शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-34
(Desi Kahani) 8
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पीयूष हक्का बक्का रह गया.. अपनी माँ पर ही गई है ये लड़की.. बात को घुमाये बगैर सीधा सीधा बोलने की आदत दोनों को है.. पीयूष को ऑफिस में आज बेहद जरूरी काम था.. दूसरी तरफ वैशाली नाम का जेकपोट हाथ में आया था उसे भी जाने नहीं दे सकता था.. पीयूष उलझन में पड़ गया
स्किनटाइट जीन्स और व्हाइट केप्रि पहने बैठी वैशाली ने अपना एक हाथ पीयूष के कंधे पर रख दिया.. उसी के साथ वैशाली का एक तरफ के स्तन की झलक पीयूष को दिख गई.. ओह्ह। वैशाली ने एक ही पल में पीयूष के दिमाग को एक ही पल में बंद कर दिया
“अब जल्दी भोंक.. कहाँ जाना है?? ऑटोवाले भैया कब से पूछ रहे है”
“मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है वैशाली.. तू ही बता ”
वैशाली को थोड़ा गुस्सा आया.. साथ ही साथ पीयूष के भोलेपन पर हंसी भी आई.. अभी भी ये पहले जैसा ही है.. लड़की को लेकर कहाँ जाते है वो तक पता नहीं है इसे..
“भैया.. अम्बर सिनेमा पर ऑटो ले लीजिए.. ” ऑटो उस तरफ चलने लगी
“नहीं नहीं.. वहाँ नहीं.. उस सिनेमा की बिल्कुल बगल में मेरे दोस्त का घर है.. उसने देख लिया तो आफत आ जाएगी.. ”
“तो फिर? कहाँ जाएंगे?” वैशाली सोचने लगी
“साहब, अगर आप लोगों को कोई सुमसान जगह की तलाश है तो मैं आपको ले जा सकता हूँ ” ऑटो वाले ने कहा
“कहाँ पर?” वैशाली और पीयूष दोनों एक साथ बोले
“शहर के बाहर मेरा घर बन रहा है.. वहाँ कोई नहीं होता.. काम भी बंद है अभी.. मुझे जो ऊपर का खुशी से देना चाहते हो देना.. मेरी बीवी बीमार है.. मेरी भी थोड़ी मदद हो जाएगी.. ” ऑटो वाले ने कहा
“ठीक है.. वहीं पर ले लो.. ” वैशाली ने तुरंत फैसला सुना दिया..
लगभग पंद्रह मिनट में रिक्शा एक सुमसान खंडहर जैसी जगह पर आकर रुकी.. दीवारें थी पर प्लास्टर बाकी था.. अंदर कोई नहीं था.. आजूबाजू भी दूर दूर तक किसी का नामोनिशान नहीं नजर आ रहा था..
“आप वापिस कैसे जाओगे साहब? यहाँ ऑटो नहीं मिलेगी आपको.. ”
“तुम दो घंटे बाद हमें लेने वापिस आना.. ” वैशाली ने कहा
“मेरा नंबर सेव कर लीजिए.. फोन करेंगे तो १० मिनट में पहुँच जाऊंगा” ऑटो स्टार्ट कर वो निकल गया
वैशाली और पीयूष खंडहर के अंदर गए.. रेत के एक बड़े से ढेर पर वैशाली बैठ गई.. बिना अपने कपड़ों की परवाह कीये.. थोड़े संकोच के साथ पीयूष भी वैशाली के पास बैठ गया
काफी देर तक दोनों में से कोई कुछ नहीं बोला। थक कर आखिर वैशाली ने शुरुआत की
“पीयूष, २० मिनट से ज्यादा गुजर चुके है.. ऐसा ना हो की मुझे तुझ से जबरदस्ती करनी पड़े”
सुनते ही पीयूष ठहाका मारकर हंसने लगा.. “क्या यार वैशाली.. कुछ भी बोलती है… छोटी थी तब भी तू ऐसी ही नटखट थी”
“छोटी थी तब की बात है वो.. अब मैं बड़ी हो चुकी हूँ पीयूष.. मेरी पसंद.. मेरा टेस्ट अब बदल चुका है”
“मतलब?? ” पीयूष को समझ नहीं आया
रेत के ढेर पर बैठे पीयूष को धक्का देकर सुला दिया वैशाली ने.. और उसके होंठों पर अपने होंठ लगाते हुए उसके लंड को पेंट के ऊपर से दबाने लगी और बोली “छोटी थी तब मुझे लोलिपोप चूसना बहुत पसंद था.. अब मुझे ये चूसना पसंद है”
माय गॉड.. वैशाली के इस कामुक रूप को देखकर पीयूष हक्का बक्का रह गया.. ये लड़की तो एटमबॉम्ब से भी ज्यादा स्फोटक है.. !!
इतना कहते ही वैशाली, पीयूष के लाल होंठों को चूमते हुए उसके लंड को मुठ्ठी में मसलने लगी..
“बड़ा भी हुआ है या उतना ही है जितना आखिरी बार देखा था??” कहते हुए वैशाली ने पेंट की चैन खोलकर अन्डरवेर में से लंड पकड़कर बाहर निकाला.. लंड की साइज़ देखकर उसने “वाऊ.. ” कहा..
“पीयूष.. अब ज्यादा वक्त बर्बाद मत कर.. ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा.. आज तुझे कलकत्ता का माल मिला है मजे करने के लिए.. ये देख मेरी रत्नागिरी आफुस..” भारी स्तनों वाली छाती को उभारते हुए दिखाकर वैशाली ने पीयूष को पागल बना दिया.. पीयूष बावरा होकर वैशाली के स्तनों को दबाने लगा.. “ओह्ह वैशाली.. पता है उस दिन जब हम होटल गए थे.. ये तेरे बड़े बड़े बबलों में ही मेरी जान अटक कर रह गई थी उस दिन.. जब हमने साथ में पहली बार किया तब तेरे कितने छोटे छोटे थे.. और जब बड़े हुए तब तू चली गई.. तुझे वो सब बातें याद भी है या भूल गई?”
“पीयूष, कोई भी लड़की अपना पहला किस कभी भूल नहीं सकती.. मुझे सब कुछ याद है.. तू बहोत पसंद था मुझे.. पर तू उस पिंकी के साथ ज्यादा खेलता था तब बड़ा गुस्सा आता था मुझे.. ”
“कौन सी पिंकी यार??”
“एक नंबर का भुलक्कड़ है तू.. पीछे वाली गली में रहती थी.. रमणकाका की बेटी”
“अरे हाँ.. वो.. वो तो मुझे जरा भी पसंद नहीं थी.. पता नहीं यार तुझे उस समय क्यों ऐसा लगा की पिंकी मुझे पसंद थी.. मैं उस समय भी तुझसे बहोत प्यार करता था.. ” दोनों बातें करते हुए एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे.. थोड़ी थोड़ी देर पर वैशाली घड़ी पर नजर डाल लेती थी..
वैशाली किसी परपुरुष के साथ ऐसा कभी न करती.. पर जब से उसे संजय के अवैध संबंधों के बारे में पता चला.. उसका दिमाग फट रहा था.. वो मादरचोद वहाँ मस्ती करे और मैं यहाँ गांड मराऊ ?? मैं भी बेशरम बन सकती हूँ.. और संजय के ऊपर आए गुस्से के कारण ही आज वो पीयूष का लंड पकड़कर रेत में लेटी थी..
“पीयूष.. ऐसे धीरे धीरे नहीं.. जरा जोर से दबा.. ” वैशाली ने बड़ी ही धीमी कामुक आवाज में कहा। पीयूष वैशाली के गाल, गर्दन और कान को चूमते हुए उसके विशाल स्तनों को दबा रहा था.. वैशाली के टाइट टीशर्ट के ऊपर के बटन निकालकर उसने खजाना खोल दिया.. ब्रा के अंदर कैद दो खरबूजों के बीच की गोरी चीट्टी खाई.. आहहाहहाहहा.. ब्रा के ऊपर से उभर कर आए स्तनों के ऊपरी हिस्सों को वो चूमते हुए वैशाली के पेंट की चैन को खोलने लगा.. वैशाली की पेन्टी.. चुत का रस रिसने से पूरी तरह भीग चुकी थी
“ओह पीयूष.. बहुत खुजली हो रही है यार अंदर.. अपने हाथ से थोड़ा सहला उसे.. ” लंड के ऊपर अपनी पकड़ को मजबूत करते हुए वैशाली ने कहा.. इतनी मजबूती से कभी कविता ने भी नहीं पकड़ा था पीयूष का.. कविता से हजार गुना ज्यादा हवस थी वैशाली में ..
“ओह्ह वैशाली.. मुझे एक बार तेरे ये दोनों बबले खोल कर देखने है यार.. ” वैशाली ने टीशर्ट के बाकी बटन खोल दिए.. और ब्रा की कटोरियों में से दोनों मांस के पिंड को बाहर निकाला.. दूध जैसे गोरे भारी भरकम स्तनों को देखकर पीयूष कि आँखें फटी की फटी ही रह गई..
“कितने मस्त है यार तेरे बबले.. ” दोनों लचकते स्तनों को हाथ में पकड़कर पीयूष दबाने मसलने लगा..
“तेरा स्पर्श मुझे पागल बना रहा है पीयूष.. मज़ा आ रहा है.. जोर से दबा.. क्रश इट.. ओ येह.. ओ गॉड.. आह्ह” अपने पति की बेवफाई का बदला लेने के लिए वैशाली पीयूष के शरीर फिर हाथ फेर रही थी.. वैशाली के खिले हुए गुलाब जैसे जिस्म को पीयूष रौंदने लगा..
“वैशाली.. तुझे कैसा लगा मेरा.. ??” अपने लंड की ओर इशारा करते हुए पीयूष ने वैशाली की जीन्स केप्रि को खींच कर उसके घुटनों तक ला दिया
“मस्त है तेरा पीयूष.. मज़ा आएगा”
“तेरे पति से बड़ा है ना !!!” संजय का जिक्र होते ही वैशाली के दिमाग के कुकर की सीटी बज गई..
“तू नाम मत ले उस भड़वे का.. मेरा मूड खराब हो जाएगा” वैशाली ने नीचे झुक कर पीयूष का पूरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी.. और बड़ी ही तीव्र गति से चूसने लगी..
“आह्ह वैशाली.. जरा धीरे धीरे.. निकल जाएगा मेरा” पीयूष के आँड़ों से खेलते हुए वैशाली बड़ी मस्ती से चूस रही थी
वैशाली की टाइट केप्रि को बार बार खींचने पर भी जब नहीं निकाल पाया पीयूष तब उसने परेशान होकर वैशाली से कहा
“अरे यार.. ये तेरी चुत के चारों तरफ जो किलेबंदी है उसे हटा.. मुझसे तो निकल ही नहीं रहा है.. कितना टाइट पहनती है तू?”
“मेरे पीयूष राजा.. ऐसे टाइट पेंट में ही हिप्स उभर कर बाहर दिखते है.. और में हॉट लगती हूँ.. समझा.. !!” वैशाली ने आँख मारते हुए कहा
“वो तो ठीक है मेरी रानी.. पर इसे खोलने में कितना वक्त बर्बाद होता है!! इससे तो देसी घाघरा ही अच्छा.. जो पहनने के भी काम आए और वक्त आने पर बिछाने के भी.. अब नखरे छोड़ और उतार ये तेरी केप्रि” अपने ठुमकते लोड़े को काबू में करने के लिए पीयूष ने उसे हाथ से पकड़ कर रखा था..
वैशाली रेत के ढेर से खड़ी हुई.. उसकी पीठ पर रेत लग गई थी.. वैशाली ने केप्रि और साथ में अपनी पेन्टी भी उतार दी.. और कमर से नीचे पूरी नंगी हो गई..
वैशाली की मोटी मोटी जांघें देख पीयूष उत्तेजित होकर उन्हे चूमने लगा.. हल्के झांटों वाली चुत पर हाथ फेरते हुए उसने चुत का प्रवेश द्वार ढूंढ निकाला.. और अपनी उंगलियों से उसकी क्लिटोरिस से जैसे ही उसने खेलना शुरू किया.. वैशाली सिहर उठी.. उसने पीयूष के सिर को पकड़ कर अपनी दो जांघों के बीच में दबा दिया.. सिसकियाँ लेते हुए वो अपने पैरों से पीयूष के लंड को रगड़ने लगी..
“ओह पीयूष.. चाट मेरी यार.. ” तड़प रही थी वैशाली.. उसके स्तन फूल कर सख्त हो गए थे.. निप्पल उभर आई थी.. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था उससे.. वो अपनी झांटों वाली चुत को पीयूष के चेहरे पर रगड़ने लगी.. लेकिन पीयूष अब भी सिर्फ चूम ही रहा था.. अपनी जीभ उसने वैशाली की चुत में नहीं डाली थी
चुत की खुजली से परेशान वैशाली ने पीयूष को धक्का देकर रेत के ढेर पर गिरा दिया.. और उसके चेहरे पर सवार हो गई.. दोनों तरफ अपने पैर जमाकर मदमस्त होकर अपनी चूचियाँ मसलते हुए वो आगे पीछे होने लगी.. वैशाली के जिस्म का वज़न आ जाने से पीयूष का चेहरा रेत में धंस गया.. उसने वैशाली की चुत की परतों के बीच अपनी जीभ फेरनी शुरू कर दी.. दोनों उत्तेजनावश वासना के महासागर में गोते खाने लगे.. हवस की आग में झुलस रही वैशाली पीयूष के सर के बाल पकड़कर अपनी चुत का दबाव बनाने लगी.. पीयूष ने अपने नाखून वैशाली के कोमल चूतड़ों में गाड़ दिए.. चुत का रस पीयूष के पूरे चेहरे पर सना हुआ था..
एक घंटा हो गया.. इन दोनों का फोरपले अब भी चल रहा था.. वैशाली पीयूष के स्पर्श की एक एक पल बड़े मजे से महसूस कर रही थी.. पीयूष की जीभ.. चुत के अंदर तक घुस चुकी थी और वैशाली को स्वर्ग की सैर करवा रही थी.. पीयूष ने अपने लंड को मुठ्ठी में पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया.. उसे लंड हिलाता देख वैशाली ने उसका हाथ छुड़ाकर खुद हिलाना शुरू कर दिया
“हाये पीयूष.. ये तेरा खुरदरा लंड जब मेरी चुत की दीवारों पर घिसेगा तब कितना मज़ा आएगा यार.. !!” अब वैशाली को लंड लेने की इच्छा होने लगी.. वैशाली ने अपनी कमर को थोड़ा सा उठाया.. पीयूष अब रिसती हुई चुत को साफ देख पाया.. उसने अपनी जीभ को वैशाली के गांड के छेद से लेकर क्लिटोरिस तक चाटा.. और अंगूठे से क्लिटोरिस को कुरेदने लगा.
दो दो संवेदनशील जगहों पर जीभ का स्पर्श होते ही वैशाली बेहद उत्तेजित हुई.. और वो खुद झड़ जाए उससे पहले पीयूष के लंड के ऊपर बैठ गई.. जिस प्रकार से लंड घिसकर अंदर गया उससे वैशाली को यकीन हो गया की हिम्मत के लंड के मुकाबले पीयूष के लंड में ज्यादा मज़ा आएगा..
“आह्ह पीयूष.. ओह माँ.. फक मी.. येस.. ओह गॉड.. फक मी हार्ड.. ” कराह रही थी वैशाली.. पीयूष भी नीचे से दमदार धक्के लगाए जा रहा था..
“ओह्ह वैशाली.. मेरा निकलने की तैयारी में है.. !! कितनी टाइट है तेरी चुत.. आह्ह.. !! लगता है काफी दिनों से बिना चुदे कोरी पड़ी है तेरी चुत.. ”
“ओह्ह.. जोर से धक्के मार पीयूष.. स्पीड बढ़ा.. फाड़ दे मेरी चुत को.. बहुत भूखी हूँ.. ओह ओह्ह.. ” पागलों की तरह कूद रही थी वैशाली.. खंडहर की दीवारों के बीच “फ़च फ़च” की आवाज़ें गूंज रही थी.. “पीयूष.. पानी अंदर मत निकालना.. नहीं तो भसड़ हो जाएगी.. पिछले एक साल से उस कमीने के साथ मैंने कुछ नहीं किया है”
“ओह्ह पीयूष.. आह्ह.. उईई माँ.. बहोत मस्त चोद रहा है यार.. आह्ह मैं गईईईई” कहते हुए वैशाली थरथराने लगी और झड़ गई.. झड़ते ही वो उसी अवस्था में पीयूष की छाती के ऊपर लेट गई.. पीयूष ने अपना लंड बाहर निकाल और वैशाली की गांड के इर्दगिर्द अपनी पिचकारी दे मारी.. गांड के छेद पर गरम गरम वीर्य का स्पर्श होती है वैशाली ने कहा “कितना गरम है यार.. पीछे जलने लगा मुझे.. “
वैशाली पीयूष के शरीर से उतर गई.. और बेफिक्र होकर उसके बगल में रेत पर लेट गई.. दोनों पसीने से सन चुके थे.. और पूरे शरीर पर रेत लग गई थी.. वासना का तूफान शांत हो गया था.. और दोनों धीरे धीरे वास्तविकता की दुनिया में कदम रख रहे थे.. पीयूष अब भी लेटे लेटे वैशाली के स्तनों को दबा रहा था
वैशाली: “तुझे इतने पसंद है मेरे स्तन?”
पीयूष: “हाँ डार्लिंग.. इन्हे देखते ही मैं बेकाबू हो जाता हूँ”
वैशाली: “मुझे भी तेरे साथ इत्मीनान से करवाने का बड़ा ही मन था.. इतना मज़ा आया है मुझे आज की क्या कहूँ.. आई वॉन्ट टू फ़ील दिस अगैन..वापिस कब मिलेगा मुझे?”
“तू यहाँ और कितने दिनों के लिए है?”
“कम से कम एक हफ्ते के लिए.. ” पीयूष के नरम लंड से खेलते हुए वैशाली ने कहा
पीयूष: “तेरे शरीर इतना आकर्षक है की अगर दिन रात करता रहु तो भी मेरा मन नहीं भरेगा.. अगर तू तैयार हो तो अभी एक और बार करते है”
वैशाली मुस्कुराई और बोली “यहाँ इस अनजान जगह में खुले में करने में जो मज़ा आया.. मेरा भी दिल कर रहा है एक बार और करने के लिए… पर जल्दी करना पड़ेगा.. वक्त बहुत ही काम है.. और कल वापिस तू कुछ सेटिंग करना.. जहां बुलाएगा मैं आ जाऊँगी.. बहोत सह लिया संजय के साथ.. अब मैं ज़िंदगी का पूरा मज़ा लूँगी”
पीयूष ने करवट लेकर पास लेटी वैशाली के स्तन की निप्पल को चूसना शुरू किया.. इसी के साथ वैशाली की चुत में करंट दौड़ने लगा.. पीयूष का लंड भी जागृत हो गया.. वैशाली पीयूष के लंड पर अपनी छातियाँ रगड़कर उसे और सख्त करने लगी.. स्तनों के गरम नरम स्पर्श से लंड का सुपाड़ा खिल उठा..
पीयूष ने वैशाली को लंड से दूर किया और उसे रेत में उल्टा लेटा दिया.. और उसपर सवार होकर अपने लंड को उसके चूतड़ों पर चाबुक की तरह मारने लगा.. गोरे कूल्हे लाल लाल हो गए.. रेत के अंदर वैशाली के चुचे अंदर धंस गए.. गीली रेत की ठंडक अपने स्तनों पर महसूस कर रही थी वैशाली।
बगल में साइलेंट मोड पर रखा हुआ पीयूष का मोबाइल अविरत बजे जा रहा था.. उसके बॉस राजेश और सेक्रेटरी पिंटू के अनगिनत मिसकॉल थे स्क्रीन पर.. उतना ही नहीं.. कविता और शीला के भी मिसकॉल आए थे.. पर इस हवस के सागर में डूबे हुए जोड़े को दुनिया की परवाह न थी
वैशाली के भव्य चूतड़ों को चौड़ा कर पीयूष ने गांड के छेद पर अपनी जीभ फेरकर वैशाली को झकझोर दिया.. “माय गॉड पीयूष.. कहाँ जीभ फेर दी तूने.. तुझे घिन नहीं आई?”
“तुझे नहीं पसंद तो नहीं करूंगा डीयर.. ”
“पसंद नापसंद की बात नहीं है यार.. नीचे जीभ से कोई चाटे तो मज़ा तो आता ही है.. मेरे कहने का ये मतलब था की ऐसी गंदी जगह तू कैसे चाट सकता है!!” वैशाली को जरा भी अंदाजा नहीं था की इस जगह भी कितना आनंद छुपा हो सकता है
“पीयूष प्लीज.. चाटना बंद कर.. मैं मर जाऊँगी.. “वैशाली से बर्दाश्त नहीं हो रहा था.. पीयूष चाट पीछे रहा था और आग लग रही थी वैशाली की चुत में.. जब रहा नहीं गया तब वैशाली ने रेत के ढेर में हाथ डालकर खुद ही अपनी चुत को ढूंढ निकाला.. और क्लिटोरिस को पकड़कर दबा दिया.. तब उसे चैन आया.. चुत की खुजली थोड़ी शांत होने पर अब वह आराम से गांड चटाई का मज़ा ले पा रही थी
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