शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-19
(Desi Kahani) 5
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शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)
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शीला: “घर जाकर पीयूष से अपनी निप्पल चुसवा लेना.. जलन कम हो जाएगी.. तूने पिंटू का पकड़ा था क्या?”
कविता: “पकड़ा तो था.. पर चूस नहीं पाई.. मेरा बहोत दिल कर रहा था उसका चूसने का.. ”
शीला: “तुझे पसंद है लंड चूसना?? पीयूष तो कह रहा था की मैं तुझे लंड चूसना सिखाऊँ.. और तू उसका मुंह में ही नहीं लेती…”
कविता: “आप तो जानती हो ना भाभी.. घर की मुर्गी दाल बराबर.. प्रेमी का लंड चूसना मुझे पसंद है.. पति का लंड मुंह में लेने में वो मज़ा कहाँ.. !! और इन पतियों का एक बार चूस लो तो हररोज लंड निकालकर मुंह के सामने रख देंगे.. ”
शीला और कविता बातें कर रहे थे उतने में पीयूष पॉपकॉर्न ले कर आ गया.. कविता वापिस अपनी सीट पर जाकर बैठ गई और पीयूष उन दोनों के बीच में बैठ गया
शीला ने धीमे से पीयूष के कान में कहा “पॉपकॉर्न वाली उंगली कविता की चुत में मत घुसाना.. वरना जलने लगेगा उसे”
पीयूष: ” कुछ भी कहो भाभी.. आप बड़ा मस्त चूसती हो!!”
शीला: “अरे मेरे राजा.. तू एक रात के लिए मुझे मिल.. दो घंटे तक तेरा लंड मुंह से नहीं निकालूँगी”
पीयूष: “आप तो जबरदस्त हो भाभी.. ”
कविता: “ये तुम दोनों कब से क्या गुसपुस कर रहे हो? पीयूष तू मेरे साथ मूवी देखने आया है या भाभी के साथ? कब से उनके साथ चिपका हुआ है!”
पीयूष: “क्या यार कविता!! कुछ भी बोल रही है तू.. भाभी अकेले है तो वो बोर न हो जाएँ इसलिए कंपनी दे रहा था उन्हे”
कविता: “हाँ तो सिर्फ कंपनी ही देना.. कुछ और नहीं.. समझा!!”
हॉल में फिर से अंधेरा छा गया.. और उस अनजान शख्स ने अपने लंड से रुमाल हटा दिया.. जैसे चमकती बिजली में सांप नजर आता है वैसे ही पिक्चर की रोशनी में उसका लंड चमक रहा था.. लाल लाल सुपाड़े की नोक पर वीर्य की एक बूंद उभर आई थी.. शीला भूखी नज़रों से उसे तांक रही थी.. काफी तगड़ा मोटा लंड था.. पर उस अनजान शख्स का साथ उलझने में उसे डर लग रहा था.. इसलिए शीला ने अपने आप को रोक रखा.. पर दो घड़ी के लिए उसका भोसड़ा लालच में तो आ ही गया था.. शीला के चुपचाप बैठने के बावजूद उस आदमी ने अपना लंड उसके दर्शन के लिए खुला ही छोड़ दिया.. उसे आशा थी की लंड को देखकर कहीं शीला का मन कर जाएँ..
दो तीन मिनट के बाद, पिंटू वापिस कविता के पास आकार बैठ गया.. दूसरी तरफ पीयूष अपने हाथों से शीला के गदराए जोबन पर नेट-प्रेक्टिस कर रहा था.. पिंटू ने भी वही हरकत कविता के स्तनों के साथ शुरू कर दी
शीला ने अब अपने ब्लाउस के सारे हुक खोल दिए.. एक स्तन को पीयूष मसल रहा था और दूसरे स्तन पर उसने उस अनजान आदमी का हाथ पकड़कर रख दिया.. उस आदमी को दौड़ना था और स्लोप मिल गया.. वह बेरहमी से शीला के एक स्तन को मरोड़ने मसलने लग गया..
दो स्तन.. दो अलग अलग आदमी से एक साथ मसलवा रही साहसी शीला ने हिम्मत करके उस अनजान आदमी का लंड अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया और हिलाने लग गई.. उसके दूसरे हाथ में पीयूष का लंड था.. दो हाथ में दो लंड.. और फिर भी उसकी भोस खाली.. ये कैसी विडंबना!!! शीला को अपने भोसड़े के लिए सहानुभूति हो रही थी.. उस शख्स के लंड की साइज़ देखकर शीला फिदा हो गई.. और उसे जीवा और रघु के दमदार लंड की याद भी आ गई।
शीला की निप्पल से खेलते हुए पीयूष ने उनके कान में कहा “भाभी ये क्या कर रही हो आप? कौन है ये आदमी?”
शीला: “किसकी बात कर रहा है तू?”
पीयूष: “उस आदमी की.. जिसका आपने पकड़ रखा है और जो आपके दूसरे स्तन को मसल रहा है.. अभी मेरा हाथ उसके हाथ से टकरा गया”
शीला: “पीयूष.. तुझे मेरे साथ छेड़खानी करते देख.. इन्टरवल में वो मुझे ब्लेकमेल करने लगा.. की अगर मैं उसे नहीं दबाने दूँगी तो वो कविता को जाकर सबकुछ बता देगा.. अब तेरे भले के लिए मुझे एक अनजान आदमी को मेरे शरीर के साथ खेलने की छूट देनी पड़ी.. क्या करती!!”
सुनकर पीयूष चुप हो गया..
पिक्चर खतम होने की थी.. और हर कोई आखिरी पड़ाव पर था.. आखिरी ओवर में २० रन बनाने हो और जिस तरह बेट्समेन चारों तरफ अंधाधुन शॉट लगाता है.. बिल्कुल उसी तरह.. उस पूरी लाइन में धड़ल्ले से स्तन मर्दन पूरे जोश के साथ चल रहा था..
दो दो पुरुषों के साथ एक साथ बबले दबवाते हुए शीला ने एक विचित्र हरकत कर दी
पीयूष के कान में उसने कहा “ये आदमी मुझे मुंह में लेने के लिए कह रहा है.. पर मैं नहीं लेने वाली.. कुछ भी हो जाएँ.. मुझे ये सब नहीं पसंद.. ये तो तेरे भले के लिए मैं अपने बॉल दबवाने के लिए राजी हुई.. अब कंधा दिया तो वो कान में मूतने की बात कर रहा है”
पीयूष: “मत लेना मुंह में भाभी.. पिक्चर अब १० मिनट में खतम हो जाएगा.. तब तक कैसे भी कर के उसे टाल दो.. ”
एक दो मिनट के लिए शांत रहकर शीला ने अपना घातक यॉर्कर फेंका..
“पीयूष.. वो मुझे धमकी दे रहा है की अभी के अभी वो कविता को सब बताया देगा.. क्या करू मैं? वो बता देगा तो गजब हो जाएगा”
पीयूष की गांड फट कर फ्लावर हो गई..
“अच्छा.. ब्लैकमेल कर रहा है आपको??”
“हाँ.. अब जल्दी बोल.. क्या करू मैं? अगर ये बता देगा तो कविता तेरी माँ चोद देगी” शीला अब रोहित शर्मा की तरह फटके लगा रही थी
“अब चूस लो भाभी.. और क्या कर सकते है” पीयूष अपनी गांड बचाने में लग गया..
पीयूष का लंड हिलाते हिलाते शीला दूसरी तरफ झुक गई और उस शख्स के फुँकारते लंड को एक पल में मुंह में भर लिया.. वो आदमी तो भोंचक्का रह गया.. और शीला के सिर पर हाथ फेरता रहा.. शीला ने अपने मुंह में उसके लंड को इतना टाइट पकड़ रखा था जैसे मदारी के चिमटे में जहरीला सांप फंसा हो..
सात आठ बार शीला ने लंड को पूरा बाहर निकालकर अपने कंठ तक अंदर घुसा दिया.. और ऐसा चूसा.. ऐसा चूसा की उसके लंड का सारा जहर शीला के मुंह में ही निकल गया.. और उसी के साथ हॉल में रोशनी चालू हो गई.. शीला ने तुरंत उसका लंड मुंह से निकाला और खड़ी हो गई.. अपने बाल ठीक करने लगी.. मुंह में भरे हुए वीर्य को थूकने का मौका नहीं मिल इसलिए वो उस अनजान पुरुष का सारा माल निगल गई.. पीयूष स्तब्ध होकर इस कामुक देवी और उसकी हरकतों को देखता ही रह गया.. शीला को अपने ब्लाउस के हुक बंद करने का समय नहीं मिल इसलिए उसने अपने स्तनों को पल्लू से ढँक दिया था.. शीला ने देखा की पीछे की लाइन में बैठी हुई स्त्री अपने ब्लाउस के हुक बंद कर रही थी.. उसकी नजर शीला से मिली और शीला ने मुस्कुरा दिया.. जैसे उसके राज को पकड़ लिया हो.. उस स्त्री ने अपने होंठ पर उंगली रखकर शीला को इशारा किया.. शीला ने तुरंत अपने होंठ पर चिपके वीर्य को पोंछ लिया.. और उस शरमाते हुए उस स्त्री की तरफ आभार प्रकट करते हुए आगे निकल गई..
रात के १२:३० बज चुके थे.. तीनों रिक्शा में बैठकर घर पहुंचे.. रिक्शा में भी पीयूष, शीला और कविता के बीच में बैठा था.. शीला के स्तन दबाते दबाते कब घर आ गया ये पता ही नहीं चला.. कविता सब देख रही थी.. पर वो क्यों कुछ बोलती?
रात के १२:३० बज चुके थे.. तीनों रिक्शा में बैठकर घर पहुंचे.. रिक्शा में भी पीयूष, शीला और कविता के बीच में बैठा था.. शीला के स्तन दबाते दबाते कब घर आ गया ये पता ही नहीं चला.. कविता सब देख रही थी.. पर वो क्यों कुछ बोलती?
शीला अपने घर के बरामदे में पहुंचकर बोली “पीयूष, मेरे घर की चाबी तेरे घर पर रखी हुई है.. जरा आकर मुझे दे जाना.. ”
कविता और पीयूष अपने घर के अंदर दाखिल हुए.. और पीयूष शीला भाभी के घर की चाबी ढूँढने लगा..
कविता मन में सोच रही थी.. आज शीला भाभी पीयूष को पूरा निचोड़ लेगी.. मेरे लिए कुछ भी नहीं बचने वाला..
पीयूष के लंड पर हाथ सहलाते हुए कविता ने पीयूष को कहा “जा.. भाभी को चाबी देकर आ.. ताला भी खोल देना उनका.. लगता है शीला भाभी को तेरी चाबी पसंद आ गई है”
पीयूष: “क्या यार कविता!! कुछ भी…. !!” कहते हुए पीयूष खुशी खुशी कंपाउंड की दीवार फांद कर शीला के बरामदे में पहुँच गया।
कविता घर के अंदर चली गई थी इसलिए पीयूष ने राहत की सांस ली.. और शीला को चाबी देते हुए कहा “भाभी.. खोल दूँ??”
शीला ने अपना पल्लू हटा दिया.. और अपने पपीते जैसे मदमस्त स्तनों के दर्शन करवाती हुई कामुक आवाज में बोली “हाँ खोल दे पीयूष.. ”
कविता अंदर थी पर पीयूष को यह डर था की कहीं वो बाहर न आ जाए.. इसलिए वो अपने दरवाजे पर नजर रखे हुए शीला के घर का ताला खोलने लगा.. उसी वक्त शीला घुटनों के बल झुक गई और पीयूष के लंड को उसके पतलून से बाहर निकाल दिया.. और उसके टोप्पे पर चूमकर बोली
“क्या हुआ पीयूष? इतना वक्त क्यों लग रहा है तुझे खोलने में? छेद नहीं मिल रहा क्या तुझे?”
“अरे भाभी.. आप मुझे मरवा दोगी.. वो कविता अभी बाहर निकलेगी तो अभी के अभी मुझे तलाक दे देगी.. ”
कविता किचन की खिड़की से और अनुमौसी बेडरूम से.. शीला और पीयूष के इस मिलन को देख रहे थे.. अनुमौसी ने अपने बेटे के लंड को देखने की बहोत कोशिश की.. पर अंधेरे के कारण नहीं दिखा… सख्त कड़े उत्तेजित लंड को देखे अरसा बीत गया था.. मौसी ने एक निराशा भरी नजर अपने पति चिमनलाल पर डाली.. मोटी तोंद और कमजोर लंड वाला चिमनलाल खर्राटे लेकर सो रहा था.. उसके पूपली जैसे लंड को मौसी ने हाथ से हिलाकर देखा.. मरी हुई छिपकली जैसे लंड ने कोई हरकत नहीं की.. अनुमौसी ने एक गहरी सांस छोड़ी.. और कमर हिला रहे अपने बेटे को देखकर उत्तेजित होकर.. चिमनलाल के मोबाइल को अपने भोसड़े में घुसेड़ दिया.. कविता भी खिड़की से अपने पति का लंड चूस रही शीला को देखते हुए.. और पिंटू को याद करते हुए.. अपनी नेलपोलिश लगी उंगलियों से क्लिटोरिस को कुरेदने लगी..
सास और बहु खिड़की से कमर हिला रहे पीयूष को देखते हुए सोच रहे थे.. ये चोद रहा है या मुंह में दिया हुआ है!!??
शीला ने पीयूष का पूरा लंड मुंह में लेकर इतना चूसा की पीयूष के होश उड़ गए.. पीयूष ताला खोल रहा था उतनी देर में तो शीला ने उसके लंड को झड़वा दिया.. कविता पिंटू के याद में अपनी चुत खुजाते हुए सो गई.. उसे मालूम था की शीला भाभी की पकड़ से छूटने के बाद.. पीयूष के पास उसे देने लायक सख्त लंड बचा ही नहीं होगा.. और फिलहाल उसे जरूरत भी नहीं थी। अनुमौसी भी अपने पति के मोबाइल से मूठ लगाकर.. अपनी बूढ़ी चुत को सहलाते हुए.. उल्टा लेटकर सो गई।
शीला ने मस्ती से पीयूष के लंड को चूस चूस कर खाली कर दिया….
अपने लंड को पेंट के अंदर रखकर चैन बंद करते हुए पीयूष ने कहा “मैं अब चलता हूँ भाभी… ऐसे ही मौके देते रहना.. भूल मत जाना”
शीला: “तेरी जब मर्जी करे चले आना.. मना नहीं करूंगी.. ”
पीयूष जाते जाते शीला के दोनों स्तनों को मसलकर गया.. शीला के होंठों पर चमक रही वीर्य की बूंद को देखकर वो मुसकुराते हुए निकल गया।
काश मेरी कविता भी इसी तरह लंड मुंह में लेकर मेरा वीर्य चूसती तो कितना अच्छा होता!! शीला भाभी को अब हाथ में रखना पड़ेगा.. एक बार धड़ल्ले से टांगें फैलाकर चोदना है भाभी को.. भोसड़ा भी मस्त होगा साली का.. और छातियाँ उसकी ये बड़ी बड़ी.. चौबीसों घंटे गरमाई हुई रहती है… बस एक मौका मिल जाएँ.. पीयूष ये सब सोचते सोचते घर में घुस गया.. शीला भी बिस्तर पर गिरते ही सो गई.. और तब उठी जब अनुमौसी का फोन आया..
“अरे बाप रे.. देर हो गई.. आज तो महिला मण्डल के साथ यात्रा पर जाना है” बड़बड़ाते हुए वो झटपट बाथरूम में घुसी और फटाफट जैसे तैसे नहाकर तैयार हो गई.. बाहर निकली तो अनुमौसी के घर के पास एक मिनीबस खड़ी थी.. और अंदर करीब २५ औरतों का झुंड था.. अनुमौसी बस के बाहर शीला का इंतज़ार करते हुए खड़ी थी.. शीला तुरंत अंदर चढ़ गई.. और अनुमौसी को हाथ पकड़कर अंदर चढ़ने में मदद की
अनुमौसी: “तेरे अंदर तो बहोत जोर है शीला.. हम तो अब बूढ़े हो गए!!”
तभी आगे की रो में बैठी एक जवान औरत ने कहा “अरे मौसी, वो तो उनका पति घर पर नहीं है इसलिए सारा जोर बचाकर रखा हुआ है.. अगर पति साथ होते तो उनका सारा जोर निचोड़ लिया होता अब तक.. क्यों ठीक कहा ना भाभी??” शीला उस उँजान औरत के सामने देखकर मुस्कुराई पर कुछ बोली नहीं.. सब अनजान थे इसलिए शीला थोड़ा सा शरमा रही थी
थोड़ी देर बाद.. अनुमौसी शीला की बगल वाली सीट पर आकर बैठ गई.. और उस तरह बैठी की उनके स्तन शीला के कंधों से रगड़कर जाए
अब शीला ये सब हथकंडों से कहाँ अनजान थी!! उसने मौसी से कहा “मौसी, आपकी कविता तो बड़ी ही होशियार है..!!”
अनुमौसी: “अच्छा.. !! ऐसा क्यों लगा तुझे शीला? वैसे तो मेरा पीयूष भी कम होशियार नहीं है.. ”
अनुमौसी ने पीयूष का नाम लेकर बड़े ही विचित्र ढंग से शीला की आँखों में देखा.. शीला को एक पल के लिए शक हुआ.. कहीं ये बुढ़िया ने रात को मेरे और पीयूष के बीच के खेल को देख तो नहीं लिया.. !! चलो.. जो भी होगा देखा जाएगा.. चिंता करके कोई फायदा नहीं है
अनुमौसी भजन गाने लगी.. और सारी औरतें उनका साथ देने लगी.. थोड़ी ही देर में वो मिनीबस नजदीक के एक छोटे से शहर पहुंची.. वहाँ के मंदिर में दर्शन करने के बाद सारी औरतें बाजार में शॉपिंग करने निकल पड़ी..
शीला और अनुमौसी साथ में घूम रहे थे.. चलते चलते वो एक दुकान पर पहुंचे जहां बेलन और चकला मिलता था
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