बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 4
(Family Sex Stories) 1
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दीदी भी खाना खाते हुए मुझे देख रही थी की मेरा क्या जवाब होगा? जब से हम लौटे थे उन्होंने मुझसे कुछ
बात नहीं की थी। पर मैं मुस्कुराकर बात टाल गया। दीदी खाना खाकर ऊपर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं भी सोने ऊपर पहुंच गया।
दीदी अभी जाग रही थी- “मोनू एक बात पुछूं? सच-सच बताना…” रूम की लाइट बंद थी और 11:00 बजे होंगे।
मुझे लगा दीदी क्या पूछेंगी?
मोनू – हा दीदी पूछो।
दीदी- तू कब वापस आया था वहां लौटकर?
मोनू – जब तुमने दरवाजा खोला था तभी। क्यों?
दीदी- तूने इतनी देर क्यों लगा दी और तेरे पास कोल्ड-ड्रिंक भी तो नहीं थी।
मोनू – “दीदी मैं काफी दुकानों पर गया था, कुछ बंद थी और बाकी लोगों के पास बोतल ठंडी नहीं थी। इसीलिए वापस आने में देर हो गई। और तुम बोली चलो तो वापस आ गया तुम्हारे साथ। उस आदमी के 100 रूपये मेरे पास रह गए। कल वापस करने जाना होगा…” दीदी के इस सवाल से मैं घबरा तो गया था पर बात बनाकर
बोला।
दीदी को विश्वास हो गया की मुझे वो सब नहीं पता जो वहां हुआ था। दीदी बोली- “मैंने उसको 100 रूपये वापस कर दिए थे। तुम्हें वहां जाने की जरूरत नहीं है…”
मैंने कहा- “ठीक है। वो पैसे मैं आपको दे दूंगा…”
दीदी ने कहा- “नहीं, वो तू ही रख ले। आज तूने मेरी बड़ी मदद की है ना…”
मुझे लगा दीदी ताना दे रही है या सच में कह रही है? खैर, मैं दीदी के नंगे चूतड़ों को याद करते-करते सो गया।
फिर कुछ दिन नॉर्मल थे कुछ खास नहीं हुआ। फिर हमारा रिजल्ट आ गया और मैं फर्स्ट डिवीजन पास हो गया था और इस बार ऋषि भी पास हो गया था। लगता था मेरी नकल करने का उसको फायदा हुआ था। कुछ दिनों बाद मैं ऋषि के साथ कालेज में एडमिशन के लिए फॉर्म लेने गया था। पर उस दिन कोई छुट्टी थी इसीलिए मैं
जल्दी लौट आया। जब मैं घर पंहुचा तो मम्मी कहीं जा रही थी।
मोनू – मम्मी कहां जा रही हो?
मम्मी- “तेरी आंटी के घर। उनके साथ मुझे माकेट जाना है। शाम तक आ जाऊूँगी। तू जल्दी कैसे आ गया?”
मोनू – कालेज में छुट्टी हो गई थी। क्या घर में कोई नहीं है?
मम्मी- “नहीं रश्मि है। तेरी किरण आंटी भी आई है। दोनों ऊपर रूम में है। उनहोंने दरवाजा लाक कर दिया है…” ये बोलकर मम्मी ने चाभी मुझे दी और चली गई।
मैं लाक खोलकर घर के अनदर आया तो मुझे हंसने की बड़ी तेज आवाज आई। मैं धीरे से ऊपर चला गया।
ऊपर कमरे के अनदर दोनों बेड पर बैठे थे और किसी बात पर हस रहे थे। मैंने सोचा छुपकर इनकी बातें सुनता हूँ। क्यों ये इतना हस रहे हैं?
जैसे की आप जानते है की किरण ऋषि की मां है। पास के मोहल्ले में रहती है। उम्र यही कोई 38 साल। उनका भी रूप रंग कुछ कम नहीं था। देखकर लगता नहीं था की दो बच्चों की मां है। लगता है जब वो 19-20 साल की रही होगी तभी ऋषि पैदा हो गया होगा, और रिंकी (ऋषि की छोटी बहन) उसके 3 साल बाद। ऋषि के पापा
किसी बड़ी सरकारी नौकरी में है और आजकल उनकी पोस्टिंग दिल्ली में है। पर महीने में एक दो बार घर आ ही जाते हैं। वो काफी दिन बाद आज हमारे घर आई थी। कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला था तो मैं अनदर देखते हुए उनकी बातें सुनने लगा।
किरण- अरे उसका बहुत लम्बा है?
दीदी- सच में? कितना लम्बा?
किरण- तेरी कभी ठुकाई हुई है?
दीदी- ठुकाई। कहा पर?
“यह पर…” किरण आंटी मुमकुराई और उन्होंने दीदी की चूत पर हाथ रखकर कहा।
मैंने मन में सोचा साला मा बेटा दोनों बड़े हरामी है।
दीदी को अपनी इज्जत पर अचानक हुए इस हमले से करंट लग गया। उनहोंने आंटी का हाथ हटाते हुए कहा-
“क्या करती हो आंटी?”
किरण- अरे तू डरती बहुत है। आज पहली बार तो अकेले मिली है। अपने दिल की बात नहीं बताएगी अपनी दोस्त को। या तू मुझे अपना दोस्त मानती ही नहीं?
रश्मि- नहीं ऐसी बात नहीं है। आप तो मेरी बेस्ट दोस्त हो।
किरण- तो खुलकर बात कर न? मेरे अलावा तो कोई सुनने वाला नहीं है। जब मैं तेरी उम्र की थी तो सारे मोहल्ले के लड़कों को अपनी उंगलियों पर नचाती थी। अरे भरी जवानी ऐसे मत बर्बाद कर रश्मि। अच्छा अपना फिगर तो बता।
रश्मि- जी 34-26-36।
किरण- वाह वाह… तुझे मेरा फिगर पता है?
रश्मि- जी नहीं और मुझे जानना भी नहीं है।
किरण- “अरे तू डरती क्यों है? मैं तेरी दोस्त ही नहीं, बड़ी बहन भी हूँ। मुझसे बातें शेयर नहीं करेगी तो किस्से करेगी? तेरे इन मम्मों को किसी ने दबा-दबाकर इनका रस पिया है?” आंटी ने अपने दोनों हाथ दीदी की छातियों पर रख दिए।
अपने खजाने की रक्षा करने के लिए उठते दीदी के हाथों को आंटी ने पकड़ लिया।
किरण- “अरे मुझसे क्यों शरमाती है।? बता न। अब ये मत बोलना की तूने इनहें अभी तक मसलवाया नहीं है…”
दीदी कसमसा कर चुप हो गई। आंटी ने दीदी के दोनों हाथ अपने एक हाथ से पकड़े और दूसरे हाथ से वो दीदी की चूचियां सहलाने लगी।
किरण- “चल कोई बात नहीं। मैं तो हूँ न तेरी हेल्प करने के लिए…” कहकर आंटी दीदी की चूचियों को धीरे-धीरे मसलने लगी।
दीदी का गोरा चेहरा मस्ती में लाल हो गया। मुझे आंटी की हरकतें देखकर थोड़ा अजीब लग रहा था। पर दीदी पर चढ़ी मस्ती की लहर ने उनकी टांगों के बीच छिपी उनकी चूत में खलबली मचा दी, और उन्होंने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख लिया।
दीदी की आँखें मस्ती में बंद होने लगी और वो कांपती आवाज में बोली- “आंटी बस करो। कुछ-कुछ हो रहा है…”
पर आंटी ने दीदी की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और दीदी के दोनों हाथ उठाकर अपने खरबूजों के साइज वाली चूचियों पर रख लिए, और कहा- “दबा इनहें…”
रश्मि- ये कितने बड़े और नरम हैं?
किरण- “अरे इन पर ही आदमी मरता है। औरत का पिछवाड़ा और चूचियां ही मदों को सबसे ज्यादा आकर्षित करती है…”
दीदी की चूचियां भी अब उत्तेजना के कारण एकदम कड़क हो गई थी। उनका शेप एकदम आम की तरह था।
आंटी ने मस्ती में दीदी की चूचियों को जोर से दबाया।
रश्मि- अंकल तो ज्यादातर दिल्ली में रहते है तो आप?
किरण- शर्मा मत, पूछ न की किस्से चुदवाती हूँ?
चुदाई का नाम सुनते ही दीदी के बदन में एक झुरझुरी दौड़ गई और उनकी चूत पनियाने लगी- बताइए न?
किरण – “अरे हमारी गली में कोने में एक दुकान है न फोटोकापी की। वहां एक लड़का बैठता है राज । उसी से
चुदवाती हूँ आजकल। साला बहुत लाइन देता था मुझे। बहुत मस्त चोदता है। किसी से कहना नहीं…” कहकर
किरण आंटी ने अपना हाथ दीदी की चूत पर रख दिया और सहलाने लगी।
दीदी ने आँख बंद कर ली और पूछा – कितना लम्बा है उसका?
दीदी की ये बात सुनते ही किरण आंटी के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और बोली- “पूरे गधे के जितना 8”
इंच का और उनहोंने अपनी मुठी में दीदी की चूत को भर लिया …”
दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई।
किरण – “तुझे बताऊँ वो मुझे कैसे चोदता है?” आंटी ने दीदी को खड़ा करके घोड़ी बना दिया और उनका बदन
निहारने लगी।
दीदी घोड़ी बनी इतनी सेक्सी लग रही थी की मेरा मन कर रहा था अभी अनदर जाकर अपना लण्ड उनके पीछे
पेल दु । घोड़ी बनना रश्मि दीदी को भी रोमांचित कर रहा था और उनके निप्पल खड़े होने लगे थे।
आंटी मन में खुश हो रही थी की उनहोंने रश्मि दीदी को अपने जाल में फंसा लिया है। आंटी अब अपनी चूत को
सहला रही थी तो मुझे लगा की दीदी का बदन मर्दो के साथ-साथ औरतों को भी बहुत लुभाता है।
“इतनी सेक्सी है तु । न जाने अब तक चुदी क्यों नहीं? क्या तेरा कोई बायफ्रेंड नहीं है?” आंटी अपने हाथ दीदी
के कूल्हों पर रखती हुई बोली।
रश्मि- “नहीं आंटी। मन तो बहुत है पर डर लगता है। जल्दी बताओ वो कैसे करता है?”
किरण – “बड़ी बैचेन है? अगर मैं मर्द होती तो तुझे जमकर चोदती। राज मेरी कमर ऐसे ही सहलाता है जैसे मैं
तेरी सहला रही हूँ। फिर ऐसे वो मेरी गाण्ड दबाता है…” आंटी जो बोल रही थी वही कर रही थी।
दीदी मजे से आखें बंद किए सोच रही थी की किरण की जगह राज उनकी कमर सहला रहा है। कहा- “आह्ह…
आंटी फिर क्या करता है वो?”
किरण – “फिर वो मेरी चूत को मसलता है…” और वो दीदी की चूत की मसलने लगी और दबाने लगी- “और
पता है फिर वो क्या करता है?” किरण आंटी दीदी को तड़पाती हुई बोली।
“क्या करता है आंटी बोलो न? आ आह्ह…” दीदी बदहवासी में अपने बदन को हिलाते हुए बोली।
“फिर वो मेरे साथ ऐसा करता है…” ये कहकर किरण आंटी अपनी चूत को दीदी की गाण्ड से रगड़ने लगी।
रश्मि दीदी तो मस्ती में खोकर किसी और दुनिया में चली गई थी और किरण आंटी अब बेहिचक उनके बदन
से खेलने लगी।
“सच में रश्मि, तु एक बार राज का लण्ड ले ले अपनी चूत में। तेरी जिंदगी बन जाएगी…” कहते हुए आंटी ने
दीदी के सीधा बेड पर लिटाया और उनके होंठ चूमने लगी- “फिर वो मेरी चुचियों को कस-कस के दबाता है…”
और उनहोंने दीदी की टी-शर्ट के अनदर हाथ डालकर चुचिया मसलकर रख दी।
“आह्ह… इस्स… आंटी उह्ह… उम्म… मर जाऊूँगी…” दीदी मस्ती से छलक उठी।
“और चोदते हुए वो गनदी-गनदी गालियाँ देता है। तुझे गालियाँ सुनना अच्छा लगता है? बोल रांड़ आह्ह…” आंटी
की भी अब आँख बंद हो रही थी और उनके धक्के तेज हो गए। आंटी ने दीदी के निप्पल खींचते हुये पुछा- “बोल
न बहन की लौड़ी बोल? तुझे सुननी है चुदते हुए गनदी-गनदी गालियाँ? मजा आता है तुझे गालियाँ सुनकर?”
“हां आंटी मुझे गनदी-गनदी गालियाँ सुनना अच्छा लगता है। गालियाँ सुनकर मेरी चूत में एक कसक सी उठती है
और उससे पानी आने लगता है…” रश्मि दीदी बोली।
दीदी के मुंह से ऐसी बातें सुनकर मेरा तो लण्ड फटने लगा और मैं अपना लण्ड मुठियाने लगा।
आंटी दीदी को ऐसे रगड़ रही थी की दीदी ‘आह्ह’ की आवाज करके झड़ गई और आँख बंद करके निढाल लेट
गई। पर आंटी का अभी नहीं हुआ था तो वो अभी भी लगी हुई थी। थोड़ी देर में आंटी की फैली हुई बुर ने भी
पानी छोड़ दिया और वो दीदी को दबोचकर उनके ऊपर गिर गई।
पर मेरी बदकिस्मती की आंटी को सामने शीशे में मैं मुठ मरता दिख गया। और मेरी नजर भी आंटी की नजर
से शीशे में ही मिली । दीदी का मुंह अभी भी तकिए में दबा था, पर आंटी आँखें फाड़कर मुझे या मेरे लण्ड को
देख रही थी।
तभी दीदी का बदन हल्का सा हिला और आंटी ने मुझे धीरे से वहां से जाने के लिए कहा। मैं फौरन वहां से हट
गया, पर लण्ड में हलचल अभी भी मौज द थी, और उत्तेजना से मैं पागल हो रहा था तो मैं काम पुरा करने नीचे
बाथरूम में घुस गया और अपना पैंट और अंडरवियर उतारकर एक कोने में फेंक दिया और फिर से मुठ मारने में
लग गया।
तभी मुझे पायल की छम-छम सुनाई दी, और मैं कुछ समझ पता तब तक बाथरूम का दरवाजा खुल गया। अब
दृश्य कुछ ऐसा था की मैं नंगा खड़ा था, मेरे हाथ में मेरा मस्ती से फुला लण्ड था और बाथरूम के दरवाजा पर
किरण आंटी थी।
पता नहीं मुझमें कहा से इतनी हिम्मत आ गई की मैंने आंटी का हाथ पकड़कर उनहें अनदर खींच लिया । आंटी
ने अपना दुपट्टा दरवाजे के ख खूंटे पर टांग दिया और दरवाजा अनदर से बंद कर लिया । मैंने बिना कुछ बोले
अपना हाथ आंटी की चुचियों पर रख दिया और आंटी ने अपना हाथ बढ़ाकर मेरा लण्ड पकड़ लिया । मैं तो
मस्ती से पागल हो गया और उनकी चुचियों को जोर से दबाने लगा।
“थोड़ा धीरे। सबर नहीं है तुझमें? हाय रे कितना गरम है तेरा पर छोटा है…” किरण आंटी मेरा लण्ड सहलाती
हुई बोली।
आंटी के नरम हाथ का स्पर्श अपने गरम लण्ड पर पाकर मैं बिल्कुल मस्त हो गया। आंटी अब झुक कर नीचे
बैठ गई। उनके लो-कट सुट से मुझे लाल ब्रा में कैद उनकी गोरी-गोरी चूचियाँ नजर आने लगीं।
“मजा आया था वो सब देखकर?” आंटी ने मेरा लण्ड हिलाते हुए पुछा।
मैं मस्ती से पागल हुआ जा रहा था। मेरे मुंह से निकला- “हाँ आंटी बहुत मजा आया…”
“मुझे अपनी बहन के बदन से खेलते देखकर तुझे मजा आया। बड़ा हरामी है तु …” आंटी मुझे छेड़ते हुए बोली
और दुसरे हाथ से मेरे अनडों को भी सहलाने लगी।
“कभी किसी लड़की ने तेरी लुल्ली पकड़ी है? चोदा है किसी को अभी तक?” आंटी ने मेरे कान में फुसफुसाया।
अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने सोचा ऐसा मौका मुझे कभी नहीं मिलेगा, जब किरण जैसी मदमस्त
लण्डखोर औरत मेरे साथ बाथरूम में अकेली है। ये उसी ऋषि की माूँ है जो मेरी बहन को गनदी नजरों से देख
रहा था। मुझे इसका फायदा उठाना चाहिए । मैंने आंटी को उनके बाल पकड़कर खड़ा किया और धक्का देकर
दीवार के साथ लगाया और पागलों की तरह उनसे लिपटकर उनकी मोटी चूचियाँ दबाने लगा। आंटी के मुंह में
मैंने अपनी जबान डाल दी और स्मूच करने लगा।
आंटी जो मुझे एक नादान शर्मिला लड़का समझकर छेड़ रही थी, उनको ऐसा होने का बिल्कुल अंदाज नहीं था।
वो कुछ घबरा गई। मेरे अनदर उसके बेटे ने जो हवस का शैतान जगाया था वो उससे अंजान थी। सिकारी अब
खुद सिकार बनने की कगार पर था। वो अपने हाथों से मुझे पीछे धक्का देने की कोशिश कर रही थी, पर न
जाने मेरे अनदर कहां से इतने ताकत आ गई की वो मुझे हिला भी नहीं पाई। ये जिंदगी में पहली बार मैं किसी
औरत के बदन के उतार चढ़ाव अपने हाथों से महसुस कर रहा था।
हमारी कश्मकश में मेरा लण्ड कभी आंटी के पेट, कभी जांघों और कभी जांघों के बीच छुपी उनकी बुर पे लग
रहा था। मैंने कपड़े के ऊपर से ही उनकी एक चूची अपने मुंह में भर ली और चूसने लगा। फिर मैंने उनको घुमा
दिया और नीचे झुक कर उनके उभरे हुए चूतरों को दबाने लगा। फिर मैंने उनकी जांघ पर जोर से काट लिया ।
“आह्ह… आऽ काटो मत…” आंटी दर्द से कराही।
अब मैंने अपना लण्ड उनकी गाण्ड की दरार में लगाया और धक्के लगाने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था
जितना कभी मुठ मारने में भी नहीं आया था। मैं अपने हाथ आगे बढ़ाकर आंटी की गदराई चूचियों को मसलने
लगा।
तभी रश्मि दीदी की आवाज आई- “आंटी? आप कहाँ हो?” दीदी नीचे आ गई थी।
आवाज सुनते ही आंटी बहुत परेशान हो गई और बोली- “अरे मोनू आअह्ह… कमीने छोड़ दे अब तो वरना दोनों
पकड़े जायेंगे। मेरा क्या है? पर तेरी बहन तेरे बारे में क्या सोचेगी?”
पर मैं आंटी की बात को अनदेखा करता हुआ अपना लण्ड आंटी के नरम चूतरों पर रगड़ता रहा।
“देख रश्मि अब इधर ही आयेगी। आह्ह… इश्श … मान जा मोनू …” आंटी फिर से बोली।
डर तो मुझे भी था पर हवस डर से बड़ी थी। आंटी के उभरी हुई नरम गाण्ड पर लण्ड रगड़े जाने का मजा डर से
जीत गया और मैंने धक्के तेज कर दिए। मैं जल्दी से अपना पानी निकालना चाहता था।
“आंटी क्या तुम बाथरूम में हो? रश्मि दीदी अब बाथरूम के दरवाजे पे आकर खड़ी हो गई थी- “जल्दी बाहर
आओ मुझे भी बाथरूम जाना है…”
किरण आंटी बोली- “रश्मि थोड़ा टाइम लगेगा, तुम ड्राइंग रूम में बैठ जाओ…”
“आंटी क्या कर रही हो? मेरी छूट जाएगी जल्दी आओ…” बोलकर दीदी ड्राइंग रूम की तरफ चली गई।
“छोड़ दे मुझे कुत्ते। आह्ह… ईस्स… रश्मि फिर से आ जाएगी…” आंटी बोली और उनहोंने अपने चूतड़ थोड़े पीछे
किए।
मेरे फुले हुए लण्ड के लिए इतना बहुत था और मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया। मैं पीछे से आंटी से चिपक गया।
शानदार ओगैज्म था।
तकरीबन दो मिनट हम वैसे ही खड़े रहे फिर आंटी ने मुझे हटाया और देखा की उनकी सलवार पीछे से मेरे माल
से भीग सी गई है। आंटी के चेहरे की शरारत वाली हसी अब गायब हो गई थी और उसकी जगह उनकी आँखों
में मेरे लिए गुस्सा था- “बेवक़ूफ़… देख तुने क्या किया? अब मैं रश्मि को क्या बोलूँगी ? अरे मैं कहीं भागी जा
रही थी। अगर आज तु ने ये हरकत न की होती तो फिर कभी तुझे पुरा मर्द बना देती। गधा कहीं का…”
मैंने सोचा आंटी को नाराज करना ठीक नहीं है। ये मुझे अपनी चूत का तोहफा दे सकती हैं। तो मैं उनसे माफी
मांगने लगा।
पर आंटी ने कहा- “अभी चुपचाप यहाँ से निकल और दुसरे कमरे में जाकर अपने कपड़े पहन। रश्मि फिर आ
जाएगी। जब तक मैं अपनी हालत थोड़ी ठीक करती हूँ…”
मैं दरवाजा खोलकर धीरे से सरक गया और बगल वाले रूम में जाकर कपड़े पहनने लगा।
तभी फिर रश्मि दीदी की आवाज आई- “आंटी, जल्दी खोलो अब मुझसे रुका नहीं जा रहा। क्या कर रही हो?”
तभी किरण ने दरवाजा खोलकर कहा- “अरे मेरी सलवार पे पानी पड़ गया है वो ही सुखा रही हूँ। आ जा तु
मूत ले अनदर आकर…”
“तुम्हारे सामने? पहले तुम बाहर जाओ…” दीदी ने कहा।
“अरे अब मुझसे कैसी शर्म । आ जा…” आंटी ने दीदी का हाथ पकड़कर अनदर खींचा। दीदी बाथरूम में घुस गई
और आंटी ने अनदर से दरवाजा बंद कर लिया ।
मैंने कपड़े पहन लिए थे तो चुपचाप वहां से निकलकर बाहर ड्राइंग रूम में जाकर टीवी देखने लगा।
थोड़ी देर बाद दीदी और आंटी ड्राइंग रूम में आई और मुझे देखकर दीदी ने पूछा- “तु कब आया मोनू और
दरवाजा कैसे खोला…”
“अभी-अभी आया दीदी। मम्मी की चाभी मेरे पास थी तो उसी से दरवाजा खोलकर आ गया…” मैंने आंटी की
तरफ देखते हुए कहा जो अब मुझे देखकर फिर से मुसकुरा रही थी।
फिर वो दीदी से बोली- अच्छा रश्मि अब मैं चलती हूँ।
दीदी बोली- फिर आना आंटी।
“हाँ अब तो आना ही पड़ेगा…” आंटी बोली और अपने घर चली गई।
दीदी अपने रूम में ऊपर चली गई और मैं टीवी देखने लगा।
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