बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 3
(Family Sex Stories) 130
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रश्मि दीदी के बारे में मेरा नजरिया और गंदा होता जा रहा था। मुझको अब लगने लगा था की दीदी अपनी मदमस्त जवानी लुटाने को बेताब हैं। और इसी दौरान एक दिन दीदी ने मुझसे कहा की उनहें कालेज से एक असाइनमेंट मिला है, जिसमें उनहें झोपड़-पट्टी वाले इलाके का एक सर्वे करना है, और उनहें साफ सफाई के बारे
में जागरूक करना है। उनकी पार्टनर शहर के दूसरे हिस्से के 50 घरों में जाएगी और हमारे घर के पास वाले इलाके में दीदी को 50 घरों में जाना था। दीदी ने कहा तुम मेरे साथ चलना।
अगली सुबह 9:00 बजे मैं और दीदी सर्वे के लिए निकल पड़े। दीदी ने उस दिन ब्लैक रंग का सूट पहना था और जुड़ा बाँधा हुआ था। काले रंग के कपड़ों में दीदी का गोरा बदन कयामत बरपा रहा था। थोड़ी ही देर में हम स्लम एरिया में पहुंच गए। हर तरफ गंदगी फैली हुई थी। गंदी नालियां, टूटी सड़कें, हवा में बदबू , ज्यादातर घर
खाली पड़े थे, उनमें रहने वाले लोग अपने-अपने काम पे चले गए थे। सड़क पर जो लोग दिख रहे थे वो दीदी को
भूखी नजरों से देख रहे थे।
एक आदमी जो सड़क के किनारे चरस पी रहा था दीदी को देखकर बोला- “अरे कहां जा रही है मेरी जान। मेरे पास आ जा। बहनचोद रण्डी की क्या गाण्ड है? अरे मस्त कर दूंगा अपने लण्ड से…”
हम उसकी बात को अनसुना करके आगे बढ़ गए। अनपढ़ जाहिल लोगों से वैसे भी हम क्या उम्मीद करते? खैर,
कुछ घरों में औरतें थी, जिससे दीदी ने बात की। कुछ ने हमारी मदद की और कुछ ने नहीं की। ये सब करते-करते दोपहर के दो बज गए, पर अभी भी 50 घर पूरे नहीं हुए।
“दीदी कितना घूमना पड़ेगा। मैं थक गया हूँ…” मैं दीदी से बोला।
“ओह्ह… मोनू मैं भी बहुत परेशान हो गई हूँ। ये लोग तो ठीक से बात ही नहीं करते…”
तभी मैंने जो देखा तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। सामने से वही बैंक वाला गंदा आदमी चला आ रहा था। हमारे पास आकर वो रुक गया, और दीदी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला- “किसी ने सही कहा है,
जब ऊपरवाला देता है तो छप्पर फाड़कर देता है। आज जुए में 10000 रूपए जीता और अब आपसे मुलाकात हो
गई। पहचाना मैडम? कुछ याद आया। आप आज यहा कैसे?”
रश्मि दीदी को तो साप सूंघ गया वो कुछ बोल ही नहीं रही थी। तो मैं बोला- “हम यहा सर्वे करने आये हैं…”
कैसा सर्वे?
जी हम लोगों को साफ सफाई के बारे में बता रहे हैं।
“वाह… बहुत नेक काम है जरा मुझे भी तो कुछ बताइए। आइये मैडम मेरा घर पास ही में है…” वो आदमी मुझे
पूरी तरह अनदेखा कर रहा था और उसने दीदी से धीरे में कुछ कहा।
दीदी ने अपनी नजरें नीची कर ली।
“चलिए न मेरे घर। सामने ही है…” वो फिर बोला।
“न-नहीं, हमारा काम पूरा हो गया अब हमें घर जाना है…” दीदी ने कांपती आवाज में बोला।
पर वो भी बड़ा हरामी आदमी था। वो इतना अच्छा मौका कैसे जाने देता? उसने फौरन दीदी का गोरा हाथ पकड़ लिया और बोला- “अरे ऐसे कैसे? आप तो मेरी मेहमान हैं। मुझे भी सेवा का कुछ मौका दें…” और वो दीदी को सामने वाले घर की तरफ ले जाने लगा।
दीदी तो काठ की गुड़िया की तरह उसके साथ चल दी। मैं चाहता तो उनको रोक सकता था, पर मेरे अनदर का हवस का शैतान मुझे ऐसा करने से रोक रहा था। मैं भी उन दोनों के पीछे उस घर के अनदर आ गया। झोपड़े जैसा घर था। एक कमरा आगे और एक पीछे बना था। एक कोने में शराब की कुछ खाली बोतलें पड़ी थीं।
सामान के नाम पर एक पुरानी चारपाई, एक मेज, एक बड़ा बक्सा आगे वाले कमरे में था। उसने दीदी को चारपाई पर बैठा दिया।
“देखा मैडम हमारा हवा महल हा हा हा…” वो अपनी जेब से एक क्वार्टर निकलकर मेज पर रखता हुआ बोला।
वो आदमी अनदर चला गया और दो मिनट बाद जब वो बाहर आया तो उसके हाथ में एक स्टूल था और सिर्फ
लुंगी में था। वो एकदम दुबला पतला था। उसने बनियान भी नहीं पहनी थी।
“अरे मैडम मुझे भी तो बताइए सफाई के फायदे? देखो मेरा घर कितना गंदा है और मेरे घर में सफाई करने वाली भी कोई नहीं है…” वो दीदी के बिल्कुल पास स्टूल रखकर बैठ गया।
अब दीदी की सांसें कुछ तेज चलने लगीं। दीदी की घबराहट मैंने और उस आदमी ने भी नोट की।
वो फिर बोला- अरे कुछ जवाब नहीं दिया आपने?
दीदी ने कुछ संभलते हुए एक फॉर्म निकल और उससे कहा- पहले ये फॉर्म भर दो।
वो बोला- “मैडम मैं इतना पढ़ा लिखा होता तो मेरी ये हालत होती? मैं बोल देता हूँ आप ही भर दो…”
दीदी ने बैग से पेन निकालते हुए पूछा- तुम्हारा नाम?
“मेरा नाम सलमान है…” ये कहकर उसने अपना उल्टा हाथ दीदी की जांघ पर रख दिया।
दीदी को तो मानो 440 वाल्ट का करेंट लग गया और उनके बदन ने झटका सा लिया। दीदी ने कहा- “हम लेट हो रहे हैं। हम कल आकर आपको बता देंगे…” दीदी ने एक बार फिर से वहां से निकलने की कोशिश की।
“अरे अभी तो दो ही बजे हैं, और बाहर कितनी तेज धूप है। थोड़ी देर में चली जाना मैडम…” सलमान जिसका हाथ अभी भी दीदी की जांघ पर था, उससे दीदी की जांघ सहलाता हुआ बोला।
दीदी ने फॉर्म को सर्वे के रजिस्टर में रखा और बोली- “नहीं हम कल आ जायेंगे…”
“कितनी गमी है। पानी पियोगी मैडम?”
“जी पपला दीजिए…” दीदी ने सोचा वो पानी लेने जायेगा तो हम भाग भी सकते हैं।
पर वो बहुत मंझा खिलाड़ी था। उसने मुझसे कहा- “जा बेटा जरा अनदर से एक गिलास पानी तो ले आ। गिलास अनदर अलमारी में है और पानी मटके में…” ये कहते हुए वो स्टूल से उठकर दीदी के बगल में चारपाई पर आ बैठा। और सीधा दीदी की चूचियों को घूरता हुआ बोला- “तुम्हारा नाम क्या है मैडम?”
“जी मेरा नाम रश्मि है…”
दीदी को देखकर वो बहुत उत्तेजित हो रहा था। मुझे लगा अगर मैं वहां नहीं होता तो वो अब तक दीदी के कपड़े फाड़ चुका होता।
“तुम इतना क्यों डर रही हो रश्मि? फॉर्म तो पूरा भर लो…” वो बोला और मैं मन मारकर पानी लेने अनदर चला गया।
अब सलमान के साथ दीदी अकेले थी। अनदर के कमरे में टीवी वी॰सी॰आर॰ होम थिएटर जैसी चीजें एक कोने में पड़ी थी, जिसको देखकर मुझे लगा या तो सलमान मैकेनिक है या फिर चोर। वरना इसके पास ये सामान कैसे आया? फिर जैसे ही सामने अलमारी से पीतल का गिलास उठाया वैसे ही मेरे कानों में दीदी की हल्की सिसकी सुनाई दी।
“आह्ह… इिह…” ये सिसकारी बहुत धीमी थी पर वो घर इतना छोटा था की मुझे सुनाई दे गई। मैं पानी भरना भूल के दीवार के पास आ गया और कान लगाकर सुनने लगा। कुछ हल्की-हल्की आवाज सुनाई दे रही थी। मैंने ध्यान दिया और सुना।
दीदी- “आह्ह… सलमान प्लीज… अब जाने दो हमें…”
सलमान- “ऐसे कैसे जाने दूं मेरी जान? मुझे तो मेरी किस्मत में यकीन नहीं हो रहा…”
दीदी- “अरे वो मेरा छोटा भाई साथ है। वो क्या सोच रहा होगा? मेरी बड़ी बदनामी होगी। अआह्ह…”
सलमान- “उस दिन बैंक में 100 लोगों के बीच में तेरी बदनामी नहीं हुई थी, और आज तो यहा कोई नहीं है।
साली तेरी शक्ल सोचकर मैंने कितनी रंडीयो को चोदा है, और कितना मुठ मारा है तुझे इस बात का जरा भी इल्म है…”
तभी फिर मुझे दीदी की सिसकारी सुनाई दी- “आह्ह… इमि… आह्ह… वो मेरा भाई तो यहा है अनदर आह्ह…
प्लीज…”
सलमान- “अच्छा अब समझा त अपने भाई से डर रही है? रुक मैं कुछ करता हूँ…”
दीदी कुछ नहीं बोली।
मैं सोच में पड़ गया की क्या वाकई दीदी मेरी वजह से हिचक रही है? अगर मैं न होता तो क्या वो वाकई चुदवा लेती? मैं तुरंत पानी लेकर बाहर आ गया। मुझे देखकर सलमान खड़ा हो गया और मैंने देखा की दीदी का जुड़ा खुल चुका था और वो अपना दुपट्टा सही कर रही थी।
सलमान अपनी लुंगी में खड़े लण्ड को मुझसे छुपाते हुए बोला- “अरे ये पानी तो इस गमी में बिल्कुल बेकार है।
एक काम कर तू जल्दी से दो ठंडे की बोतलें ले आ…” और उसने मुझे 100 रूपये का नोट दे दिया।
मुझे बहुत गुस्सा आया क्योंकि वो तो मुझे एक नौकर की तरह काम करवा रहा था, पर उसका मकसद मैं समझ गया था।
तभी दीदी बोली- “नहीं ये पानी ही ठीक है। इतनी धूप में ये कहां जायेगा…”
मैं समझ गया की वो मुझसे कहना चाहती है की मुझे इस आदमी के साथ अकेले मत छोड़ो।
“अरे जवान लड़का है। कुछ नहीं होता। जा बेटा जल्दी जा। अगर चौराहे वाली दुकान बंद हो तो थोड़ा आगे
पानवाले के पास से ले आ। खूब ठंडी देखकर लाना…” सलमान ने दीदी की बात काटते हुए कहा।
फिर मैं बाहर आ गया और सलमान ने दरवाजा बंद कर दिया। पर मेरे दिमाग में कुछ और चल रहा था। मैं
घूम के साइड में खिड़की के पास आ गया। अनदर क्या हो रहा होगा ये सोचकर मैं पागल हुआ जा रहा था।
खिड़की की लकड़ी कई जगह से चटकी थी। मैंने एक दरार में अपनी आँख लगाकर अनदर देखा।
सलमान ने रश्मि दीदी को अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था और उसका हाथ दीदी की कमर और चूतड़ को सहला रहा था।
“अब तो शर्म छोड़ दो रश्मि। अब तो तेरा भाई भी चला गया मेरी जान…” सलमान दीदी की गाण्ड को दबाते हुए बोला।
“प्लीज… सलमान मुझे घर जाने दो प्लीज…” दीदी सलमान का हाथ अपनी गाण्ड से हटाती हुई बोली।
“तूने उस दिन बैंक में भी मेरे साथ के॰एल॰पी॰डी॰ कर दी थी। आज तो जाने नहीं दूंगा मेरी जान। आज तो तुझे जवानी का पूरा मजा दूंगा…” सलमान दीदी के बालों में अपना मुँह डालते हुए बोला। दीदी के बालों की खुशबू से उसका लण्ड और ज्यादा तन गया। अब सलमान दीदी के बालों को अपने लण्ड से रगड़ने लगा।
दीदी के बाल खीचने लगे तो दीदी कराहते हुए बोली- “आह्ह… दर्द होता है…”
मुझे ये जानकर अच्छा लगा की उस दिन बैंक में उसने दीदी को चोदा नहीं था।
सलमान का हवस का नशा अब बढ़ता जा रहा था, और वो दीदी की जांघों को सहलाने लगा। दीदी भी थोड़ा बहकने लगी।
अब वो सलमान को रोक नहीं रही थी।
“तेरी उम्र क्या है छमिया?” सलमान ने पूछा।
“जी 19 साल…” दीदी कांपती आवाज में बोली।
“पहले कभी लण्ड खाया है?” सलमान दीदी की गर्दन को अपनी खुरदुरी जीभ से चाटता हुआ बोला।
दीदी के बदन ने फिर से एक झटका खाया।
सलमान- “बोल साली, चुदी है किसी से पहले? बोल कुटिया…”
दीदी- “आह्ह… नही, मैं कुूँवारी हूँ अआह्ह…”
सलमान की आँखों में एक चमक आ गई जैसे उसे कुबेर का खजाना मिल गया हो। उसने जल्दी से दीदी को चारपाई पर पटका और अपनी लुंगी खोलकर पूरा नंगा हो गया। उसका लण्ड झटके ले रहा था। मेरा तो हलक सुख गया था, पता नहीं दीदी की क्या हालत हुई होगी?
“हाथ में ले इसे…” सलमान ने दीदी का हाथ पकड़कर उसने अपने लण्ड पर रख हदया।
दीदी ने धीरे से उसका लण्ड दबा दिया।
दीदी के नरम हाथों का स्पर्श पाकर लण्ड ने फिर से जोर का झटका खाया और इस बार सिसकी सलमान के मुूँह से निकली।- “आह्ह… साली क्या नरम हाथ है रंडी तेरे आह्ह…”
अपनी बड़ी बहन को सलमान का लण्ड इस तरह से हिलाते देखकर मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैंने भी अपना
लण्ड बाहर निकाल लिया ।
“चल जल्दी से नंगी हो जा मेरी जान। जन्नत की सैर करने के लिए…”
दीदी की आँखों में एक नशा था वो बिना पलक झपकाए सलमान का लण्ड देखे जा रही थी। दीदी ने इतने पास से पहली बार लण्ड देखा होगा शायद।
सलमान ने दीदी को खाट पर लेता दिया और उनके पैजामे का नाड़ा खोलने लगा। जैसे ही नाड़ा खुला और वो पैजामा नीचे खींचने लगा।
तभी दीदी ने उसे एक जोर का धक्का दिया और वो जल्दी से खड़ी हो गई और अपने उतरते हुए पैजामे को दोनों हाथों से पकड़ लिया। और जोर से चिल्लाई- “नहीं, मैं ये नहीं करने दूँगी। जाने दो मुझे…”
सलमान की आँखें हवस के नशे से लाल हो गई थी। वो बोला- “साली ये तेरी पुरानी आदत है अभी तो मजे ले रही थी और एन मौके पे बदल गई। उस दिन तूने बैंक में भी यही किया था। पर वहां तो बहुत लोग थे इसीलिए तुझे छोड़ दिया था। पर आज तू नहीं बचेगी। तूने क्या सोचा के मैं तेरे जैसा कोरा जवान माल बिना चोदे जाने दूंगा?”
दीदी की ऐसी हालत देखकर मैंने सोचा की आजकल लड़की का दीदी की तरह खूबसूरत होना एक गुनाह है। अब दीदी सलमान से काफी डर गई थी और वो धीरे-धीरे पीछे होने लगी।
पर सलमान ने आगे बढ़कर उनहें पकड़ लिया। उसने दीदी को दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया और एक हाथ से दीदी की चूची को दबाने लगा और दूसरे हाथ से दीदी का पैजामा नीचे करने की कोशिश करने लगा। हवस का ये नंगा नाच देखकर मेरा हाथ अपने लण्ड पर फिर से पहुंच गया।
“बेहेनचोद… क्या मुलायम चूचियां है तेरी रानी। आज तक मैंने इतनी चूचियां दबाई हैं, लेकिन तेरी जैसी चूची नहीं देखी, जो कड़क भी है और मुलायम भी…” सलमान दीदी की चूची दबाता हुआ बोला।
दीदी अपने को बचाने के लिए दीवार की तरफ घूम गई। अब दीदी की पीठ सलमान की तरफ थी।
“मुझे छटपटाती लौंडिया बहुत पसंद है साली कुटिया… आज तो तेरी सी चूत को चोद-चोदकर भोसड़ा न बनाया तो मेरा नाम नहीं…” सलमान दीदी को अपनी गिरफ्त में लेता हुआ बड़बड़ाया।
मुझे दीदी पर दया आने लगी और मैंने सोचा की अनदर जाकर दीदी को बचाओ पर मेरी वासना मुझे रोक रही थी। मुझे लग रहा था की मुझे दीदी को पूरी नंगी देखने का मौका मिलने वाला है।
तभी सलमान ने एक झटके में दीदी के पैजामे को अपने अनुभवी हाथों से सरका कर नीचे कर दिया। फफर वो घुटनों पर बैठ गया और उसने दीदी का कुरता ऊपर उठा दिया। दीदी ने ग्रीन रंग की पैंटी पहनी थी जिसे वो चूमने लगा और दीदी के चूतड़ों को दबाने लगा फिर उसने दीदी की पैंटी को भी सरका कर नीचे कर दिया।
अब दीदी के चूतड़ पूरे नंगे हो चुके थे। एकदम सफेद… एक भी दाग नहीं, जैसे ब्लू फिल्म वाली लड़कियों के होते हैं, एकदम गोल और सुडौल। उभरे बाहर की तरफ निकलते हुए दीदी के चूतड़ देखकर मेरी तो जैसे सांस ही रुक गई। दीदी की चूत तो मुझे नहीं दिख रही थी, पर फिर भी मुझे लगा मैंने जन्नत देख ली है।
सलमान ने बिना वक्त खराब किए अपना मुंह दीदी के चूतड़ों में घुसा दिया और उनहें चाटने लगा। जैसे ही उसकी खुरदुरी जीभ दीदी की गाण्ड के छेद पर पहुंची दीदी के मुंह से एक सिसकारी निकल गई- “अह्ह… आह्ह… इस्स… मा अह्ह…” दीदी के लिए ये नया अनुभव रहा होगा।
सलमान की जीभ दीदी के पिछवाड़े की दरार से होकर उनकी चूत तक जा रही थी और दीदी मदहोश होकर
अपने चूतड़ पीछे की तरफ धकेल रही थी। दीदी की कुंवारी गाण्ड और चूत चाट-चाटकर सलमान खुशी से भर
गया। दीदी अब फिर से उसके काबु में थी। अब उसने अपना तना हुआ 6” इंच का लौड़ा दीदी को झुका के उनकी
चूत के मुंह पे रखा।
मैंने सोचा अब तो मैं भी दीदी को चुदने से नहीं बचा सकता। और मैं अपना लौड़ा जोर से हिलाने लगा फच-फच करते हुए मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया। ऐसा ऑर्गेज्म मुझे कभी नहीं हुआ था मेरी आँखें बंद हो गई और मेरी टांगें कांपने लगी थीं।
तभी अचानक फटाक की आवाज हुई और मैं फिर से अनदर झाकने लगा। मैंने देखा की सलमान जमीन पर पड़ा था और दीदी के हाथ में एक टूटी हुई बोतल थी जो शायद दीदी ने सलमान के सिर पर फोड़ दी थी। दीदी फटाफट अपनी पैंटी और पैजामा पहनने लगी। सलमान बिल्कुल हिल नहीं रहा था। अब मैं भी घबरा गया था और मैं भी घर के दरवाजे की तरफ भगा।
जैसे ही मैं वहां पंहुचा दीदी दरवाजा खोलकर बाहर आ गई और बोली- “मोनू चल यहाूँ से। इसका सर्वे पूरा हो गया…”
“अरे रश्मि तुम्हारा दिन कैसा रहा आज?” पापा ने खाना खाते हुए दीदी से पूछा। हम सब डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।
“जी ठीक था…” दीदी ने जवाब दिया।
“तुम कुछ परेशान लग रही हो…” मम्मी ने पूछा और तुम्हारी गर्दन पर ये निशान कैसा है?
दीदी तो मनो सुनन पड़ गई, कहा- “जी वो लगता है किसी कीड़े ने काट लिया। जहां हम आज गए थे काफी
गंदगी है वहां…” दीदी बात बनाते हुए बोली।
“भाई सुना है की मोनू ने आज बड़ी मदद की अपनी बड़ी बहन की…” पापा मुमकुराते हुए बोले।
मैंने मन में सोचा- “हा बहुत मदद की मैंने। उस शराबी को अपनी जवान बहन थाली में परोस कर दे दी।
बलात्कार होते होते बचा था आज दीदी का…”
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