बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 6
(Family Sex Stories) 18
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सुबह जब मैं उठा तो मैंने सोचा की मैं एक बार ऋषि को समझाने की कोशिश करके देखता हूँ। करीब 9:00 बजे मैंने ऋषि का नंबर डायल किया। दो बार बेल बजी और रिक्की ने फोन उठाया।
“हेलो ऋषि है। मैं मोनू बोल रहा हूँ…” मैंने पूछा।
“एक मिनट होल्ड करना…” रिक्की बोली।
एक मिनट बाद ऋषि ने फोन उठाया औरबिना कुछ सुने ही बोला- “मैं 10:00 बजे तक आ जाऊँगा…”
“अरे सुनो तो जल्दी मत करो…” मैंने बोला पर मेरी बात सुनने से पहले ही उसने फोन काट दिया था। उसको लगा होगा की घर पर दीदी अकेली हैं, इसीलिए मैंने फोन किया है। मैंने फिर से फोन लगाया।
फिर रिक्की ने उठाया और कहा- “भैया तो आपसे बात करके बाहर निकल गए…”
अब मैं परेशान हो गया।
तब तक दीदी की आवाज आई- “किससे बात कर रहा था। कहीं जा रहा है क्या?”
अब मैं उनहें क्या बताता? कहा- “दीदी वो ऋषि आने के लिए बोल रहा था। उसकी एक बुक मेरे पास आ है वो ही लेने आ रहा है…” मैं बात संभालता हुआ बोला।
“मोनू मैंने पहले भी तुमसे कहा है वो लड़का ठीक नहीं है फिर तु ने उसे घर क्यों बुलाया?” दीदी बोली।
“नहीं नहीं दीदी ऋषि दिल का अच्छा लड़का है। बस पढ़ाई में थोड़ा कमजोर होने की वजह से एक दो बार फेल हो गया, वरना ऐसी उसमें कोई खराब बात नहीं है…” मैंने जवाब दिया।
“कुछ भी हो उसको जल्दी से चलता कर देना…” बोलकर दीदी किचेन में चली गई।
इधर दीदी को ऋषि में कोई इंटरेस्ट नहीं है और उधर वो ऐसे आ रहा है जैसे की दीदी टांगें फैलाये चूत पसारे उसके लण्ड का इंतजार कर रही है। मुझे अब उसके ऊपर गुस्सा भी आ रहा था की बिना मेरी बात सुने वो मेरे घर आने के लिए निकल पड़ा। पता नहीं आगे क्या होगा?
तब तक दीदी ने नास्ता लगा दिया था तो हम नास्ता करने लगे। फिर दीदी टीवी देखने लगी और मैं ऊपर रूम में आ गया।
घड़ी में 10 बजने में 10 मिनट बाकी थे। जैसे-जैसे टाइम बीत रहा था मेरा गुस्सा नर्वसनेस में बदलने लगा। मेरे पसीने छूटने लगे और दिल जोर से धड़कने लगा। तभी अचानक दरवाजा की बेल बजी। मैं फौरन नीचे आने के लिए सीढ़ियो पर आया तो मैंने नीचे देखा की दीदी ने दरवाजा खोल दिया है और ऋषि घर के अनदर आ चुका है।
दीदी अभी भी अपनी नाईट ड्रेस में थी, यानी लूस टी-शर्ट और लोअर। ब्रा उनहोंने पहनी नहीं थी तो टी-शर्ट में उनके निप्पल भी नजर आ रहे थे।
“नमस्ते दीदी, मोनू कहां है?” ऋषि दीदी की चुचियों को घूरता हुआ बोला।
“नमस्ते…” दीदी उसे अपनी चुचियों को घूरता देखकर सकपका गई- “इधर से ऊपर चले जाओ। मोनू ऊपर कमरे में है…” दीदी ने जवाब दिया।
दीदी की बात सुनकर ऋषि के चेहरे के भाव बदल गए और वो ऊपर आ गया।
तभी दीदी नीचे से चिल्लाई- “मोनू तुम्हारा दोस्त आ गया है, वो ऊपर आ रहा है, और मैं नहाने जा रही हूँ…”
“ऋषि ऊपर आकर बोला, क्यों बहनचोद बोला था न की जब रश्मि अकेली हो तब बुलाना तो तु यहाँ क्या कर रहा है? तुझे बोला था न की मैं 10:00 बजे तक आऊँगा उससे पहले ही तुझे दफा हो जाना चाहिए था…”
मैंने कहा- “भाई वो दीदी ने फोन पर सुन लिया था की तुम यहाँ आने वाले हो। इसीलिए मैं रुक गया, वरना उनहें क्या बोलता की तुम्हें बुलाकर मैं कहाँ जा रहा हूँ?”
“तो तु ने उसे बता दिया की मैं उसे चोदने आ रहा हूँ?” ऋषि मुमकुराते हुए बोला।
“कैसी बात करते हो भाई। मैंने उनसे कहा की तुम्हारी एक बुक मेरे पास है वो ही लेने आ रहे हो…” मैंने जवाब दिया।
ऋषि – “अब एक काम कर। ये ब्लू – फिल्म की सी॰डी॰ ले कंप्यूटर में लगा और दफा हो जा और सुन दो बजे से पहले मत लौटना…”
“पर भाई। दीदी को तुममें कोई इंटरेस्ट नहीं है…” मैंने सी॰डी॰ लेते हुए कहा।
“चुप गांडू । जल्दी कर वरना ऐसी गाण्ड मारूंगा की याद करेगा…” ऋषि ने मेरा गिरेबान पकड़ते हुए कहा।
मैंने चुपचाप ब्लू – फिल्म लगा दी। और नीचे चला आया।
ऋषि भी मेरे पीछे-पीछे आ गया और बोला- “चल निकल जल्दी…”
“पर दीदी को तो बोल दूँ?” मैंने कहा।
“मैं तेरी करतूत न उनसे बोल दूँ?” और ऋषि ने मुझे धक्के देकर घर से निकाल दिया और अनदर से दरवाजा बंद कर लिया ।
मेरा दिमाग़ घुम गया। और मैं वही दरवाजे के पास बैठ गया। मेरी समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करूं? ऋषि 4 घंटे दीदी के साथ क्या करना चाहता है जो मुझे दो बजे तक ना आने के लिए कह रहा था। करीब 20-25 मिनट ऐसे ही निकल गए।
तभी मुझे एक आईडिया आया और मैं घर के पीछे चला गया, जहां एक आम का पेड़ था। मैं उस पेड़ पर चढ़ गया और अपने कमरे की खिड़की पर आ गया। कमरे में ऋषि नहीं था। कंप्यूटर भी बंद था। मैं धीरे से कमरे के अनदर आ गया और नीचे झाकने लगा। ऋषि ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था। दीदी कहीं नहीं दिख रही थी। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और ऋषि बाथरूम की तरफ आ गया।
दीदी नहाकर निकल आई थी। उनहोंने बादामी रंग की स्कर्ट और ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहनी थी। उनके बालों से पानी टपक कर उनकी टी-शर्ट और स्कर्ट को भिगो रहा था। वो ऋषि को अचानक वहां देखकर चौक गई
“अरे तुम… मोनू कहां है?” दीदी ने पूछा।
ऋषि – “जी जो बुक मैं लेने आया था वो उसने गलती से एक दूसरे लड़के को दे दी। वो मुझे इंतेजार करने को बोलकर वो ही लेने गया है। आप नहा रही थी इसीलिए आपको नहीं बोला…”
रश्मि- “तो तुम भी उसके साथ चले जाते। बुक उसी लड़के के घर से ले लेते…”
ऋषि – “आप सही कह रही है। ये बात तो मेरे दिमाग़ में आई ही नहीं। पर अब तो मोनू चला गया और मैं उस लड़के का घर नहीं जानता। तो आप कहें तो मैं यहीं इंतेजार कर लूँ?”
रश्मि- हाँ ठीक है।
“आप कुछ नाराज सी लग रही है। शायद आपको मेरा आपके घर आना अच्छा नहीं लगा…” ऋषि दीदी के मासूम चेहरे को घूरता हुआ बोला।
रश्मि- “नहीं नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं। आओ बैठकर बात करते हैं…” और दीदी जाकर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ गई। ऋषि भी उनकी साइड में जाकर बैठ गया। अब वो दोनों टीवी देखते हुए कुछ बात करने लगे। दीदी बीच-बीच में उसकी बातों पर हँस भी देती थी।
दीदी की नजर टीवी पर थी और ऋषि दीदी की चुचियों को घूर रहा था। और बीच-बीच में अपना लण्ड पैंट के ऊपर से खुजा भी देता था। इसी बीच दीदी की नजर भी एक बार उसके पैंट में बने टेंट पर पड़ी। फिर उनहोंने अपनी नजर टीवी में गड़ा ली पर शायद ऋषि के लम्बे लण्ड से निकलती गर्मी अब दीदी का जवान बदन भी महसूस कर रहा था। इसीलिए उनहोंने पलटकर फिर उसके खड़े लण्ड के तरफ देखा। किसी ने सच ही कहा है की मोटा और लम्बा लण्ड हर उम्र की औरत को दीवाना बना देता है।
दीदी को अपने पैंट में बने तम्ब की तरफ ताकते देखकर ऋषि का जोश दोगुना हो गया। अब वो दीदी की तरफ देखकर धीरे – धीरे उपने लण्ड को सहलाने लगा।
दीदी ने फिर से निगाहें फेर ली। ऋषि फिर कुछ बोला और सरक कर एकदम दीदी के पास आ गया। दीदी के चेहरे पर फिर से लाली छाने लगी और उनकी तनी चूचियां टी-शर्ट में ऊपर-नीचे होने लगी। फिर ऋषि कुछ बोला और दीदी फिर से हँस पड़ी।
कमाल था की एक घंटे पहले दीदी ऋषि को खराब लड़का बता रही थी और अब हँस-हँसकर उसके साथ बात कर रही है। क्या ऋषि का प्लान कामयाब हो जायेगा? मैंने सोचा। मैंने मन ही मन ऋषि की दाद दी की क्योंकी मुझे लगा की इतनी जल्दी उसने दीदी को अपने जाल में फूँसा लिया । पर मुझे ऊपर उन दोनों की बातें सुनाई नहीं दे
रही थीं, तो मैं धीरे से नीचे उतरकर ड्राइंग रूम के बगल वाले कमरे में छीप गया, वहां से वो मुझे दिखाई तो नहीं दे रहे थे, पर उनकी बात मैं सुन पा रहा था।
ऋषि – सही कहा तुमने। उम्र तो हमारी बराबर ही है पर मोनू दीदी कहता है इसीलिए मैं भी कहता था पर अब से नाम से ही बुलाऊँगा तुम्हें।
रश्मि- बातें बहुत बनाते हो तुम।
ऋषि – रश्मि एक बात कहूँ, तुम्हारे बाल बहुत खूबसूरत हैं बिल्कुल तुम्हारी तरह।
रश्मि- अच्छा जी… लगता है तुम्हें लड़कियों के बालों में बहुत इंटरेस्ट है।
ऋषि – अरे मुझे तो बहुत चीजों में इंटरेस्ट है पर अगर बालों की बात हो तो सिर्फ तुम्हारे। किसी और लड़की के नहीं।
रश्मि- तो किस-किस चीज में इंटरेस्ट है बताओ?
ऋषि – “तुम्हारे बाल, तुम्हारी आूँखें, तुम्हारे ये सेक्सी होंठ…”
ऋषि की आवाज सुनकर लगा जैसे वो नशे में हो पर वो दीदी को नाम से बुला रहा था और उसने उनके होंठों को सेक्सी भी बोला पर दीदी ने उसे कुछ नहीं कहा। मैं सोच में पड़ गया।
तभी दीदी की आवाज आई- “आह्ह… ओह्ह… ऋषि मेरे बाल छोड़ो…”
“क्यों मेरे हाथों में इनकी खूबसूरती कम तो नहीं हो जाएगी…” तभी उसके सांस खींचने की आवाज आई। शायद वो दीदी के बाल सूँघ रहा था- “क्या खुश्बू है?” उसने कहा।
रश्मि- अरे छोड़ो भी। तुम कुछ ज्यादा ही कर रहे हो।
ऋषि – लो छोड़ दिए, अच्छा एक बात पूछूँ? अगर तुम बुरा न मानो तो?
रश्मि- ऐसा क्या पूछना है?
ऋषि – साइज क्या है तेरे कबूतरों का?
रश्मि- क्या? कबूतर क्या?
अब ऋषि तु तेरे पर आ गया था पर शायद दीदी ने ध्यान नहीं दिया- “अरे तेरी चुचियों का साइज?” ऋषि बोला। मुझे तो अपने कानों पर पवमवास ही नहीं हुआ की वो दीदी से ऐसे बोल रहा था।
“पागल हो गए हो क्या? लिमिट में रहो। तुमने दोस्ती के लिए बोला था इसीलिए तुमसे इतनी देर से बात कर रही थी वरना…” दीदी गुस्से से चीखी।
“अरे ज्यादा नाटक मत कर। मुझे पता है तेरा बदन चुदाई मांग रहा है…” ऋषि भी थोड़ा कड़क हुआ।
“बकवास बंद करो…” दीदी चीखी तभी कुछ गुथम-गुथ्थ हुई और दीदी की सिसकारी मेरे कानों में पड़ी- “आह्ह… ओह्ह… छोड़ो मुझे। निकल जाओ मेरे घर से…”
मै ये देखने के लिए की क्या हो रहा है धीरे से बाहर आकर किचेन में घुस गया। मैंने देखा की दीदी सोफे के साइड में खड़ी है और ऋषि से अपनी टी-शर्ट का कोना छुड़ाने की कोशिश कर रही है। उनके लम्बे बाल बिखरे हुए हैं। दीदी थोड़ा डरी हुई सी लग रही थी।
तभी ऋषि ने दीदी को अपनी बाँहों में भर लिया और उनके होंठों को चूसने लगा। दीदी अपने आपको छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी पर ऋषि के कसरती बदन के आगे उनकी एक न चली। वो दीदी के होंठ ऐसे चुस रहा था की जैसे खा ही जायेगा। अचानक उसने दीदी की चूचियां भी दबानी शुरू कर दी।
दीदी के घुटी हुई कराह से पता चल रहा था की ऋषि के पत्थर जैसे हाथ दीदी की मुलायम चुचियों का बुरा हाल कर रहे थे। तभी दीदी ने ऋषि को धक्का दिया और भागकर नीचे के बेडरूम में चली गई।
ऋषि ने अपनी टी-शर्ट उतरकर सोफे पर फेंक दी और उनके पीछे चला गया।
उत्तेजना से मेरा हाल बुरा था पर ऋषि का ये रवैय्या देखकर मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था।
अनदर से फिर दीदी की सिसकारी आई- “आह्ह… आह्ह… ऋषि प्लीज… इतनी जोर से मत दबाओ आह्ह… माँ उह्ह… मम्मी…” दीदी की रोती सी आवाज आई।
मैं धीरे से बेडरूम की तरफ बढ़ा। मैंने देखा की बेडरूम के दरवाजे पर दीदी की टी-शर्ट पड़ी हुई थी। फिर दरवाजे के किनारे से मैंने अनदर देखा। ऋषि ने दीदी को पीछे से पकड़ा हुआ है और दीदी की स्कर्ट उनके पैरों में फसी हुई है और पैंटी उनके पैरों में फूँसी है।
ऋषि की जीनस और अंडरवियर बेड पर पड़ी थी। ऋषि ने अपना लण्ड पीछे से दीदी की चूत पर लगाया हुआ था और वो उनकी चूचियां दबाता हुआ उनहें गर्दन पर चुम रहा था।
मुझे लगा की अब रश्मि दीदी भी गरम हो गई है और ज्यादा विरोध करने की स्थिति में नहीं है।
शायद ऋषि भी ये बात समझ गया था। अब ऋषि उनकी पीठ से अपना हाथ घुमाते हुए उसके सिर पर ले गया और उसके बालों से खेलने लगा। ऋषि रश्मि दीदी के सिर पर हाथ फेर कर प्यार करने के साथ ही साथ ये भी जता रहा था कि अब वो ही दीदी के खूबसूरत नंगे जिस्म का मालिक है।
ऋषि ने दीदी को धीरे से घुमाया और अपना होंठ दीदी के गालों पर लेजाकर चुमने लगा। दीदी ने अपना मुंह शर्म से नीचे कर लिया । लेकिन ऋषि ने ठोड़ी को पकड़कर उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनके होठों से अपना होंठ लगा दिया, और उनके मीठे-मीठे, नरम और रसीले होठों को फिर से चुसना शुरू कर दिया।
दीदी भी धीरे – धीरे वासना के नशे में डूबती जा रही थी। शायद दीदी का मन कह रहा था कि डूबजा इस नशे में लेकिन दिमाग़ इनकार कर रहा था। लेकिन ऐसा लग रहा था कि दीदी का मन जीत रहा था और दिमाग़ हार रहा था। इसीलिए अब दीदी की तरफ से कोई विरोध दिखने में नहीं आ रहा था।
लगभग 3-4 मिनट तक दीदी के होठ चूसने के बाद ऋषि दीदी को बेड पर ले गया और अपनी गोद में बिठा लिया । फिर उसने अपना दांया पांव ऊपर उठा लिया और उसका तकिया बनाकर रश्मि दीदी का सिर उसमें रख दिया।
अब दीदी का सिर पीछे की तरफ लटक गया और उनके दोनों विशाल चूचे आगे की ओर उभर आये। ऋषि हौले-हौले दीदी की चुचियों को मसलना चालू कर देता है। रश्मि दीदी के मुंह से एक हल्की सी आवाज निकलती है आआह्ह… ऋषि उनकी चुचियों को मसलना जारी रखता है। चुचियों को मसलते हुए वो अब दीदी के निप्पलों को भी मसलने लगता है। निप्पल मसलने से एकदम कड़क हो जाती है।
मैं जानता था की ऋषि अब समझ चुका है कि ये गदराई हसीना भी अब जवानी के मजे लूटने के लिए तैयार है। अनजाने ही सही या अनचाहे ही सही, लेकिन स्त्री और पुरुष के शरीर के मिलने पर काम का सुख तो दोनों को ही मिलता है। रश्मि दीदी के साथ भी यही हो रहा था।
ऋषि जो बुरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और उसने दीदी की चुचियों को मसलना छोड़कर अब उसके निप्पल पर अपना मुंह लगा दिया। अब दीदी की एक चूची और उसकी निप्पल ऋषि के मुंह में था और वो उसे जोर-जोर से चुस रहा था और दूसरा हाथ उनकी दूसरी चूची को बुरी तरह से मसल रहे थे। ऋषि पागलों की तरह उसे चुस रहा था और इधर रश्मि दीदी की सांसें तेज होती जा रही थी। रश्मि दीदी ने अपने दोनों पैर जमीन पर फैला दिए और उत्तेजना के मारे वो उसे इधर-उधर फेंकने लगी।
अब दीदी का खुद से कंट्रोल खतम हो रहा था और उनके मुंह से आवाज निकलने लगी थी- “आह्ह… आह्ह… अह्ह… आह्ह… उई माँ ओफ्फ… ओफ्फ आह्ह…”
अब ऋषि ने उनकी चुचियों को मसलना बंद किया और उसने अपना बांया हाथ दीदी के शरीर पर घुमाते हुए उनकी चूत पर रख दिया और छेद तलाशने लगा। कुछ ही पलों में ऋषि ने अपनी उंगली दीदी की चूत के छेद पर रख दी और उसे मसलने लगा। रश्मि दीदी को मानो करेंट लग गया और वो बुरी तरह से छटपटाने लगी। महीनों से उनके अंदर दबी पड़ी कामवासना अब जागने लगी थी।
थोड़ी देर उनकी चूत मसलने के बाद ऋषि अपना मुंह दीदी के कान के पास ले गया और धीरे से उनके कान में कहा- “तेरे इसी छेद में मैं अभी अपना लण्ड डालूँगा और जीवन भर इसको अपना बनाकर रखूँगा। मैं पिछले कई महीनों से तरस रहा था रश्मि तेरी इस चूत को पाने के लिए । आअह्ह्ह… कितनी नरम है रानी तेरी ये चूत, मैं
तो धन्य हो गया रश्मि तुझे पाकर। कितनी खूबसूरत लगती है नंगी होकर तु रश्मि? आअह्ह्ह… कैसा गदराया बदन है तेरा मेरी जान। आअह्ह्ह… ला अब तेरी इस रसीली चूत को चुम लूँ…” फिर ऋषि दीदी की चूत चाटने लगा। थोड़ी देर चूत चाटने के बाद ऋषि ने दीदी को सीधे बेड पर सलटाकर उनकी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया।
अब दीदी की बिना बालों वाली चूत उभरकर ऊपर आ गई। ऋषि ने दीदी की टांगें उठाकर अपने कंधे पर रख ली और अपना लण्ड दीदी की चूत पर सेट किया और एक झटका मारा। ऋषि का आधा लण्ड दीदी की चूत का फांक चीरता हुआ अनदर घुस गया। ये देखकर मेरे दिल में एक अजीब सी फीलिंग हुई।
दीदी के मुंह से सिसकारी निकलती है- “उफ्फ… आऽ उफ्फ्फ… मर गई…”
ऋषि ने अपने होंठ दीदी के होंठों पर रख दिए और एक धक्का और दिया। उसका लण्ड अब जड़ तक दीदी की चूत में पैवस्त हो गया था। दीदी की आँखों से आंस निकल आये। मैंने सुना था की पहली बार चुदने पर लड़कियों को दर्द होता है। आज देख भी लिया ।
वैसे भी ऋषि का लण्ड 7½” इंच का 3” इंचुमोटा था वो तो चुदी चुदाई औरत के आंस निकलवाने के लिए काफी था। अब ऋषि लय से दीदी को चोद रहा था। थप-थप की आवाजें कमरे में गूँजने लगी है। दीदी के मुंह से ‘उफ्फ आह्ह… अओच…’ आवाजें आ रही थी जो मुझे बहुत सेक्सी लग रही थीं।
ऋषि का बिना बालों वाला लण्ड दीदी के चूत से ऐसे अनदर-बाहर हो रहा था जैसे पिस्टन इंजन से अनदर-बाहर होता है। ये नजारा देखकर मेरे को याद आया की मेरी जिस बहन को उस दिन सलमान इतना करीब पहुँचकर भी न चोद पाया था ,उसे आज मेरे दोस्त ऋषि ने चोद दिया।
करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद ऋषि रश्मि दीदी की चूत में ही झड़ गया। पक्क की आवाज के साथ उसका मुरझाया हुआ लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकल आया और वो दीदी के बगल में लेट गया। दीदी की आँख से आंस और चूत से ऋषि का सफेद गाढ़ा वीर्य बहकर बाहर आ रहा था।
ये नजारा देखकर मेरे लण्ड ने पैंट में ही पानी छोड़ दिया। मेरे पैर कांपने लगे और मैं सोफे पर जाकर बैठ गया। झड़ने के साथ ही मेरी वासना भी खतम हो गई और मुझे एहसास हुआ की क्या हो गया है?
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