बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 9
(Family Sex Stories) 29
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कुछ ही क्षणों में दीदी ऋषि से कहने लगती है- “प्लीज… अब बस करो छोड़ दो मुझे…”
पहली बार ऋषि भी आधे घंटे में झड़ गया था। पर पहली बार दीदी को चोदने के बाद जब वो किचेन में पानी पीने गया था तब उसने सेक्स को बढ़ाने वाली गोली खा ली थी। उसी गोली ने ऋषि को शैतान बना दिया था। ऋषि का लण्ड दर्द करने लगा था, पर वो झड़ने का नाम नहीं ले रहा था और दीदी 3 बार झड़ चुकी थी। ऋषि ने दीदी को अनसुना करते हुये उनको जोर से भींचकर अपने धक्के तेज कर दिए और दीदी को और तेजी से चोदने लगा। दीदी को अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उनमें अब दम नहीं बचा था, बस वो पड़े-पड़े ‘अआहह… ओहह…’ की आवाजें निकाल रही थी।
करीब 10 मिनट के बाद आखिरकार, ऋषि को लगा की उसका लण्ड कभी भी वीर्य बाहर निकाल सकता है। ये एहसास होते ही तुरंत उसने अपना लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकाल लिया और लण्ड दीदी के मुँह में डाल दिया। दीदी ने न चाहते हुए भी उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया कयोंकी अब उनमें बोलने की ताकत भी नहीं बची थी।
ऋषि ने दीदी के मुँह में ही वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। पूरी तरह झड़ने के बाद ऋषि ने अपना लण्ड दीदी के मुँह से बाहर निकाला। उसका लण्ड अभी भी पूरी तरह नहीं बैठा था।
उसका वीर्य पीकर दीदी का मुँह खारा हो गया था। उनको अजीब सा लग रहा था। थोड़ा वीर्य दीदी के होठों से निकलकर उनके गालों पर बह गया था।
ऋषि ने मुश्कुराते हुए दीदी का हाथ पकड़कर अपना लण्ड उनके हाथ में रख दिया। उसके लण्ड ने फिर एक झटका खाया। फिर ऋषि रश्मि दीदी के बगल में लेट गया और उनके नंगे बदन से लिपट गया। 15 मिनट तक दोनों उसी तरह से पलंग पर पड़े रहे। शायद दोनों ही इस लंबी चुदाई के बाद बूरी तरह से थक चुके थे।
मुझे लगा की दीदी की पहली चुदाई तो यूँ ही थी पर ये दूसरी चुदाई काफी धमाकेदार हुई और इसमें दीदी भी काफी एन्जॉय कर रही थी। पहली बार तो दीदी बेमन से चुदी थी पर मर्द के कड़क लण्ड की ताकत का उन्हें इस बार ही अहसास हुआ था और शायद आज की इस चुदाई के बाद दीदी को मर्द शब्द का अर्थ भी समझ में आ गया होगा।
15-20 मिनट के बाद दीदी के शरीर में थोड़ी हरकत हुई। शायद उनके मुँह में ऋषि के वीर्य के स्वाद ने उन्हें उठने पर मजबूर कर दिया। उसने थोड़ा खड़ी होने का प्रयास किया लेकिन ऋषि का दांयां पैर उनकी जांघों पर पड़ा हुआ था और उसका एक हाथ में दीदी की चूची थी और ऋषि ऐसे ही सो गया था। दीदी ने पहले ऋषि के हाथ को अपने स्तन से हटाया और फिर उठकर बैठ गई। फिर उसने उसकी जांघों को अपने ऊपर से हटाया और पलंग से उठ खड़ी हुई ।
रश्मि दीदी पूरी तरह से नंगी थी और चुदाई के बाद बला की खूबसूरत लग रही थी। बाहर की तरफ निकली हुई गोल-गोल उभारों वाली उसकी गाण्ड और बड़े-बड़े विशाल स्तन उसे बेहद कामुक बना रहे थे। वो वैसे ही नंगी चलती हुई बाथरूम की तरफ जाने लगी। मैं फिर से सोफे के पीछे चला गया। अचानक दीदी की नजर ड्राइंग रूम के कोने में रखी ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी और उसमें अपनी छाया देखकर दीदी रुक गई।
दीदी शीशे के थोड़ा करीब गई और अपने नंगे जिश्म को निहारने लगी। अपने नंगे जिश्म को देखते हुए कभी तो वो शर्मा जाती और कभी गौरव और अहंकार से उसका मन भर जाता कि मेरे इसी जिश्म को पाने के लिये लोग इतना ललायित रहते हैं।
अपने जिश्म पर घमंड करना हर स्त्री का स्वभाव होता है और उसे भोगने की इच्छा करना हर पुरुष का। औरत इस बात से अनजान होती है कि आदमी का लक्ष्य तो औरत के जिश्म में बसी उसकी चूत होती है, फिर शरीर चाहे वो किसी रश्मि का हो या किसी चारू, रुची या अमृता का।
कुछ देर तक इसी तरह अपने जिश्म को आईने में निहारने के बाद दीदी बाथरूम में चली गई। मुझे लगा की अब मैं घर से बाहर निकल जाता हूँ। पर बाथरूम में पहुँचकर दीदी ने दरवाजा ही बंद नहीं किया और शावर चालू करके अपने शरीर की सफाई करने लगी।
दोनों जिस्मों के गुत्थम गुत्था होने से पैदा होने वाला पशीना और ऋषि के वीर्य ने दीदी के शरीर को चिपचिपा बना दिया था और चुदाई के दौरान हुई कसरत ने उनको काफी थका दिया था। लेकिन पानी की बौछार शरीर में लगने से उन्हें काफी राहत महसूस हुई और ताजगी का अहसास उसके शरीर में नवीन उर्जा का संचार करने लगा।
लगभग 10 मिनट तक नहाने के बाद रश्मि दीदी पूरी तरह ताजगी महसूस करने लगी और अब उन्होंने शावर बंद किया और तौलिया लपेटे नंगी ही वापस कमरे में आ गई। अब दीदी को ऋषि से शर्म जैसी कोई बात नहीं थी।
इधर ऋषि भी लगभग हल्की नींद पूरी करने के बाद जाग चुका था और काफी तरोतजा महसूस कर रहा था।
उसने अपनी आँखें खोली और पलंग पर ही पड़ा रहा। दीदी को बिस्तर पर ना पाकर उसकी निगाहें रश्मि को खोजने लगी।
नहाने के कारण रश्मि दीदी के बदन में एक अलग ही चमक दिखाई दे रही थी और उसका गोरा बदन नंगा होने की वजह से और भी मादक लग रहा था। दीदी नहाकर कमरे में नंगी खड़ी थी, उसका एक पैर स्टूल पर था और दूसरा पैर जमीन था और वो अब अपने पैरों को पोंछ रही थी। उसके बाल खुले हुए थे और उसकी कमर तक लटक रहे थे।
अपनी खूबसूरत हसीना के चिकने नंगे बदन को देखकर ऋषि के लण्ड में फिर हरकत होने ल्गी। दीदी की बड़ी – बड़ी नंगी गाण्ड, मोटी जांघ और किसी पर्वत की तरह विशाल लटकते हुए स्तनों को देखकर ऋषि का लण्ड फिर अपने आकार में आने लगा और फिर से रश्मि की चूत में जाने के लिये मचलने लगा। वो तुरंत हरकत में आता है और पलंग से खड़ा हो जाता है। उसका लण्ड अब फिर से बूरी तरह से कड़क हो चुका था और वो उसी अवस्था में रश्मि के पीछे जाकर खड़ा हो जाता है और उसके बदन को पीछे से कामुक नजरों से घूरने लगता
दीदी इस बात से बेखबर थी की ऋषि जाग चुका है और उनके एकदम पीछे आकर खड़ा है, वो अपनी ही धुन में थी और पूरी तन्मयता से अपने नंगे बदन को पोछे जा रही थी। वो ये सोच रही थी की अब कपड़े पहनने चाहिए, क्योंकी कभी भी मोनू वापस आ सकता है। उसे क्या पता की उसका भाई उसकी ये धमाकेदार चुदाई लाइव देख चुका है।
लेकिन ऋषि तो सोचता है की दीदी को चोदने के लिए उसे मेरी परमिशन थी, इसीलिए उसे कोई भी जल्दी नहीं थी। उसे तो कुछ और ही मंजूर था। कुछ क्षणों तक रश्मि दीदी के नंगे बदन को घूरने के बाद ऋषि ने उनको पीछे से पकड़ लिया और अपना लण्ड दीदी की नंगी गाण्ड की दरारों में जोर से दबा दिया और उसने अपने दोनों हाथों को आगे करके फिर से दीदी की चूचियों पर हमला बोल दिया।
अचानक इस तरह पकड़े जाने से दीदी चौंक गई। वो पीछे मुड़कर देखने की कोशिश करती है लेकिन ऋषि ने उसे इतनी जोर से पीछे से भींचकर रखा था कि वो पल्नट नहीं पाती तो दीदी अपनी गर्दन थोड़ी ऊपर उठाकर पीछे खड़े ऋषि की तरफ करके कहती है- “अरे ये क्या? छोड़ो मुझे। कभी भी मोनू वापस आ सकता है और तुम हो कि फिर शुरू हो गये। अभी मन नहीं भरा क्या? छोड़ो मुझे प्लीज…”
ऋषि जानता है की मैं कहीं छिपा हुआ सब देख रहा हूँ। इसीलिए उस पर दीदी की इन बातों का कोई असर नहीं हुआ और उसने दीदी को और भी जोर से को पकड़ लिया। अब उसने दीदी की गाण्ड पर अपने लण्ड का दबाव और भी बढ़ा दिया और उनकी दोनों चूचियों को और भी ज्यादा जोरों से मसलने लगा। फिर ऋषि ने अपना लण्ड धीरे-धीरे दीदी की गाण्ड में ऊपर-नीचे रगड़ना शुरू कर दिया।
रश्मि दीदी की नरम-नरम विशाल गददेदार गाण्ड में अपना लण्ड रगड़ने से उसे एक अलग ही सुख का अहसास हो रहा था और उसकी उत्तेजना भी अपने चरम में पहुँच जाती है।
ऋषि दीदी की गाण्ड में अपने ल्रण्ड को रगड़ते हुए ही दीदी के गालों को चूमकर बोला- “अभी क्या जल्दी है जान? अभी तो 12:30 ही बजा है, और तुम्हें तो मोनू की बेकार फिकर हो रही है वो अभी नहीं आयेगा और आ भी गया तो क्या? उसके सामने ही उसकी बहन चोदूंगा और वो अपना लण्ड हिलाएगा…”
रश्मि दीदी यह सुनकर चौंक गई पर वो कुछ कहने के लिये मुँह खोलने कोशिश करती, इससे पहले ही ऋषि ने अपने होंठ रश्मि के होठों से लगा दिए और उनकी मदमस्त जवानी का रस पीने लगा। ऋषि का लण्ड रश्मि दीदी की गाण्ड में दस्तक दे रहा था और उसके दोनों हाथ दीदी की चूचियों को मसल रहे थे, साथ ही वो दीदी के होठों से जवानी का रस चूस रहा था।
दीदी चाह कर भी कुछ बोल नहीं बोल पाई और लगातार अपने बदन को मसले जाने के कारण वो भी धीरे-धीरे गरम होने लगी और दीदी की वासना फिर उछाल मारने लगी।
अब ऋषि ने अपने दांये हाथ को दीदी की चूची से हटाया और धीरे-धीरे उनके पेट से स्पर्श करते हुए उसने अपना दांया हाथ दीदी की उभरी हुई जवान चूत पर रख दिया। अपनी जवान चूत पर ऋषि का हाथ लगते ही दीदी पर एक मदहोशी सी छाने लगती है और वो ऋषि का लण्ड फिर से अपनी चूत में लेने के लिये मचलने लगी।
ऋषि का हाथ अब रश्मि दीदी की चूत की दरारों के ऊपर घूम रहा था और दीदी का बदन फिर से उत्तेजना के मारे थरथराने लगता है। कुछ देर तक दीदी की चूत को सहलाने के बाद ऋषि ने अपनी एक उंगली दीदी की चूत के अंदर डाल दी और उसे हौले-हौले अंदर-बाहर करने लगा।
रश्मि दीदी मारे उत्तेजना के गरम हो गई और उनकी चूत से पानी निकलने लगा। उनके पैरों की शक्ति अब जवाब देने लगती है और अब खड़े रह पाना दीदी के लिये काफी कठिन हो गया।
दीदी की चूत से निकलने वाले पानी के अपने हाथों से लगते ही ऋषि समझ जाता है कि रश्मि अब फिर से गरम हो चुकी है, और लण्ड लेने के लिए तैयार है। पर वो तय नहीं कर पा रहा की लण्ड फिर से दीदी की चूत में डाले या फिर उनकी गददेदार गाण्ड मारे।? अब ऋषि और भी तेजी से उनकी चूत से खेलने लगा और अपनी उंगली दीदी की चूत से और भी तेजी से रगड़ने लगा।
रश्मि दीदी अब पूरी तरह से बेकाबू हो गई और उसके मुँह से- “आहहह… आह्ह्ह… ओफ़्फ़्फ़ सीह सीह्न की अवाजें निकलने लगी। दीदी के लिये उस पोजीशन में खड़े रहना अब संभव नहीं था। एक तरफ ऋषि का लण्ड बुरी तरह से उनकी गाण्ड से चिपका हुआ था और उसका एक हाथ रश्मि की दोनों चूचियों को मसल रहा था और दूसरी तरफ दूसरा हाथ उनकी चूत से खिलवाड़ कर रहा था।
रश्मि दीदी को बेहद आनंद आ रहा था लेकिन कुछ ही देर पहले वो ऋषि के लण्ड का स्वाद चख चुकी थी, इसलिये अपनी चूत में केवल एक छोटी सी उंगली से उन्हें वो सुख और संतुष्टी नहीं प्राप्त हो रही थी, जो उसे कुछ देर पहले ऋषि के लण्ड से मिली थी।
दीदी बदहवासी में अपना पूरा जोर लगाकर गोल घूमकर ऋषि से लिपट गई। ऋषि भी दीदी को अपने सीने से चिपका कर उनके चेहरे को बेतहशा चूमने लगा। रश्मि दीदी की विशाल चूचियां अब ऋषि की छाती से चिपकी हुई थीं, और वो खुद उसकी बाहों में। ऋषि उन्हें चूमे जा रहा था और अपने हाथों से उसकी दोनों बड़ी गाण्ड को मसलते जा रहा था। ऋषि ने कुछ देर तक दीदी को अपनी बाहों में थामे रखा। ऋषि दीदी के बदन की गर्मी का सुख लेता रहा और उनके नंगे जिश्म को सहलाते रहा। फिर उसने अपने पैरों को ढीला छोड़ दिया और घुटनों के बल नीचे बैठ गया। उसने अपने दोनों हाथों से दीदी की गाण्ड को पकड़ लिया और अपना मुँह उनकी चूत में लगा दिया।
अब रश्मि दीदी बेजान सी खड़ी थी और ऋषि उनकी बुर चूस रहा था। दीदी के हाथ ऋषि के सिर पर तेजी से घूम रहे थे, उनकी आँखें बंद थी और मुँह से सिसकियां निकल रही थी। दीदी को देखकर ऐसा लग रहा था कि उन्हें ऋषि का अपने जिश्म से खिलवाड़ बहुत पसंद आ रहा था और वो चाहती थी कि ऋषि उसके नंगे जिश्म से जी भरकर खेले।
कुछ देर तक खड़ी रहकर अपनी बुर चूसवाने के बाद रश्मि दीदी का हौसला पस्त हो जाता है। उनके पैरों में जान नहीं बची थी कि वो उनके गदराये बदन का भार उठा सके। अब दीदी भी नीचे बैठ गई और उनके नीचे बैठते ही ऋषि ने हौले से धक्का देकर उन्हें वहीं लिटा दिया।
जमीन पर बिछा कालीन अब बिस्तर का काम कर रहा था। ऋषि और रश्मि दीदी दोनों में अब वो धैर्य नहीं बचा कि वो पलंग तक जायें, लिहाजा दीदी भी बिना किसी विरोध के कालीन पर पीठ के बल लेट गई। नंगी रश्मि दीदी नीचे लेटकर कामवासना से अपने दोनों पैरों को ऊपर-नीचे करने लगी और अपनी दोनों चूचियों को अपने ही हाथों से मसलने लगी।
थोड़ी-थोड़ी देर में वो अपने होठों को अपने ही दातों से काट रही थी और दीदी के मुँह से सिसकारियां निकल रही थी। दीदी का ये मौन निमंत्रण पाकर पहले से ही उत्तेजित ऋषि और भी कामांध हो जाता है और फैसला करता है की एक बार और चूत लेने के बाद वो रश्मि की गाण्ड मारेगा।
ये सोचकर वो दीदी की दोनों जांघों को फैलाकर उसके बीच में बैठ गया और अपने लण्ड में मुँह से थूक निकाल कर लगाने लगा और अपने लण्ड को चिकना करने लगा। फिर उसने अपना लण्ड रश्मि दीदी की चूत में लगाकर एक हल्का सा धक्का दिया जिससे लण्ड आधा रश्मि दीदी की चूत में घुस गया।
दीदी की चूत जो दो बार चुदने से काफी खुल चुकी थी, आराम से आधा लण्ड अपने अन्दर ले लेती है। दीदी भी अपनी बुर में होने वाली वासना की खुजली से बचैन थी और इस बात का इंतजार कर रही थी कि ऋषि अब उनके जिश्म से खेलना छोड़कर अपना लण्ड उनकी बुर में डाले और चोदना शुरू करे। ऋषि का लण्ड अपनी चूत में पाकर दीदी बेहद आनंद का अनुभव करने लगी और अपनी चूत को ऊपर उछाल-उछालकर वो ऋषि का पूरा लण्ड अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी।
ऋषि दीदी की मंशा समझ गया और एक जोर के झटके के साथ अपना पूरा का पूरा लण्ड रश्मि दीदी की चूत में डाल दिया। लण्ड के झटके के साथ अंदर जाने के साथ ही दीदी के मुँह से एक जोर की ‘आह्हह’ निकल्र गई। उनकी आँखें बंद हो गई और मुँह खुल गया। फिर वो बार-बार अपनी जीभ अपने होठों पर फेरने लगी। कामवासना के अतिरेक में उनका सिर कभी दाएं तो कभी बायें घूम रहा था। पूर्णतः उन््मुक्त और नंगी दीदी ने अपने जिश्म को पूरी तरह से ढीला करके ऋषि को समर्पित कर दिया और ऋषि के लण्ड के लिये अपनी चूत में प्रवेश को और भी असान बना दिया।
अब वो ऋषि के लण्ड को अपनी चूत की गहराईयों तक महसूस करना चाहती थी। नंगी रश्मि दीदी नागिन की तरह कमरे के कालीन में बल खाने लगी और उनके ऐसे बल खाने से वो और भी मादक लगने लगी और दीदी ने ऋषि को अपनी चूत में और तेजी से प्रहार करने के लिये मजबूर कर दिया।
ऋषि ने भी दीदी के जिश्म पर ऐसा अधिकार जमा लिया कि उन्हें चोदने के लिये अब उसे दीदी की सहमति की भी जरूरत नहीं रह गई थी। ऋषि ने जबरन ही सही लेकिन जब दीदी को मजबूर करके नंगी किया और उनकी बुर को चोदा तब दीदी को अपने बदन के जवान होने का अहसास हुआ और ये भी अहसास हुआ कि उनके जवान जिश्म की जरूरतें ऐसी हैं जिसे केवल्न एक मर्द ही पूरा कर सकता है।
रश्मि दीदी की हालत ऐसी हो गई थी कि ऋषि का लण्ड ही उनकी एकलौती जरूरत बन गई थी और उस लण्ड को लेने के लिए न तो उसे किसी मखमली बिस्तर की जरूरत थी और ना ही पलंग की और इसीलिये ऋषि ने जब उन्हें कमरे के कालीन पर चोदने के लिये लिटाया तो वो बिना किसी विरोध के उसी जगह चुदने के लिये तैयार हो गई।
रश्मि दीदी ऋषि से चुदने के बाद काफी हल्का महसूस कर रही थी। अपने शरीर में उसे एक अजीब बेचैनी जो महसूस होती रहती थी, जिसे वो समझ नहीं पाती थी, उसकी वो बेचैनी शांत हो गई थी। पहली बार की चुदाई ने ही उसके मन और मस्तिष्क को प्रसन्न कर दिया और ये बोनस सेक्स उनके लिये एक दवा का काम कर रहा था। दीदी अपनी पहली चुदाई से खुश तो थी पर उस चुदाई ने उनकी चुदने की भूख को और बढ़ा दिया था और दीदी और भी मादक हो गई थी।
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