शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-24

(Desi Kahani) 13

redwalker69 2026-05-19 Comments

This story is part of a series:

मौसी दो बार झड़ चुकी थी.. उनकी विनती पर जीवा ने अपना लंड बाहर निकाला.. वो अबतक झड़ा नहीं था.. चुदकर तृप्त हो चुकी मौसी ने शर्म त्याग कर रूखी के नंगे स्तन को पकड़कर दबाया.. रूखी ने मौसी के हाथ को और जोर से अपने स्तन के साथ रगड़कर उनका दूसरा हाथ अपनी चुत पर रखवा दिया.. रूखी का “अत्यंत ज्वलनशील” भोसड़ा.. चुत की गंध वाला प्रवाही छोड़ने लगा था.. अनुमौसी की चुत ठंडी हो चुकी थी.. वो गरम सांसें छोड़ते हुए अपना भूतकाल याद कर रही थी.. इतने लंबे वैवाहिक जीवन में, चिमनलाल ने कभी उन्हे ऐसे तृप्त नहीं किया था.. चिमनलाल से वो इस कदर परेशान थी की मन ही मन नफरत करने लगी थी.. तंग आ गई थी..

 

जीवा और रघु ने अब रेणुका को रिमांड पर ले रखा था.. नए बॉलर को जिस तरह निशाने पे रखकर बल्लेबाज छक्के लगाता है.. उसी तरह जीवा और रघु ने रेणुका को इतनी बेरहमी से चोदा की रेणुका पस्त हो गई.. मदमस्त हो गई.. जीवा के प्रत्येक धक्के से रेणुका सातवे आसमान पर उड़ने लगती थी.. उसके गोरे गोरे बोब्बे को अपने खुरदरे मर्दाना हाथों से रघु मसल रहा था.. उस दौरान जीवा अपने गन्ने जैसे लंड से रेणुका की चुत का भोसड़ा बना रहा था.. शीला और रूखी, जीव और रघु के दमदार लंड को बड़े ही अहोभाव से देख रही थी.. वह दोनों एक दूसरे के आलिंगन में लिपटकर अपनी चुत खुजा रही थी..

 

जीवा के दमदार धक्कों से रेणुका अनगिनत बार स्खलित हो गई थी.. जितनी बार वो स्खलित होती तब वह अपनी कमर को बिस्तर से एक फुट ऊपर उठा लेती.. और तभी जीवा रेणुका की कमर को मजबूती से पकड़कर बिस्तर पर फिर से पटक देता और चोदना जारी रखता.. अपनी मर्दानगी का पूर्ण प्रदर्शन करते हुए.. जीवा अपने अजगर जैसे लंड को रेणुका की चुत में अंदर बाहर करते ही जा रहा था.. रेणुका की चुत और जीवा का लंड ऐसे उलझ गए थे जैसे प्रकृति ने उनका निर्माण एक दूसरे के लिए ही किया हो.. रेणुका की कराहें और सिसकियाँ पूरे कमरे में गूंज रही थी.. मदमस्त होकर रेणुका जीवन के सबसे बेहतरीन आनंद को महसूस कर रही थी.. उसकी हरेक सिसक कामुकता से भरपूर थी..

 

रेणुका: “ओह्ह जीवा.. मर गई मैं तो.. मज़ा आ गया.. लगा धक्के.. आह्ह उहहह.. ऊई माँ.. ओह्ह शीला.. आज तो मैं धन्य हो गई.. यार.. कितने सालों से मैं ऐसा ही कुछ ढूंढ रही थी.. जबरदस्त है तेरा लंड जीवा.. अंदर तक ठोकर मार रहा है.. उहह उहह.. ”

 

रघु के लंड को लोलिपोप की तरह चूस रही थी मौसी.. शीला और रूखी अपने बलबूते पर ही दो-तीन बार झड़ चुकी थी.. चुद रही रेणुका खुद ही अपने स्तनों को ऐसे मरोड़ रही थी जैसे उन्हे जिस्म से अलग कर देना चाहती हो.. जीवा “पच्च पच्च” की आवाज के साथ कातिल धक्के लगाता जा रहा था.. रेणुका फिर से किनारे पर पहुँचने वाली थी.. अब तो उससे स्खलन भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था.. अपने हाथ फैलाकर उसने जीवा के कंधों को पकड़कर अपनी ओर खींच लिया और उसे चूमने लगी.. रेणुका के होंठ चूसते हुए जीवा ने अपनी मजबूत बाहों में भरकर रेणुका को बिस्तर से उठा लिया.. चुत को लंड में घुसाये रखा

 

जीवा का ये बाहुबली प्रदर्शन देखकर.. रूखी, अनुमौसी और शीला की आह्ह निकल गई..

 

अनुमौसी: “बाप रे.. देख तो शीला.. इसने तो रेणुका को उठा लिया.. और खड़े खड़े नीचे से पेल रहा है.. इसका लंड तो जिसे मिल जाए उसका जीवन सार्थक बन जाएँ.. सांड जैसी ताकत है इसमें.. देखकर मुझे फिरसे नीचे खुली होने लगी है”

 

रेणुका ने अपने दोनों पैरों को जीवा की कमर के इर्दगिर्द लपेट लिया.. चौड़ी चुत में जीवा का लंड अंदर बाहर हो रहा था.. जीवा का आधा लंड अंदर और आधा बाहर था.. जीवा ने रेणुका के कूल्हों को मजबूती से पकड़कर संतुलन बनाए रखा था.. रेणुका की चुत इतनी फैल चुकी थी की हाथ की मुठ्ठी भी आसानी से अंदर चली जाएँ.. जीवा के हर धक्के के साथ रेणुका की चुत का रस जमीन पर टपक रहा था… रेणुका ने अपने दोनों हाथ जीवा की गर्दन पर लपेट लिए थे.. और जीवा के होंठ कामुक अंदाज में चूसते हुए नीचे लग रहे धक्कों का आनंद ले रही थी.. जीवा की छाती से दबकर उसके दोनों स्तनों बगल से झाँकने लगे थे.. जीवा के इस रौद्र स्वरूप को देखकर उत्तेजित हो चुकी शीला और रूखी ने अनुमौसी के भोसड़े पर हमला कर दिया..

 

रेणुका को उठाकर चोदते हुए जीवा पूरे कमरे में यहाँ वहाँ घूम रहा था.. इतना ही नहीं.. वो चलते चलते किचन में आया.. और मटके से लोटा भरकर पानी निकालकर पीने लगा.. ये सबकुछ वो रेणुका को चोदते हुए ही कर रहा था.. किचन के प्लेटफ़ॉर्म पर पड़ी सब्जियों की टोकरी से जीवा ने एक खीरा उठाया.. और उसे रेणुका की गांड के छेद पर रगड़ने लगा.. रेणुका के दोनों चूतड़ पूरे फैल चुके थे.. खीरा गांड के छेद पर रगड़ते हुए जीवा रेणुका को लेकर वापस बेडरूम में आ गया.. शीला, रूखी और मौसी.. इस रोमांचक फाइनल मेच को देख रहे थे.. जीवा जिस तरह से रेणुका को उठाकर चोद रहा था.. ये अनुमौसी को बेहद पसंद आ गया.. एक बार जीवा से इसी तरह चुदवाने का मन बना बैठी वो..

 

अनुमौसी खड़े खड़े एकटक जीवा-रेणुका की चुदाई देख रही थी.. तभी रघु चुपके से उनके पीछे गया..उनके चूतड़ फैलाये और अपनी जीभ उनके छेद पर फेर दी..

 

“उईई माँ.. ” मौसी और कुछ नहीं बोली.. रघु ने उनकी गांड से लेकर चुत तक चाटना शुरू कर दिया.. अनुमौसी का शरीर इस चटाई से कांपने लगा था.. रघु आसानी से चाट सके इसलिए वो थोड़ा सा झुक गई.. इसी के साथ रघु की जीभ ने मौसी की गांड में एंट्री मार दी.. जीभ के कुरेदने से मौसी को खुजली होने लगी.. और उन्होंने अपनी तीन उँगलियाँ अपनी चुत में रगड़ना शुरू कर दिया..

 

“आह्ह.. ओह्ह.. हाँ रघु.. वही पर.. जरा दाईं तरफ.. हाँ वही.. उईई.. चाट मेरी.. आह्ह रघु.. ” रघु उनके चूतड़ों को और फैलाकर जितना हो सकता था उतने अंदर अपनी जीभ घुसाता गया.. उत्तेजीत मौसी ने अपने शरीर को थोड़ा सा और झुकाया.. आज का दिन मौसी के लिए सबसे यादगार दिन बन रहा था..

 

रेणुका को अपने अलग अंदाज में उछाल उछालकर चोद रहे जीवा ने लंड की साइज़ का खीरा रेणुका की गांड के अंदर घुसाने की कोशिश की.. और बेरहमी से आधा खीरा अंदर घुसा दिया.. रेणुका को इतना दर्द हुआ की वो चिल्लाने लगी.. उसकी चीख को रोकने के लिए जीवा ने उसके होंठों पर अपने होंठ दबाकर उसे चुप करा दिया.. और इशारे से अपनी प्रेमीका रूखी को करीब बुलाया.. अपने स्तन और कूल्हें मटकाती हुई बड़ी ही मादक चाल से चलती रूखी जीवा के करीब आई और रेणुका तथा जीवा दोनों के कूल्हों को सहलाने लगी..

 

जीवा: “यार रूखी..तू इसकी गांड में उंगली करते हुए मेरे आँड चूस दे.. तेरी मदद के बगैर मेरा लंड झड़ने नहीं वाला.. ” वो फिरसे रेणुका के होंठ चूसने लगा

 

अचानक अनुमौसी चीखने लगी “नहीं नहीं.. मर गई दर्द से मैं तो.. आहह शीला.. तू बोल ना इसे की मेरी गांड से निकाल ले.. मुझे पीछे नहीं करवाना.. बहोत दर्द होता है मुझे.. ” सबकी नजर अनुमौसी की ओर गई.. रघु ने झुककर खड़ी मौसी की गांड में एक ही धक्के में अपना लंड घुसा दिया था.. मौसी को दिन में तारे नजर आने लगे.. रघु ने मौसी का जुड़ा खोल दिया और उनके लंबे बालों को खींचकर उन्हे पकड़ रखा था.. मौसी हिल भी नहीं पा रही थी.. रघु ने जोर से बालों के ऐसे खींचा की अनुमौसी की गर्दन ऊपर हो गई और उनकी चीख गले में ही अटक गई.. मौसी अब पूरी तरह से रघु की गिरफ्त में थी.. घोड़ी कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो.. लगाम खींचते ही काबू में आ ही जाती है.. अनुमौसी को पता चल गया था की रघु अपनी मनमानी करके ही रहेगा..

 

मौसी गिड़गिड़ाने लगी.. “रघु.. प्लीज.. निकाल दे बाहर.. दर्द से मरी जा रही हूँ.. हाथ जोड़ती हूँ तुझे.. आगे के छेद में जितना मर्जी डाल ले तू.. पर पीछे मत कर.. जलन हो रही है.. दया कर मुझ पर.. ”

 

मौसी का ये हाल देखकर शीला उनके करीब आकार नीचे बैठ गई.. पहले उसने मौसी के होंठ चूम लिए.. और उनके लटक रहे नारियल जैसे स्तनों को दबाने लगी.. ग्लाइकोड़ींन पीने से जैसे खांसी बंद हो जाती है.. वैसे ही शीला की हरकतों से मौसी शांत हो गई.. शीला ने मौसी की ऐसी खास जगहों पर स्पर्श किया की मौसी सिहरने लगी.. रघु मौसी की गांड में लंड घुसेड़कर ठुमक रहा था.. धक्कों से मौसी की गांड चौड़ी हो गई थी.. अब उनका दर्द काम होने लगा..

 

मौसी: “शीला.. मेरी चूचियाँ भी चूस दे थोड़ी सी” शीला को मौसी के पिचके हुए स्तन चूसने का बिल्कुल मन नहीं था.. बिना रस के आम कौन चूसेगा भला!! फिर भी शीला ने उनकी निप्पलों को मुंह में लेकर “बच बच” की आवाज के साथ चूसना शुरू कर दिया..

 

रूखी अपने प्रेमी के खूंखार लंड से चुद रही रेणुका की भोस को बड़े ही गर्व से देख रही थी.. जीवा के आँड को चूसते हुए.. रसिक के लंड से मोटे खीरे को रेणुका की गांड में डालती जा रही थी.. रूखी को रेणुका की गांड मारने में बड़ा ही मज़ा आ रहा था.. उसने खीरे को एक बार अपनी चुत पर भी रगड़कर देख लिया.. बहोत मज़ा आया.. आज घर जाकर ये प्रयोग जरूर करूंगी.. रूखी ने शीला को अपने पास बुलाया.. और रेणुका की गांड से निकली हुई ककड़ी उसकी चुत में दे मारी..

 

अनुमौसी की गांड फाड़ कर थक चुका रघु.. अपना लंड खींचकर.. रूखी की चुत पर टूट पड़ा.. मौसी बेचारी अपनी गांड बचाकर दूर भाग गई.. बड़ी मुश्किल से लँगड़ाते हुए चल आ रही थी मौसी… वो कपड़े पहनकर दूर बैठी ये चुदाई का भव्य खेल देखने लगी.. उनकी चुत और गांड दोनों ठंडे हो चुके थे.. और इस उत्सव से उन्होंने इस्तीफा देते हुए वी.आर.एस ले लिया था..

 

दर्शक बनकर बैठी मौसी.. बाकी बचे बल्लेबाजों के फटके देख रही थी.. उनकी सांस अब भी फुली हुई थी.. बेचारी मौसी!!! लेकिन शीला की मदद से उनके चुदाई जीवन को चार चाँद लग गए थे इसमें कोई दो राई नहीं थी..

 

रेणुका की हालत देखकर मौसी सोच रही थी.. “कितनी गर्मी है साली की चुत में!! इस जालिम जीवा के खूंखार लंड से चुद रही है फिर भी थकने का नाम नहीं ले रही.. वैसे रघु का लंड भी कुछ कम नहीं है” सभी प्रतिभागियों की क्षमता का पृथक्करण कर रही थी मौसी.. जीवा और रघु के लंड पर तो वो अब निबंध लिख सकती थी.. एक पल के लिए उन्हे ऐसा विचार आया की अगर जीवा और रघु को वियाग्रा की गोली खिला दी जाए और उनके लंड पर जापानी तेल की मालिश की जाएँ.. तो क्या होगा? बिना किसी मदद के भी उन्होंने मेरी गांड फाड़ दी.. अगर इन्हे गोली खिलाकर तेल लगाकर चुदवाएं तो ये दोनों माँ चोद देंगे मेरे भोसड़े की.. सीधा एम्बुलेंस से अस्पताल जाने की नोबत आ जाएँ.. गांड और चुत को टाँकें लगाकर सिलवाना पड़ जाएँ..”

 

रेणुका का काम तमाम हो गया.. आखिरी कुछ धक्कों ने तो उसे लगभग रुला दिया था.. रेणुका की चुत पर ऐसे भयानक प्रहार पहली बार हुए थे.. जीवा को ऐसी टाइट कडक चुत मिलने पर वो भी दोहरे जोर से धक्के लगा रहा था.. जब तक रेणुका उत्तेजित थी तब तक उसे मज़ा आ रहा था.. पर अब ५-६ बार स्खलित हो जाने के बाद उसे दर्द होने लगा था.. चुत भी जल रही थी.. पेट भर जाने के कोई जबरदस्ती खिलाएं और जो हाल होता है वही हाल रेणुका का हो रहा था.. जीवा के लंड के प्राहर अब उसे आनंद के बजाए पीड़ा दे रहे थे

 

“ओहह ओहह आह्ह मर गई.. बस बहोत हुआ जीवा.. मेरा हो गया.. अब निकाल ले बाहर.. बस अब ओर नहीं.. मेरे पेट में दर्द होने लगा है.. मैं झड़ चुकी हूँ.. धीरे धीरे.. ओ माँ.. स्टॉप ईट जीवा.. शीला.. इससे कहों के बाहर निकाले.. ” रेणुका की हालत बद से बदतर होती जा रही थी.. जीवा किसी खूंखार जंगली जानवर की तरह रेणुका की सारी बातें अनसुनी कर बेरहमी से चोदता ही गया.. रेणुका का नंगा बदन चुदते चुदते पसीने से तरबतर हो गया था..

 

अनगिनत बार झड़ जाने के बाद भी रेणुका को जीवा ने नहीं छोड़ा.. अंत में उसे बिस्तर पर पटक दिया और अपना मूसल लंड बाहर खींच लिया.. खतरनाक धक्के खा खा कर रेणुका की हालत खराब हो गई.. थोड़ी देर आराम करने के बाद उसकी सांसें ठीक हुई.. वासना का तूफान शांत हो गया.. रेणुका अब चुपचाप मौसी के पास आकर बैठ गई.. अब रूखी-शीला और जीवा-रघु के बीच घमासान चल रहा था

 

शीला और रूखी की हवस तो मौसी और रेणुका के मुकाबले कई ज्यादा थी.. रघु शीला को उलटी लिटाकर उनकी चुत को धमाधम चोदते हुए पावन कर रहा था.. इस दौरान अनुमौसी चुपके से अपने घर चली गई..

 

शीला और रूखी की हवस को देखकर रेणुका स्तब्ध हो गई.. रूखी का देसी कसरती शरीर का सौन्दर्य उसे प्रभावित कर गया.. तो दूसरी तरफ शीला की गोरे खंबे जैसी जांघें.. पुष्ट पयोधर मदमस्त स्तन.. सपाट गोरी और दागरहित पीठ.. लचकदार कमर.. और मटके जैसे कूल्हें..

 

रेणुका ने नीचे हाथ फेरकर अपनी चुत के हालचाल चेक किए.. कहीं ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ ना!! जीवा ने तो आज हद ही कर दी.. ऐसे भी भला कोई चोदता है.. !! रूखी अब जीवा का काले सांप जैसा लंड चूस रही थी.. देखकर ही रेणुका के पसीने छूट गए.. बाप रे.. इतना बड़ा लिया था क्या मैंने !!!

 

शीला रघु के लंड से फूल स्पीड में चुद रही थी.. “आह्ह रघु.. बहोत मज़ा आ रहा है.. और जोर से.. शाबबास.. वाह मेरे राजा.. क्या ताकत है तेरी.. मस्त धक्के लगा रहा है.. ओह.. फाड़ दे मेरी चुत.. आहह आहह.. ओर जोर से ठोक.. उहह उहह.. और तेज.. जल्दी जल्दी.. हाँ हाँ.. वैसे ही.. आहह आह्ह.. मैं झड़नेवाली हूँ.. रुकना मत.. आह्हहह आह्ह आईईईईईई.. !!!!” शीला झड गई

 

शीला: “मेरा पानी निकल गया और तू अब तक नहीं झड़ा रघु??”

 

रघु: “भाभी.. आज गांड नहीं मारने दोगी क्या??” कहते हुए रघु ने शीला की गांड में उंगली डालकर हिलाया

 

शीला: “नहीं रघु.. आज नहीं.. आज तो भोस को ही तृप्त करना है.. गांड मरवाने का मूड नहीं है मेरा”

 

“रघु.. तुम मेरी गांड मार लो” जीवा का लंड चूसते हुए रूखी ने कहा

 

रघु शीला के शरीर से उतरकर रूखी के पास गया.. घोड़ी बनकर जीवा का लंड चूस रही रूखी के चूतड़ों को हाथ से चौड़ा किया.. रूखी के सुंदर अंजीर जैसे गांड के छेद पर अपना गरम सुपाड़ा रख दिया.. रूखी ने एक पल के लिए जीवा का लंड मुंह से निकालकर कहा “आहह.. कितना गरम है तेरा लंड रघु.. अंगारे जितना गरम लग रहा है पीछे.. थोड़ा सा थूक लगाकर डालना.. सुख मत पेल देना.. मैं जानती हूँ तेरी आदत.. गांड को देखकर ही गुर्राए सांड की तरह टूट पड़ता है तू.. मरवाने वाली के बारे में सोचता तक नहीं..” रूखी ने फिरसे जीवा का लंड मुंह में ले लिया..

 

एक ही दिन में शीला और रेणुका एकदम खास सहेलियाँ बन गई.. रात को दोनों ने ब्लू फिल्म की डीवीडी देखते हुए लेसबियन सेक्स का मज़ा लिया.. फिर एक ही बिस्तर पर नंगी होकर दोनों पड़ी रही.. एक दूसरे के अंगों से खेलते हुए देर तक बातें करती रही.. समाज की.. घर की.. पति की.. पड़ोसियों की.. बातें करते करते एक दूसरे की बाहों में कब सो गई दोनों को पता ही नहीं चला..

 

एक ही दिन में शीला और रेणुका एकदम खास सहेलियाँ बन गई.. रात को दोनों ने ब्लू फिल्म की डीवीडी देखते हुए लेस्बियन सेक्स का मज़ा लिया.. फिर एक ही बिस्तर पर नंगी होकर दोनों पड़ी रही.. एक दूसरे के अंगों से खेलते हुए देर तक बातें करती रही.. समाज की.. घर की.. पति की.. पड़ोसियों की.. बातें करते करते एक दूसरे की बाहों में कब सो गई दोनों को पता ही नहीं चला..

 

सुबह पाँच बजे जब रसिक दूध देने आया तब शीला की आँख खुली.. नंगे बदन पर फटाफट गाउन पहनकर शीला दूध लेने बाहर आई.. रसिक शीला को देखकर हमेशा तुरंत उत्तेजित हो जाता.. उसने शीला के स्तनों को छेड़ते हुए दबा दिया और बोला “आज बहोत मन कर रहा है करने का भाभी.. क्या माल लग रही हो आप आज तो!!” शीला के गाउन के अंदर हाथ डालकर उसके स्तन मसलते हुए उसने कहा “अंदर आ जाऊ भाभी?”

 

शीला: “आज नहीं रसिक.. आज घर में मेहमान आए हुए है.. ”

 

रसिक: “आप भी ना भाभी.. कभी कभी ही आपसे करने के लिए बोलता हूँ और आप मना कर रही हो”

 

शीला: “धीरे बॉल रसिक.. मेहमान अंदर सो रहे है.. जाग जाएंगे तो मुसीबत आन पड़ेगी.. वरना मैंने तुझे कभी मना किया है कभी.. ?? आज नहीं हो पाएगा.. तू निकल जल्दी से”

 

रसिक उदास होकर शीला के स्तन दबाता रहा.. उसका लंड खड़ा हो गया था.. वो चुपचाप खड़ा रहा पर उसने शीला के स्तन नहीं छोड़े..

 

शीला: “ठीक है.. तू रुक यहाँ ” शीला बेडरूम में जाकर देख आई.. रेणुका गहरी नींद में सो रही थी। वो दबे पाँव वापिस आई

 

शीला: “देख रसिक.. अंदर डालने का सेटिंग तो नहीं हो पाएगा.. मैं तेरा हिला देती हूँ”

 

शीला ने रसिक की धोती में हाथ डालकर उसका लंड बाहर निकाल लिया.. लोहे के सरिये जैसा सख्त लंड हाथ में लेकर शीला हिलाने लगी.. रसिक शीला के गाउन को उठाकर उसकी चुत में उंगली घिसने लगा.. एक ही मिनट तक ये खेल चला और रसिक के लंड ने पिचकारी छोड़ दी.. शीला की चुत रसिक की उंगली के स्पर्श से पानी पानी हो गई थी.. शीला ने झुककर रसिक के झड़े हुए लंड को चूम लिया और उसे धोती के अंदर रख दिया.. रसिक चला गया

 

शीला दूध की पतीली को गेस पर गरम करने रखकर रेणुका की बगल में लेट गई.. उसने गहरी नींद सो रही रेणुका की नंगी चूचियों को ध्यान से देखा.. उसकी हर सांस के साथ चूचियाँ ऊपर नीचे हो रही थी.. शीला ने उन सुंदर स्तनों को हाथ में लिया.. रसिक के स्पर्श से गीली हो चुकी चुत को सहलाते हुए वो रेणुका के स्तनों को मींजने लगी.. तीन उँगलियाँ अपनी भोस में डालकर रसिक मे मर्दाना लंड को याद करते हुए शीला झड़ गई.. रेणुका अब भी नींद में थी.. ऑर्गैज़म का सुख प्राप्त करते ही शीला की आँख लग गई.. जब वो जागी तब रेणुका बिस्तर पर नहीं थी.. शीला ने सोचा की रेणुका बाथरूम में गई होगी.. तभी उसे याद आया.. अरे बाप रे.. दूध गरम करने रखा था वो तो भूल ही गई.. !!! वो भागकर किचन में आई.. रेणुका वहीं खड़ी थी.. चाय बना रही थी.. चाय को छान रही रेणुका को पीछे से बाहों में भर लिया शीला ने और कहा “गुड मॉर्निंग रेणुका.. !!”

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