शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-33
(Desi Kahani) 15
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बिस्तर पर लेटे लेटे वैशाली को हिम्मत के संग की चुदाई याद आ गई.. साथ ही साथ पीयूष की हरकतें भी.. शीला रसिक के मूसल को याद करते हुए गीली होने लगी.. पता नहीं क्यों.. बिस्तर पर लेटते ही शीला के दिमाग की सेक्स फैक्ट्री चालू हो जाती थी.. कमरे में अंधेरा था.. शीला ने चादर ओढ़कर अपने गाउन के अंदर हाथ डाल दिया.. वैशाली की चुत में भी खुजली उठी थी.. उसे पीयूष की कही बात याद आ रही थी “क्यों न हम फिर से पहले की तरह नादान और नासमझ बन जाएँ!!”
पीयूष अब भी उस पर फिदा है ये वैशाली जान छुकी थी.. वैशाली ने मुड़कर शीला की विशाल छातियों को देखा.. मम्मी ने इस उम्र में भी खुद को कैसे मैन्टैन कर रखा है !!
वैशाली की नज़रों से बेखबर शीला अपनी चार उँगलियाँ भोसड़े में डालकर अंदर बाहर कर रही थी.. उस तरह की वैशाली को भनक भी न लगे.. पर उसकी सांसें फूल गई थी और वो तेजी से सांस ले रही थी.. आखिर वैशाली भी एक स्त्री थी.. शीला की चुत जिस तरह रस रिस रही थी.. उसकी गंध भी वैशाली के नथुनों तक पहुँच गई थी… माय गॉड.. मम्मी मास्टरबेट कर रही है!! वैशाली शरमा गई.. हाँ.. वही कर रही है मम्मी.. ध्यान से देखने पर उसे शीला के हाथ की हलचल भी नजर आने लगी.. ये देखकर वैशाली से भी रहा न गया.. उसने अपनी चुत पर हाथ फेरा.. गीली हो गई थी उसकी मुनिया..
अचानक शीला ने एक लंबी सांस छोड़ी और पलट कर सो गई.. वैशाली भी पीयूष और हिम्मत को याद करते हुए अपनी भड़कती चुत को सहलाने लगी.. उसका दूसरा हाथ स्तनों को मरोड़ रहा था.. उंगलियों से रगड़ते हुए वो भी झड़ गई.. माँ और बेटी एक ही बिस्तर पर मूठ लगाकर सो गई। करवट लेकर सो रही शीला ने भी वैशाली की आहें सुनी और अंदाजा लगा लिया की उसकी पीठ पीछे वो क्या कर रही थी
रात के तीन बजे शीला पानी पीने के लिए उठी.. किचन में जाकर पानी पीने के बाद जब वह लौटी तब उसने देखा की कमरे की खुली खिड़की से चाँद की किरणे वैशाली पर पड़ रही थी। उसने चादर नहीं ओढ़ राखी थी.. गाउन के ऊपर के तीन बटन भी खुले थे.. रात को सोते समय वो ब्रा निकाल देती थी ये शीला जानती थी.. शीला करीब आकर उसके गाउन के बटन बंद करने लगी.. बटन बंद करते हुए बेटी के उभारों को नरम भाग पर उंगली का स्पर्श होते ही शीला सहम गई.. मन में उठ रहे हलकट विचारों को धकेल कर उसने वैशाली का गाउन ठीक किया और उसके बगल में सो गई।
“ये मुझे आज क्या हो रहा है? जिसे भी देखूँ बस सेक्स के विचार ही आते है.. अच्छा हुआ की वैशाली नींद में थी वरना मेरे बारे में क्या सोचती?” शीला को अपने ही विचारों से भय लगने लगा
सुबह पाँच बजे रसिक दूध देने आया.. वैशाली अंदर के कमरे में सो रही थी फिर भी शीला ने रसिक को अपने स्तन चूसने दिए.. उसका लंड हिलाया.. और उसके गाल और होंठ पर एक जबरदस्त किस भी दी.. उसके बाद ही उसे जाने दिया.. ज्यादा कुछ कर पाना मुमकीन नहीं था.. शीला अपने रोज के कामों में व्यस्त हो गई.. वैशाली को उसने देर तक सोने दिया..
थोड़ी देर बाद वैशाली जाग गई.. अंगड़ाई लेते हुए वो बाहर झूले पर बैठे हुए ब्रश पर टूथपेस्ट लगाने लगी.. शीला किचन में मशरूफ़ थी.. वैशाली ने पीयूष के घर की तरफ देखा.. पर वो नजर नहीं आया.. कल भी वो इसी तरह झूले पर बैठी थी पर तब उसे पीयूष के घर की ओर देखना का खयाल नहीं आया था तो अब क्यों आ रहा था !!! ताज्जुब हुआ वैशाली को.. तभी अनुमौसी बाहर आई
अनुमौसी: “कैसी हो बेटा? लगता है अभी अभी जागी हो”
वैशाली: “हाँ मौसी.. बहोत अच्छी नींद आई तो देर तक सोती रही”
अनुमौसी: “यही तो है मायके का सुख.. ना कोई बंधन ना कोई जिम्मेदारी.. जैसे ही ससुरत लौटो की फिर से जैल में कैद.. ये मेरी कविता को ही देख लो.. पीयूष को जल्दी ऑफिस जाना होता है इसलिए वो बेचारी पाँच बजे उठकर खाना बनाती है.. इससे पहले जो नौकरी थी वो अच्छी थी.. ये वाली ऑफिस जरा दूर है इसलिए पीयूष को जल्दी निकलना पड़ता है.. बेचारा मेरा बेटा रात को वापीस लौटते लौटते थक जाता है..बहुत महेनती है मेरा बेटा”
वैशाली: “हाँ मौसी.. पीयूष बहोत ही अच्छा लड़का है” बोलने के बाद खुद को चाटा मारने का मन किया वैशाली को.. क्या बोलने की जरूरत थी मौसी के आगे !!!
मौसी और कुछ पूछती उससे पहले वैशाली ही वहाँ से उठी और सीधी बाथरूम चली गई.. नहा कर और फ्रेश होकर वो अप-टू-डेट फेशनेबल कपड़े पहनकर तैयार हो गई और शीला के पास आई। उसके छोटे तंग वस्त्रों से आधे से ज्यादा जिस्म बाहर झलक रहा था
शीला: “बेटा, तू छोटी नहीं रही.. ऐसे कपड़े पहनना शोभा नहीं देता.. कुंवारी थी तब तक सब ठीक था.. देख तो सही कितने टाइट कपड़े है!! शादी के बाद ऐसे अधनंगे कपड़े पहनकर मैं तुझे बाहर नहीं जाने दूँगी.. शर्म भी नहीं आती तुझे ”
जवाब में वैशाली ने शीला के गालों पर हल्के से किस की और हँसते हँसते बेडरूम में चली गई
मौसी की बातों से वैशाली को पता चल गया की पीयूष सुबह ७ बजे ऑफिस के लिए निकल जाता है.. पूरा दिन नौकरी पर रहता था तो उसे देख पाना मुमकीन नहीं था.. रात को भी वो देर से घर आता और फिर कविता और वैशाली जब वॉक लेने निकलते तभी उसकी झलक वैशाली देख पाती। दूसरी तरफ पीयूष का भी यही हाल था.. वैशाली के दीदार के लिए वो भी तड़पता रहता था.. पर काफी कोशिशों के बाद भी उसे निराशा ही हाथ लगी। दोनों के मन में “नादान और नासमझ” बनने की बड़ी तीव्र चूल उठ रही थी
एक रात को करीब दस बजे.. रोज की तरह कविता और वैशाली वॉक लेकर लौटे और कविता के घर की छत पर ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे। घर के अंदर बैठे पीयूष का बड़ा मन कर रहा था की वो भी ऊपर छत पर उन दोनों के साथ बैठे। पर बिन बुलाए मेहमान की तरह जाना उसे पसंद नहीं था। मन तो वैशाली का भी बहुत था की पीयूष ऊपर उनके पास आए..
कविता और वैशाली की दोस्ती इतनी गाढ़ी हो छुकी थी की वो दोनों एक दूसरे को अपनी सारी बातें बताने से हिचकिचाते नहीं थे.. कविता ने अपने और पिंटू के बारे में सारी कथा सुनाई.. वैशाली ने भी अपने जीवन की कुछ ऐसी बातें बताई जो केवल वो ही जानती थी.. रात को देर तक बैठे बैठे वो दोनों दुनिया भर की बातें करती रहती.. उनकी दोस्ती से शीला भाभी या अनुमौसी को कोई हर्ज नहीं था.. आखिर दोनों लड़कियां थी
एक हफ्ता बीत गया पर ना संजय का फोन आया और ना ही वैशाली ने उसे फोन किया.. ये बात शीला को बहुत परेशान कर रही थी.. शीला को यकीन था की अगर वो वैशाली से इस बारे में पूछेगी तो वो सीधे सीधे जवाब नहीं देगी.. उससे असलियत उगलवाने का कोई तरीका ढूँढने लगी शीला
दूसरी रात जब वैशाली और कविता वॉक लेने गए तब शीला ने ही संजय को फोन लगा दिया.. बियर बार में बैठकर अपनी सहकर्मी प्रेमिला के साथ शराब पीते हुए और उसकी जांघों को सहलाता हुआ संजय, फ्लोर पर नाच रही अधनंगी डांसरों के लटके झटके देखकर ठंडी आहें छोड़ रहा था। सुंदर स्तनों को उछलती हुई एक बार डांसर संजय के करीब आई और झुककर अपनी गहरी गली दिखाकर टिप मिलने की आशा में खड़ी रही.. बियर बार की तमाम रस्मों से वाकिफ प्रमिला से संजय के हाथों में १०० का नोट थमा दिया जिसे संजय ने उस लड़की के दो स्तनों के बीच दबा दिया.. उसी वक्त उसका फोन बजा और स्क्रीन पर सासु माँ का नाम देखकर वो चोंक उठा
“एक्सकयुज मी डार्लिंग.. ” प्रमिला का गाल को थपथपाकर संजय फोन पर बात करने के लिए बियर बार के कोलाहल से बाहर निकला और फोन उठाया
“हाँ मम्मी जी, कैसी हो आप?”
“मैं ठीक हूँ.. आप कैसे है? घर पर आपके मम्मी पापा की तबीयत कैसी है?”
“सब ठीक है.. आपकी तबीयत कैसी है? काफी दिन हो गए, व्यस्तता के कारण वैशाली को फोन नहीं कर पाया.. अभी फोन करता हूँ उसे” सिगरेट जलाते हुए संजय ने कहा
शीला: “हाँ हाँ कोई बात नहीं.. वैशाली आपको बहुत याद करती है.. कब आ रहे हो घर? वो तो कह रही थी की बस चार दिन का ही काम था.. अभी तक खतम नहीं हुआ?”
संजय: “अरे नहीं मम्मी जी, काम तो चार दिन का ही था पर जिस पार्टी को मुझे मिलना था वो कहीं बीजी है इसलिए अब तक मिलना नहीं हुआ.. और एक दो दिन लग जाएंगे मुझे ”
काफी देर हो गई पर संजय लौटा नहीं इसलिए प्रमिला दरवाजा खोलकर बाहर निकली और पीछे से आवाज लगाई “संजु डार्लिंग, कितनी देर लगा रहे हो !! जल्दी आओ ना !!”
संजय ने चोंक कर पीछे देखा और अपने होंठ पर उंगली रखकर शशशशशश करते हुए प्रमिला को चुप रहने का इशारा किया और फिर शीला से बात करने लगा.. पर शीला ने प्रमिला की आवाज को साफ साफ सुन लिया था.. शीला अनुभवी थी.. उसने संजय से उस लड़की के बारे में कुछ भी नहीं पूछा.. संजय को यही प्रतीत हुआ की सासु माँ ने प्रमिला की आवाज नहीं सुनी होगी वरना वो इस बारे में जरूर पूछती..
शीला जानबूझकर यहाँ वहाँ की बातें कर रही थी.. और बेकग्राउंड की आवाज़ें सुनकर अनुमान लगा रही थी की संजय कहाँ होगा.. तभी संजय ने ये कहकर फोन काट दिया की उसका बॉस उसे बुला रहा था इसलिए उसे फोन काटना पड़ेगा। संजय की इस हरकत से शीला का शक यकीन में बदलने लगी.. कौन होगी वो लड़की जो संजय को डार्लिंग कह कर बुला रही थी?
वैशाली ने शीला को बताया था की संजय पैसे उड़ाता है और कुछ कमाता नहीं है.. सब से उधार लेकर गायब हो जाता है ये भी पता था.. लेकिन वैशाली ने कभी किसी पराई औरत के बारे में कभी कुछ नहीं कहा था.. हालांकि संजय की गंदी नजर का अनुभव तो ऐसे सालों पहले हो ही चुका था.. पर उसने ये सोचकर अपने मन को समझा लिया था की सारे मर्दों की नजर ऐसी ही होती है.. उसके पति की नजर भी वैसी ही थी
शीला दामाद को बेटे समान मानती थी.. फिर जिस तरह संजय उसके स्तनों को भूखी नज़रों से ताकता रहता.. शीला अस्वस्थ हो जाती.. इन मर्दों को बस एक ही बात समझ में आती है.. मौका मिलते ही स्त्री को फुसलाओ और उसकी टांगें खोलकर चोद दो.. मन ही मन में वो दुनिया के सारे मर्दों को गालियां दे रही थी.. कौन होगी वो लड़की जिसने संजय को डार्लिंग कहकर पुकारा था??
वो लड़की जो भी हो.. उस लड़की से उलहकर संजय वैशाली का जीवन बर्बाद करें वो शीला बर्दाश्त करने वाली नहीं थी.. साला समझता क्या है अपने आप को? उसका बस चलता तो संजय को दो चाटे लगाकर उसका दिमाग ठिकाने पर ले आती.. पर बात वैशाली के वैवाहिक जीवन की थी.. और उसे बचाने के लिए झगड़ा करना कोई उपाय नहीं था.. एक विचार ऐसा भी आया की कहीं दोष वैशाली का तो नहीं होगा ना !! ये जांच भी करना आवश्यक था। शीला ने वैशाली की सास को कलकत्ता फोन लगाया.. कैसे भी करके वो इस बात के मूल तक पहुंचना चाहती थी
दूसरे दिन वैशाली बड़ी जल्दी जाग गई.. ये देख शीला चोंक गई.. वैशाली को देर तक सोना बेहद पसंद था.. तो आज ये जल्दी क्यों उठ गई होगी?
“गुड मॉर्निंग” कहते हुए मुंह में ब्रश डालकर वैशाली सीधे छत पर चली गई… सुबह के साढ़े छह बजे थे.. बाहर कोई खास चहल पहल नहीं थी.. थोड़ी सी ठंड थी और बड़ा आह्लादक वातावरण था.. निप्पल पर ठंडी हवा का स्पर्श होते ही वैशाली को झुरझुरी सी होने लगी.. सामने की छत पर पीयूष गुलाब के पौधों को पानी दे रहा था.. जिस काम के लिए वो जल्दी जागी थी वो मिशन सफल हो गया.. जो जागत है वो पावत है
वैशाली को देखते ही पीयूष के मन का मोर ताताथैया करने लगा.. उसने हाथ से इशारा करके वैशाली को गुड मॉर्निंग कहा.. वैशाली ने भी हाथ से इशारा किया.. वैशाली के नाइट ड्रेस से उभरकर नजर आ रहे बड़े बड़े स्तन देखकर पीयूष के लंड में झटका लगा.. क्या माल लग रही है यार !! पहले तो इतनी सुंदर नहीं थी ये.. शादी के बाद लंड के धक्के खा खा कर इसका रूप ही निखर गया है.. कविता भी चुद चुद कर कैसी खिल गई है.. जिस दिन ना चोदो उस दिन मुरझाई सी रहती है.. स्त्री का सबसे बेस्ट मेकअप है लंड.. रोज लंड मिले तो हर स्त्री सुंदर और खिली खिली ही रहेगी.. पीयूष वैशाली को ऐसे तांक रहा था जैसे वो नंगी खड़ी हो..
इन दोनों का नैन-मटक्का चल रहा था तभी कविता भी छत पर आई.. पीयूष की पतंग आसमान में उड़ने से पहले ही कट गई.. वैशाली भी ऐसे अस्वस्थ हो गई जैसे रंगेहाथों पकड़ी गई हो.. कविता की तरफ देखे बगैर ही वो सीढ़ियाँ उतर गई..
“आज तो बड़ी देर लगा दी तूने.. बहोत पानी पीला दिया क्या पौधों को?” कविता ने एसीपी प्रधयुमन की तरह पूछताछ शुरू की
“मैं.. नहीं वो.. वो तो जरा.. बात दरअसल ये है की.. ” पीयूष बॉखला गया “तू समझ रही है ऐसा कुछ भी नहीं है.. मैं तो पौधों को पानी दे रहा था” पीयूष के शब्दों में सिमेन्ट कम और रेत ज्यादा थी..
कविता: “पर मैंने कब कहा की तू वैशाली को देख रहा था???? पर अच्छा हुआ जो तेरे दिल में था वो होंठों पर आ ही गया.. कर ले एक बार वैशाली के साथ.. तुझे भी चैन मिलेगा और वैशाली को भी !!” पीयूष की कमर पर चिमटी काटते हुए हंस रही थी कविता
“क्या सच में? क्या बात कर रही है तू?” पीयूष को समझ नहीं आया की वह क्या बोले.. बोलने के बाद उसे एहसास हुआ की “क्या सच में?” बोलकर उसने कितनी बड़ी गलती कर दी थी.. वो कविता को धमकाने लगा
“क्या तू भी.. कुछ भी बोलती रहती है.. तुझे तो मुझ पर विश्वास ही नहीं है.. जब देखों तब शक करती रहती है” मर्दों का ये हथियार है.. जब भी वो गलत हो तब पत्नी को धमका कर चुप करा देना.. !!
कविता भी कुछ कम नहीं थी.. उसे इस बात का गुस्सा आया की रंगे हाथों पकड़े जाने के बावजूद पीयूष उसे धमका रहा था
“अब रहने भी दे पीयूष.. ज्यादा शरीफ मत बन समझा.. सालों पहले तूने और वैशाली ने क्या गुल खिलाए थे मुझे सब पता है”
अरे बाप रे.. पीयूष की गांड ऐसे फटी की सिलवाने के लिए दर्जी भी काम न आए
“क्या कुछ भी बकवास कर रही है.. कोई काम-धाम है नहीं बस पूरे दिन बातें करा लो.. मुझे ऑफिस जाने में देर हो रही है.. टिफिन तैयार किया या नहीं? बड़ी मुश्किल से मिली है ये नौकरी.. तू ये भी छुड़वा देगी ” गुस्से से पैर पटकते हुए पीयूष ने कहा.. कविता को लगा की आज के लिए इतना डोज़ काफी था.. पर जाते जाते उसने सिक्सर लगा दी
“हाँ हाँ टिफिन तो कब से तैयार है.. ये तो तुझे आने में इतनी देर हुई इसलिए मैं ऊपर देखने चली आई.. तुम्हें डिस्टर्ब करने का मेरा कोई इरादा नहीं था.. तुम शांति से पौधों को जितना मर्जी पानी पिलाते रहो.. सारे पौधे तृप्त हो जाए बाद में नीचे चले आना” कविता गुस्से से सीढ़ियाँ उतर गई
“ये कविता साली मुझे आराम से देखने भी नहीं देती.. तो चोदने कैसे देगी? भेनचोद ये पत्नीयों को कैसे समझाए? पति थोड़ा बहुत फ्लर्ट करें तो इसमें कौनसा पहाड़ टूट पड़ता है ये समझ नहीं आता.. कोई कदर ही नहीं है कविता को मेरी.. बहोत गुस्सा आया उसे कविता पर.. लेकिन देश के अन्य मर्दों की तरह वो भी अपनी पत्नी के सामने लाचार था.. जीरो पर आउट होकर पेवेलियन में जिस तरह बेट्समेन नीची मुंडी करके लौटता है वैसे ही पीयूष सिर नीचे झुकाकर सीढ़ियाँ उतारने लगा
कविता को आज पीयूष की फिरकी लेने का मस्त मौका मिला था.. और कोई भी पत्नी ऐसे मौके को छोड़ती नहीं है। पीयूष को सीढ़ियाँ उतरते देख कविता ने कहा “नीचे ध्यान से देखकर उतरना.. कहीं गिर गया तो तेरी देखभाल करने कोई पड़ोसन नहीं आएगी.. वो तो मुझे ही करना होगा इतना याद रखना तुम”
पीयूष चुपचाप टिफिन लेकर ऑफिस के लिए रवाना हो गया.. वो गली के नुक्कड़ तक पहुंचा ही था की तभी उसने रिक्शा में बैठी वैशाली को देखा.. रोता हुआ बच्चा चॉकलेट को देखकर जैसे चुप हो जाता है.. वैसे ही वैशाली को देखकर पीयूष के मन का सारा गुस्सा भांप बनकर उड़ गया..वैशाली ने पीयूष को ऑटो में बैठने को कहा और ऑटोवाले से बोली की यहाँ से निकलकर ऑटो को आगे खड़ा करें.. ताकि इस इलाके से बाहर निकालकर आगे की योजना के बारे में सोच सकें।
“अब बता पीयूष.. किस तरफ लेने के लिए कहू?” वैशाली ने सीधे सीधे पूछ लिया.. पीयूष ने अपनी ऑफिस का पता बताया
“ऑफिस की बात नहीं कर रही.. अरे बेवकूफ तुझे नादान और नासमझ नहीं बनना है?? ” वैशाली ने आँखें नचाते हुए नटखट आवाज में कहा
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