शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-66
(Desi Kahani) 5
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नाराज मौसम को देखकर फाल्गुनी सोच में डूब गई.. इस मामले को सुलझाएं कैसे? किसी भी सूरत में अपना ये सीक्रेट मौसम को नही बता सकती थी ये बात तो पक्की थी.. मौसम नाराज होकर करवट बदलकर फाल्गुनी से विरुद्ध दिशा में सो गई.. मौसम की चूत में जबरदस्त खुजली हो रही थी पर साथ ही साथ उसका दिमाग ये सोच रहा था की यही सही वक्त था फाल्गुनी से वो राज उगलवाने का.. अगर वो आज जान नही पाई तो ये राज हमेशा राज बनकर ही रह जाएगा..
मौसम को कंधे से पकड़कर फाल्गुनी ने अपनी और खींचा और बोली “नाराज हो गई यार!! मैंने आज तक तुझसे कोई बात कभी छुपाई है क्या!! वो हरीश मुझे लाइन मारता था वो भी बता दिया था मैंने तुझे!!”
मौसम: “हाँ फाल्गुनी.. तुझे जो लड़का लाइन मार रहा था उसके बारे में तो सब बता दिया था तूने.. पर जो तुझे चोद गया उसके बारे में मुझे कुछ भी नही बता रही.. एक बार को तो ऐसा भी विचार आया मुझे की कहीं उस लफंगे हरीश के साथ तो तूने नही चुदवाया ना?? हो सकता है.. क्यों नही हो सकता.. जो लड़की अपनी सब से खास सहेली से इतनी बड़ी बात छुपा सकती है.. वो कुछ भी कर सकती है”
फाल्गुनी अब बराबर फंस चुकी थी.. उसने एकदम धीमी आवाज में कहा “तूने ऐसा क्यों नही सोचा की मेरे लिए बताना मुमकिन नही होगा तभी नही बताया होगा… वरना मैं क्यों तुझसे कुछ भी छुपाऊँ?? और तुझसे छुपाकर मुझे क्या फायदा?”
मौसम: “क्या फायदा ये तो छुपानेवाला ही बता सकता है.. कुछ तो होगा कारण.. हो सकता है की तुझे लगता हो की अगर मुझे बताएगी तो मैं भी तेरे साथी में हिस्सा मांगूँगी.. !!”
फाल्गुनी: “पागलों जैसी बात मत कर, मौसम!!”
मौसम: “तुझे ये भी विचार नही आया की सात आठ बार मजे लूट लेने के बाद तू मुझे भी मौका देती..!! मुझे पता नही था की तू इतनी स्वार्थी होगी.. अब तक तो हम एकदम खास सहेलियाँ थी.. पर शायद अब तुझे अकेले अकेले ही खाने में मज़ा आने लगा है.. जा.. अब से तेरी कट्टी”
पहाड़ टूट पड़ा फाल्गुनी पर.. मौसम रूठ जाएँ तो कैसे चलेगा.. !! फाल्गुनी अपने माँ बाप के बगैर रह सकती थी पर मौसम के बगैर उसे एक पल नही चलता था.. इतनी गहरी दोस्ती थी दोनों की.. फाल्गुनी को भी मन ही मन गुस्सा आ रहा था.. की मौसम ऐसी बात के लिए उससे रूठ गई!! पर मैं भी क्या करूँ? अगर मौसम को सब सच बता दूँ तो कयामत आ जाएगी.. और नही बताती तो दोस्ती टूट जाएगी.. ओह्ह क्या करूँ?
रात के साढ़े तीन बज रहे थे पर मौसम या फाल्गुनी.. दोनों की नींद उड़ चुकी थी.. वैशाली घोड़े बेचकर सो रही थी.. अपनी चूत शांत करके.. अब वो सच में सो रही थी या ढोंग कर रही थी वो तो उसे पता.. !! पर मौसम और फाल्गुनी के संबंध ऐसे चौराहे पर आकर खड़े हो गई थे की अगर फाल्गुनी सच नही बताती तो दोनों की दोस्ती वहीं खतम होने वाली थी
बहोत उदास हो गई फाल्गुनी.. जिंदगी ऐसे कठिन मोड पर लाकर खड़ा कर देगी ऐसा उसने कभी नही सोचा था.. सोचते सोचते कब दोनों की आँख लग गई उन्हे पता ही नही चला..
बहोत उदास हो गई फाल्गुनी.. जिंदगी ऐसे कठिन मोड पर लाकर खड़ा कर देगी ऐसा उसने कभी नही सोचा था.. सोचते सोचते कब दोनों की आँख लग गई उन्हे पता ही नही चला..
सुबह साढ़े छह बजे एलार्म बजते ही सब से पहले वैशाली की आँख खुली.. उसने धक्का देकर मौसम को जगाया.. अपने नंगे जिस्म को देखकर.. वैशाली को पिछली रात की रंगीन घटनाएं याद आ गई.. मन ही मन मुस्कुराते हुए उसने मौसम को हाथ से सहारा देकर उठाया और गुड मॉर्निंग कहते हुए उसे गले से लगा लिया.. स्तन से स्तन मिलें.. और स्तनों ने भी आपस में सुप्रभातम कर लिया..
“अब इस चुड़ैल को भी जगा..फिर हम तीनों बाथरूम में एक साथ नहायेंगे.. सब के सामने तैयार होकर जाने से पहले.. एक एक ऑर्गैज़म हो जाए.. फिर किसी की ओर आकर्षण होने का कोई खतरा नही.. वरना इस छुपी रुस्तम फाल्गुनी का कुछ कह नही सकते.. माउंट आबू में ही किसी को ढूंढकर उसके नीचे लेट जाएगी.. और फिर हम से कहेगी.. सात-आठ बार नही पर नौ बार चुदवाया है.. अभी भी साली मादरचोद ने उसका नाम नही बताया.. और ये भी नही बताया की सात-आठ बार एक ही लंड लिया था या हर बार अलग अलग था.. !!”
सुबह-सुबह वैशाली के मुंह से यह नंग-धड़ंग बातें सुनकर मौसम की चूत में कुछ कुछ होने लगा.. मौसम खड़ी हुई और वैशाली को उसकी निप्पल से खींचते हुए बाथरूम के अंदर ले गई.. और इंग्लिश कमोड पर बैठकर पेशाब करने लगी.. उसने निप्पल पकड़े रखी थी.. वैशाली ने कहा “क्या कर रही है यार तू? दर्द हो रहा है.. ऐसे भी भला कोई निप्पल खींचता है क्या!! दिमाग-विमाग है या नही? नहाना मुझे भी है.. ऐसे ही थोड़े बिना नहाए साइट सीइंग के लिए निकल पड़ूँगी!! अब जल्दी खतम कर और खड़ी हो जा.. मुझे भी बड़ी जोर से लगी है” मौसम के हाथ से अपनी निप्पल छुड़वाते हुए वैशाली ने थोड़े गुस्से से कहा
पर मौसम ने उसकी एक न सुनी.. और आराम से कमोड पर ही बैठकर मुस्कुराते रही.. आखिर थककर वैशाली बाथरूम के फर्श पर ही उकड़ूँ बैठ गई और मूतने लगी.. दोनों की पेशाब की धार की आवाज पूरे बाथरूम में गूंज रही थी..
वैशाली: “वो रांड अब तक जागी क्यों नही? रात को कहीं किसी वेटर के साथ चुदवाने तो नही गई थी ना.. !! उसका कुछ कह नही सकते” मौसम के गले में अपने बाहों का हार डालकर उसकी नाक से अपनी नाक रगड़ते हुए उसने कहा
मौसम ने झुककर अपना हाथ वैशाली की मूत रही चूत पर लगाया और पेशाब की धार से अपनी हथेली गीली करके खुद की चूत पर मल दिया और आँखें बंद कर किसी दूसरी दुनिया में ही पहुँच गई और बोली “आहाहाहा.. वैशाली कितना गुनगुना और गरम लग रहा है यार!! मन कर रही है की टांगें चौड़ी करके यहीं नीचे लेट जाऊँ.. और तेरे पेशाब की धार सीधी अपने चूत में लूँ.. ”
मौसम के सुंदर स्तनों को दबाते हुए वैशाली ने कहा “अरे यार.. पहली बता देती.. चूत में क्यों.. तेरे मुंह में ही मेरी धार मार देती.. ऐसा मस्त नमकीन स्वाद तुझे और कहीं चखने को नही मिलेगा.. ”
मौसम को घिन आ गई “छी छी यार.. मुंह में भी कभी कोई मुतता है क्या!!!”
वैशाली: “यार मौसम.. ये फाल्गुनी हमे उस चोदनेवाला का नाम क्यों नही बता रही? कोई बहोत बड़ा राज है क्या?”
मौसम: “रात को हम दोनों के बीच इस बारे में काफी कहा सुनी हुई थी.. तू सो गई उसके बाद.. मैंने कितनी बार पूछा पर उसने बताया ही नही.. इतना बुरा लगा मुझे.. दोस्ती में ऐसा भी क्या छुपाना!!! अगर मुझे बता देती तो मैँ कौन सा उसके लवर को छीन लेने वाली थी..!!”
वैशाली: “हाँ यार.. उस बात का मुझे भी बुरा लगा था.. जब हम तीनों इतना खुल चुके थे तब उसे बताने में भला क्या दिक्कत थी?? अब उसे बताना ही ना हो फिर पूछकर क्या काम.. !!”
मौसम: “हमें काम तो कुछ नही पर जानना जरूरी है.. कहीं वो किसी उलटे सीधे मर्द के साथ फंस गई हो तो हम उसकी मदद कर सकते है ”
वैशाली सोचने लगी.. मौसम की बात तो सही थी.. एक तरफ फाल्गुनी सेक्स से इतना परहेज करती है.. और फिर भी सात-आठ बार कर चुकी है.. ऐसा कैसे हो सकता है? कहीं किसी के चंगुल में तो नही फंस गई? या फिर कोई ब्लैकमेल कर रहा हो.. ??
वैशाली: “तेरी बात बिल्कुल सही है मौसम.. कुछ तो बड़ा लोचा है.. हमें कुछ करना ही होगा” वैशाली वैसे ही नंगी कमरे में चली गई और फाल्गुनी को जगाकर बाथरूम में खींच लाई..
फाल्गुनी को अंदर लाकर वैशाली ने शावर चालू कर दिया और तीनों एक दूसरे पर पानी उड़ाते हुए खेलने लगी.. पानी का जादू ही कुछ ऐसा होता है की बूढ़े से बूढ़ा आदमी भी उसके संसर्ग में आकर बच्चे जैसा बन जाता है.. गीजर के गरम गुनगुने पानी को एक दूसरे पर उछालते हुए वैशाली दोनों के साथ बातें कर रही थी.. पर मौसम और फाल्गुनी एक दूसरे से नजरें चुरा रही थी.. दोनों बात भी नही कर रही थी.. फाल्गुनी से मौसम का ये बदला बदला सा रूप बर्दाश्त नही हो रहा था.. उसने मौसम पर पानी उड़ाकर उसे मनाने की कोशिश तो की.. पर मौसम तौलिया लेकर बिना कुछ कहें कमरे में चली गई..
वैशाली समझ गई की दोनों के बीच अनबन हुई थी.. मौसम के बाहर जाते ही मौके का फायदा उठाकर वैशाली ने दरवाजा बंद कर लिया और फाल्गुनी को अपनी बाहों में दबा दिया.. फाल्गुनी ने वैशाली के होंठों पर किस करते हुए कहा “देख वैशाली.. जैसे तूने सिखाया था वैसे ही किस करना अब आ गया मुझे”
वैशाली: “अब वो तो होना ही था.. क्यों नही आता भला.. !! आखिर गुरु कौन है तेरी!!! हा हा हा हा.. पर मुझे ऐसी शेखी नही मारनी चाहिए की मैंने ही तुझे किस करना सिखाया” वैशाली ने परोक्ष तरीके से बात छेड ही दी.. फाल्गुनी के स्तनों पर साबुन मलते हुए दूसरा साबुन उसने उसके हाथ में दे दिया.. फाल्गुनी समझ गई और वो भी वैशाली के भरे भरे स्तनों पर साबुन लगाते हुए बोली “मतलब? तू कहना क्या चाहती है?”
वैशाली: “मेरे कहने का ये मतलब है की तूने सात-आठ बार जिसका भी लंड अपनी चूत में दलवाया.. उसने सीधे सीधे तो लंड अंदर नही डाला होगा न.. पहले बूब्स दबाएं होंगे.. चूसे होंगे.. चूत चाटी होगी.. और लिप किस भी की होगी.. फिर मैं ये कैसे कह सकती हूँ की मैंने तुझे सिखाया?”
“वो तो उन्होंने की थी.. मैंने थोड़े ही की थी? जिसने की हो वही जाने.. उनके करने से मुझे किस करना कैसे आ जाता.. !! पर ये बता दूँ.. की तुझे और मौसम को किस करने में जो मज़ा आया था वैसा मज़ा उनके साथ नही आया था यार.. !!”
फाल्गुनी के बोलते ही वैशाली ने नोटिस किया “उन्होंने.. उनके.. ” शब्द प्रयोग का अर्थ यह था की फाल्गुनी को चोदने वाला कोई उसकी उम्र का या उसकी आसपास की उम्र का नही था.. कोई बड़ी उम्र का या बुजुर्ग ही हो सकता है.. अब नाम जानने के लिए फाल्गुनी को फुसलाना जरूरी था.. वैशाली का दिमाग भी उसकी माँ शीला जैसा तेज था.. उसने एक तरकीब सोची..
फाल्गुनी की चूत पर साबुन रगड़ते हुए वैशाली ने अपनी एक उंगली अंदर डाली और उसके होंठों पर एक लंबी किस कर दी.. दोनों के साबुन लगे स्तन एक दूसरे के संग दब गए.. चूत में उंगली करते हुए उसने फाल्गुनी से कहा “फाल्गुनी, मेरी एक रीक्वेस्ट है.. ”
फाल्गुनी: “हाँ हाँ बोल ना.. !!”
वैशाली: “यार, बात दरअसल यह है की तुझे शायद नही पता होगा.. मेरे और मेरे पति संजय के बीच जरा भी नही बनती.. पिछले काफी समय से हम एक दूसरे से ठीक से बात तक नही करते.. तुझे पता है फाल्गुनी, मर्द तो घूमते रहते है और अपनी जरूरतें बाहर कहीं भी पूरी कर लेते है.. लेकिन हम लड़कियां ऐसा नही कर सकती.. मर्दों को अपनी हवस बुझाने के लिए बाजार में ढेरों लड़कियां मौजूद है जो पैसे लेकर अपने शरीर का सौदा कर लेती है.. पर हम लड़कियों के लिए वो सुविधा भी आसानी से उपलब्ध नही होती.. यार फाल्गुनी, तू अभी कुंवारी है इसलिए शायद मेरी बात समझ में नही आएगी.. पर एक बार हमारी चूत को लंड की आदत पड़ जाती है ना.. फिर उसे वो चाहिए ही चाहिए.. संजय तो अब मुझे छूता तक नही.. या यूं कह लो की मैं उस मादरचोद को हाथ लगाने नही देती.. किसी रांड की चूत में घुसा हुआ लंड मैं क्यों अपने मुंह में लूँ.. ??” वैशाली ऐसे ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रही थी जिन्हे सुनकर फाल्गुनी की चूत गरम भांप छोड़ने लगी..
बाथरूम से बाहर आकर मौसम ने कपड़े पहन लिए.. मेकअप भी कर लिया.. लेकिन वैशाली और फाल्गुनी अभी तक बाथरूम में ही घुसी हुई थी.. क्या कर रही होगी वो दोनों अंदर? दरवाजा भी बंद है.. जरूर रात जैसा है कोई कार्यक्रम शुरू किया होगा दोनों ने.. मैं भी अंदर रहती तो मज़ा आता.. वैशाली के साथ वैसे तो बहोत मज़ा आता ही है.. बोल्ड और ब्यूटीफुल है वो.. पर इन दोनों ने दरवाजा अंदर से बंद क्यों कर रखा है? मौसम को ज्यादा विचार करने की जरूरत नही पड़ी क्योंकि दरवाजे के करीब खड़े रहकर उसे वैशाली की बातें स्पष्ट सुनाई दे रही थी.. अब मौसम कान लगाकर उनकी बातें बाहर से सुन रही है उसका पता वैशाली और फाल्गुनी को कैसे चलता.. !!
वैशाली: “मुझे तो हर रात को इतनी इच्छा होती है.. रोज रात होते ही मेरी भूख जाग जाती है और मुझसे बर्दाश्त नही होती.. संजय तो अपनी मस्ती में कहीं पड़ा रहता है.. और मैं यहाँ मर्द के स्पर्श को तरसती और तड़पती रहती हूँ.. फाल्गुनी, मैं भी जवान हूँ.. मेरे भी अरमान है.. जरूरतें है.. ज्यादा से ज्यादा तीन दिनों तक अपनी भूख को सहन कर लेती हूँ.. चौथे दिन तो ऐसा मन करता है की कहीं भाग जाऊँ.. अलग अलग प्रयोग करके खुद को संतुष करने की कोशिश करती हूँ.. पर कितने दिनों तक?? ओरीजीनल लेने में कितना मज़ा आता है.. तुझे तो पता ही है.. !!”
फाल्गुनी: “हाँ यार वैशाली.. तेरी बात बिल्कुल सही हैं.. मैं कितनी भी कोशिश करूँ मुझसे गलती हो ही जाती है.. साला कंट्रोल ही नही रहता.. पर तू मुझसे क्या चाहती है, ये तो बता.. !!”
वैशाली: “बुरा मत मानना फाल्गुनी, तेरा जो भी पार्टनर हो उसे मैं छिनना नही चाहती.. पर एक बार मुझे भी उनसे मिलवा दे.. मुझे बहोत मन कर रहा है यार.. इस चूत में असली लंड गए हुए एक साल से ऊपर हो गया है.. मुझे तो लगता है की मैं पागल हो जाऊँगी.. ”
फाल्गुनी: “जो तू कह रही है वो मुमकिन नही हो सकता.. कोई चांस ही नही है:
वैशाली: “मैं समझ सकती हूँ यार.. पर अगर तेरे पार्टनर के साथ मुमकिन न हो तो उसके कोई दोस्त से सेटिंग करवा दे.. हम दोनों मिलकर मजे करेंगे”
फाल्गुनी: “यार वैशाली, मैं तुझे कैसे समझाऊँ? ये पोसीबल ही नहीं ये.. वो मौसम भी यही बात को लेकर मुझसे रूठी हुई है.. उसे भी नाम जानना है.. अगर मैं उसे नाम बता दूँगी तो उसकी क्या हालत होगी वो नही जानती.. और तुम भी कल रात से इसी जिद पर अडी हुई हो..!!”
मौसम दरवाजे पर कान चिपकाकर ये सारी बातें बड़े ध्यान से सुन रही थी.. उसकी सांसें गले में अटक गई थी.. कहीं कोई बात सुनने में रह न जाए इसलिए वो एकटक अपना ध्यान अंदर की बातों पर केंद्रित कर सुन रही थी.. उसे वैशाली की बात सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ.. एक स्त्री होकर कैसे वो अपनी दोस्त का पार्टनर मांग रही थी!!!! वो भी सेक्स करने के लिए ?? माय गॉड.. एक नंबर की बेशर्म है साली.. !!”
फाल्गुनी: “वैशाली, जैसा तूने कहा की मर्दों को पैसे देकर लड़कियां मिल जाती है.. तो क्या संजय भी ऐसी लड़कियों के साथ संबंध रखता है ??”
वैशाली की उंगलियों का जादुई असर अब फाल्गुनी पर हो रहा था.. उत्तेजित होकर वो विचित्र सवाल पूछ रही थी जिनका जवाब भी उत्तेजना और अश्लीलता से भरपूर ही होने वाला था
वैशाली: “हाँ यार.. दो दो महिना बाहर रहकर जब वो घर आता है.. तब इतने आराम से मेरे बगल में लेटे हुए बिना कुछ कीये पड़ा रहता है.. देखकर ही पता चल जाता है की वो अपनी आग कहीं और बुझाकर आया है.. बाकी ऐसा कौन सा पति होगा जो दो महीने तक अपनी पत्नी से दूर रहकर वापिस आयें और अपनी पत्नी को हाथ भी ना लगाएं.. !!!”
फाल्गुनी: “सही बात है.. मर्द लोग तो कुछ भी कर सकते है.. ना जगह देखते है.. न समय देखते है.. जब मन करे तब छेड़ने लगते है.. हम लोगों तो कितनी शर्म आती है पर उन्हें तो कोई शर्म ही नही होती.. !!”
वैशाली: “जैसे पुरुषों के लिए लड़कियों और औरतों का बाजार होता है वैसे ही हम लड़कियों के लिए भी लड़कों/मर्दों का बाजार होता तो कितना अच्छा होता.. !! मेरी जैसी भूखी लड़कियां.. विधवा.. तलाकशुदा औरतें.. वहाँ जाकर अपनी पसंद के लड़के से चुदकर हवस को शांत कर पाती.. ये भूख अब सही नही जाती.. तू मानेगी नही.. इतना मन करता है की तुझे क्या बताऊँ?? कल रात तुम दोनों ने देखा था न.. कितनी गरम हो गई थी मैं!! ये जानते हुए की मेरी खुजली शांत कर सकें ऐसा लंड हाजिर नहीं है फिर भी कैसे मैंने मेरी चूत को तेरे और मौसम के चेहरे पर चिपका दिया था!! अब तुझसे क्या छुपाना.. संजय की उपेक्षा से मैं तंग आकर मैं यहाँ अपनी मम्मी के पास आ गई.. और सेक्स की इतनी तीव्र इच्छा हो रही थी की मैंने मम्मी की गैरमौजूदगी में अपने कॉलेज के पुराने फ्रेंड को घर बुलाकर चुदवा लिया.. तब जाके नीचे थोड़ी ठंडक मिली.. पर मुसीबत ये है की एक बार करने पर भूख थोड़े समय के लिए शांत तो हो जाती है.. पर दो-तीन बितते है वापिस अंदाई लेकर भूख जाग जाती है.. कभी कभी तो पुरुषों को देखकर इतने गंदे गंदे विचार आने लगते है मन में की क्या बताऊँ? मन करता है की उनको वहीं धर दबोचूँ और अपनी चूत में उनका लंड ले लूँ.. अब ऐसे मैं कहीं मुझसे कोई बड़ी गलती हो गई तो?? इसीलिए मैंने तुझसे कहा.. की तू जिसके साथ मजे करती है उसके साथ मेरी भी सेटिंग करवा दे.. तू बुरा मत मानना.. पर तू तो कुछ दिनों में चली जाएगी.. फिर मुझे ऐसा चांस दोबारा नही मिलेगा.. मुझे एक बार तो मजे कर लेने दे यार.. तुझे क्या दिक्कत है?? पर जब तू नाम भी नही बता रही तो करने देने का कोई सवाल ही नही उठता.. ” एक भारी सांस छोड़ते हुए वैशाली ने कहा
फाल्गुनी: वैशाली, तू मेरे पार्टनर के साथ सेक्स करें उसमें मुझे कोई प्रॉब्लेम नही है.. पर मैं उलझन में हूँ.. अगर मैं वो नाम बता दूँगी तो तू मेरे बारे में क्या सोचेगी!!! और मौसम को पता चलेगा तो उसके सर पर आसमान टूट पड़ेगा.. !!”
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