.. फटाफट तैयार होकर वो दो मिनट में बाहर आया.. उसे इतनी जल्दी बाहर आया देखकर अनुमौसी ने कहा “इतनी जल्दी तैयार भी हो गया? नहाया भी की नहीं? या सिर्फ मुंह धो लिया? ब्रश किया की नहीं ठीक से? हे भगवान.. ये आजकल के नौजवान.. कब सुधरेंगे??”

 

सबकुछ सुन रही कविता कुछ नहीं बोली.. वो मौसम और फाल्गुनी को कपड़े बेग में भरने में मदद कर रही थी.. उसने पीयूष की तरफ जरा भी ध्यान नहीं दिया.. वैशाली कब से तैयार होकर अपना बेग लिए उनके ड्रॉइंगरूम में बैठी थी

 

आखिर वह पाँच लोग दो ऑटो में बैठकर ऑफिस पहुंचे.. साढ़े सात बज गए पहुंचते पहुंचते.. आधा घंटा देर हो गई थी.. पूरा स्टाफ बस में बैठ चुका था.. बस उन्ही पाँच का इंतज़ार था.. माउंट आबू जाने के लिए लक्जरी बस रावण हुई.. बस में अब भी ८ सीट खाली थी.. जरा भी भीड़भाड़ नहीं थी.. सब बड़े उत्साह में थे और मज़ाक के मूड में भी..

 

पिंटू को देखते ही कविता की सांसें थम गई.. पिंटू अपने एक सहकर्मी के साथ बैठा था.. और उसके बाएं तरफ की सीट पर कविता और पीयूष बैठ गए.. राजेश बस के आगे के हिस्से में खड़ा हुआ था.. रेणुका पिंक साड़ी में जबरदस्त लग रही थी.. बार बार वो पीयूष की तरफ देखकर स्माइल करती रही.. मौसम और फाल्गुनी तो बिल्कुल आखिर वाली सीटों पर जा बैठी.. दोनों अपनी ही मस्ती में मस्त थी.. अंदर अंदर बातें करते हुए वह दोनों बार बार हंस पड़ती..

 

उनकी हंसी की आवाज सुनकर राजेश का ध्यान मौसम की ओर आकर्षित हुआ.. तीरछी नज़रों से वह मौसम के कच्चे सौन्दर्य का लुत्फ उठाने लगा.. मौसम जब हँसती तब उसके गाल पर हसीन डिम्पल पड़ते.. देखकर ही राजेश फ़ीदा हो गया था.. बस जैसे जैसे आगे बढ़ती रही वैसे ही सारे प्रवासी रंग में आते जा रहे थे.. सब हंसी खुशी मज़ाक मस्ती कर रहे थे.. पीयूष और कविता को छोड़कर..

 

कविता जबरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान लाए बैठी थी लेकिन किसी से बात नहीं कर रही थी.. मन में सोच रही थी “ये चूतिये पीयूष ने सारे मूड का सत्यानाश कर दिया कल रात को.. सब मजे कर रहे है पर मुझे कुछ अच्छा ही नहीं लग रहा” बोर होकर वो खड़ी हो गई और रेणुका के पास जाने लगी.. सीट से उठाते हुए उसका पैर पिंटू के पैर से टकरा गया.. अपने प्रियतम का स्पर्श होते ही वो खिल उठी..

 

तभी राजेश ने सब का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए यह घोषणा की

 

“साथियों, कल मेरी पत्नी का जन्मदिन है.. इसी खुशी में हम सब माउंट आबू जा रहे है.. कंपनी के सारे परिवारजनों के साथ साथ हमारे साथ तीन नए लोग भी शामिल है.. उनको हमारे साथ पराया न लगे ये सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है.. लेडिज एंड जेन्टलमेन, प्लीज वेलकम मिस वशाली, मिस मौसम एंड मिस फाल्गुनी”

 

सब ने ताली बजाते हुए उन्हे “हाई” कहा.. तीनों शर्मा गई और खड़ी होकर सबको थेंक्स कहने लगी.. मौसम का खिले गुलाब सा सौन्दर्य देखकर कई देखनेवालों की आहें निकल गई.. पूरी बस में जैसे सुंदरता का भूकंप आ गया जिसका एपीसेंटर थी मौसम.. !!!

 

सब से पहचान होते ही मौसम और फाल्गुनी अपने असली रंग में आ गई.. दोनों ने हंसी मज़ाक करते हुए पूरी बस में धूम मचा दी.. वैशाली भी अपने प्रॉब्लेम को भूलकर मौसम और फाल्गुनी के साथ जुड़ गई.. संजय की कड़वाहट भरी यादों को दूर हटाते हुए.. वह कुछ दिन आराम से जीना चाहती थी.. राजेश टीशर्ट और जीन्स में बहोत हेंडसम लग रहा था.. तो दूसरी तरफ रेणुका अपने गदराए जिस्म पर साड़ी ओढ़े बेहद सुंदर और परिपक्व लग रही थी..

 

एक बात वैशाली के ध्यान में आई.. कविता बार बार पिंटू की ओर देख रही थी.. वैसे उसके लिए ये अच्छा ही था.. कविता का ध्यान भटका हुआ रहेगा तभी तो वो पीयूष के साथ फ्लर्ट कर पाएगी.. !!!!

 

मौसम की कोयल जैसी आवाज से बस में बहार खिल गई थी.. उसकी कच्ची कुंवारी छातियाँ तो बस.. उफ्फ़.. कहर ढा रही थी.. बस में बैठे लोग अक्सर नजर चुराकर उन कच्चे अमरूदों का रसपान कर लेते थे.. पीयूष और पिंटू राजेश के साथ बैठकर आगे के कार्यक्रम के बारे में विचार-विमर्श कर रहे थे.. बड़ा ही मस्त माहोल था बस में.. रोमेन्टीक सा..

 

रेणुका सीट पर बैठे बैठे खिड़की से बाहर देख रही थी.. उसकी पारदर्शक साड़ी से नजर आती क्लीवेज को देखकर पीयूष ठंडी आहें भर रहा था.. बीच बीच में दोनों की नजर एक हो जाती तब एक प्यारी सी मुस्कान देकर रेणुका उसके और पीयूष के प्रेम सर्टिफिकेट को रीन्यु कर देती थी.. उस दिन पैसे लेने गया तब कितना मज़ा आया था रेणुका के साथ.. आह्ह.. जोरदार गरम चीज है मैडम तो.. !!

 

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