शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-35

(Desi Kahani) 7

redwalker69 2026-05-22 Comments

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पीयूष अब उठा और दोनों हाथों से वैशाली को जांघों से पकड़कर खिंचकार थोड़ा सा ऊपर कर दिया.. और अपने सुपाड़े को गांड के छेद पर रख दिया.. वैशाली को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके छेद पर किसी ने कोयले का अंगारा रख दिया हो.. इतना गरम लग रहा था पर मज़ा भी आ रहा था.. गर्मी का एहसास होते ही उसकी गांड का वाल्व सिकुड़कर बंद हो गया। पर पीयूष बेहद उत्तेजित था.. या यूं कहो की निरंकुश सा हो चुका था.. उसने अपने लंड को जोर से अंदर धकेला.. वैशाली तो यही सोच रही थी की पीयूष उसकी गांड के साथ बस छेड़छाड़ कर रहा था.. लेकिन उस अत्यंत कोमल और संकरी गांड के मुकाबले काफी बड़े सुपाड़े के अंदर घुसते ही उसकी चीख निकल गई

 

“ओओईईई माँ.. मर गई मैं.. नालायक.. क्या किया तूने? निकाल बाहर.. ” पीयूष वैशाली की चीखो को अनसुना करते हुए अंदर धकेलता गया. उसका आधा लंड अंदर घुस गया.. वैशाली को चक्कर आने लगे.. आँखों के सामने अंधेरा छा गया.. पीयूष की पकड़ से छूटने के लिए वो उछलने लगी.. पर जरा सी भी हलचल करने पर उसे तीव्र पीड़ा हो रही थी.. इसलिए उसने प्रतिकार या विरोध करना बंद कर दिया

 

टाइट गांड के अंदर पीयूष के लंड की चमड़ी भी छील गई थी.. उसे भी जल रहा था.. बहोत टाइट था वैशाली की गयंद का छिद्र

 

थोड़ी देर तक बिना हिलेडुले पीयूष स्थिर पड़ा रहा.. वैशाली की जान में जान आई “प्लीज पीयूष.. बाहर निकाल दे यार.. किसी और दिन ट्राय करेंगे.. अभी मैं इसके लिए तैयार नहीं हूँ.. ” दर्द से कराहते हुए वैशाली ने कहा

 

पीयूष ने बड़े ही प्यार से वैशाली की गर्दन को चूमते हुए कहा “वैशाली.. ”

 

उसने जवाब नहीं दिया

 

पीयूष ने फिर से कहा “सुन रही हो डीयर??”

 

“हाँ बॉल.. क्या है?”

 

“तूने पहले कभी पीछे करवाया है? मतलब किसी गांड मरवाई है क्या कभी?”

 

“नहीं.. कभी नहीं.. बहोत दर्द होता है.. तू कभी अंदर लेगा तो पता चलेगा तुझे”

 

 

“मैं क्या होमो लगता हूँ तुझे.. जो किसी की अंदर लूँगा??” गुस्से से पीयूष ने लंड को फिर से दबाया.. वैशाली के कंठ से दबी हुई चीख निकल गई.. “बस कर यार.. मुझसे अब बर्दाश्त नहीं होता”

 

पीयूष: “वैशाली.. जीवन में हर तरह के अनुभव करने चाहिए.. ये अनुभव भी जरूरी है”

 

“भेनचोद.. चूल मची है चुत में.. और तू गांड के पीछे पड़ा है?” वैशाली अब गुस्सा हो गई.. भोसड़े की खुजली बर्दाश्त नहीं हो रही थी उससे.. पीयूष ने लंड को बाहर खींचा.. वैशाली को राहत मिली.. “गुड बॉय.. अब मैं घूम जाती हूँ.. फक मी इन द फ्रंट”

 

पीयूष ने फिर लंड को दबाया.. “उईई माँ.. क्या कर रहा है तू? मुझे बहोत दर्द हो रहा है यार.. कब से बॉल रही हूँ समझता क्यों नहीं?”

 

पीयूष ने धीरे से लंड बाहर निकाल लिया… गांड आजाद होते ही वैशाली की जान में जान आई.. वो पलट गई और बोली “बहोत वक्त जाया किया है तूने.. अब जल्दी कर.. ” वैशाली ने पीयूष का लंड पकड़कर खुद ही अपनी चुत में डाल दिया.. और अपनी कमर उठा ली.. शताब्दी एक्स्प्रेस की गति से पीयूष ने चुत चुदाई शुरू कर दी.. वैशाली भी चूतड़ उछालकर उसके धक्कों का माकूल जवाब दे रही थी

 

कुछ ही मिनटों की चुदाई के बाद वैशाली झड़ गई.. पीयूष ने भी लंड बाहर निकालकर वैशाली के गद्देदार पेट पर वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.. दोनों अब शांत हो गए.. वैशाली पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी.. रेत से घिसकर उसने अपने पेट पर लगा वीर्या साफ कर लिया.. दोनों इतने गंदे हो चुके थे जैसे मजदूरी करके वापिस लौटे हो.. वैशाली की चुत तो शांत हो गई पर उस मादरचोद ने जो गांड में लंड डाला था.. वहाँ जलन हो रही थी और दर्द भी..

 

“ये कपड़े तो देख और हमारा हाल देख.. ऐसे कैसे घर जाएंगे हम दोनों??” वैशाली को चिंता होने लगी..

 

पीयूष भी सोच में पड़ गया.. कहीं थोड़ा पानी मिल जाएँ तो सफाई हो सकती है.. पीयूष ढूँढने लगा.. मकान का काम चल रहा था मतलब कहीं न कहीं टंकी जरूर होगी.. पीछे की तरफ टंकी नजर आई.. पर उसमें बहोत दिने से भरा हुआ गंदा पानी था..

 

“ऐसे गंदे पानी में मैं अपने पैर नहीं साफ करूंगी” वैशाली ने मना कर दिया

 

“कोई बात नहीं महारानी.. अभी तेरे पापा विदेश से मिनरल वॉटर भेजेंगे.. उससे साफ कर लेना.. ठीक है !! नखरे छोड़ और साफ कर” वैशाली ने जैसे तैसे अपने कपड़े साफ किए और शरीर पर लगी रेत को झटक दिया

 

“अब जल्दी करते है पीयूष.. एक घंटे के लिए सहेली को मिलने के बहाने निकली थी.. घर से निकले हुए साढ़े तीन घंटे हो गए है.. मम्मी चिंता कर रही होगी.. अब भागना पड़ेगा”

 

अब पीयूष की भी फटी.. ऑफिस का काम छोड़कर आया था.. कितनी जरूरी डिलीवरी करनी थी आज.. राजेश सर क्या सोचेंगे.. बिना कहे ही छूटी मार दी!! पर कोई फोन ही कहाँ आया है किसी का.. फिर तो कोई टेंशन नहीं है..

 

तभी अचानक उसे याद आया की चुदाई शुरू करने से पहले उसने फोन को साइलन्ट मोड पर रख दिया था.. रेत के ढेर से थोड़े दूर उसने मोबाइल रखा हुआ था.. फोन हाथ में लेते ही उसके होश उड़ गए.. उसके चेहरे पर शिकन आ गई

 

“क्या हुआ??” चिंतित पीयूष को देखकर वैशाली ने पूछा

 

“अरे यार.. मेरे बॉस के दस मिसकॉल आ गए है.. घर से कविता के और तेरी मम्मी के मिसकॉल भी है.. कहीं बॉस ने घर पर तो फोन नहीं किया होगा?? घर पर फोन किया होगा तो कविता ने तो यही कहा होगा की मैं ऑफिस के लिए निकल चुका हूँ!! बाप रे !!”

 

वैशाली को भी याद आया.. उसका फोन भी पर्स के अंदर था.. पर्स से फोन निकालकर उसने देखा तो मम्मी के बीस मिसकॉल थे और संजय के भी काफी कॉल आकर चले गए थे.. इस मादरचोद को भी आज ही मेरी याद आनी थी!! जैसे इतना काफी नहीं था.. वैशाली को कविता का मेसेज भी आया था “कहाँ है तू? कहीं पीयूष के साथ तो नहीं है.. प्लीज कॉल अरजेंट” इसका मतलब तो ये हुआ की दोनों के घर पर प आता चल चुका था.. कोई भी समस्या हो कविता सब से पहले शीला को बताती थी ये बात पीयूष को पता थी

 

दोनों के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी.. वैशाली खड़ी हुई और बोली “कुछ भी हो जाएँ पीयूष.. पर हमें इसी बात पर अड़े रहना है की हम साथ नहीं थे.. हम दोनों को साथ जाते हुए किसी ने देखा तो नहीं होगा ना??”

 

पीयूष के पास इसका कोई जवाब नहीं था.. दोनों सिर पकड़कर खड़े रहे.. “बुला लूँ ऑटो वाले को?” पीयूष ने कहा

 

“नहीं.. मुझे सोचने दे कुछ.. अब जो भी होगा देखा जाएगा.. ” वैशाली ने कहा

 

“हम जब सोसायटी के नुक्कड़ से ऑटो में बैठे तब किसी न किसी ने हमे देखा ही होगा.. ” पीयूष की गांड फट कर फ्लावर हो गई

 

“अब मजे किए है तो थोड़ा भुगतना भी पड़ेगा.. हम ये कहेंगे की हम ऑटो में साथ निकले औ मैंने तुम्हें बस स्टेंड पर छोड़ दिया था” वैशाली का दिमाग काम पर लग गया

 

“मैं बॉस को फोन करता हूँ.. पर क्या कहूँगा उनसे?”

 

“अरे यार.. बोल देना की रास्ते में एक बाइक वाले का एक्सीडेंट हुआ था तो तू उसे लेकर अस्पताल गया था.. इसलिए ऑफिस नहीं आ सका”180

 

“यार तू कितनी आसानी से जूठ बोल सकती है.. मुझसे तो बोला ही नहीं जाता.. एक काम कर.. तू ही बात कर ले मेरे बॉस से”

 

“ठीक है.. फोन लगाकर दे.. मैं बात करती हूँ”

 

पीयूष ने राजेश सर को फोन लगाकर वैशाली को दिया। राजेश बहोत गुस्से में था.. पर सामने पीयूष के बजाए किसी लड़की की आवाज सुन कर वो भी ठंडा हो गया.. वैशाली ने पट्टी पढ़ाकर राजेश को चोदू बना दिया..

 

“हो गया प्रॉब्लेम सॉल्व? अब तू कविता को फोन लगा” वैशाली ने पीयूष से कहा

 

“कविता को? पर क्यों?”

 

“तुझे जो कहा वो कर.. लगा फोन” वैशाली ने कहा

 

“अरे पर फोन मिलाकर क्या बात करू?”

 

“अभी तेरे बॉस को एक्सीडेंट वाला बहाना दिया ना हमने.. तो घर पर भी वही कहना है.. इतना भी नहीं समजता तू बेवकूफ?”

 

पीयूष ने कविता को फोन किया और जो बात वैशाली ने राजेश से कही थी वही बात उसने कविता को बोल दी.. फिर रिक्शा वाले को फोन करके बुलाया.. और ऑटो में अपने घर के एरिया तक पहुँच गए.. वैशाली ने अपने पर्स से 500 का एक नोट निकालकर ऑटो वाले को दे दिया… वो खुश होकर चला गया

 

“तू भी यार.. इतने पैसे भी कोई देता है क्या??” पीयूष को ५०० रुपये बहोत ज्यादा लगे.. उसके हिसाब २००-२५० में काम बन जाता

 

वैशाली: “यार.. तूने आज मुझे जो ऑर्गजम दिए है.. उसके सामने ५०० रुपये की कोई कीमत नहीं है.. और देख.. जब गैरकानूनी हरकतें कर रहे हो तब रिश्वत देने में कभी कंजूसी नहीं करनी चाहिए.. ” गुरुमंत्र दिया पीयूष को वैशाली ने

 

“तू फिर कब मिलेगा मुझे??” वैशाली ने पूछा

 

“तू मुझे मोबाइल कर देना.. जहां कहेगी मैं आ जाऊंगा.. ” ऐसे व्यभिचारी मामलों में जगह की व्यवस्था करना पुरुष की जिम्मेदारी होती है.. पीयूष में इतनी हिम्मत नहीं थी इसलिए परोक्ष रूप से उसने वैशाली पर ही वो जिम्मेदारी डाल दी

 

वैशाली: “ठीक है.. लेकिन जब बुलाऊ.. जहां बुलाऊ.. पहुँच जाना वरना तू जहां भी होगा पहुँच जाऊँगी और वहीं खड़े खड़े चोद दूँगी.. समझा!!”

 

इतनी रंगीन धमकी सुनकर पीयूष पानी पानी हो गया.. उसने चुपके से वैशाली के हाथ को दबा दिया.. और दोनों अलग अलग रास्ते चल निकले

 

पीयूष के लिए तुरंत घर जाना मुमकिन नहीं था.. अगर दोनों एक साथ ही सोसायटी में प्रवेश करते तो जिस बात का सब को शक था वो यकीन में बदल जाता..

 

शीला अपने घर चिंता से पागल हुई जा रही थी.. जवान लड़की देर तक घर ना लौटे.. फोन पर कॉन्टेक्ट न हो पाए.. कोई अता-पता न हो.. तो कोई भी माँ का चिंतित होना काफी स्वाभाविक है..

 

वैशाली को देखते ही शीला मशीनगन की तरह फायरिंग करने लगी “कहाँ थी तू? एक घंटे का बोलकर गई थी अभी चार चार घंटे हो गए और तेरा कुछ पता ही नहीं.. !! एक फोन तक नहीं कर सकती थी?? कितनी चिंता हो रही थी मुझे.. कहाँ गई थी तू?”

 

वैशाली: “मेरी बात तो सुनो मम्मी.. वो मेरी फ्रेंड है ना.. सुमन.. ?? उसके घर गई थी.. उसके घर मेहमान आए हुए थे.. और वो बेचारी अकेली थी.. सब के लिए खाना बनाना था तो मैं उसे मदद कर रही थी.. अब उसे भला कैसे मना करती? थोड़ी देर में काम खतम कर के निकल जाऊँगी ऐसा सोचते सोचते इतना टाइम निकल गया.. फोन मेरा पर्स के अंदर था.. और वो मेहमान ऊंची आवाज पर टीवी देख रहे थे इसलिए मैं फोन की रिंग सुन नहीं पाई.. तूने खाना खाया की नहीं?”

 

शीला: “मैंने तो खाना कहा लिया.. पर तेरे कपड़ों पर इतनी रेत क्यों लगी है?” शीला की शातिर आँखों से कुछ भी बच नहीं सकता

 

“मम्मी.. ऑटो से उतरकर मैं चलते चलते सुमन के घर की तरफ जा रही थी.. तभी मेरे आगे एक रेत से भरा ट्रेक्टर जा रहा था.. आगे एक खड्डा आया और ट्रेक्टर से रेत उछल कर आजू बाजू चल रहे सब के ऊपर गिरी.. मैं नहाने जाती हूँ” शीला ओर कोई प्रश्न पूछती उससे पहले वैशाली भागकर बाथरूम में घुस गई.. शावर लेने के बाद उसे एहसास हुआ की साफ कपड़े तो लेना भूल ही गई थी.. अपने स्तनों को ऊपर तोलिया बांधकर वो बाहर निकली और बेडरूम के अंदर अपने कपड़े लेने के लिए उसने दरवाजा खोलने की कोशिश की..

 

दरवाजा अंदर से लोक था.. वैशाली ने शीला को आवाज दी.. “मम्मी.. ये बेडरूम को लोक क्यों लगाया है?? मुझे मेरे कपड़े लेने है”

शीला भागकर आई और अपने होंठ पर उंगली रखते हुए वैशाली को चुप रहने के लिए कहा “अंदर संजयकुमार सो रहे है.. धीरे से बोल वरना जाग जाएंगे.. बहोत थक कर आए है.. मुझे कह रहे थे की कोई उन्हे डिस्टर्ब न करे.. इसलिए मैंने बाहर से दरवाजा लोक कर दिया… थोड़ी देर पहले वो कविता और मौसी ने आकर भूचाल मचा दिया था.. ”

 

वैशाली: “क्यों? कविता और मौसी को क्या हुआ?”

 

शीला: “अरे हुआ कुछ नहीं.. पीयूष ऑफिस जाने के लिए निकला और समय पर पहुंचा नहीं.. उसके बॉस ने कविता को फोन किया इसलिए सब चिंता करने लगे.. मौसी ने तो ५ दिए जलाने की मन्नत भी मांग ली.. अब पीयूष कोई छोटा बच्चा है जो कहीं खो जाएगा !!! मैंने उसे समझाया की थोड़ी देर शांति रखें.. पीयूष का पता चल ही जाएगा.. और पीयूष कितना सुशील और संस्कारी लड़का है !! वो बिना बताए या घर वालों से छुपाकर कहीं जाने वालों में से नहीं है.. उलझ गया होगा बेचारा किसी काम में.. पर मेरी बात सुनता कौन!! तभी फोन आया की पीयूष का पता चल गया.. मौसी की जान में जान आई.. कविता तो रोने ही लग गई.. मैंने उनसे कहा की वो खोया ही नहीं था.. तुम लोग बेकार में टेंशन ले रहे थे.. अब इन सब शोर-शराबे से संजय की नींद खराब न हो इसलिए मैंने ही बाहर से ताला लगा दिया.. ये ले चाबी.. अंदर जाकर कपड़े बदल ले.. और हाँ.. वापिस वो अधनंगे कपड़े मत पहनना.. दामाद जी को बुरा लगेगा.. वो सोचेंगे की मायके में आकर तू आउट ऑफ कंट्रोल हो गई है.. जा अंदर.. और ब्लू कलर की साड़ी पहन कर आना.. मैंने तुझे दी थी न वो वाली.. बहुत जचेगी तुझ पर.. !!”

 

संजय का नाम सुनते ही वैशाली के मूड का सत्यानाश हो गया.. पीयूष के संग की चुदाई का जो भी नशा था वो एक ही पल में उतर गया.. संजय से वो अब नफरत करती थी.. आखिर एक औरत कब तक बर्दाश्त करेगी? मुंह बिगाड़कर वैशाली ने कहा “उसे जो सोचना हो सोचे.. मुझे कोई फरक नहीं पड़ता.. उसने मेरे कौन सी चिंता की है जो मैं उसकी परवाह करू? भाड़ में जाए संजय.. मैं तो आज मेरी पसंद के कपड़े ही पहनूँगी.. ”

 

संजय का नाम सुनते ही वैशाली के मूड का सत्यानाश हो गया.. पीयूष के संग की चुदाई का जो भी नशा था वो एक ही पल में उतर गया.. संजय से वो अब नफरत करती थी.. आखिर एक औरत कब तक बर्दाश्त करेगी? मुंह बिगाड़कर वैशाली ने कहा “उसे जो सोचना हो सोचे.. मुझे कोई फरक नहीं पड़ता.. उसने मेरे कौन सी चिंता की है जो मैं उसकी परवाह करू? भाड़ में जाए संजय.. मैं तो आज मेरी पसंद के कपड़े ही पहनूँगी.. ”

 

शीला बेबस हो गई.. आजकल की पीढ़ी को कुछ भी समझाना बड़ा ही कठिन है.. वो ओर कुछ कहती उससे पहले वैशाली ने दरवाजा खोल दिया.. अंदर गई.. और धड़ाम से दरवाजा बंद कर दिया..

 

शीला घबरा गई.. उसे यकीन था की दरवाजे की आवाज से संजय जाग जाएगा और दोनों के बीच झगड़ा होगा.. अब क्या करू? पति पत्नी के झगड़े के बीच में पड़ना भी ठीक नहीं होगा.. अरे, पति पत्नी के बीच तो मनमुटाव होता रहता है.. वैशाली बेकार में इतना गुस्सा कर रही है.. इतने दिनों के बाद आया है संजय.. पर वैशाली के चेहरे पर कोई खुशी ही नहीं थी..

 

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