शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-51

(Desi Kahani) 3

redwalker69 2026-05-25 Comments

This story is part of a series:

कविता आज पीयूष को सबक सिखाना चाहती थी.. उसने एक क्रान्तिकारी निर्णय लिया.. बिना ब्रा पहने ही उसने पिंटू का पसंदीदा गुलाबी टॉप चढ़ा लिया.. माय गॉड.. बिना ब्रा के टॉप पहनकर वह खुद ही शरमा रही थी.. उसकी इस हरकत पर सबका ध्यान जाने वाला था ये तो तय था.. नही नही कविता.. इस तरह लोगों के सामने नही जा सकते.. कविता वापिस टॉप उतारकर ब्रा पहनने ही वाली थी तब वापिस पीयूष की याद आ गई.. उस कड़वाहट ने उसे बिना ब्रा के ही टॉप पहनने के लिए राजी कर लिया..

 

पतले कपड़े वाले टॉप से उसके उरोज दबाकर देखे.. पत्थर जैसी सख्त चूचियाँ थी.. कुछ दिनों से उनका कोई उपयोग भी तो नही हुआ था.. !! कविता ने अपने बाल सँवारे.. और बालों की एक लट को कान के पीछे दबा दिया.. कातिल लग रही थी कविता.. बिना ब्रा के उसके स्तन.. ज्यादा बड़े नही.. और छोटे भी नही.. गुलाबी टॉप में बेहद सुंदर लग रहे थे.. कविता ने कमरे के अंदर चलकर देखा.. की कैसा लग रहा है.. अपने स्तनों को थिरकते देख वह खुद ही शरमा गई.. आज तो देखने वालों के होश ही उड़ जाने वाले थे.. पेंट की चैन टूट जाएगी सब की.. ​

 

कविता तैयार होकर मौसम और फाल्गुनी के कमरे की तरफ जाने लगी..

 

दूसरी तरफ पीयूष का लंड घुटनों के बल बैठकर चूस रही थी वैशाली.. थोड़ी देर चूसते ही सख्त गन्ने जैसा हो गया पीयूष का लंड..

 

“मस्त हो गया है पीयूष.. चल डाल दे अंदर.. !!” कहते हुए वैशाली मुड़कर झुक गई.. पीयूष ने उसका स्कर्ट ऊपर किया और पेन्टी को घुटनों तक सरका दिया.. उसके गोरे कूल्हों पर एक थप्पड़ लगाकर वह अपनी उंगलियों से चूत का छेद ढूँढने लगा.. छेद पर सुपाड़ा रखकर उसने एक धक्के में ही पूरा लंड अंदर डाल दिया.. वैशाली के मुंह से आनंद भरी चीखी निकल गई.. ​

 

“ओह्ह.. मर गई पीयूष.. आह्ह.. जल्दी जल्दी कर.. ” पीयूष फूल स्पीड में धक्के लगाने लगा.. वैशाली की कमर को कसकर पकड़कर वो धक्के लगाए जा रहा था.. ए.सी. ऑन था फिर भी दोनों पसीने से तरबतर हो गए.. थोड़ी ही देर में वैशाली चुदकर ठंडी हो गई और पीयूष ने बेज़ीन में अपना वीर्य गिरा दिया.. वैशाली ने तुरंत कपड़े पहने और पीयूष को बाहर धकेला ताकि कोई देख न ले.. अपना काम हो गया अब तू जल्दी से निकल

 

“पार्टी मे मिलते है.. बाय” पीयूष चला गया..

 

पीयूष अब मौसम और फाल्गुनी के कमरे में गया.. मौसम नहा रही थी और फाल्गुनी कोई इंग्लिश मूवी देख रही थी.. फाल्गुनी की जांघ पर हल्की सी चपत लगाते हुए उसने पूछा “मौसम कहाँ है ?”

 

“वो नहा रही है जीजू.. पता नही बहोत देर लगा दी आज उसने.. ” तभी फाल्गुनी की नजर पीयूष के लंड वाले हिस्से पर गई “जीजू, आप की पोस्ट ऑफिस खुली हुई है” कहते हुए वह हंसने लगी.. पीयूष को पता नही चला की वो क्या कहना चाहती थी

 

“क्या पागलों की तरह हंस रही है?” पीयूष ने कहा.. तभी फाल्गुनी ने उंगली से पेंट की तरफ इशारा किया.. हड़बड़ाहट में चैन बंद करना भूल गया था पीयूष.. उसका लंड अब भी थोड़ा सख्त था इसलिए अंदर उभार भी नजर आ रहा था.. पीयूष ने शरमाकर अपनी चैन बंद करने की कोशिश की.. पर लंड सख्त होने की वजह से बंद करने में दिक्कत आ रही थी.. अभी थोड़ी देर पहले ही वैशाली की चूत से बाहर निकला था.. उसका नशा उतरा नही था लंड का.. आधी चैन बंद करके ही पीयूष को संतोष लेना पड़ा.. फाल्गुनी की नजर बार बार उसके उभार पर जा कर अटक जाती थी.. पीयूष का वो उभरा हुआ हिस्सा फाल्गुनी के नादान मन मे अजीब सी गुदगुदी पैदा कर रहा था..

 

तभी टीवी पर चल रहे मूवी मे हीरो और हीरोइन एक दूसरे को किस करने लगे.. फाल्गुनी शरमा गई और चैनल बदलने के लिए रीमोट ढूँढने लगी.. वैसे उसने इंग्लिश मूवी लगाई ही इसलिए थी ताकि ऐसे सीन देख सके वरना वो आस्था चैनल न लगाती!!! पर किसी पुरुष के सामने ये सीन चल जाने पर वह शर्म से पानी पानी हो गई.. आधे घंटे से मूवी मे कोई सीन नही आया.. और पीयूष की हाजरी मे ही सब शुरू हो गया.. मौसम की बात अलग थी.. वो पीयूष की साली थी.. लेकिन पीयूष के सामने फाल्गुनी अपनी मर्यादा मे ही रहती.. जब मौसम और पीयूष किसी नॉनवेज जोक पर हँसते तब फाल्गुनी शरमाकर चुप ही रहती.. मौसम हमेशा उसे टोकती की वह सब के साथ ज्यादा बात नही करती.. पर पता नही क्यों.. सेक्स को लेकर कोई बात आते ही फाल्गुनी के पसीने छूट जाते.. और वो थरथर कांपने लगती.. सेक्स के प्रति इस अभिगम के बारे मे मौसम ने कई बार फाल्गुनी से पूछा पर उसने कभी कुछ बताया नही.. मौसम को ऐसा लगता था जैसे फाल्गुनी कुछ कहना तो चाहती थी पर कह नही पाती थी

 

पीयूष बेफिक्र होकर सोफ़े पर बैठकर टीवी देखने लगा.. अभी अभी खतम हुए किसिंग सीन को लेकर फाल्गुनी काफी अपसेट थी.. पर पीयूष को इससे कोई फरक नही पड़ा.. वो तो बस मौसम को देखने आया था.. उस कच्ची कली को नंगी करके उसका सील तोड़ने का मौका मिल जाए तो पूरा जीवन सफल हो जाएँ.. टीवी देखते देखते ये सोच रहा था पीयूष.. अभी मौका था.. आबू के मदमस्त वातावरण मे साली को गरम कर दिया हो तो वापिस घर जाकर कोई न कोई मौका जरूर मिल जाएगा.. ऐसा कुछ करना था यहाँ की मौसम पूरा दिन उसी के नाम की माला जपती रहे.. जो भी करना था यहीं करना था.. एक बार घर चले गए फिर घंटा कुछ होना था.. !!! माउंट आबू में सिर्फ प्रोजेक्ट मौसम की प्राथमिकता रहेगी.. प्रोजेक्ट रेणुका, प्रोजेक्ट वैशाली और प्रोजेक्ट शीला को घर जाकर देख लेंगे..

 

इन सारी बातों से बेखबर मौसम बाथरूम के अंदर साबुन के झाग को अपने स्तनों पर रगड़ते हुए.. जीजू के साथ आज दोपहर को जो हुआ था.. उसे याद कर रही थी.. मदहोश कर देने वाली किस.. और स्तन मर्दन.. आह्ह.. मौसम ने बेसिन से टूथब्रश उठाया और अपनी चूत पर रगड़ दिया.. आह्ह.. शावर से गिर रहा गरम पानी.. उस गर्माहट की याद दिलाने लगा जो उसने तब महसूस की थी जब पीयूष ने उसके स्तन दबा दिए थे.. आज से पहले कभी भी मौसम इतना उत्तेजित नही हुई थी.. वो अपने मनपसंद हीरो को याद कर अपनी चूत मे उंगली तो पहले भी करती थी.. पर आज प्रत्यक्ष अनुभवों को याद करते हुए वह हस्तमैथुन कर रही थी.. और उसे बड़ा ही अनोखा मज़ा मिल रहा था.. पीयूष ने जिस तरह उसकी निप्पल को मसला था.. ओह्ह.. कितना मज़ा आया था यार.. !!! हाययय.. मौसम का मन कर रहा था की ऐसे ही नंगी होकर वो बाहर निकले और पीयूष से लिपट जाए.. पीयूष को याद करते हुए उसने आधा टूथब्रश अपनी चूत मे डाल दिया.. अब असली लंड को अंदर घुसाने का समय आ चुका था​

 

लंड की याद में आज पहली बार ऑर्गजम मिला था मौसम को.. अद्भुत.. अवर्णनीय सुख का अनुभव हुआ उसे.. सारा जिस्म हल्का हल्का सा महसूस हो रहा था.. जवानी की दहलीज पर खड़ी लड़की तभी खिलती है जब किसी प्रेमी का स्पर्श होता है..

 

ब्रा के हुक बंद करते हुए.. मौसम अपने जीजू के साथ संसर्ग से खिल उठे अपने स्तनों को संभालकर ब्रा में फिट करते हुए हंस पड़ी.. जैसे किसी महत्वपूर्ण डॉक्यूमेन्ट को लॉकर में रख रही हो उतना संभालकर उसने अपने स्तनों को ब्रा के अंदर बांध लिया.. पेन्टी पहनकर उसने तौलिया छाती पर लपेट लिया और बाहर निकली.. भीगे बाल.. अर्धनग्न जिस्म पर तौलिया लपेटा हुआ जवान जिस्म.. मौसम का रूप किसी एटम-बॉम्ब से कम नही था.. और इस बॉम्ब की झपेट में जो सबसे पहले आया.. वो था पीयूष.. !!

 

मौसम का यह रूप देखकर पीयूष चोंक उठाया.. मौसम को भी यह कल्पना नही थी की जीजू अभी उसके कमरे में ही उपस्थित होंगे.. वो तो आराम से बाथरूम के बाहर निकली.. पर सामने सोफ़े पर पीयूष को बैठा देखकर शरमा गई.. और बेड पर पड़े अपने कपड़े लेकर तुरंत बाथरूम में चली गई.. जाते हुए पीछे से उसकी गीली पीठ और घुटनों को देखकर पीयूष का लंड उसकी पतलून के अंदर ही भारत-नाट्यम करने लगा..

 

बाथरूम का दरवाजा बंद करते वक्त मौसम ने पीयूष की तरफ देखा.. दोनों की नजर एक हुई.. और पीयूष उस कातिल नज़रों से घायल हो गया.. इस पूरे तमाशे को फाल्गुनी देख रही थी.. पर उसके चेहरे के हावभाव में कोई बदलाव नही आया.. छेड़छाड़.. रोमांस.. शारीरिक आकर्षण.. यह सारे विषय उसके लिए सिलेबस में फिलहाल कहीं मौजूद ही नही थे..

 

करीब दस मिनटों के बाद मौसम कपड़े पहनकर बाहर आई.. कमरे में सन्नाटा था.. मौसम का हुस्न इतना कातिल था की ट्यूबलाइट की रोशनी भी उसके सामने फीकी लग रही थी.. जैसे ही मौसम बाहर निकली.. फाल्गुनी अपने कपड़े लेकर अंदर नहाने के लिए चली गई.. पीयूष और मौसम कमरे में अकेले थे.. एकांत मिलते ही पीयूष के अंदर का बंदर उछलकूद करने लगा.. उसने मौसम को आँख मारी.. मौसम शरमा गई.. वो अब आईने मेइन देखकर मेकअप करते हुए बार बार पीयूष को कनखियों से देख रही थी.. पीयूष पीछे से उसके कूल्हें देखकर अपने लंड को बार बार सहला रहा था..

 

पीयूष से अब ओर रहा नही गया.. इस मौके का फायदा उठाने के इरादे से वह खड़ा होकर मौसम के पास गया और उसे बाहों में भर लिया.. फाल्गुनी बाथरूम में थी इसलिए मौसम ने विरोध नही किया.. पीयूष ने झुककर उसकी गर्दन के पिछले हिस्से को चूम लिया.. अपने जीजू की इस प्रेमभरी हरकत से मौसम को इतना मज़ा आया की उसकी आँखें बंद हो गई..

 

अपना हाथ पीछे ले जाकर वो पीयूष के बालों में अपनी उँगलियाँ फेरने लगी.. हाथ ऊपर होते ही उसके दोनों स्तन उभरकर बाहर आ गए.. आईने में उन स्तनों का प्रतिबिंब देखकर पीयूष बावरा होकर उनपर टूट पड़ा.. कच्ची कुंवारी छाती पर मर्द का स्पर्श अनुभवित कर मौसम मस्त होकर जैसे स्वर्ग में पहुँच गई.. पीयूष का खड़ा लंड उत्तेजना पूर्वक मौसम की पीठ पर वार कर रहा था.. मौसम को पीयूष का लंड अपनी पीठ पर चुभता हुआ महसूस हो रहा था.. अनजाने में ही वह अपनी पीठ को उनके लंड पर रगड़ने लगी..

 

पीयूष ने अपना हाथ मौसम के ड्रेस के अंदर डालकर उसकी चूचियों को दबोच लीया.. मौसम ने अपना चेहरा घुमाया और दोनों के होंठ एक हो गए.. कामाग्नि से दोनों के बदन तपने लगे.. एक दूसरे के जिस्म को भोगने की चाह तीव्र होने लगी.. पर मौसम को ये मालूम नही था की इस भूख को जितना तृप्त करो उतना ही बढ़ती जाती है.. !! अपने जिस्म पर पीयूष के स्पर्श से बेकाबू हो रही मौसम को ये भी अंदाजा नही रहा की जिसके साथ वो ये खतरनाक खेल खेल रही है.. वह उसकी बड़ी बहन का सुहाग था.. वाकई वासना इंसान को अंधा बना देती है

 

“मौसम, आई वॉन्ट टू सक यॉर निप्पल.. !!!” पीयूष ने मौसम के कान में कहा

 

मौसम इस प्रपोज़ल को सुनकर कामुक हो उठी.. लेकिन औरत कितनी भी उत्तेजित क्यों न हो.. अपने आसपास की परिस्थितियों का पूरा ध्यान रखती है..

 

“जीजू, फाल्गुनी किसी भी वक्त बाहर आ सकती है.. अभी नही, प्लीज.. अब आप जाइए, वो थोड़ी ही देर में बाहर निकलेगी.. ” मौसम ने समझाया

 

“नही मौसम.. मुझसे रहा नही जाता.. कुछ भी कर.. मुझे तेरा बॉल चूसना है अभी.. प्लीज”

 

“ओह्ह जीजू.. आप समझते क्यों नही.. अभी ये पॉसिबल नही है.. प्लीज ट्राय टू अन्डर्स्टैन्ड.. !!”

 

“आई लव यू, मौसम” पीयूष उसके कान में फुसफुसाया और उसके दोनों स्तनों को मसल दिए.. मौसम ने भी अपनी पीठ से पीयूष के लंड को दबा दिया..

 

पीयूष के मुंह से “आई लव यू” सुनकर मौसम को बहोत अच्छा लगा.. वह अपने जीजू से बार बार यह सुनना चाहती थी.. पर ऐसा करने से उसकी बहन के संसार को बड़ा खतरा था ये अब ज्ञात हुआ मौसम को.. वैसे वो कुछ बोले या न बोले उससे क्या फरक पड़ता था? वो जो कुछ भी कर रही थी वह अपने जीजू के प्रेम का स्वीकार नही था तो और क्या था? मौसम पीयूष की बाहों में समा गई.. जीजू की बाहों में उसे अद्भुत सलामती और प्रेम की संवेदना महसूस होती थी.. उसने पीयूष को चूमा.. पीयूष ने उसकी जीभ चूस ली.. मौसम भी अब बेहद उत्तेजित हो चुकी थी..

 

मौसम के वी-नेक गले वाले ड्रेस के अंदर हाथ डालकर पीयूष ने उसका एक स्तन बाहर खींचने की कोशिश की.. पर ड्रेस इतना टाइट था की वह उसे बाहर निकाल नही पाया.. लेकिन स्तन का ५० प्रतिशत हिस्सा बाहर निकल गया था.. उस आधे दिख रहे स्तन की गोरी गोलाई को उसे चूमकर ही संतोष लेना पड़ा.. आक्रामक होकर उसने अपने दांत गाड़ते हुए उसके स्तन को काट लिया.. अपने उभार को वापस ब्रा के अंदर डालते हुए मौसम ने देखा की पीयूष के काटने से उसके स्तन पर लाल निशान बन गया था.. मौसम के जीवन का प्रथम लव-बाइट.. !!

 

तभी बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई.. दोनों एकदम से अलग हो गए.. और पीयूष कमरे से बाहर चला गया

 

पौने आठ बज चुके थे.. और आठ बजे तो सबको डाइनिंग रूम में इकठ्ठा होना था.. सब से पहले मौसम और फाल्गुनी पहुँच गए.. मौसम के चेहरे पर उत्तेजना का नशा अब भी दिख रहा था.. एक के बाद एक.. सब समय पर डाइनिंग हॉल में आने लगे..कविता और पीयूष भी अलग अलग आए थे.. कविता का ड्रेसिंग देखकर सबकी सांस गले में ही अटक गई..

 

सबसे पहले रेणुका ने कविता की तारीफ की “Wow..!! Kavita, you are looking absolutely gorgeous..!!कितनी जवान और खूबसूरत लग रही है तू इस ड्रेस में.. कौन कहेगा की तू शादी शुदा है !! अठारह से ऊपर एक साल की नही लग रही तू.. ” उसकी कमर पर चिमटी काटते हुए उसने कहा .. अपनी तारीफ सुनकर कविता खुश हो गई

 

मौसम और फाल्गुनी भी कविता का ड्रेसिंग देखकर चकित रह गए “दीदी, गजब लग रही हो आप इस ड्रेस में.. एकदम कयामत!!” फाल्गुनी ने शरमाते हुए कहा “दीदी आप तो नोरा फतेही से भी ज्यादा हॉट लग रही हो!!” फिर नजदीक जाकर फाल्गुनी ने कविता के कान में कहा “अरे दीदी, आपने ब्रा क्यों नही पहनी?? आप जब चलती हो तो सब उछलता है”

 

फाल्गुनी की बात सुनकर कविता ने हँसकर उसे प्यार से गाल पर हल्की चपत लगाई और कहा “उछलने दे.. उछलने से क्या होता है.. !! बाहर तो नही निकल रहे है ना.. !!” कहते हुए वह बिंदास पीयूष के पास जाकर खड़ी हो गई.. पीयूष वैशाली के साथ बातों में उलझा हुआ था.. कविता को देखकर वैशाली के होश उड़ गए.. पीयूष ने एक नजर कविता की तरफ देखा.. और उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कविता ने ऐसे कपड़े पहनकर खानदान की इज्जत की माँ चोद दी हो..

 

गुस्से में पीयूष ने कहा “इससे अच्छा तो तू बिना कपड़ों के ही चली आती.. !!! लोगों को दिखाने का शौक हो तो पूरा ही दिखा दे एक बार में .. !! इतना भी छुपाकर क्यों रखा? मेरी इज्जत को डुबोने बैठी है तू.. !!”

 

“कोई कपड़ों से अपनी इज्जत की धज्जियां उड़ाता है तो कोई अपने बर्ताव से.. !!” कविता ने बेफिक्री से जवाब दिया..

 

लंबे डाइनिंग टेबल पर सब बैठने लगे.. कविता के साथ बैठने के बजाए पीयूष, पिंटू के साथ जाकर बैठा.. यह बात राजेश ने नोटिस की.. राजेश भी कविता के पिंक टॉप में से बिना ब्रा की दिख रही गोलाइयों को ताड़ रहा था.. सिर्फ राजेश ही नही.. हॉल में बैठे सभी मर्दों की नजर बार बार कविता पर चली जाती थी.. गुलाबी रंग के स्लीवलेस पतले टॉप के अंदर परफेक्ट साइज़ के स्तनों ने हाहाकार मचा दिया था..

 

खाना परोसा जाने लगा.. एक के बाद एक नई नई डिश आने लगी.. कविता तीरछी नज़रों से पीयूष का निरीक्षण कर रही थी.. की वो कितनी बार वैशाली की तरफ देखता है..

 

सब के सामने राजेश ने पीयूष से कहा “पीयूष, तेरे जितना मूर्ख आदमी इस पार्टी में और कोई नही है”

 

“क्यों? क्या हुआ सर?”

 

राजेश: “अरे भई, इतनी सुंदर.. मोम की पुतली जैसी पत्नी को छोड़कर तू पिंटू के साथ बैठ गया.. !!! ये तो अच्छा हुआ की कविता के बगल में मौसम बैठी है.. वरना उसके पास बैठने वालों की लाइन लग जाती.. ”

 

कविता गर्व से पीयूष की ओर देख रही थी.. पीयूष नीचे देखने लगा.. मन ही मन वो कविता को.. इस स्थिति के लिए कोस रहा था..

 

राजेश: “जाओ पीयूष.. अपनी पत्नी के पास जाकर बैठो”

 

पीयूष: “नहीं.. मैं यहीं ठीक हूँ.. ” राजेश की राय को ठुकराते हुए उसने कहा

 

“कोई बात नही सर.. अगर वो मेरे पास आकर नही बैठता.. तो मैं ही उसके पास चली जाती हूँ” कहते हुए कविता खड़ी हुई.. हाई हील के सैन्डल पहनकर अपने स्तनों को मटकाते हुए वो पिंटू और पीयूष के पास आई और बोली “पिंटू सर.. आप प्लीज जरा बगल वाली कुर्सी में शिफ्ट हो जाएंगे.. ??

पिंटू की तो जैसे लॉटरी ही लग गई.. “स्योर मैडम.. ” कहते हुए एक कुर्सी छोड़कर बैठ गया.. और कविता, पीयूष और पिंटू के बीच में बैठ गई.. कविता के मन की मुराद भी पूरी हो गई.. एक तरफ पति था और दूसरी तरफ उसका प्रेमी.. बीच में कविता.. बैठते वक्त उसने पीयूष के पैरों पर जान बूझकर लात मारी और सब सुन सके ऐसी आवाज में कहा “हाई पीयूष.. कैसे हो? “जैसे वह किसी अनजान से बात कर रही हो.. हद तो तब हुई जब कविता ने बाउल से सब से पहले पिंटू की थाली में परोसा और फिर बची कूची सब्जी पीयूष के प्लेट में डाली.. पीयूष की इज्जत का कचरा कर दिया कविता ने.. डाइनिंग टेबल पर बैठे सब को यकीन हो गया की कविता और पीयूष के बीच कुछ अनबन थी..

 

मौसम को कविता का पीयूष के प्रति ये कठोर बर्ताव बिल्कुल अच्छा नही लगा.. पीयूष के लिए उसे बुरा लग रहा था.. पर वो कुछ कर नही सकती थी..इसलिए उसने अपना ध्यान खाना खाने पर केंद्रित किया.. सिल्क की भारी साड़ी में सजी हुई रेणुका खाना खाते हुए बार बार पीयूष की ओर देख रही थी और सोच रही थी की आखिर कविता ऐसा क्यों कर रही है ?? कविता ने खुद ही उसे अपने और पिंटू के प्रेम प्रकरण के बारे में बताया था.. अपने प्रेमी के संग डिनर कर रही कविता को देखकर रेणुका को भी पीयूष के साथ बैठने का दिल करने लगा था..

 

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