बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 8
(Family Sex Stories) 29
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दीदी का चेहरा मारे शर्म के लाल हो गया और उन्होंने फिर से अपनी आँखों को बंद कर अपना चेहरा घुमा लिया।
रश्मि दीदी की शर्म भले ही ना खतम हुई हो, लेकिन लगातार देर तक ऋषि के सामने नंगी पड़ी रहने से उनकी झिझक खतम हो चुकी थी और अब वो अपने दोनों पैर बिस्तर पर इधर-उधर बार-बार फैला रही थी। इससे उसके नग्न शरीर की मादकता और भी बढ़ रही थी जो ऋषि को और भी उत्तेजित कर रही थी।
अब ऋषि ने दीदी के बिस्तर पर फैले दोनों पैरों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे उसे दांए बांए फैला दिया अब मुझे बाहर से भी दीदी की चूत साफ दिखाई देने लगी। ऋषि अब अपनी कमर को दीदी की जांघों के बीच में ले गया और अपना लण्ड दीदी की धड़कती चूत पर रगड़ने लगा।
ऋषि का गरम लण्ड अपनी चूत से टकराते ही दीदी के दिल की धड़कन तेज हो गई क््योंकी उन्हें फिर से ऋषि के लण्ड का स्वाद जो मिलने वाला था।
अपना लण्ड रश्मि की चूत में डालने से पहले ऋषि अपना मुँह रश्मि दीदी के गालों के पास ले गया और उन्हें बेतहाशा चूमने लगा और फिर काम की उत्तेजना में बोला- “रश्मि मेरी जान, आज से तुम सदा-सदा के लिये मेरी हो गई हो, आज मैं तुम्हें ऐसे चोदूंगा की तुम बार-बार चुदवाने मेरे पास आओगी। तुम्हें आज इस बात का अफसोस होगा कि तुम आज तक इस सुख से वंचित क्यों रही?” ये कहकर उसने दीदी के गाल्रों को चूम लिया।
उसके बाद ऋषि उठा और फिर से अपना लण्ड दीदी की चूत में रगड़ने लगा। उसका एक हाथ रश्मि दीदी की जांघों और उनकी गाण्ड को सहला रहा था और दूसरे हाथ से वो दीदी की छातियों को मसल रहा था। अब ऋषि की सहनशक्ति दे रही थी और उसने अपना लण्ड रश्मि दीदी की चूत के मुहाने में लगा दिया।
लण्ड के चूत में लगते ही दीदी सतर्क हो गई और आगे होने वाली घटना का अनुभव करते हुए अपनी आँखों और होठों को बुरी तरह से भींच ल्िया। इधर ऋषि भी बेहद उत्तेजित और खुश था आखिर पिछले कई महिनों की उसकी हसरत आज पूरी जो हो गई थी। ऋषि ने अपने लण्ड में थोड़ा सा दबाव डालकर हल्का सा धक्का दिया और अपने लण्ड का सुपाड़ा दीदी की चूत में घुसेड़ दिया।
लण्ड के अंदर जाते ही रश्मि दीदी की चूत के अंदर एक खलबली मच गई और दर्द से उसके मुँह से एक ‘आहह’ निकल गई। अभी दीदी की चूत में पहली चुदाई का दर्द बरकरार था और ऋषि ने दुबारा दीदी को चोदना शुरू कर दिया।
फिर कुछ क्षणों तक दीदी को दर्द से कराहते देखकर ऋषि ने उसका मजा लिया। फिर थोड़ा और धक्का उसने अपने लण्ड से लगाया तो लण्ड त्रगभग आधा दीदी की चूत में चला गया।
लण्ड के आधा अंदर जाते ही रश्मि दर्द से बिलबिलाने लगी और कराहने लगी- “आह्ह्ह… उईई माँ, मर गई मैं तो, माआईए, बस करो ऋषि सहन नहीं हो रहा है, प्लीज… छोड़ दो मुझे, निकालो न उसे बाहर…”
दीदी को इस तरफ फड़फड़ाते हुए देखकर ऋषि को मजा आ रहा था। कुछ क्षणों तक दीदी को इस तरह देखने के बाद अचानक ऋषि ने एक जोर का धक्का लगाया और उसका पूरा का पूरा मोटा लण्ड दीदी की चूत में समा गया और रश्मि दीदी के मुँह से एक चीख निकल गई- “आईई माआईए बचाओ मुझे…” दीदी की आँखों में दर्द के मारे फिर से आंसू आ गए।
लण्ड को पूरी तरह से रश्मि दीदी की चूत में उतार देने के बाद ऋषि दीदी के नंगे जिश्म पर लुढ़क गया और उन्हें अपनी बाहों में जकड़कर अपना मुँह दीदी के होठों पर ल्रगा दिया। अब वो अपनी कमर को हौले-हौले हिलाने लगा जिससे उसका लण्ड दीदी की चूत में अंदर-बाहर होने लगा।
में सोचने लगा- अब दीदी को इतना दर्द क्यों हुआ जबकी थोड़ी देर पहले एक बार तो वो चुद चुकी है? उधर ऋषि अपने मकसद में कामयाब हो गया था और उसने मुझे दिखा दिया की दीदी अपनी मर्जी से उससे चुदवा रही थी। रश्मि दीदी के बेपनाह खूबसूरत नंगे जिश्म के अपने अधिकार में होने की कल्पना से ऋषि की उत्तेजना और भी बढ़ गई और उसका लण्ड लोहे के समान कड़क हो गया। अपने लण्ड के और भी कड़क हो जाने से वो और भी उत्तेजित हो गया और उसने रश्मि दीदी को बुरी तरह से अपनी बाहों में भींच लिया और जोर-जोर से अपनी कमर को हिलाने लगा।
ऋषि अपना लण्ड इतनी जोर-जोर से दीदी की चूत में डाल रहा था कि चूत और लण्ड की इस टक्कर में फच-फच की आवाजें कमरे में गूंजने लगी और हर झटके के साथ रश्मि दीदी के मुँह के एक ‘आहह’ निकल रही थी – “अआह्ह्ह… आह्हह… उडईई माँ बस्स ओफ़्फ़्फ़
दीदी के मुँह के से निकलने वाली कराहों से ऋषि और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया और वो पूरी मस्ती में झूम झूम कर दीदी को चोदने लगा। दोनों की आखें बंद थी और दोनों एक दूसरे से बुरी तरह से लिपटे हुए थे, दोनों के मुँह से थोड़ी थोड़ी देर में ‘उहह… आहह… ओफ़्फ़..” की हल्की सी आवाजें निकल रही थी और कमरे के वातावरण को कामुक बना रही थीं। दीदी का हाथ अब ऋषि के पीठ पर था और वो धीरे-धीरे उसकी पीठ पर अपना हाथ घुमाने लगी।
तभी ऋषि ने हौले से अपना सिर ऊपर उठाया और धीरे से अपनी आँख खोलकर रश्मि दीदी की तरफ देखा, उसकी आँखें काम की उत्तेजना के कारण लाल सुर्ख थी। उसने देखा कि दीदी हौले-हौले अपना सिर कभी दाएं तो कभी बांए घुमा रही है। वो बार-बार अपने होठों को अपने दातों से दबा लेती थी। उनके ऐसा करने का मतलब साफ था कि वो भी चुदाई के खेल का भरपूर मजा ले रही थी।
रश्मि दीदी को इस तरह करते हुए देखकर ऋषि ने उत्तेजना के आवेग में दो-तीन जोर के झटके उनकी चूत में लगा दिए तो दीदी के मुँह से जोर से चीख निकल गई- “आहहह…”
फिर ऋषि ने दीदी को जोर से भींचकर ताबड़तोड़ उनके गालों को चूमना शुरू कर दिया। इस तरह चूमने से दीदी भी उत्तेजित हो गई और उन्होंने भी ऋषि को जोर से भींच लिया। वो और भी तेजी से उसकी पीठ पर हाथ घुमाने लगी।
कुछ देर तक इसी तरह से दीदी को चोदने के बाद ऋषि थोड़ा ऊपर उठा और अपना बांया हाथ पलंग पर रखकर उसी के सहारे थोड़ा ऊंचा हो गया। अब वो दीदी को असानी से हरकतें करते हुए देख रहा था। वो उसी अवस्था में अपनी कमर लगातार हिला रहा था और अपना लण्ड दीदी की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। अब वो अपना एक हाथ दीदी के नंगे जिश्म पर घुमाने लगा।
उसके हाथ अब दीदी के चेहरे पर घूम रहे थे, कभी वो अपना हाथ उनके गालों पर घुमाता तो कभी होठों पर, तो कभी बालों में। इसी तरह अपने हाथों को घुमाते हुए ऋषि ने अपना हाथ धीरे-धीरे दीदी की जवानी के रस से भरी हुई छातियों पर रख दिया और दीदी को दोनों चूचियों को बारी-बारी से मसलने लगा।
कभी ऋषि मेरी बहन की छाती के क्लिवेज देखने के सपने देखता था और आज उसी रश्मि की गदराई छातियां उसके सामने एकदम नंगी खुली पड़ी थी और वो उसे जोर-जोर से मसले जा रहा था। ज्यादा मसले जाने के कारण रश्मि दीदी की छातियां लाल् हो गई थी और उसमें ऋषि की उंगलियों के लाल निशान साफ तौर पर दिख रहे थे। अब ऋषि ने थोड़ा नीचे झुकते हुए उनकी बाई चूची के निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उसे जोर – जोर से चूमने लगा और अपने दूसरे हाथ से उनका दायां दूध मसलने लगा और नीचे अपने लण्ड के धक्के उसने दीदी की चूत में लगाने जारी रखे।
इस तरह चूचियां को दबाने और चूसने और अपनी चूत में लगातार लण्ड के झटके पड़ने से रश्मि दीदी भी काम उत्तेजना में झूम गई और अपनी कमर को हौले-हौले झटके देने लगी। एक दूसरे की बाहों में नग्न रश्मि और ऋषि लगातार अपनी कमर को झटके देकर चुदाई में इतने तलल्लीन हो चुके थे कि कि वो दोनों ही अपनी सुध बुध खो चुके थे।
कुछ देर तक इसी तरह अपनी सुध बुध खो देने वाली चुदाई के बाद ऋषि ऊपर उठा और दीदी की चूची चूसना छोड़कर अब वो उनके ऊपर उकड़ बैठ गया। उसका लण्ड अभी भी दीदी की चूत में था। अब उसने दीदी की दोनों चूचियों को फिर अपने दोनों हाथों ले लिया और बुरी तरह मसलने लगा और अपने लण्ड को और भी जोर-जोर से दीदी की चूत में पेलना शुरू कर दिया।
दीदी का चेहरा आनंद से खिल उठा। ऋषि की इस हरकत से उन्हें इतना आनंद मिला कि उसके मुँह से- “अहहह… आहहह… आह्ह्ह… आउच्च्च… ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ..” की आवाज निकलने लगी और वो वासना के समुन्दर में गोते लगाने लगी। ऋषि दुबारा उनकी ऐसी चुदाई करेगा ऐसा दीदी ने सपने में भी नहीं सोचा था।
मैंने देखा की रश्मि दीदी अब अपनी सारी हिचक और शर्म को छोड़कर उन्मुक्त भाव से ऋषि का साथ दे रही है और अपनी हवस शांत करने के लिये उन्होंने अपना नंगा शरीर पूरी तरह ऋषि को सौंप दिया है। कहीं से कोई प्रतिरोध नहीं था और दीदी ने ऋषि को अपने नंगे जिश्म के साथ मनमानी करने और उससे खिलवाड़ करने की पूरी छूट दे दी थी।
रश्मि दीदी के इस उन्मुक्त समर्पण ने ऋषि को और भी हब्शी बना दिया। वो और भी चुदासा होकर दीदी को चोदने लगा। ऋषि और जोरों से उनकी चूत में झटके मारने लगा। दीदी की पहाड़ के जैसी चूचियों को उसने और भी जोरों पकड़ लिया और इस तरह नोचने लगा मानों वो दीदी की छातियों को उखाड़ कर उनके शरीर से अलग करना चाहता है।
रश्मि दीदी अपना सिर बड़ी ही तेजी से इधर-उधर घुमा रही थी। शायद वो फिर से झड़ने लगी। अपनी ऐसी चुदाई से अब वो हांफने लगी थी और अब लंबी-लंबी सांसें ले रही थी। पर ऋषि उसकी इस हालत को देखकर उत्तेजना के सागर में डूबता चला गया और दीदी की चूचियों को छोड़कर अब अपने दोनों हाथ उनकी पीठ के नीचे लेजाकर उन्हें धीरे से उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया।
पूरी तरह से निढाल हो चुकी दीदी के दोनों हाथ दाएं बाएं झूलने लगे और वो ऋषि की गोद में समा गई। ऋषि का लण्ड दीदी की चूत से बाहर नहीं आया, और चूंकी वो उसकी गोद में बैठी थी इसलिये उनकी दोनों चूचियां ऋषि के मुँह के पास झूल रही थी। ऋषि ने मारे उत्तेजना के दीदी की विशाल चूचियों को अपने मुँह में भर लिया और उसमें भरे जवानी के रस को पीने लगा।
ऋषि ने अब अपना एक हाथ दीदी की पीठ से हटाकर उनकी चिकनी गाण्ड पर रखा और उन्हें हल्के-हल्के से ऊपर उठाने और छोड़ने लगा।
दीदी अब उसकी गोद में ऊपर-नीचे होने लगी और ऋषि की गोद में बैठे हुए ही उससे चुदने लगी। रश्मि दीदी को ये आभास भी नहीं था कि मर्द की गोद में बैठकर भी उसका लण्ड अपनी चूत में लिया जा सकता है और वो इस रोमांच का भरपूर मजा ले रही थी उन्होंने अपने दोनों लटके हुए हाथ अब ऋषि के कंधों पर रख लिये और वो खुद ही अपने पैरों के पंजों के सहारे ऊपर-नीचे होने लगी, इससे ऋषि के हाथ थोड़ी देर के लिये खाली हो गये।
अब ऋषि दीदी की गाण्ड को सहलाने लगा क्योंकी दीदी खुद ही उसकी गोद में बैठकर उसके लण्ड पर ऊपर-नीचे हो रही थी और झटके मार रही थी। अपने हाथों से वो दीदी की चिकनी गाण्ड को सहलाते हुए उसकी गाण्ड का छेद तलाशने लगा और अपना हाथ उसकी गाण्ड के छेद पर रख दिया।
अपनी गाण्ड के छेद पर ऋषि का हाथ लगते ही दीदी के शरीर में एक सनसनी दौड़ गई और उन्होंने जोर से ऋषि के कंधों को पकड़ लिया। इधर ऋषि अब होले-हौले दीदी की गाण्ड के छेद को अपनी उंगली से रगड़ने लगा। अपने शरीर के दोनों छेदों पर एक साथ हमले से दीदी थरथरा गई। उनके जिश्म में ऐसी उत्तेजना होने लगी जिसे सहन करना अब उसके बस में नहीं था।
दीदी की गाण्ड मारने की ऋषि की बहुत इच्छा थी लेकिन पहले वो उसे अपने मोटे लण्ड के लिये तैयार करना चाहता था। कुछ देर तक उनकी गाण्ड के छेद में अपनी उंगली रगड़ने के बाद वो हौले से अपनी पहली उंगली को थोड़ा सा धक्का देते हुए दीदी की गाण्ड में घुसा देता है और धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने ल्गा। गाण्ड में ऋषि की उंगली और चूत में उसका लण्ड अपने दोनों छेदों की इस तरह से एक साथ हो रही चुदाई से दीदी एकदम बदहवास हो गई और उन्होंने ऋषि को जोर से भींच लिया। दीदी उसे ताबड़तोड़ चूम रही थी उन्हें ऐसा लगा कि वो फिर से झड़ने वाली है।
ऋषि अब तेजी से दीदी की गाण्ड में उंगली से अंदर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर तक इसी तरह अपनी उंगली अन्दर-बाहर करने के बाद उसने अपनी उंगली को थोड़ा और अंदर धक्का दिया और अपनी आधी उंगली दीदी की गाण्ड में घुसा दी और गाण्ड में ही उसे हिलाने लगा। कुछ देर तक अपनी आधी उंगली दीदी की गाण्ड में रखने के बाद ऋषि ने एक और धक्का देते हुए उसकी पूरी उंगली ही दीदी की गाण्ड में घुसा दी।
पूरी उंगली गाण्ड में घुसने से दीदी चिहुंक उठी, पर ऋषि ने इस पर ध्यान न दिया और अपनी पूरी की पूरी उंगली गाण्ड में अंदर-बाहर करने लगा। रश्मि दीदी जैसे अपना आपा खो बैठी और अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाने लगी और उन्होंने ऋषि को बुरी तरह से अपनी बाहों में जकड़ लिया।
ऋषि को लगा जैसे वो जन्नत की सैर कर रहा था। उसने सोचा की रश्मि की चूत में उसका लण्ड, मुँह में चूची और रश्मि की गाण्ड में उंगली। उसकी तो जैसे पांचो उंगलियां घी में थी।
दस मिनट तक रश्मि दीदी को इसी तरह से चोदने के बाद उसने फिर से उनको लिटा दिया और खुद उनके नंगे जिश्म पर लुढ़क गया। ऋषि अपने जिश्म की हवस को दीदी के नंगे जिश्म से मिटा रहा था, लेकिन उसके दिमाग में भी वासना की हवस भरी हुई थी और इसीलिये वो अब दीदी के साथ कामुक बातें करना चाहता था।
रश्मि दीदी की चूत में लण्ड डालने से उसके शरीर को आराम मिल रहा था और उसके लण्ड की प्यास बुझ रहीथी। लेकिन कामुक बातें करने से उसके दिमाग को सुकुन मिलता।
ऋषि रश्मि से बोला- “बहुत खूबसूरत हो तुम रश्मि, तेरा ऐसा नंगा जवान जिश्म पाकर तो मैं धन्य हो गया…” दीदी जवाब में कुछ नहीं कहती कि हूं कह के रह जाती है।
लेकिन ऋषि अपनी बात कहना जारी रखता है- “अब रोज डालूंगा तेरे अंदर डार्लिंग, बोलो दोगी न रोज डालने के लिये?
रश्मि – ऊठउउउउठं
ऋषि – क्या ऊठठउठउं? बोलो न कुछ अपने मुँह से?
रश्मि – हाँ।
ऋषि – “अरे ऐसे नहीं बोलो हाँ मैं रोज डालने दूंगी’ बोलो न ऐसा प्लीज…”
रश्मि – मुझे शर्म आती है, मैं नहीं बोल सकती।
ऋषि – “अब क्या शर्माना? दो बार चुद चुकी है मुझसे, मेरा पूरा लण्ड आधे घंटे से अपनी चूत में घोंट रखा है और कहती हो शर्म आती है। फिर खाली मुझे ही तो कहना है और कौन सुनेगा तेरी बात को? (उसे पता था मैं दरवाजे के बाहर खड़ा सब सुन रहा हूँ और शायद वो मुझे ही सुनवाना चाहता था) अब बोल दो प्लीज… मेरे कान तरस रहे हैं, ये सुनने के लिये तेरे मुँह से.
रश्मि दीदी थोड़ी ना नुकुर और शर्माने के बाद बोली- हाँ मैं रोज डालने दूंगी।
ऋषि – कभी मना तो नहीं करेगी मेरी जान?
रश्मि – कभी मना नहीं करूंगी, तुम्हारी जब मर्जी हो डाल लेना?
ऋषि – जब मर्जी हो तभी मतलब?
रश्मि – जब मर्जी याने सुबह, शाम, दिन या रात जब तुम कहोगे तुमको डालने दूंगी, कभी मना नहीं करूंगी।
ऋषि – क्या डालने देगी बोल न?
रश्मि – जो तुम्हारी इच्छा हो।
ऋषि – अरे अगर मेरी इच्छा लौकी डालने की हुई तो?
रश्मि – उंहह… अरे जो अभी डालकर रखा हुआ है।
ऋषि – क्या डालकर रखा हुआ है मेरी रंडी?
रश्मि उसकी पीठ पर चपत लगाती हुई तनिक जोर से कहती है- “ऊठउउउउउउउं…”
ऋषि – फिर वो ही बात, बोलो न क्या डालकर रखा हुआ है कुतिया?
रश्मि – मुझे नहीं पता।
ऋषि – बोलो न मेरी रांड़ क्या डालकर रखा हुआ है?
रश्मि – सच मुझे नहीं पता इसका नाम।
ऋषि – “अच्छा। मैं बताता हूं इसका नाम। इसे लण्ड कहते हैं मेरी जान, जो अभी तेरे अंदर मैंने डालकर रखा हुआ
है। अब बोल?”
रश्मि- नहीं नहीं मैं नहीं बोल सकती।
ऋषि रश्मि की गाण्ड में थप्पड़ लगाते हुए- “बो5555लल जल्दी…”
रश्मि थोड़ा और शर्माते हुए- “अआहह… मैं तुमको रोज ल्ल्लण्ड डालने दूंगी, कभी मना नहीं करूंगी…”
ऋषि- कहां डालने दोगी लण्ड को?
रश्मि गुस्से से- “तुम भी न… मैं और नहीं बोलूंगी…”
ऋषि प्यार से- “बोल न प्लीज… अब ये मत बोलना तुझे ये भी नहीं पता की मैंने कहां डालकर रखा हुअ है? ले मैं उसका भी नाम बता देता हूं। उसको चूत कहते हैं रश्मि रानी जहां मेरा लण्ड घुसा हुआ है अभी रश्मि फिर थोड़ा हिचकते हुए- “मैं रोज तुमको लण्ड च्च्चूत में डालने दूंगी, कभी मना नहीं करूंगी…”
ऋषि – और गाण्ड में?
रश्मि – “अब मैं और कुछ नहीं बोलूंगी, जो बोलना था सो बोल दिया?”
ऋषि मुझे जो सुनाना चाहता था वो सुना दिया। अब वो दीदी को और परेशान नहीं करता और उसको चूमने लगा। दरअसल वो ये भी चाहता था कि तन के साथ रश्मि दीदी उसके साथ मन से भी खुल जाय, तो उसे चोदने में और भी मजा आयेगा। उसने फिर से अपने धक्के तेज कर दिए और रश्मि की बुर में अपना लण्ड पेलने लगा।
कुछ देर तक ऋषि का लण्ड अपनी बुर में लेने के बाद अचानक दीदी जोर से ऋषि को पकड़ लेती है फिर एकदम से निढाल पड़ जाती है और अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर लेजाकर दीला छोड़ देती है और अपना सिर एक तरफ लुढ़का देती है। वो तीसरी बार झड़ गई थी पर उसकी आँखों से आंसू की बूंदें टपक जाती हैं। शायद आज मन भर के चुदने की अपनी इच्छा पूरी होने से खुशी के मारे दीदी की आँखों से आंसू निकल आये थे।
ऋषि भी दीदी को देखकर समझ जाता है की अब ये झड़ चुकी है।
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