बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 11

(अन्तर्वासना) 22

redwalker69 2026-10-29 Comments

This story is part of a series:

अचानक मेरी नींद खुली और मैंने घड़ी की तरफ देखा रात के 3:00 बजे थे। मेरे बगल का बेड खाली पड़ा था मतलब ऋषि को दीदी के साथ कमरे में घुसे 5 घंटे से ज्यादा हो गए थे पर वो बाहर नहीं आया था। मुझे लगाकी वो नीचे हो सो गया था।

 

मैं घीरे से नीचे गया। कमरे का दरवाजा अन्दर से बंद था और खिड़की पर पर्दा पड़ा हुआ था। मैं अन्दर देखने का रास्ता ढूँढ़ने लगा।

 

पर तभी मुझे दीदी की आवाज सुनाई दी- “आहह… दर्द होता है। छोड़ो भी अब। तुम्हारा मन नहीं भरता क्या? आहह… इस्स्स…”

 

ऋषि- रश्मि मेरी जान, अगर मेरा बस चले तो तुम्हें मैं दिन रात नंगा करके सिर्फ चोदता रहूँ और कोई काम न करूं।

 

रश्मि- नहीं आहह… अब फिर से पीछे आअहह… नहीं ओह्हह इस्ह… अभी भी दर्द हो रहा है आअह्ह्ह… ऋषिऊऊ नहीं आअहह… आगे डालो ना आहह…”

 

ऋषि – जान जो मजा तुम्हारी गाण्ड में है वो चूत में नहीं है। चूत भी मारूंगा पर गाण्ड मारने के बाद। अभी तो बहुत टाइम है अपने पास।

 

रश्मि दीदी ये सुनकर हँसते हुए बोली- “अरे क्या? आहह… सोने नहीं दोगे क्या मुझे? आहह… ओऊ… 3:00 तो बज गए है आहह… सुबह 7-8 बजे तक जागना होगा ऊओहह… आअहह…”

 

मैंने फौरन एक स्टूल लिया और दरवाजे के पास धीरे से रखकर उसके ऊपर खड़ा हो गया। दरवाजे के ऊपर रोशनदान से अब मैं अन्दर देखने लगा। कमरे में जीरो वाट का बल्ब जल रहा था और उसकी ल्राल रोशनी में मैंने देखा की ऋषि बेड पर बैठा था और उसने दीदी को अपने आगोश में ले रखा था और उनके मम्मे नोंच रहा था। दोनों के शरीर पर एक सूत का धागा भी नहीं था।

 

ऋषि ने दीदी से कहा – “अब जल्दी से अपनी गाण्ड दे दो मेरी जान, वरना तुम्हारा रेप कर दूंगा…”

 

दीदी मुश्कुराते हुए बोली – “तो करो न रेप… कब से इच्छा थी की कोई मेरा रेप करे…”

 

सच ऋषि ने एक ही दिन में दीदी को अनाड़ी से खिलाड़ी बना दिया था।

 

ऋषि बोला – अच्छा तो चल आज तेरी ये इच्छा भी पूरी कर देता हूँ। हरामजादी कुतिया, जिस गाण्ड को मटका मटकाकर तू दुनियां की झांटें जाती है आज उसी गाण्ड में लण्ड पेल्कर तेरा घमंड तोड़ूंगा रंडी। बहुत अकड़ दिखाती थी न… देखा कैसे तेरी बुर का मैंने भोसड़ा बना दिया। अब तेरी गाण्ड से तेरी बची हुई अकड़ निकालूँगा।

 

रश्मि दीदी को गलियां सुनकर बहुत मजा आने लगा। उन्हें लगा की सच में ऋषि उनके रेप करने वाला है। वो भी रोल-प्ले में उसका साथ देने लगी।

 

दीदी – भगवान के लिए मुझे छोड़ दो। मुझे जाने दो।

 

ऋषि – “साली हरामजादी रंडी, अब तुझे कोई नहीं बचा सकता जल्दी से कुतिया बन जा…” कहकर ऋषि ने दीदी गाण्ड पकड़कर उन्हें पलट दिया और उनकी गाण्ड पर एक जोर का थप्पड़ जड़ दिया और बोला- “चल छिनाल जल्दी से अपनी गाण्ड ऊपर उठा…”

 

दीदी को थप्पड़ पड़ने से बहुत दर्द हुआ और वो बोली- “आहह… अरे ऋषि क्‍या कर रहे हो?”

 

ऋषि – “तुम्हीं तो कह रही थी जान तुम्हारा रेप करने को। रेप कोई प्यार से थोड़ी किया जाता होगा?” ऋषि मुश्कुराते हुए बोला।

 

दीदी मुश्कुराते हुए- “तुम्हें बड़ा मजा आ रहा था रेप का क्‍यों?”

 

ऋषि – “अब टाइम मत वेस्ट करो मेरी जान। जल्दी से गाण्ड ऊपर कर दो। वरना रात भर सोने नहीं दूंगा…”

 

रश्मि दीदी अब समझ गई की ऋषि को मना करने का कोई फायदा नहीं। वो उनकी गाण्ड में अपना लण्ड पेले बिना मानेगा नहीं। ये सोचकर दीदी ने अपनी गाण्ड ऊपर उठा दी और दोनों हाथों से तकिये को पकड़कर उसमें अपना मुँह दबा दिया। अपनी आँखें बंद करके वो अपनी गाण्ड पर होने वाले जुल्म के लिए तैयार हो गई। ऋषि ने दीदी की गाण्ड को थोड़ा और ऊपर उठाकर उनकी टांगें थोड़ा और खोल दी और उनके चूतरों को मसलने लगा। फिर उसने अपना लण्ड छड़ी की तरह दीदी की चूत और गाण्ड पर मारना शुरू किया।

 

दीदी ने दर्द की उम्मीद में अपने होंठों को अपने दांतों से काट लिया। थोड़ी देर पहले मुझे अफसोस हो रहा था की मैं सो क्‍यों गया, और दीदी की गाण्ड चुदाई नहीं देख पाया। अब मेरा अफसोस गायब हो गया और उसकी जगह उत्तेजना ने ले ली। अब मैं बेसब्री से इंतजार कर रहा था की ऋषि अपना हलब्बी लण्ड दीदी की गाण्ड के छल्ले के पार कर दे।

 

ऋषि ने दीदी के चूतरों को पकड़कर फैलाया और अपना लण्ड दीदी की गाण्ड के छेद पर रख दिया। मेरा दिल धक्‌ धक्‌ करने लगा और तो दीदी का क्या हाल होगा? ऋषि ने दीदी की गाण्ड के छेद को फैलाते हुए अपना लण्ड उनकी गाण्ड में ठूंस दिया।

 

दीदी का मुँह तकिया से दबा होने के बावजूद उनके मुँह से एक चीख निकल गई- “उईई माँ मर गईई…”

 

ऋषि ने अगले धक्के के साथ ही अपने लण्ड को जड़ तक दीदी की गाण्ड में पेल दिया। दीदी का शरीर कांपने लगा। ऋषि फिर से रेप वाले मूड में आकर दीदी के बाल पकड़कर बोला- “बोल साली रंडी। दिखाएगी फिर से मुझे नखरे… हरामजादी, भोसड़ी वाली… कुतिया…” दीदी को गाल्रियां देने के साथ ही उसके धक्कों का जोर बढ़ता जा रहा था।

 

पर दीदी तो ऋषि की खरीदी हुई रांड़ की तरह चुपचाप सब सुन रही थी और अपनी गाण्ड में लण्ड पिलवा रही थी। गाण्ड की चुदाई में ऋषि को इस बात का मजा आता था की गाण्ड के छेद का कोई अंत नहीं होता। जहां तक चाहे पेल्ते जाओ। ऋषि ने दीदी को पेट के बल लिटा दिया और उनकी चूचियों को दबा-दबाकर उनकी गाण्ड मारने लगा।

 

शुरू में तो दीदी के मुँह से केवल चीखें ही निकल रही थी पर धीरे-धीरे उनको भी मजा आने लगा। अब ऋषि ने अपनी तीन उंगलियां गचाक से दीदी के चूत में पेल दी और उनकी गाण्ड में धककों की स्पीड और बढ़ा दी। दीदी के एक छेद में ऋषि की उंगलियां और दूसरे छेद में लण्ड अन्दर-बाहर हो रहे थे। एक साथ दोनों छेद में ऋषि को पाकर दीदी पूरी तरह मदमस्त हो गई और झड़ने लगी। ऋषि भी अब कगार पर था तो उसने अपने धक्कों की रफ़्तार और बढ़ा दी और दीदी की गाण्ड में ही झड़ गया।

 

दीदी – “अह॒ह… जान निकाल दी तुमने मेरी आअज…”

 

ऋषि – “अरे यार, आदत नहीं हुई तुम्हारी अभी तक?”

 

दीदी – “आदत? अरे मैं कोई रंडी हूँ जो रोज 10 बार चुदती हूँ और गाण्ड मरवाती हूँ। पहली बार आज तुम्हारा ही लिया है आगे और पीछे भी। समझे? अब हटो मुझे बाथरूम जाना है.

 

ऋषि – रुको… मैं भी चलता हूँ। तुम्हें मूतते देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

 

में समझ गया की दोनों बाहर आने वाले हैं तो मैं जल्दी से ऊपर आ गया और अपने कमरे में आकर लेट गया। पर मेरी आँखों में नींद नहीं थी।

 

करीब आधे घंटे बाद ऋषि भी कमरे में आया और मुझे जगा हुआ देखकर बोला – “क्यों बे गान्डू, सोया नहीं? हाँ वैसे भी जिसकी बहन चुद रही हो उसे नींद कहां आती है। हा हा हा…”

 

ऋषि मेरा मजाक उड़ाता हुआ बोला – “पर एक बात तो है, मैंने आज तक जितनी भी लड़कियां चोदी है रश्मि को चोदने का मजा सबसे ज्यादा है। क्या झटके देती है चुदते हुए। तीन बार चूत मारी और दो बार तेरी बहन की कोरी गाण्ड… पर अभी भी इच्छा हो रही है की फिर से चट्टान पर रख चोद दूं साली को. अब मेरे मुँह से निकल गया- “5 बार किया तुमने। सुबह भी तो 3 बार किया था। कैसे?”

 

ऋषि – “अबे दवाई खाई थी मैंने। आखिर मेरे यार की बहन है, पहली चुदाई धमाकेदार होनी ही चाहिए थी। अब सो जा और मुझे भी सोने दे। बहुत थक गया हूँ.

 

अगले दिन भी ऋषि ने दीदी को खूब चोदा और उसके बाद जब भी उसे मौका मिलता वो दीदी को अपने घर लेजाकर या मेरे घर आकर चोदता था। जब घर पर कोई नहीं होता तो दीदी खुद उसे फोन करके बुला लेती थी और घंटों चुदवाती थी। ऋषि जब भी दीदी को चोदता मुझे पूरी चुदाई डिटेल में जरूर बताता, पर दीदी मेरे सामने शरीफ बनी रहती थी।

 

मैंने किरण आंटी को एक दो बार चोदने का प्लान बनाया, पर कुछ हो पाता उससे पहले की ऋषि के पापा अपनी परिवार को भी अपने साथ दिल्‍ली ले गए। मेरे अरमान दिल में ही रह गए, पर मुझे लगा की चल्नो ऋषि अब दीदी को नहीं चोद पायेगा।

 

एक दिन ऋषि का फोन आया। दीदी कहीं बाहर गई थी तो वो मुझसे बात करने लगा। उसने मुझे बताया की वो दो-तीन दिन के लिए रक्षाबंधन पर आ रहा है। उसने मुझे बोला की 3 दिन वो अपने घर पर अकेला रहेगा।

 

उसने दीदी को यही बताने के लिए फोन किया था और वो बाद में फिर से फोन करके दीदी से बात कर लेगा।

 

मुझे अब ऋषि से चिढ़ होती जा रही थी। उधर दीदी ने अब मुझसे बात करना काफी कम कर दिया था, शायद इसकी एक वजह ये थी की वो समझ गई थी मेरी नजरों में उनके लिए फर्क आ गया है। इसलिए मुझे दीदी की तरफ से भी कोई ऐसा मौका नहीं मिला जिसका मैं फायदा उठाता। दीदी दिन रात ऋषि के ख्याल में ही खोई रहती थी।

 

मैंने देखा रात को वो मेरे सोने का इंतेजार करती रहती है तो मैंने एक दो बार सोने का नाटक करके देखा की मेरे सोने के बाद वो गन्दी किताबें पढ़ती है और अपनी चूत में उंगली करती है। ये सब और फिर ऋषि के मुँह से दीदी की चुदाई की कहानियां सुनकर मेरे अन्दर दीदी को चोदने की इच्छा दिन पर दिन आग पकड़ती जा रही थी। मुझे लग रहा था की ऋषि फिर से दीदी को चोदने आ रहा है और मैं उसे कैसे भी रोक।

 

ऐसे में एक दिन मम्मी ने मुझे बुलाया और कहा – “तेरी मौसी का फोन आया था, इस बार तेरे कजिन्स राखी परनहीं आएंगे…”

 

“हर साल्र तो वही लोग आते हैं मम्मी, क्‍यों न इस बार मैं दीदी को लेकर वहां चला जाऊँ?” मैंने तुरंत मम्मी से

कहा। मुझे लगा की जब हम यहाँ नहीं होंगे तो ऋषि लण्ड हिलाता वापस चला जायेगा।

 

मम्मी – ठीक है। मैं आज ही तेरी मौसी को फोन कर देती हूँ।

 

मोनू – नहीं मम्मी, हम उन्हें सरप्राइज देंगे।

 

मम्मी ने पैसे देकर मुझे बोला जाकर ट्रेन के टिकेट बुक करवा लाओ और मैं रिजर्वेशन करवाने चला गया। राखी से एक दिन पहले की टिकेट आराम से मिल गई और जब मैं लौट कर आया तब तक दीदी को भी मम्मी ने बता दिया था। अब दीदी को तो पता नहीं था की उनका यार उनको चोदने के लिए उसी समय यहाँ आने वाला था, तो वो आराम से जाने के लिए तैयार हो गई। ट्रेन में बैठते ही दीदी मुझसे पहले की तरह ही बातें करने लगी और मुझे लगा की हमारे लौटने तक सब नार्मल हो जायेगा। सफर अच्छा रहा और हम रात होने से पहले मौसी की कोठी पर पहुँच गए।

 

जब हमने बेल बजाई तो मौसी का कुत्ता राकी हमारे स्वागत के लिए भौंकता हुआ बाहर आया। दीदी को राकी से बहुत डर लगता था। राकी एक हटूटा-कट्‌टा जर्मन शेफर्ड था। वैसे दीदी को सभी कुत्तों से डर लगता था पर राकी से वो कुछ ज्यादा ही डरती थी। तब तक मनीष भी बाहर आ गया।

 

मैं आपको बता दूं की मेरी मौसेरी बहन का नाम मोनिका है। और उसकी भी उम्र 19 साल है और मेरा कजिन मनीष उससे एक साल बड़ा है पर मेरी उससे अच्छी बनती है। हम दोस्तों की तरह ही रहते हैं। मेरे मौसी और मौसा दोनों डाक्टर हैं, और शहर का सबसे बड़ा नर्सिंग होम चलाते हैं। कुल मिलाकर अच्छे पैसे वाले लोग हैं। मनीष हमें देखकर बहुत खुश हुआ और दरवाजा खोलने लगा।

 

पर रश्मि दीदी बोली- “पहले राकी को बांध दो फिर मैं अन्दर आरऊँगी…”

 

मनीष हँसते हुए राकी को पकड़कर अन्दर ले गया और हम पीछे-पीछे अन्दर आ गए। अन्दर आकर हमने देखा की घर पर और कोई नहीं था। तब मनीष ने बताया की मौसी, मौसा और मोनिका हमारे मामा के घर चले गए हैं, और घर पर केवल मनीष ही है।

 

दीदी ने कहा – “लो सरप्राइज देने की जगह मिल गया। मोनू तुम्हें आने से पहले फोन कर देना चाहिए था?”

 

मनीष ने कहा कोई बात नहीं। मैं अभी उन लोगों को वापस बुला लेता हूँ और उसने मामा के घर फोन करके हमारे आने के बारे में बता दिया। तब मौसी ने फोन पर मुझसे कहा की अच्छा हुआ की तुम लोग आ गए अब तुम लोग आराम करो, हम कल दोपहर तक वापस आ जायेंगे।

 

फिर हम मनीष के साथ डिनर करने चले गए और वापस आते आते 10:00 बज गया और रश्मि मोनिका के रूम में सोने चली गई और मैं मनीष के रूम में उसके साथ सोने आ गया। मनीष मुझसे बोला- “यार आज घर पर कोई था नहीं, इसीलिए एक दोस्त से ब्लू-फिल्म लेकर आया था। देखेगा?”

मैंने कहा – “पर अगर टीवी रूम में रश्मी दीदी आ गई तो?”

 

मनीष बोला- यहीं रूम में कंप्यूटर पर लगा लेते हैं…” और हम ब्लू-फिल्म देखने लगे और उसने अलमारी से व्हिस्की की बोतल निकाली और बोला- “आज ऐश करवाता हूँ तुझे…” और दो लार्ज पेग बना दिए।

 

मैंने इससे पहले बियर ही पी थी, ये पहली बार मैं व्हिस्की पी रहा था और हम दोनों भाई पीते-पीते ब्लू-फिल्म का मजा ले रहे थे। पर दोस्तों हर ब्लू-फिल्म की हीरोइन में मुझे रश्मि दीदी नजर आ रही थी और उसको चोदने वाला हर आदमी ऋषि। देर रात तक हम पीते रहे, हमें काफी चढ़ भी गई थी और हम काफी गरम भी हो गए थे।

 

मोनू – भाई रहा नहीं जा रहा, मैं तो मुठ मारने जा रहा हूँ।

 

मनीष – यार, कभी कोई लड़की चोदी है?

मोनू – “नहीं यार, हमारी किश्मत में लौंडिया कहां? हम तो हांथों से गुजारा कर रहे हैं भाई। तुम्हारी तो गर्लफ्रेंड है, तुमने तो बहुत पेला होगा?”

 

मनीष – “कहां यार, कुछ दिनों पहले एक दोस्त का घर कुछ दिनों के लिए खाली था तो उसने एक रात को रंडी बुलाई थी, तब हम दोनों ने उसको चोदा था। उसके बाद कभी मौका नहीं मिला। गर्लफ्रेंड है तो मगर ज्यादा कुछ करने नहीं देती। उस रंडी की उम्र 35-38 साल की होगी फिर भी बहुत मजा आया था। सोचता हूँ कोई 18-20 साल का कड़क माल हो तो लेने में कितना मजा आयेगा…”

 

मोनू – भाई लौंडिया तो अब सपने में मिलेगी तो तुम जल्दी से हिला के सो जाओ।

 

मनीष – यार अगर बुरा न मानो तो एक बात कहूँ?

 

मोनू – ऐसी क्या बात है?

 

मनीष – यार लौंडिया तो यहीं है और बहुत करारी भी, मेरा तो बहुत दिनों से दिल है उसपर अगर तुम कहो तो मैं उसको चोद लूँ।

 

मोनू – “अब इस वक़्त लौंडिया? मैं कहूँ तो चोदेगा मतलब? किसकी बात कर रहा है?”

 

मनीष – रश्मि की।

 

मुझे ये सुनकर बहुत गुस्सा आया की साला पूरी दुनियां को चोदने के लिए मेरी ही बहन नजर आती है। मैंने तो अभी तक उनको चोदा नहीं और ये साला पहले दीदी को चोद ले।

 

पर मैं उसके सामने खुलना नहीं चाहता था इसीलिए बोला – “या तो तुम्हें ज्यादा चढ़ गई है या तुम बहुत बड़े कमीने हो। साले बहन पर ऐसी नजर रखते हो? अगर मैं तुमसे कहूँ की मैं मोनिका को चोदना चाहता हूँ तो तुम्हें कैसा लगेगा? तुमको ज्यादा चढ़ गई है इसीलिए मैं तुमको माफ कर देता हूँ। अगर ये बात तुमने होश में की होती तो तुम्हें बहुत मारता…”

 

मनीष – “यार कहा था की बुरा मत मानना। तुम तो नाराज हो गए। अगर तुम मोनिका को चोदने को कहोगे तो मैं कहूँगा की अगर चोद सको तो चोद लो। यार हम लोग सेक्स को अजीब तरीके से देखते हैं। यार एक बात बताओ रश्मी या मोनिका कया कभी चुदेंगी नहीं? अब उनकी चूत में एक आदमी का लण्ड जाये, दो का या तीन का क्‍या फरक पड़ता है?”

 

अन्दर ही अन्दर मेरे मन में आया की बेटा मेरी बहन तो चुद भी चुकी और क्या पता तेरी बहन ने भी कितने लण्ड लीले होंगे। सबको लगता है की हमारी बहन तो बहुत भोली है पर जब से दीदी को ऋषि से चुदवाते देखा तब पता चला की हर जवान लड़की की जरूरत लण्ड है।

 

पर ऊपर से मैंने मनीष की बात का विरोध किया- “चुप रहो यार, अपनी बहनों के बारे में कोई ऐसा नहीं सोचता…”

 

मनीष – मैं तुम्हें सगे भाई बहन की ब्लू-फिल्म दिखा सकता हूँ मेरे पास है। इसमें लड़के और लड़की अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिखाते हैं जिससे ये पता चला की दोनों के बाप और एड्रेस एक ही हैं, और दोनों शकल से भी भाई बहन लगते हैं, और फिर धुआधार चुदाई करते हैं।

 

मोनू – मुझे नहीं देखनी यार कोई फिल्म। दीदी नहीं मानेगी।

 

मनीष को क्या पता था की मैं अपनी सगी बहन की लाइव ब्लू-फिल्म देख चुका हूँ और उससे ज्यादा दीदी को चोदने को मरा जा रहा हूँ। कुछ व्हिस्की का असर कुछ मनीष की बातों का मेरा लण्ड एकदम लोहे के राड की तरह खड़ा हो गया। इसी नशे में जब मेरे मुँह से निकला की दीदी नहीं मानेगी तो मनीष समझ गया की मैं मान गया हूँ।

 

मनीष ने इसको महसूस किया और आग में घी डालते हुए बोला – ‘सोचो ऐसा सुनेहरा मौका दुबारा नहीं मिलेगा जब रश्मि और हम दोनों के सिवा घर में कोई नहीं है। अगर आज मैंने रश्मी को चोद लिया तो तुमसे भी चुदवा दूंगा। फिर जिंदगी भर के लिए तुम्हारे लिए फ्री की चूत का जुगाड़ हो जायेगा। कसम से कह रहा हूँ की अगर ऐसा मौका मुझे मोनिका के साथ मिलता तो पूरी रात नंगी करके चोदता और तुमसे भी चुदवाता…”

 

मैंने सोचा कि ये कह तो सही रहा है और ऋषि ने कैसे बेदर्दी से दीदी को चोदा था, पर फिर भी वो उससे चुदवाने दौड़ी-दौड़ी जाती है। पर मैंने मनीष से कहा – “दीदी ने अगर घर पर बोल दिया तो?”

 

मनीष मुझे तैयार होता देखकर खुश हो गया और बोला – “यार तुम मेरे साथ तो चलो और मैं जो बोलूं वो करते रहना बस…”

 

मैंने कहा – “तुम जाओ मैं बाद में आ जाऊँगा…”

 

मनीष बोला – “यार डरो मत मेरे साथ आओ…” फिर वो मोनिका के रूम की तरफ चला गया और मैं भी हिम्मत करके उसके पीछे चल दिया।

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