बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 7
(Family Sex Stories) 18
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करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद ऋषि रश्मि दीदी की चूत में ही झड़ गया। पक्क की आवाज के साथ उसका मुरझाया हुआ लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकल आया और वो दीदी के बगल में लेट गया। दीदी की आँख से आंस और चूत से ऋषि का सफेद गाढ़ा वीर्य बहकर बाहर आ रहा था।
ये नजारा देखकर मेरे लण्ड ने पैंट में ही पानी छोड़ दिया। मेरे पैर कांपने लगे और मैं सोफे पर जाकर बैठ गया। झड़ने के साथ ही मेरी वासना भी खतम हो गई और मुझे एहसास हुआ की क्या हो गया है?
तभी ऋषि कमरे से बाहर आ गया और मुझे देखकर चौंक गया- “क्यों बे गांडू तुझे कहा था न की दो बजे से पहले मत आना और तु अनदर कैसे आया बे?” ऋषि धीमी आवाज में बोला।
“मैं कहीं नहीं गया था। यहीं था। तुम्हारी बातों में आकर आज मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया…” मैंने भी धीमी आवाज में जवाब दिया।
“साले चुप कर लाइव ब्लू – फिल्म देख रहा था। वो भी अपनी बहन की… और सुन तु ने कोई पाप नहीं किया समझा? अरे तुझे तो पुण्य मिलेगा पुण्य। भूखे को खाना खिलाने से बड़ा पुण्य कोई नहीं, और तुने अपनी भूखी बहन की भूख मिटायी है। समझा?” ऋषि बोला और सामने किचेन में चला गया।
मैं भी उसके पीछे-पीछे किचेन में गया। वो वहां पानी पी रहा था। मैंने बोला- “मेरी बहन कोई भूखी वुखी नहीं थी। मैंने देखा कैसे तुमने उसके साथ जबरदस्ती की है और उसकी आँख के आंस भी मैंने देखे हैं। अब चुपचाप चले जाओ यहाँ से…”
ऋषि हँसने लगा और बोला- “अबे गधे, तु लड़कियों को नहीं समझ सकता। अरे वो तो खुशी के आँशु थे क्योंकी आज तेरी बहन कली से फूल बन गई। आज का दिन उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन है। न मान तो जब इतना देखा तो थोड़ा और देख और सुन बे आज तो मैं रात भर यही रुकूँगा। समझा।“ जा जाकर फिर घुस जा जिस बबल में छुपा था…” और वो फिर से रूम में चला गया।
अनदर जाकर उसने रश्मि दीदी को अपने दोनों हाथों में उठा लिया । मुझे लगा वो फिर बाहर आयेगा तो मैं जल्दी से सोफे के पीछे छीप गया और ऋषि दीदी को लेकर बाथरूम में घुस गया। उसने दीदी को ऐसे उठाया था कि उनकी पूरी गाण्ड ऋषि के बांए हाथ में और उनका दाहिना स्तन ऋषि के दांये पंजे में था। वो उनहें उसी तरह उठाकर बाथरूम में ले गया और शॉवर के नीचे खड़ी कर दिया और शॉवर खोल दिया। फिर उसने बाथरूम में ही भीगती नंगी खड़ी रश्मि दीदी को ताबड़तोड़ चुमना शुरू कर दिया।
दीदी भी अब चुपचाप उसका साथ दे रही थी।
अब ऋषि ने दीदी को पीछे की तरफ घुमा दिया और उनकी गाण्ड ऋषि की तरफ हो गई। ऋषि फिर से उत्तेजना के मारे पागल हो गया। पिछले कई महीनों से जिस रश्मि को चोदने के लिए वो तरह-तरह का प्लान बना रहा था, आज वही गदराई हसीना चुदने के बाद उसके सामने पूरी तरह से नंगी खड़ी थी और उसका भाई चुप करके देख रहा था की ऋषि उसकी बहन के तमाम अंगों से खिलवाड़ कर रहा था। वो जानता था की अब उसे रोकने वाला कोई नहीं है।
रश्मि दीदी पूरी तरह से उसके कब्जे में थी। ऋषि नीचे बैठ गया और उनकी गाण्ड को चुमने लगा, दीदी की नरम-नरम उत्तेजक गाण्ड को चुमने से दीदी उत्तेजना की नई उचांईयो, में पहुँच गई। दीदी की गाण्ड को उसने पिछले दिनों कई बार याद करके मुठ मारा था लेकिन उसकी मादकता का अहसास उसे आज पहली बार हो रहा था। वो रश्मि दीदी की गाण्ड को चुमता जा रहा था और बीच-बीचु में उत्तेजना के कारण उसे अपने दांतों से काट भी लेता था, साथ ही साथ दीदी की चूत को पानी से धो भी रहा था। अब ऋषि दीदी की गाण्ड को चुमना छोड़कर पूरी तरह से अपना मुंह नीचे फर्श तक ले गया और उनको नीचे चुमना शुरू कर दिया।
पहले नंगी खड़ी दीदी की एड़ी फिर टखने उसके बाद पंडली, फिर जांघ, कमर और पीठ और आखिरी में दीदी की गर्दन। उसने अब पूरी तरह से नंगी खड़ी दीदी के पीछे जाकर उनहें दबोच लिया । उसका लण्ड दीदी की गाण्ड से चिपक गया और उसने अपने दोनों हाथ आगे की तरफ लेजाकर दीदी की विशाल चुचियों को पकड़ लिया ।
अपना मुंह दीदी के गालों से लगाकर ऋषि उनके गालों को चुमने लगा और अपना एक हाथ दीदी की चूत के ऊपर ले गया और उसको मसलने लगा। अपने दूसरे हाथ से वो दीदी की चूची भी बुरी तरह से मसलने लगा और फिर उसने अपना लण्ड बड़ी जोर से दीदी की गाण्ड में दबा दिया। अब ऋषि ने मुस्कुरा कर बाथरूम के दरवाजे से बाहर उस तरफ देखा जहां मैं छीपा हुआ था और एक आँख दबाई, जैसे इशारे से मुझे कह रहा हो की आने वाला वक्त बहुत तुफानी होगा।
रश्मि दीदी को इस तरह अपने बदन को मसले जाने से उत्तेजना हो रही थी। वो कभी दर्द से रो पड़ती थी और कभी आनंद से उनके मुंह से सिसकियाँ निकल पड़ती- “आह्ह्ह… आह्ह्ह… ओह्ह्ह… बस करो ऋषि …” दीदी की सिसकियाँ और आंस भी ऋषि की वासना की भुख को और भी बढ़ा रहे थे। और वो पागलों की तरह से उसके पूरे बदन को बेदर्दी से मसलने लगा।
फिर ऋषि दीदी को छोड़कर बाथरूम से बाहर आ गया। ऋषि पूरा भीगा हुआ है और उसका लण्ड आधा खड़ा था, फिर भी वो काफी बड़ा लग रहा था। बाहर आकर उसने दीदी का भी हाथ पकड़कर उनहें बाहर खींच लिया ।
दीदी बाथरूम से बाहर निकल आई और वो भी पूरी गीली थी और बहुत सेक्सी लग रही थी। ऋषि वापस उनहें लेकर बेडरूम में ले गया और एक तौलिया लेकर दीदी को पोंछना शुरू किया। मैं सोफे के पीछे से निकलकर फिर दरवाजे के पास आ गया। ऋषि दीदी को पोंछने के साथ उनहें किस भी करता जा रहा था। जब उसने खुद को और दीदी को पोंछ लिया फिर से उसने दीदी को सीने से लगा लिया और उसके बदन को मसलना चालू कर दिया। कुछ देर तक उसे इसी तरह से मसलने के बाद जब उसने दीदी को अलग किया।
तो दीदी ने चेहरा शर्म से झुका लिया । दीदी के आँखें बंद थी।
ऋषि ने दीदी की ठोड़ी पकड़कर उनका चेहरा ऊपर उठाया और होठों को चुम लिया, और बोला- “डार्लिंग अभी तो सिर्फ ट्रेलर था, पूरी फिल्म तो अभी बाकी है…”
मैंने देखा की ऋषि का लण्ड अब पूरी तरह खड़ा होकर उत्तेजना के मारे झटके मार रहा है।
हालाँकी रश्मि दीदी ने चुदाई का स्वाद चख लिया था फिर भी वो थोड़ा-थोड़ा शर्मा रही थी इसलिए वो आँखें बंद किए खड़ी थी। नंगे खड़े ऋषि ने दीदी को फिर से अपने पास खींचा और उसके बदन से चिपक गया। दीदी ने ऋषि के बदन की गर्मी को महसूस किया। दोनों पूरी तरह से नंगे होकर चिपके थे। दीदी ने साफ महसूस किया कि ऋषि इस वक्त काम के नशे में इस कदर डूबा हुआ है कि उसका पूरा बदन किसी भट्टी की तरह गरम हो चुका है।
कुछ देर तक रश्मि दीदी को अपने नंगे बदन से चिपकाकर रखने और उसकी नंगी काया की गर्मी का सुख लेने के बाद ऋषि दीदी से अलग हुआ और खींचकर उनहें पलंग के पास ले आया। फिर एक हल्का सा धक्का देकर उसने दीदी को पलंग पर बैठा दिया, दीदी के दोनों पैर पलंग पर लटक रहे थे और वो पलंग पर बैठ गई। पास खड़े ऋषि ने अब दीदी का एक हाथ उठाया और अपने लण्ड पर रख दिया और मुठ्ठी को बंद कर दिया।
ऋषि ने दीदी को चोदने की तैयारी में शायद आज ही अपने लण्ड के बालों को साफ किया था। उसका बिना बालों का खड़ा लण्ड और भी विकराल लगा रहा था। अपना लण्ड वो रश्मि दीदी की मुठ्ठी में देकर उनके हाथों से अपनी मुठ्ठ मरवाने लगा। ऋषि के लण्ड का पहाड़ी आलू जैसा सुपाड़ा एकदम सूर्ख लाल हो गया था।
रश्मि दीदी के लिए ये एक नितांत नवीन अनुभव था उसने पहली बार किसी मर्द का लण्ड अपने हाथों में पकड़ा था। उसने महसूस किया कि ऋषि का लण्ड फौलाद की तरह कड़क और किसी भट्टी में तपाये लोहे की तरह गरम है। पिछले कुछ दिनों के आधे अधूरे अनुभव जो दीदी को थे आज का अनुभव उन सबसे अलग था।
रश्मि दीदी के नरम-नरम हाथ जब ऋषि के लण्ड पर आगे पीछे सरक रहे थे तो उसे एक अजीब आनंद का अनुभव हो रहा था। उसे कभी गुमान भी न था कि रश्मि के हाथों में ऐसा जादू छीपा है। ऋषि का लण्ड अब बुरी तरह से कड़क हो गया था और उसे नीचे करना संभव नहीं था इसलिए दीदी अब उसके लण्ड को ऊपर से नीचे की तरफ सहला रही थी।
ऋषि अब बुरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और लण्ड में अत्यधिक तनाव के कारण अब वो दुखने लगा था। तनाव और उत्तेजना के कारण उस अब ऐसा लगने लगा था कि यदि इसे जल्द ही रश्मि की चूत में ना डाला तो ये अब फट जायेगा। उसने रश्मि दीदी के हाथों को अपने लण्ड से आजाद किया और वो दीदी के और भी सामने आकर खड़ा हो गया, अब ऋषि का लण्ड दीदी के एकदम मुँह के सामने था। ऋषि ने अपना लण्ड दीदी के गालों में लगाया और वहां उसे रगड़ने लगा। वो दीदी के पूरे जिश्म में अपना लण्ड रगड़ना चाहता था, अब वो अपना लण्ड उसके गालों से हटाकर उसके पूरे चेहरे में घुमाने लगा।
रश्मि दीदी बेहद शर्मसार थी और आँखें बंद किये हुए ऋषि के अपने नंगे जिश्म के साथ खिलवाड़ को महसूस कर रही थी। ऋषि अब अपने लण्ड को दीदी के होठों पर घुमाने लगा, मानो वो अपने लण्ड से उनके होठों पर लिपिस्टिक लगा रहा हो।
रश्मि दीदी ने अपने मुँह को जोर से भींच लिया और अपने होठों को भी जोर से बंद कर त्रिया, कहीं गल्नती से ऋषि का लण्ड उनके मुँह में ना घुस जाय। दीदी को लगा कि अगर ऋषि ने लण्ड होंठों से नहीं हटाया तो उन्हें उबकाई आ जायेगी और वो उल्टी कर देगी।
पर ऋषि मंझा हुआ खिलाड़ी था। उसने अपने बांयें हाथ से रश्मि दीदी के जबड़ों को पकड़ा और उसे तनिक दबाया तो दीदी का मुँह थोड़ा सा खुल गया और अब ऋषि उनके खुले मुँह में अपना लण्ड डालने की कोशिश करने लगा। लेकिन दीदी ने पूरी तरह से अपना मुँह नहीं खोला था इसलिये उसे अपना लण्ड दीदी के मुँह में डालने में परेशानी हो रही थी।
उसने थोड़ा और दीदी के मुँह को दबाया तो उनका मुँह पूरी तरह से खुल गया अब उसने अपना लण्ड दीदी के मुँह में हौले से डाल दिया और धीरे-धीरे उसे काफी गहराई तक उसके मुँह में घुसेड़ दिया। अब रश्मि दीदी गों-गों की आवाजें अपने मुँह से निकालने लगी। वो कुछ कहना चाहती थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी, क्योंकी ऋषि का मोटा लण्ड उनके मुँह में था।
ऋषि ने अब दीदी के सिर को पीछे से पकड़ा और धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाने लगा और अपना लण्ड दीदी के मुँह में अंदर-बाहर करने लगा। रश्मि दीदी की आँखें फटने लगी क््योंकी ऋषि के धककों से उसका लण्ड दीदी के गले तक चला जा रहा था।
दीदी के लिये ये एक बिल्कुल नया और विचित्र अनुभव था क््योंकी दीदी ने कभी भी किसी मर्द के लण्ड का स्वाद नहीं चखा था। कुछ देर तक इसी तरह से अपनी कमर हिला-हिलाकर अपना लण्ड दीदी के मुँह में डालने के बाद ऋषि ने अपनी कमर हिलाना बंद किया और दीदी के सिर के बालों को पीछे से पकड़ लिया और धीरे-धीरे उनका सिर आगे पीछे करने लगा।
रश्मि दीदी के लिये हालांकि ये बिल्कुल नया खेल था जो उसने आज से पहले कभी नहीं खेला था इसीलिये उनके मन में काफी गलतफहमी थी लेकिन आज ऋषि ने जबरन ही सही लेकिन जब उसके मुँह में अपना लण्ड डाल ही दिया तो शुरुआत में थोड़ी हिचकिचाहट के बाद अब उनको भी ऋषि के लण्ड का स्वाद अच्छा लगने लगा था, और इस खेल में दीदी को भी मजा आने लगा था। अब अनजाने में ही कब उनका मुँह थोड़ा और खुल गया और ऋषि के लण्ड के लिये अपने मुँह में और जगह कर दी, ताकी वो असानी से लण्ड अपने मुँह में ले सके।
ऋषि ने इसको तुरंत महसूस कर लिया और उसने दीदी के सिर को हिलाना बंद कर दिया लेकिन दीदी का सिर आगे पीछे हिलना बंद नहीं हुआ, वो उसी तरह अपने सिर को आँखें बंद किये हिलाती रही और उसके लण्ड को चूसती रही।
रश्मि दीदी की आँखें बंद थी और उन्होंने अब इतनी जोर से उसके लण्ड को चूसना शुरू कर दिया कि उनके मुँह पच-पच की आवाजें भी आने लगी। इतनी जोर से लण्ड को अपने मुँह में भींच लेने के कारण उनके दोनों गालों में गड़ढे पड़ने लगे थे। पच-पच की आवाज के बीच में उनके मुँह से 55५ उ5 आहह… आहह…’ की आवाजें निकल रही थी।
और इधर ऋषि आँखें बंद किये अपनी गदराई हसीना के मुख-मैथुन का आनंद ले रहा था। उसके मुँह से सीऽ सीऽ की आवाजें निकल रही थी वो प्यार से दीदी के बालों और पीठ में हाथ फेरने लगा और अत्यन्त कामोत्तेजना में आहह… आहह… वाह रश्मि सक इट बेबी’ बड़बड़ाने लगा।
दीदी को कुछ देर पहले जिस लण्ड के होंठों पर लगने से उबकाई आ रही थी, उसी घोड़ेछाप लण्ड को अब वो लोलीपाप की तरह स्वाद लेकर चूस रही थी।
थोड़ी देर बाद ऋषि ने रश्मि दीदी को कुतिया की तरह पलंग पर बैठा दिया और खुद पलंग के नीचे उनके सामने खड़ा हो गया और अपना लण्ड दीदी के मुँह में दे दिया। दीदी को दोनों चूचियां हवा में झूल रही थी। ऋषि बीच – बीच में अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और अपनी एक उंगली को उसकी गाण्ड और उसकी चूत के छेद में मसलने लगा।
इससे दीदी की उत्तेजना और बढ़ गई और वो फिर से और जोरों से उसके लण्ड को चूसने लगी और अब वातावरण में दोनों जवान जिश्मों के मुँह से निकलने वाली सिसकियां गूँजने लगी।
फिर ऋषि ने अपना लण्ड उनके मुँह से निकाला और दीदी को हौले से धक्का दिया और पलंग पर धकेल दिया। रश्मि दीदी अब पलंग पर पीठ के बल पड़ी थी उनका सिर एक तरफ झुका हुआ था और दाहिना हाथ ऊपर की तरफ उठते हुए सिर के पास पड़ा था और दूसरा हाथ उनकी चूची के ठीक नीचे और पेट के थोड़ा ऊपर पड़ा था। दीदी की आँखें बंद थी और उनकी विशाल चूचियां उत्तेजना के मारे जोर-जोर से हिल रही थीं।
ऋषि दीदी को इस तरह पड़े देखकर पागल हो गया और वहीं पल्रंग के पास नीचे बैठ गया।
फिर उसने दीदी की दोनों टांगों को फैल्ाकर उसने अपना मुँह दीदी की चूत में लगा दिया। अब ऋषि ने दीदी की चूत को चूसना शुरू कर दिया। उसके मुँह से चप-चप चपड़-चपड़ की आवाज आने लगती है। दीदी के मुँह से उत्तेजना के मारे आहह” निकलने लगा और वो अपना सिर पलंग में इधर-उधर घुमाने लगी और अपने दोनों हाथों को ऊपर करके दीदी ने तकिये के कोनों को जोर से पकड़ लिया और उसे मसलने लगी।
ऋषि अपने दोनों हाथ दीदी की गाण्ड के नीचे ले गया और थोड़ा जोर त्रगाकर उसने दीदी के चूतरों को ऊपर उठा दिया। अब दीदी की चूत और भी असानी से उसके मुँह में आ गई, ऋषि ने अपने मुँह में ढेर सारा थूक भरकर रश्मि दीदी की चूत में उड़ेल दिया जिससे उनकी चूत और भी चिकनी हो गई।
अब वो दीदी की चिकनी चूत की फांकों पर अपनी जीभ रगड़ने लगा और चूत के अंदर के गुलाबी भाग को अपनी जीभ से सहलाने लगा।
रश्मि दीदी मारे उत्तेजना के पागल हो गई और अपनी चूत जोर-जोर से हिलाने लगी। अब ऋषि के लिये उसकी चूत में मुँह लगाये रखना कठिन हो रहा था तो उसने और भी ताकत से अपना मुँह दीदी की चूत में लगा दिया और अपनी जीभ दीदी की जवान चूत के छेद में डालकर अंदर-बाहर करने लगा।
इस तरह जीभ के अंदर-बाहर होने से दीदी थरथराने लगी और वो बुरी तरह से उत्तेजित हो गई। वो आँखें बंद किये अपना सिर तेजी से इधर-उधर पटकने लगी। दीदी की बदहवासी ने ऋषि को और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया। अब वो और भी अधिक जोश से दीदी की बुर को चूसने त्रगा।
चूत के इस बुरी तरह से चूसे जाने के कारण रश्मि दीदी का खुद से नियंत्रण पूरी तरह से खतम हो गया था, और उनकी चूत से उत्तेजना के मारे चिकना पानी निकलने लगा और दीदी झड़ गई। दीदी के बुर के मादक पानी ने ऋषि की उत्तेजना को और भी अधिक बढ़ा दिया। उसके लिये अब अपना लण्ड रश्मि की चूत से बाहर रखना संभव नहीं था।
उसका लण्ड अब बुरी तरह से झटके मार रहा था और बुरी तरह से दुखने भी लगा था। ऋषि दीदी की जवान बुर के रस का अभी और मजा लेना चाहता था और उसका मन अभी उनकी चूत चूसने से भरा नहीं था। वो दीदी की चूत और भी कुछ देर तक चूसना चाहता था। लेकिन वो भी अपने लण्ड की बगावत के आगे मजबूर हो गया और ना चाहते हुए भी ऋषि ने अपना मुँह दीदी की रसीली चूत से अबग कर दिया।
अब ऋषि पलंग पर चढ़ गया और लाल सुर्ख आँखों से अपने सामने नंगी पड़ी अपने दोस्त की बहन के जिश्म को कामुक निगाहों से देखने लगा। उसके देखने का अंदाज ऐसा था मानो वो अपनी नजरों से ही उसे चोद देना चाहता हो।
दीदी के संपूर्ण शरीर पर भरपूर निगाह डालने के बाद उसकी निगाहें अब उनकी उभरी हुई चूत पर जा टिकी। बिना बालों वाली दीदी की चिकनी सलोनी चूत जिसे अभी कुछ ही क्षणों पहले ऋषि ने चूस-चूसकर मेरी बहन की जवानी का रस पिया था, चूसे जाने के कारण फूलकर बाहर की तरफ उभर आई थी और उसकी दरार साफ दिख रही थी। रश्मि दीदी की चूत अभी भी गीली थी और उनके मन की कामवासना चिकने पानी के रूप में उसकी चूत से बाहर आ रही थी।
ऋषि ने जैसे ही चूत चूसना बंद किया दीदी को अपनी चूत में एक अजीब सा खालीपन महसूस होने लगा। उन्हें महसूस होने लगा कि मेरी चूत में कुछ होना चाहिये, जो इस वक्त नहीं है। चूत के इस खालीपन को भरने के लिये दीदी की चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी और उसकी वजह से दीदी की चूत अपने आप झटके मारने लगी। रश्मि दीदी ने आँखें खोलकर ऋषि की तरफ देखा तो उसे अपनी चूत को घूरते हुए पाया, ऋषि को इस तरह अपनी चूत को घूरते और अपनी चूत के लगातार झटके मारने के कारण वो शर्मा गई।
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