शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-41
(Desi Kahani) 7
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रेणुका के उरोजों पर पीयूष फ़ीदा था.. एक स्तन को पूरा पकड़ने के लिए पीयूष को अपनी दोनों हथेलियों का उपयोग करना पड़ता था.. एक हाथ से दबाए ही नहीं जाते थे.. दोनों हाथों से स्तनों को मसलते हुए निप्पल मुंह में लेकर वह पुच पुच की आवाज करते हुए चूसने लगा.. अपनी निप्पल पर पीयूष की जीभ का स्पर्श होते ही रेणुका जैसे आसमान में उड़ने लगी थी.. उसकी चुत से कामरस का झरना बहने लगा..
“अब चाट भी ले मेरी.. आह्ह प्लीज पीयूष.. ” पीयूष का सर अपनी चुत के ओर ले जाते हुए रेणुका ने कहा.. रेणुका के स्तनों को अच्छे से चूसने और चाटने के बाद पीयूष ने नीचे के हिस्से की ओर ध्यान केंद्रित किया.. पहले रेणुका की नाभि के अंदर अपनी जीभ को डालकर उसने गहराई नापि.. रेणुका को गुदगुदी सी होने लगी..
“ऊईई माँ.. क्या कर रहा है पागल? गुदगुदी हो रही है मुझे.. वहाँ छोड़.. और जहां चाटना चाहिए वहाँ चाट न चूतिये.. !!”
रेणुका की संगेमरमरी जांघों पर जीभ फेरते हुए, लोकल ट्रेन की गति से धीरे धीरे वह चूत के मुख्य स्टेशन पर पहुंचा.. पर तब तक तो रेणुका की तड़प तड़प कर जान ही निकल गई.. जैसे ही पीयूष की जीभ का स्पर्श उसकी क्लिटोरिस पर हुआ.. रेणुका पूर्ण रूप से बेकाबू हो गई.. उसने पीयूष के अंडकोश को मुठ्ठी में जकड़ कर लंड पर हल्ला बोल दिया.. पीयूष भी चूत के इर्दगिर्द चाट कर रेणुका की कसौटी लेने लगा.. आखिर उसने अपने हाथों से चूत के होंठों को चौड़ा किया.. अंदर दिख रहे लाल गरम भाग को सूंघकर उसने अपना नाक उस हिस्से पर रगड़ दिया.. पीयूष की इन हरकतों से पागल होते हुए रेणुका अपनी गांड ऊपर उठाकर पीयूष के चेहरे पर अपनी भोस गोल गोल रगड़ने लगी.. बिना किसी भी जल्दी के.. पीयूष ने आखिर अपनी जीभ का रेणुका की चूत में गृहप्रवेश करवाया..
चटकारे लेते हुए.. भरपूर लार का उपयोग कर पीयूष जिस तरह रेणुका की चूत को चाट रहा था.. उस सुखद अनुभूति का वर्णन करने के लिए रेणुका के पास शब्द नहीं थे.. दोनों हाथ नीचे की तरफ डालकर पीयूष ने रेणुका के दोनों कूल्हों को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा.. अब तक तो पीयूष अपने चेहरे को आगे पीछे करते हुए चाट रहा था.. लेकिन अब उसने अपना चेहरा स्थिर ही रखा और रेणुका के चूतड़ों को आगे पीछे करते हुए रेणुका की रसीली चुत का रस पीना शुरू कर दिया
जिस तरह पीयूष चुत चाट रहा था वो देखकर ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था की वो रेणुका के आनंद के लिए चाट रहा हो.. बल्कि वो जैसे निजानंद में चुत चाटते हुए किसी अलौकिक दुनिया में खो सा गया था.. लंड का काम अपनी जीभ से लेते हुए बड़ी मस्ती से पीयूष रेणुका की चुत के अंदरूनी हिस्सों को कुरेद कुरेद कर रसपान कर रहा था.. पीयूष को इतनी दिलचस्पी और उत्साह से चुत चाटते देख रेणुका अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ आनंद का मज़ा ले रही थी
“आह्ह पीयूष.. तू तो गजब है यार.. और जोर से चाट.. बहोत मज़ा आ रहा है.. हाय.. ओह पीयूष.. !!” रेणुका के मुख से उत्तेजना से भरे शब्द सरक गए और उसके साथ ही उसका पूरा जिस्म थरथराने लगा.. उस आखिरी पलों में उसने पीयूष के चेहरे को अपनी दोनों जांघों के बीच इतनी जोर से दबाया की पीयूष को सांस लेने में तकलीफ होने लगी.. चार से पाँच सेकंड तक उसने अपनी चुत का सारा रस पीयूष के मुँहे में छोड़ती रही.. उसके स्तन बेहद टाइट हो कर उभर गए थे.. पूरा शरीर कामसुख के ताप से तप रहा था.. अभी भी वो कांप रही थी.. जैसे बुखार चढ़ा हो..
पीयूष का लंड अब नब्बे डिग्री° का कोण बनाकर सख्त खड़ा हो गया था.. उसने रेणुका को सीधा लिटा दिया और उसकी जांघों को चौड़ी कर.. बीच में जगह बनाकर बैठ गया.. अपना लाल गरम सुपाड़ा.. रेणुका की चुत के होंठों के बीच रखकर जैसे ही उसने हल्का धक्का दिया.. उसका पूरा ६ इंच का लंड एक झटके में उस गीली रसदार चुत में अंदर धंस गया.. दोनों जिस्म अब एक हो गए.. समय भी जैसे थम सा गया.. रेणुका को अपनी चुत में जलन महसूस हो रही थी.. चुत को जोर से चाटते वक्त जहां जहां पीयूष के दांत घिसे थे.. उन्ही स्थानों पर अब लंड के घिसते ही उसे जलने लगा था.. पीड़ा के बावजूद रेणुका फिर से उत्तेजित हो रही थी.. आह्ह.. ऐसा दर्द सहे हुए भी कितने साल हो गए !! शादी के बाद सुहागरात को ऐसा मीठा मीठा दर्द हुआ था.. जीवन में फिरसे वैसा ही दर्द महसूस करने का मौका मिलेगा यह सोचा नहीं था रेणुका ने..
रेणुका को शीला के घर हुआ समूह चोदन याद आ गया.. जहां उस दोनों गाँव के नौजवानों ने शीला, अनुमौसी और रेणुका को अपने विकराल लंडों से बराबर पेल दिया था.. जीवा और रघु के लंड की उस भीषण चुदाई को याद करते हुए वह पीयूष के लंड का अपनी बुर की दीवारों के साथ हो रहे घर्षण से मंत्रमुग्ध हो रही थी.. पीयूष के नंगे कूल्हों को हाथ से पकड़कर अपने जिस्म को इतनी जोर से भींच लिया की लंड का टोपा उसके बच्चेदानी पर जाकर टकराया..
दोनों जिस्म अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ आनंद का मज़ा लेने में इतने मशरूफ़ हो गई के कुछ पलों के लिए ये भी भूल गए की वह दोनों शादी शुदा थे और उनका अलग अलग साथी भी है..
रेणुका नीचे से उछल उछल कर पीयूष के लंड को अपनी गहराइयों में अंदर तक समाने लगी.. पीयूष भी पागलों की तरह रेणुका के चरबीदार जिस्म की सिलवटों को रौंदे जा रहा था.. काफी देर तक एक दूसरे के विविध अंगों को पूर्णता से सहलाने और मसलने के बाद.. पीयूष ने रेणुका की भोस में दमदार धक्के लगाते हुए उसे झकझोरते आखिरी चार पाँच धक्के इतने जोर से लगाए की अनुभवी रेणुका की आँखों से आँसू टपक गए.. और साथ ही पीयूष के लंड से वीर्य भी
पीड़ा और आनंद के मिश्रण के साथ रेणुका का किल्ला भी फतह हो गया.. पीयूष ने जब उसकी बुर से अपना लंड बाहर खींचा तब वह किसी अहंकारी योद्धा की अदा से उसके दोनों पैरों के बीच लटकने लगा.. अर्ध-जागृत अवस्था में वीर्य-स्त्राव के पश्चात लटक रहे लंड का एक अलग ही सौन्दर्य होता है.. रेणुका बिस्तर पर नंगी पड़ी हुई थी.. उसकी बुर से पीयूष के वीर्य की धार बहते हुए चादर को गीला कर रही थी.. हवस शांत हो जाने पर रेणुका की आँखें ढल गई थी.. उसकी छाती पर कुदरत के दिए हुए दो पहाड़.. भारी साँसों के चलते ऊपर नीचे हो रहे थे..
“बाथरूम कहाँ है?” पीयूष ने पूछा.. रेणुका ने उंगली से इशारा करते हुए उसे बाथरूम की दिशा दिखाई.. लगभग पाँच मिनट के अंदर पीयूष पूर्ण कपड़े पहनकर तैयार होकर बाहर निकला.. ५० हजार का बंडल संभालकर जेब में रखते हुए उसने आईने में अपने आप को देखकर सब ठीक होने की तसल्ली कर ली.. ताकि राजेश सर को शक न हो जाए..
पीयूष को बेडरूम से जाता देख.. नंगी रेणुका खड़ी हुई और पीयूष को पीछे से लिपट गई.. “तुझे छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा पीयूष.. पता नहीं क्यों.. तेरे अंदर ऐसा क्या है जो मुझे तेरी तरफ खींचती ही जा रहा है.. तुझे आज मज़ा आया? मैं तुझे संतुष्ट तो कर सकी ना ?? अगली बार मैं इससे भी ज्यादा मज़ा दूँगी तुझे.. फिर कब मिलेगा मुझे? जब मैं बुलाऊ तब आ तो जाएगा न तू? ” सुई की नोक जैसी तीखी निप्पल पीयूष की पीठ पर चुभ रही थी..
“ये तो मुझे भी नहीं पता भाभी.. की दोबारा कब मिलेंगे.. पर आप ध्यान रखना.. मेरी बीवी या राजेश सर को कुछ भी पता न चले.. वरना मेरी नौकरी भी जाएगी और पत्नी भी.. !!”
“और मेरा संसार भी ऊझड़ जाएगा उसका क्या?” रेणुका ने थोड़ी सी नाराजगी से कहा
“मेरे कहने का वो मतलब नहीं था भाभी.. आप तो सब कुछ समझती हो.. मुझे भी ये सब पसंद है.. पर डर भी लगता है.. बाकी आज जिस तरह आपने मुझे ओरल-सेक्स का मज़ा दिया ऐसे सुख के लिए मैं तरस रहा था.. मेरी पत्नी ने मुझे आज तक ऐसा मज़ा नहीं दिया मुझे.. मैं इतना ही बोल रहा हूँ की जो कुछ भी करो संभल कर करना भाभी.. ”
“हम्म.. इसके लिए.. जैसा मैं कह रही हूँ वैसा करते रहना तो कोई तकलीफ या दिक्कत नहीं होगी कभी.. सुन.. तू कभी भी मुझे सामने से कॉल नहीं करेगा.. नेवर.. जब जरूरत होगी मैं सामने से कॉन्टेक्ट करूंगी तुझे.. और उससे पहले मैं व्हाट्सप्प पर फोरवार्डेड मेसेज भेजूँगी.. उस पर से तू समझ जाना की मैं तुझे कॉल करने वाली हूँ”
“ठीक है भाभी.. मैं वैसा ही करूंगा” पीयूष ने घूमकर रेणुका के दोनों बॉल एक बार फिर मसलकर उसे बाहों में भरकर लबज़ों को चूम लिया.. काफी देर तक चूमते रहने के बाद दोनों अलग हुए.. लेकिन उससे पहले रेणुका ने एक बार जोर से पीयूष के लंड को दबा दिया..
पीयूष ऑफिस पहुंचा.. राजेश को पैसे दिए.. राजेश ने उसे बिठाया और काफी देर तक चर्चा की.. पीयूष को तसल्ली हो गई की राजेश सर को जरा भी शक नहीं हुआ था.. उसकी घबराहट चली गई.. काफी देर गुफ्तगू के बाद राजेश सर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया
इस तरफ.. शीला अभी भी सोच में डूबी हुई थी.. भरी दोपहर में.. घर पर आई हुई छोटी बहन और उसकी सहेली को छोड़कर.. कविता कहाँ गई? शीला की ये आदत थी.. एक बार उसे किसी बात पर शक हो जाए फिर वह बात की जड़ तक पहुंचे बीना उसे छोड़ती नहीं थी.. वह अनुमौसी के घर पहुँच गई.. वहाँ उसे जो जानने मिला वो बिल्कुल झूठ था ये समझ गई शीला.. अनुमौसी ने कहा की कविता दर्जी की दुकान पर अपने ड्रेस का नाप देने गई थी..
शीला वापिस अपने घर लौट आई.. सोफ़े पर बैठे बैठे वह अपना दिमाग दौड़ा रही थी.. “ड्रेस का नाप देने इतनी दोपहर में कौन जाता है भला? और वो भी बिना मौसम या फाल्गुनी को साथ लिए हुए ? कविता जरूर कुछ खिचड़ी पका रही थी.. !! पर उसने मुझे भी नहीं बताया.. वैसे तो वह अपनी हर बात मुझे बताती है.. कहीं उसे मेरे और पिंटू के बारे में तो पता नहीं चल गया !! पर वैसे उसके पति पीयूष ने भी उसकी हाज़री में मेरे स्तन दबाए थे.. तब तो उसे कोई तकलीफ नहीं हुई थी.. तो भला ओर क्या बात हो सकती है !!”
शीला से ये सारी असमंजस बर्दाश्त नहीं हुई.. उसने सीधा कविता को फोन लगाया.. पर कविता ने फोन नहीं उठाया.. उसे शीला भाभी पर बहोत गुस्सा आ रहा था.. भाभी ने पिंटू और मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मेरा प्रेमी के साथ फोन पर गुटरगु करने का क्या मतलब हुआ? अगर कहीं मैं उनके पति मदन के साथ ऐसे फोन पर बातें करूंगी तो क्या वो बर्दाश्त करेगी? एक तरफ वैशाली पीयूष के पीछे पड़ी है.. दूसरी तरफ शीला भाभी मेरे पिंटू के पीछे.. मैं क्या करू? कविता का गुस्सा सातवे आसमान पर था.. उसके दिल को जबरदस्त ठेस पहुंची थी..
रेणुका के घर पहुंचकर कविता चुपचाप बैठी रही.. पानी का गिलास भी उसने बिना पिए छोड़ दिया..
रेणुका: “क्या बात है कविता? बिना झिझक बता मुझे.. अब तो हमारे बीच रिश्ता भी बन गया है.. आप दोनों हमारी कंपनी के परिवार का हिस्सा हो.. और हम तो सहेलियों जैसी है.. बिना किसी संकोच के सारी बात बता.. मैं किसी से इस बारे में बात नहीं करूंगी.. तू चिंता मत कर”
रेणुका की बात सुनकर कविता को बहोत अच्छा महसूस हुआ.. उसने सारी बात उसे बताई.. पीयूष और वैशाली के बारे में.. शीला भाभी और पिंटू के बारे में भी.. रेणुका को पिंटू और कविता के संबंधों के बारे में जानकार ताज्जुब हुआ.. काफी सालों से पिंटू राजेश का सेक्रेटरी था.. पर आज तक उसने पिंटू से कभी बात नहीं की थी..
रेणुका: “देख कविता.. मेरा यह मानना है की किसी के संबंधों में दरार आई हो तो आमने सामने बैठ कर बात को खतम करना चाहिए.. वरना बात का बतंगड़ बनने में देर नहीं लगती.. शीला को मैं अच्छे से जानती हूँ.. वो ऐसा कुछ नहीं कर सकती.. भरोसा रख.. और देख.. तू भी पढ़ी लिखी है.. तुझे इतना संकुचित मन नहीं रखना चाहिए.. विचारों को थोड़ा सा खुला रख.. पिंटू ने एक दो बार बात कर ली.. इसमे कौनसा पहाड़ टूट पड़ा!! और अगर वो तुझे सच में चाहता है तो तेरे पास ही आएगा.. अपने प्रेमी को संभालने अपने ही हाथ में होता है, समझी !! मर्द की अपनी जरूरते होती है.. पूरा दिन घर के काम से थककर कभी कभी हम सीधे सो जाते है.. और यह भूल जाते है की हमारे पति की भी जरूरतें होती है.. इस बारे में हम सोचते ही नहीं.. ”
कविता: “ऐसा नहीं है रेणुका जी, मैं पीयूष को सब कुछ देती हूँ जो वो चाहता है.. तो फिर उसे क्या जरूरत पड़ी वैशाली की ओर देखने की?” अपने दिल का दर्द सुनाया उसने
रेणुका: “ऐसा भी तो हो सकता है की जो तू दे रही है वो पीयूष के लिए काफी न हो.. और देख.. मर्दों की तो आदत होती है यहाँ वहाँ मुंह मारने की.. मेरे ही पति की बात ले ले.. बिजनेस टूर पर वह विदेश जाते है.. तब वो भी तो मुंह मारते होंगे.. मैं खुद ही पेकिंग करते वक्त उसकी बेग में कोंडोम का पैकेट रख देती हूँ.. जब मर्द दस पंद्रह दिन के लिए बाहर जाए तब वो अपनी रात की जरूरतों के लिए कुछ कर ले तो उसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है !! ऐसी बातों को मैं अनदेखा कर ही देती हूँ.. तभी संसार आराम से चलता है.. और विश्वास ही सभी संबंधों का स्तम्भ होता है.. जब विश्वास ही डगमगा जाए तब पूरी इमारत ही ढह जाती है.. इसलिए तू ज्यादा मत सोच और पिंटू को मिलकर सारी बातें खुलकर बता.. जो भी बातों पर तुझे शक हो.. या फिर नापसंद हो उसके बारे में बात कर.. तेरे पति को भी तू ओरल-सेक्स का पूरा मज़ा दे.. नहीं तो वो कहीं बाहर ढूंढ लेगा तो गलती तेरी ही होगी.. मेरी बात पर गौर कर और सोचकर कदम उठाना.. बाकी तो तू काफी समझदार है.. अपने पति से ईमानदारी की उम्मीद रख रही है पर तू भी कहाँ दूध की धुली है? क्या तूने पिंटू के साथ अपने संबंधों के बारे में कभी पीयूष को बताया?? नहीं ना !! जीवन में कभी न कभी सभी लोग थोड़ी बहोत बेवफाई तो कर ही लेते है.. और जो बातें प्रतिबंधित होती है उन्ही में सबसे ज्यादा मज़ा भी आता है.. बाकी तो.. ये जीवन एक ही बार मिलता है.. ये याद रखकर.. जहां और जब भी मजे करने का मौका मिले तब चूकना नहीं चाहिए.. ”
थोड़ी देर पहले ही पीयूष ने ओरल-सेक्स के बारे में असंतुष्टता जाहीर की थी.. बातों बातों में उसके बारे में भी उसने कविता को बोल ही दिया
कविता ने बड़े ध्यान से रेणुका की बात सुनी.. और अपनी गलती का एहसास होने लगा.. पीयूष जब भी उससे मुंह में लेने के लिए कहता तब वह बड़े ही घिन से वो काम करती.. और वो भी पीयूष की काफी मिन्नतों के बाद.. हो सकता है पीयूष वैशाली की ओर इसलिए भी आकर्षित हुआ हो.. अगर यही बात थी तो फिर आज से वो पीयूष को ये सुख भी पूरे मन से देगी.. पीयूष को और पिंटू दोनों को.. अब पिंटू से भी मीटिंग करनी होगी.. पर कहाँ करू? शीला भाभी के घर एक बार प्रोग्राम बनाया उसमें भाभी ने पिंटू को ही हड़प लिया.. रेणुका जी से ही इस बारे में पूछ कर देखूँ?? पर फिर कहीं ऐसा ना हो की रेणुका ही पिंटू को पटाने की फिराक में लग जाए.. और पिंटू तो उनकी कंपनी में नौकरी भी करता है.. कविता की चिंता ओर बढ़ गई
कविता सोच में डूबी हुई थी तब तक रेणुका ज्यूस को दो ग्लास लेकर आई.. एक ग्लास कविता के हाथ में देकर वह उसके बगल में बैठ गई..
रेणुका: “मेरे हिसाब से तो तुम्हें जल्दी से जल्दी पिंटू से मिलकर सारी बातें क्लीयर कर लेनी चाहिए.. अब तेरे घर मिलना तो मुमकिन नहीं होगा.. अगर तुझे प्रॉब्लेम न हो तो आप दोनों मेरे घर पर मिल सकते है.. वैसे भी राजेश एक बार ऑफिस के लिए निकल जाए फिर रात से पहले वापिस नहीं आता..
पिंटू को फिरसे मिलने के कल्पना मात्र से कविता का चेहरा खिल उठा..
कविता: “रेणुकाजी, वैसे तो हम एकाध बार शीला भाभी के घर पर मिल चुके है.. पर वैशाली के आने के बाद वहाँ मिल पाना भी मुमकिन नहीं है अब.. आप अगर आपके घर हमे मिलने देने के लिए राजी हो तो बड़ी ही मेहरबानी होगी.. हमारा मिलना अब बहुत जरूरी है”
रेणुका: “तो उसे कल ही बुला ले.. मुझे कोई प्रॉब्लेम नहीं है.. मैं तो सामने से कह रही हूँ तुझे”
कविता: “शुक्रिया आपका.. पर मैं आपसे एक और बात करना चाहती हूँ.. असल में, मैं यहीं बात करने यहाँ आई थी”
रेणुका: “हाँ बता ना.. क्या बात है ?”
कविता: “जी बात दरअसल ऐसी है की मेरी छोटी बहन मौसम और उसकी फ्रेंड वेकेशन में मेरे घर आई हुई है.. उन दोनों को लेकर, मैं और पीयूष कहीं बाहर जाने का प्रोग्राम बना रहे है.. अब वैशाली भी साथ आने वाली है.. मैं वैशाली को ले जाने के लिए मना करती हूँ तो पीयूष नाराज हो जाएगा क्योंकि उसे वैशाली पसंद है.. वो जिद करके भी वैशाली को साथ लेगा ही लेगा.. मैं अगर खुलकर मना करूंगी तो शीला भाभी बुरा मान जाएगी.. अब शीला भाभी हमारे साथ आने से मना कर रही है.. मुझे डर है, कहीं मेरी गैर-मौजूदगी में वो पिंटू के घर बुला लेगी.. यहाँ पिंटू शीला भाभी के साथ और वहाँ वैशाली पीयूष के साथ .. मेरी हालत आप समझ सकती हो!!”
रेणुका: “हम्म.. समस्या तो गंभीर है.. पर इसमे मैं क्या कर सकती हूँ?”
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