बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 5

(Family Sex Stories) 5

redwalker69 2026-10-17 Comments

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इस बात को 10 दिन गुजर गए, पर किरण आंटी हमारे घर नहीं आई। हमारे बीच शर्म का पर्दा हटने से मुझे जो उम्मीद जगी थी वो अब धुँधली होने लगी। कई बार सोचा की खुद किरण आंटी के घर जाऊँ पर फिर ख्याल आता था एक तो मैं उनके घर कभी गया नहीं और दुसरे वहां तो ऋषि भी होगा। अगर उसने पूछा की घर क्यों आया? तो क्या बोलूँगा? क्योंकी उससे तो मैं रोज कैफे में मिलता था तो ये भी नहीं बोल सकता की तुमसे मिलने आया हूँ। वैसे भी ऋषि ने कभी मुझे अपने घर बुलाया भी नहीं था।

 

इधर दीदी भी बुआ के घर चली गई थी, क्योंकी उनकी छुट्टियाँ भी थी। मुझे लग रहा था की अगर किरण आंटी इस समय आ जायें, तो उस दिन का अधूरा काम पुरा हो सकता है। मेरे घर में इंटरनेट तो नहीं था पर मैं ऋषि से ब्लू -फिल्म की सी॰डी॰ ले आया था और रोज रात को दीदी के कंप्यूटर पर देखता था और आंटी के साथ बिताए उन पलों को याद करके मैं मुठ मारता था। मेरी हवस दिनों दिन बढ़ती ही जा रही थी।

 

एक दिन मैं अपने कमरे में बैठा आंटी के बारे में सोच रहा था की मम्मी ने मुझे नीचे बुलाया और पुछा – “तुम्हारा कालेज कब से शुरू हो रहा है मोनू ?”

 

मोनू – “जी 10 दिन बाद, अगले महीने की 7 तारीख से। क्यों?”

 

मम्मी- “अरे तुम्हारे पापा और मुझे 5 तारीख को तुम्हारे मामा के घर जाना है। तुम्हारे नाना की प्रापटी का कुछ काम है तो मेरे भी साइन होने हैं। तुम्हारी दीदी भी यहाँ नहीं है। हमें 3-4 दिन लग सकते हैं। सेशन के शुरू में तुम्हारी छुट्टी भी नहीं करा सकते, पर अकेले तुम कैसे रहोगे? तुम्हारा खाना पीना कैसे होगा?”

 

मोनू – अरे आप किरण आंटी से कह दो न मैं 3-4 दिन उनके यहाँ रुक जाऊँगा ।

 

मम्मी- “हाँ ये हो सकता है। मैं तुम्हारे पापा से प छती हूँ…” और मम्मी पापा को फोन मिलाने लगी।

 

और मैं खुशी से झूमता हुआ अपने कमरे में चला गया।

 

थोड़ी देर बाद मम्मी मेरे रूम में आई। उनके हाथ में एक पर्ची थी- “तेरे पापा ने किरण के यहाँ रुकने को मना कर दिया है। उनहोंने तेरी बुआ को फोन कर दिया है, रश्मि 4 तक वापस आ जाएगी। अब तु मेरा एक काम कर। ड्राई-क्लिनर से ये कपड़े उठाकर किरण के घर चला जा और वापस कर आ। उस दिन जब वो आई थी तब मुझे शर्माजी के घर की शादी में पहनने के लिए दे गई थी…”

 

पापा ने के॰एल॰पी॰डी॰ तो कर दी थी, पर आंटी के घर जाने का मौका हाथ आ गया। मुझे आंटी का वो गर्म और नरम बदन बड़ा याद आ रहा था। काश, एक बार उनको चोदने का मौका मुझे मिल जाये? यही ख्याल दिन रात

मेरे दिलों दिमाग़ में छाया था। मुझे लगा आज ही मौका है आज बिल्ली मारनी ही है।

 

मैंने जल्दी से दुकान जाकर कपड़े उठाये और आंटी के घर की तरफ चल पड़ा। जैसे-जैसे आंटी का घर नजदीक आ रहा था, वैसे-वैसे मेरे लण्ड में हलचल बढ़ती जा रही थी। बस मैं ये मना रहा था की ऋषि घर पर ना हो। आंटी अकेले में मिल जाये। मैं 10 मिनट में वहां पहुँच गया और मैंने बेल बजाई।

 

मुझे उम्मीद थी की किरण आंटी ही दरवाजा खोलेंगी पर एक बूढ़ी औरत ने दरवाजा खोला और पूछा- कौन हो? किससे मिलना है?

 

मोनू – जी वो किरण आंटी?

 

बूढ़ी औरत- बह तो बाहर गई है।

 

मेरा साला प्लान चौपट हो गया। मुझे तो पता ही नहीं था की आंटी की सास भी आजकल यहीं रहती है- “जी ऋषि या रिक्की कोई है। मुझे कुछ जरूरी काम था…”

 

“ऋषि भी बाहर गया है। रिक्की की तबीयत ठीक नहीं है वो दवाई खाकर सो रही है। कहाँ से आये हो?”

 

“जी मैं नीलम जी का बेटा हूँ। मोनू …”

 

“अरे मोनू बेटा। आओ आओ। बहू आधे घंटे में आ जाएगी। तुम अनदर बैठकर इंतेजार कर लो।

 

मेरे मन में आशा फिर जागी और मैं अनदर आ गया।

 

पीछे-पीछे आंटी की सास भी आ गई। उनहोंने मुझे ड्राइंग रूम में बिठा दिया और टीवी आन कर दिया और बोली- “बेटा मैं भी जरा आराम कर लूँ । किरण का ही इंतेजार कर रही थी। वरना सो जाती तो दरवाजा कौन खोलता। अब तु आ गया है तो एक झपकी ले लेती हूँ…”

 

बुढ़िया का सोना मेरे प्लान के लिए बहुत अच्छी बात थी तो मैं तुरंत बोल- “जरूर। आप आराम से सो जाइये। मैं किरण आंटी के आने तक इंतेजार करूंगा…”

 

बुढ़िया सोने के लिए अनदर कमरे में चली गई। थोड़ी देर बाद मुझे प्यास लगी थी तो मैं पानी पीने सामने रखे फ्रिज की तरफ बढ़ गया। फ्रिज के बगल में एक कमरे का दरवाजा था। पानी पीते हुए मैंने कमरे के अनदर देखा की सामने बेड पर रिक्की सो रही थी। उसके पैर कुछ इस तरह से रखे थे की उसकी स्कर्ट के अनदर उसकी लाल रंग की पैंटी दिख रही थी। ये नजारा देखकर मेरा लण्ड झटके खाने लगा।

 

मैंने मन में सोचा, माँ न सही बेटी ही सही। थोड़ी सी हिम्मत दिखा मोनू तो थोड़े मजे तो ले ही सकता है। मैंने वापस जाकर देखा बुढ़िया आराम से सो रही थी। मैं हिम्मत जुटा के उस रूम की तरफ बढ़ गया, जहाँ रिक्की सो रही थी। अब रिक्की ने करवट बदल ली थी और वो पेट के बल सो रही थी। मेरा दिल बहुत जोर से धड़क रहा था। अब रिक्की की गाण्ड काफी उभरी हुई लग रही थी।

 

मैंने धीरे से कांपते हाथों से उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाया। उफ्फ… उसके सफेद चूतर लाल पैंटी में कयामत लग रहे थे। मैं अपनी नाक धीरे से उसकी चूत के पास ले गया और उसकी कुंवारी चूत की खुश्बू को उसकी पैंटी के ऊपर से सूंघने लगा। उत्तेजना से मेरा लण्ड फटा जा रहा था। मैंने अपना पैंट खोलकर अंडरवियर उतार दिया। एक कुंवारी लड़की के कमरे में नंगा होना मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था। मेरा डर अब धीरे – धीरे खत्म हो रहा था। मैंने रिक्की के चूतरों को धीरे से किस किया। उसने कोई हरकत नहीं की।

 

मैंने धीरे से उसकी पैंटी कमर के पास से पकड़ी और नीचे खिसकाने की कोशिश की। आधी पैंटी तो आराम से उतर गई पर फिर फसने लगी तो मैंने ज्यादा कोशिश नहीं की। मुझे लगा कहीं वो जाग न जाये। मैंने उसके आधे नंगे चूतरों को धीरे से चाटा और किस किया। फिर धीरे से उसके पास बेड पर बैठकर एक हाथ मैंने उसकी गाण्ड पर रख दिया और दूसरे हाथ से अपना लण्ड मुहठयाने लगा।

 

अगर रिक्की सीधी लेटी होती तो उसकी कच्चे आम जैसी चुचियों का भी थोड़ा मजा मुझे मिल जाता, पर आधा घंटा बीत चुका था। अब किरण कभी भी आ सकती थी तो मैंने सोचा कम से कम इसके चूतरों पर अपना पानी ही गिरा ही दूँ और मैं खड़ा होकर मुठ मारने लगा।

 

मैं झड़ने ही वाला था की तभी मुझे क्लिक की आवाज सुनाई दी। मैंने पीछे देखा तो दरवाजे के पास ऋषि खड़ा था और उसके हाथ में एक कैमरा था। मेरी तो फट के हाथ में आ गई। अब ऋषि कमरे के अनदर आया। मैं जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगा।

 

ऋषि ने मेरी गर्दन पकड़ ली और धीरे से बोला- “बेहेनचोद, मेरी बहन का बलात्कार करने जा रहा था। कुत्ते अच्छा हुआ मैं लौट आया, वरना पता नहीं तु क्या करता?”

 

मोनू – “नहीं ऋषि भाई। मुझे माफ कर दो। प्लीज…”

 

ऋषि – साले मैं इस कैमरे में अभी रोल डलवा कर आ रहा हूँ और इससे मैंने तेरी फोटो ले ली है। सबको तु बहुत शरीफ लगता है न। जब मैं ये फोटो तेरे घर वालों को दिखाऊँगा तो वो तुझे घर से निकल देंगे।

 

मोनू – भाई मुझे माफ कर दो। मैं बहक गया था। प्लीज भाई एक बार माफ कर दो।

 

ऋषि – चुप कर वरना रिक्की जाग जाएगी।

 

थोड़ा सोचने के बाद वो फिर बोला- “अच्छा पहले रिक्की के कपड़े ठीक कर और बाहर आ जा, फिर सोचता हूँ…”

ये कहकर ऋषि बाहर चला गया।

 

मैंने मन में सोचा साली किस्मत ही खराब है। लगता है बुढ़िया ने मेरे आने के बाद दरवाजा बंद नहीं किया। अगर ऋषि की जगह किरण होती तो फिर भी मैं संभाल लेता। साला खाया पीया कुछ नहीं गिलास तोडा बारह आना। मैंने रिक्की की पैंटी और स्कर्ट ठीक की और डरते-डरते कमरे से बाहर आ गया।

 

ऋषि कैमरे से रील बाहर निकाल रहा था। रील उसने अपनी जेब में रख ली।

 

मैं फिर से गिड़गिड़ाने लगा- “भाई माफ कर दो प्लीज… तुम जानते हो मैं सिर्फ मुठ मार रहा था और कुछ नहीं कर रहा था। कसम से भाई माफ कर दो…”

 

ऋषि बोला- सिर्फ एक शर्त पर।

 

“क्या शर्त भाई बोलो?” मैंने डरते-डरते पूछा।

 

“चल मेरे साथ…” और वो मुझे फिर से उसी कैफे में ले गया। ऋषि ने कंप्यूटर पर फिर से एक ब्लू – फिल्म चला दी और मुझे अपने बगल में बिठाता हुआ बोला- “साले कुत्ते। फ्री में गुरू से दीक्षा ले ली। गुरुदक्षिणा तो देना नहीं। ऊपर से गुरू की बहन चोदने चले थे बेहेनचोद…” और वो अपना लण्ड पैंट के ऊपर से खुजलाने लगा।

 

मैंने कोई जवाब नहीं दिया।

 

तभी उससे एक नई साईट खोली और एक लिंक पर क्लिक किया। एक नई फिल्म शुरू हो गई जिसमे एक जवान लड़का एक जवान लड़की को घोड़ी बनाकर पीछे से चोद रहा था पर दोनों इंडियन थे। इससे पहले मैंने सिर्फ विदेशी लोगों को इन फिल्मो में देखा था। ये पहली बार मैंने देसी फिल्म देखी थी। डर की वजह से जो मेरा लण्ड बैठ गया था फिर से खड़ा होने लगा।

 

ऋषि – “देख क्या मस्त लौंडिया है। देख क्या रंडी बनकर चुद रही है?” अचानक ऋषि ने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और बोला- “देख बेहेनचोद साली के हिलते हुए चूचे देख। कितने गोल-गोल हैं? पता है किसकी तरह लग रही है?”

 

ऋषि ने धीरे – धीरे मेरी जांघ को सहलाना शुरू कर दिया और बोला- बोल न किसकी तरह लग रही है?

 

मुझ पर एक नशा होने लगा और उसी नशे में मैंने पूछा- “कि-किसकी… तरह… लग रही है?”

 

“तेरी बड़ी बहन रश्मि की तरह। उसके भी ऐसे ही चूचे हैं न? वो भी नंगी ऐसी ही लगेगी। है न? बोल बहनचोद…” ऋषि मेरे चहेरे के भावों को पढ़ता हुआ बोला।

 

अपनी बहन का नाम सुनकर मुझे करेंट सा लगा पर ऋषि ने उसकी बहन के साथ मुझे जिस हालत में पकड़ा था

मैं क्या बोलता? मैं चुप बैठा रहा।

 

“अब उस लड़के का लण्ड देखा है। बिल्कुल मेरे लण्ड जैसा लग रहा है न?” ऋषि अपने लण्ड की मसलता हुआ बोला- “सोच की वो लड़का मैं हूँ और वो लड़की तेरी बहन रश्मि। आह्ह… देख कैसे चोद रहा हूँ मैं तेरी बहन को तेरे सामने…” और ऋषि ने मेरे खड़े हो चुके लण्ड को पकड़कर दबा दिया।

 

मेरा दिमाग़ गनगना गया।

 

ऋषि फिर से बोला- “बोल देखना है अपनी बहन को मुझसे चुदते हुए? आह्ह… बोल बहनचोद?” मेरा लण्ड हिलाता हुआ वो बोला।

 

मेरे मुंह से डर और उत्तेजना से निकल गया- “हाँ। आह्ह… देखना चाहता हूँ…”

 

ऋषि – “तो वादा कर देगा न अपनी बहन की कुंवारी चूत मझे गुरुदक्षिणा में?”

 

कहकर ऋषि ने मेरे लण्ड को इतने जोर से दबाया की उत्तेजना में मेरे मुंह से निकला- “हाँ दूँगा। ऋषि भाई आह्ह… इस्स… वादा करता हूँ…” और यह शब्द मेरे मुंह से निकलने के साथ ही मेरे लण्ड से पानी भी निकल गया।

 

ऋषि के चेहरे पर मेरे ये शब्द सुनकर एक विजयी मुमकान फैल गई। जिस तरह ऋषि ने ये बातें बोली उससे मैं वहीं बैठे-बैठे झड़ गया। मैं थोड़ी देर निढाल होकर वहीं बैठा रहा और ऋषि कुछ देर और क्लिप्स देखता रहा। फिर हम बाहर आ गए।

 

ऋषि – तो बता कहाँ चोदूँ उसे?

 

मोनू – क-किसे?

 

ऋषि – “बहनचोद अभी वादा किया और अभी भूल गया? अबे तेरी बहन रश्मि को। तु एक काम कर उसे मेरे एक दोस्त के घर लेकर आ जा…”

 

मोनू – न-नहीं। वो अभी शहर में नहीं है पर मैं क्या बोलकर उसे लाऊँगा? मैं बाद में तुम्हें फोन करके बताता हूँ।

 

ऋषि – तेरे घर पर कंप्यूटर है न?

 

मोनू – हाँ है। पर उसमें नेट नहीं है।

 

ऋषि – हम्म… कब वापस आयेगी रश्मि?

 

मोनू – पक्का नहीं पता शायद 4 तारीख तक आ जाएगी।

 

ऋषि – एक काम कर, जब तेरे घर पर तेरी बहन अकेली हो तब मुझे बता देना।

 

मोनू – ठीक है भाई।

 

ऋषि – “सुन गांडू , तुझ पर भरोसा कर रहा हूँ। ये रील तु रख ले जिसमे तेरी फोटो है, पर अगर तु ने मुझे धोखा देने की कोशिश की तो देख साले जिंदगी बर्बाद कर दूँगा तेरी। ऐसी गाण्ड मारूंगा की बस कालेज वालेज सब धरा रह जायेगा। समझा? अब भाग यहाँ से भोसड़ी के…”

 

मोनू – “नहीं ऋषि भाई। भरोसा रखो मैं फोन करूंगा…” मैंने ऋषि से रील ले ली और आगे जाकर एक गटर में फेंक दी। अब मुझे कुछ चैन आया और मैं अपने घर आ गया।

 

रात को जब मैं सोने लेटा तो मुझे नींद नहीं आ रही थी। सामने दीदी की फोटो लगी थी जिसे देखकर मेरे मन कह रहा था- “कितनी सुनदर है मेरी रश्मि दीदी? एकदम परी जैसी। कितना प्यार करती हैं मुझसे और मैंने ऋषि से क्या कह दिया उनके बारे में?”

 

पर दूसरी तरफ मेरी हवस मुझसे कह रही थी- “कितना हसीन बदन है दीदी का… गोल-गोल चूचियां, खड़े हुए निप्पल, रस भरे होंठ, उभरे हुए चूतड़, लम्बे रेशमी बाल, किसी भी मर्द का खड़ा कर दें…”

 

एक तरफ मैं सोचता अब तो ऋषि के पास रील नहीं है तो वो कुछ नहीं कर सकता। पर दूसरी तरफ सोचता अगर सच में ऋषि दीदी को अपने लम्बे मोटे लण्ड से चोदे तो? ये ही सब सोचते हुए मैं सो गया और दिन बीतने लगे। दीदी दो तारीख को ही वापस आ गई। मेरे दिमाग़ में टेंशन था की कहीं ऋषि को पता न चल जाये की दीदी वापस आ गई है तो मैंने उससे मिलना बिल्कुल बंद कर दिया।

 

जिस दिन मम्मी पापा मामा के घर गए उसी दिन रात को जब हम सोने जा रहे थे, तब दीदी के बेड पर एक काकरोच आ गया और दीदी उछलकर मेरे बिस्तर पर आ गई।

 

“आह्ह… मोनू काकरोच…” दीदी ने मुझे उनके बेड की तरफ इशारा किया।

 

मैंने चप्पल फेंक कर उसे मारने की कोशिश की पर वो उड़कर मेरे बेड पर आ गया और दीदी मुझसे आकर लिपट गई। दीदी की तनी हुई चूचियां मेरे सीने में गड़ गईं, दीदी ने ब्रा नहीं पहनी थी। मैंने अपना हाथ दीदी की कमर पर रख दिया। क्या फीलिंग थी जो मैं बयान नहीं कर सकता। अचानक वो कोकरोच दीदी के टी-शर्ट पर आकर बैठ गया। दीदी मुझसे और कस के चिपक गई। मैंने भी दीदी को कस के चिपका लिया ।

 

“मोनू वो मेरी टी-शर्ट में घुस रहा है…” दीदी चिल्लाई।

 

मैंने उसे हाथ मारकर उड़ा दिया पर दीदी ने ये नहीं देखा और मुझसे चिपकी रही। मेरा लण्ड दीदी की चुचियों के स्पर्श से खड़ा होकर दीदी की चूत पर उनके पैजामे के ऊपर से ठोकर मारने लगा। जब दीदी को इसका एहसास हुआ तो वो धीरे से पीछे हो गई।

 

मैंने कहा- “दीदी कोकरोच भाग गया…”

 

तब दीदी अलग होकर वापस अपने बेड पर चली गई। थोड़ी देर बाद जब दीदी सो गई तो मैं नीचे आ गया और बाथरूम में जाकर दीदी की नरम चुचियों को याद करके मुठ मारने लगा। मुझे रह-रहकर ऋषि की वो बात याद आ रही थी की दीदी नंगी होकर एकदम उस ब्लू – फिल्म वाली लड़की की तरह दिखेंगी। येही सोचते-सोचते मेरा वीर्य निकला और सामने टंगे दीदी के सूट पर जा गिरा।

 

मुठ मारकर मैं ड्राइंग रूम में आकर बैठ गया। मैं सोचने लगा क्या सच में दीदी ऋषि को सेक्स करने देंगी? वो कई बार मुझसे बोल चुकी थी की ऋषि उनहें ठीक लड़का नहीं लगता और मैं उससे दोस्ती न रखूँ। वो तो ऋषि को बिल्कुल भाव नहीं देंगी, पर ऋषि तो उनहें चोदने के लिए मरा जा रहा है।

 

पर मैं भी तो किरण और रिक्की को चोदना चाहता हूँ। जब मैं उसकी माँ चोदना चाहता हूँ तो वो मेरी बहन चोदने की क्यों नहीं सोच सकता? पर सोचने से क्या होता है रश्मि दीदी किरण आंटी की तरह चालू नहीं है। फिर मैं अपने बेड पर आकर लेट गया। सामने दीदी सो रही थी। मेरा मन इसी कश्मकश में था की मैं क्या करूं? जब भी मैं दीदी और ऋषि के बारे में सोचता मेरे अनदर एक शिहरन दौड़ जाती पर क्या दीदी ऋषि का साथ देंगी?

 

मुझे याद आ गया सलमान, जब मुझे लगा की दीदी चुदवा लेंगी तब भी दीदी ने उसको कुछ करने नहीं दिया। पर दीदी को दूसरे आदमी के साथ देखने से मेरे अनदर जो फीलिंग आती थी वो मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता।

 

फिर मुझे ऋषि का लण्ड याद आ गया। कितना बड़ा और मोटा। जब उसका लण्ड सख्त होकर दीदी की कुंवारी चूत का मंथन करेगा तो कैसा लगेगा? पर दीदी उसे हाथ नहीं रखने देगी। ये ही सब सोचते-सोचते मुझे कब नींद आ गई, मुझे पता ही नहीं चला।

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