बहन की चुदाई की यादें (पाप पुण्य) – 10
(Family Sex Stories) 89
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ऋषि उनकी इस मादकता को अब महसूस कर रहा था। नंगी रश्मि दीदी की मादक अदाओं ने ऋषि को उत्तेजना की चरम ऊंचाईयों तक पहुँचा दिया और उसका लण्ड और भी कड़क हो गया। अब वो और तेजी से रश्मि दीदी की चूत में प्रहार करने लगा। वो दीदी की दोनों विशाल चूचियां अपने हाथों पकड़कर जोर-जोर से मसलने लगा। दीदी भी वासना के सागर में तैरने लगी और अपनी कमर को झटके मार-मारकर उछालने लगी और ऋषि के लण्ड को अपनी चूत की गहराईयों तक पहुँचाने में उसका साथ देने लगी।
ऋषि एक तरफ तो दीदी की चूत में तजी से अपना लण्ड अंदर-बाहर कर रहा था और दूसरी तरफ उनकी चूचियों को भी मसले जा रहा था। अब दीदी ने अपने हाथ उसके दोनों हाथ पर रख लिये और मसलने लगी। दीदी अपनी छातियों को और भी जोर मसलने के लिये ऋषि को उकसा रही थी। कुछ देर के बाद दीदी ने अपने हाथ उसके हाथों से हटाए और वो अपने हाथों से उसकी पीठ बाहों और सिर को सहलाने लगी।
रश्मि दीदी के नरम हाथों के अपने बदन में घूमने से ऋषि को बेहद आनंद आ रहा था और अब मारे उत्तेजना के उसने दीदी की दोनों चूचियों को छोड़ दिया और उनके जिश्म पर ल॒ुढ़क गया और दीदी को अपनी बाहों में भर लिया। दोनों नंगे जिश्म एक बार फिर गुत्थम गुत्था हो गये और ऋषि ने दीदी के होठों पर अपने होंठ रख दिया और चूसने लगा। कुछ देर तक दीदी के होठों को चूसने के बाद ऋषि अपनी जीभ उनके होठों पर फिराने लगा और फिर धीरे से उनके मुँह के अंदर अपनी जीभ डाल दी और दीदी की जिभ से रगड़ने लगा।
ऋषि की जीभ के अपनी जिभ से टकराने से रश्मि दीदी को बेहद मजा आने लगता है और वो उसकी जीभ को चूसने लगती है। कुछ देर तक अपनी जीभ दीदी के मुँह रखने के बाद ऋषि ने उसे बाहर निकाला और दीदी को उनकी जीभ अपने मुँह के अंदर डालने के लिये बोला। रश्मि दीदी ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली तो ऋषि उसे चूसने लगा। दीदी की जीभ चूसने से उसे ऐसा आनंद मिल्रा की वो सब कुछ भूलकर उसी काम में ल्रग गया।
रश्मि के मुँह से निकलने वाले रस से ऋषि सराबोर होकर वो उसे पीने लगा। दोनों ने एक दूसरे को जोर से भीचकर रखा हुआ था और बारी-बारी एक दूसरे के मुँह में अपनी जीभ डालते और एक दूसरे को उसे चूसने का आनंद दे रहे थे।
लगभग 15-20 मिनट तक इस क्रिया को दोहराने से दोनों के शरीर में ऐसी गर्मी पैदा हो जाती है कि दोनों ही पशीने से लथपथ हो जाते हैं। गर्मी इतनी बढ़ गई कि ऋषि को रश्मि को अपनी बाहों से छोड़ना पड़ा और वो फिर से उकड़ू बैठकर उसे चोदने लगा। ऋषि अपने हाथ अब कालीन पर रखकर दीदी की बुर में तजी से लण्ड पेल रहा था। तभी रश्मि दीदी रिश् के हाथ को उठाकर अपनी चूची पर रखने का प्रयास करती है। ऋषि समझ जाता है कि रश्मि अपनी चूची को मसलवाना चाहती है।
लेकिन ऋषि अपने हाथ उसके चूची पर नहीं रखता और उसे कहता है- “मेरी रांड़, जैसा तू मेरे हाथों से इसे मसलवाना चाहती है वैसे ही इन्हें मसल तभी मुझे समझ आयेगा कि तुझे क्या और कैसे मसलवाना पसंद है?” दीदी ने पहले तो मना किया और बोली- “नहीं, मुझे शर्म आती है.
तब ऋषि कहता है – “मसलवाने में शर्म नहीं आती कुतिया तो फिर खुद मसलने में कैसी शर्म? जो मैं कहता हूं वो कर। तुझको रंडियों जैसे करते देखकर मुझे मजा आएगा और मैं तुम्हें और मजे से चोदूंगा मेरी रांड। अब और मजे लेने हो तो नखरे मत कर, और वो करो जो मैं कहता हूं कर। और सुन मेरे साथ सेक्स करते समय आगे से कभी शर्म वर्म की बात मत करना समझी? नहीं तो पूरा मजा कभी भी नहीं ले पायेगी…”
रश्मि दीदी थोड़ी न नुकुर करके उसकी बात मान लेती है और अपने हाथों से अपने चूचियों को मसलने लगती है। अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों को जब रश्मि दीदी अपने ही हाथों से मसलने लगी तो दोनों विशाल चूचियां कभी ऊपर कभी नीचे तो कभी दांए बांए हिलने लगीं। अपने ही हाथों से अपनी चूचियों को मसत्नते हुए रश्मि दीदी बला की कामुक लग रही थी और इससे ऋषि की उत्तेजना और भी चरम शिखर तक पहुँच गई।
ऋषि लगातार दीदी की बुर में अपना लण्ड अंदर-बाहर कर रहा था। कुछ देर तक ऐसे ही उन्हें चोदने के बाद जब ऋषि ने अपना लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकाला तो रश्मि दीदी बेचैन हो गई और हवा में ही जोर-जोर से अपनी कमर उछालने लगी। दरअसल दीदी कुछ और देर तक उसके लण्ड का मजा लेना चाहती थी। वो बस झड़ने ही वाली थी कि ऋषि ने अपना लण्ड उनकी चूत से बाहर निकाल लिया।
ऋषि अब दीदी को कुतिया बनाकर चोदना चाहता था और इसीलिये उसने अपना लण्ड बाहर निकाला था। ऋषि ने दीदी को पलटकर कुतिया बनने के लिये कहा।
रश्मि दीदी अभी और चुदवाना चाहती थी इसलिये ऋषि की बात मानने के अलावा उनके पास कोई भी चारा नहीं बचा था और वो पल्रटकर अंपने हाथों और पैरों पर हो गई। अब ऋषि ने दीदी को अपनी कमर को ऊपर उठाने के लिये कहा तो दीदी अपनी कमर उठाकर कुतिया की तरह चुदवाने के लिए खड़ी हो गई। अब दीदी की दोनों विशाल चूचियां नीचे की तरफ लटक गईं और उनकी बड़ी गाण्ड ऋषि की तरफ खुल गई।
दीदी की नंगी गाण्ड को देखते ही ऋषि पागल हो गया और उसे जोरों से चूमने लगा। फिर वो अपना लण्ड दीदी की गाण्ड के पास ले गया और उनकी चूत को तल्राशते हुए अपना लण्ड दीदी की चूत में फिर से घुसा दिया और रश्मि दीदी को कुत्ते की तरह पीछे से चोदने लगा। दीदी अब अपनी गाण्ड को हिला – हिलाकर उसका लण्ड अपनी चूत में ले रही थी और ऋषि भी बड़ी तेजी से अपना लण्ड उनकी चूत में डाल रहा था।
गाण्ड उठाकर चुदवाने के कारण ऋषि को दीदी की गाण्ड साफ दिखाई दे रही थी। ऋषि ने अपने मुँह में थोड़ा सा थूक भरकर दीदी की गाण्ड के छेद में डाल दिया और दीदी की गाण्ड के छेद को अपनी अंगूठे से दबाकर धीरे – धीरे मसलने लगा।
अपनी चूत में ऋषि का लण्ड और गाण्ड में अंगूठा रगड़े जाने से दीदी और भी कामुक हो गई और अपने चूतरों को और भी जोरों से हिलाने लगी, जिससे उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी तेजी से हिलने लगीं। ये देखकर ऋषि की उत्तेजना और भी बढ़ गई। अब ऋषि ने उत्तेजना के मारे अपनी एक उंगली दीदी की गाण्ड में डाल दी और उसे अंदर-बाहर करने लगा और अपने लण्ड से उनकी बुर चोदना भी जारी रखा।
अपने दोनों छेदों में लगातार प्रहार से रश्मि दीदी उत्तेजना के मारे पागल हो गई और थरथराने लगी। दीदी को ऐसा लगा कि यदि थोड़ी देर तक और उसके साथ ऐसा हुआ तो वो मारे उत्तेजना के बेहोश हो जायेगी। उसकी सांसें उखड़ने लगती है और वो वो खुद पर पर काबू नहीं रख पाती और कुछ ही क्षणों में- “आह्ह्ह… ओफ़्फ़ आई माँ555“ की आवाज निकालते हुए झड़ गई।
झड़ते ही दीदी ने चैन की सांस ली और उनका शरीर ढीला पड़ गया। वो निढाल होकर वहीं कालीन पर ही लेट गई। लेकिन इधर ऋषि का माल अभी नहीं गिरा था इसलिये उसने दीदी को फिर से खींचकर अपने पास किया और उनको पीछे से थोड़ा उठाकर अपनी जांघों के पास बैठाकर चूत में लण्ड डालकर चोदने लगा।
ऋषि को पता है कि दीदी झड़ चुकी है तो इस बार वो भी तेजी से अपना लण्ड अंदर-बाहर करने लगा और कुछ ही देर में वो भी झड़ गया और जैसे उसका माल बाहर आया तो उसने अपना लण्ड दीदी की चूत से बाहर निकालकर अपना पूरा माल दीदी की गाण्ड में उड़ेल दिया और वो रश्मि दीदी के ऊपर ही लेट गया।
मैं अब धीरे से अपनी जगह से निकलकर चुपचाप घर से बाहर निकल गया। मेरा खुद उत्तेजना से बुरा हाल हो गया था और मैंने खुद से कहा- “अब कैसे भी हो मुझे भी चूत चाहिए…” 35-40 मिनट के बाद मैं वापस घर की तरफ चल पड़ा। मैं सोच रहा था की दीदी मुझे क्या कहेगी? अगर वो मुझसे पूछेगी की मैं क्यों ऋषि को घर में उनके साथ अकेला छोड़ गया था तो मैं क्या जवाब दूंगा? यही सब सोचते-सोचते मैंने बेल बजाई।
दीदी ने दरवाजा खोला और बोली- “बड़ी देर कर दी। तुम्हारा दोस्त ऊपर तुम्हारे कमरे में बैठा-बैठा बोर हो गया होगा…”
दीदी को क्या पता की मैं अभी थोड़ी देर पहले देखकर गया हूँ की मेरा दोस्त कैसे अपना लण्ड दीदी की चूत में बोर कर रहा था। पर दीदी मुझसे सारी बात छुपाना चाहती है ये सोचकर मैंने राहत की सांस ली।
मैंने भी उनकी कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा- “दीदी वो किताब जिस लड़के को दी थी उसी के घर गया था। वो घर पर नहीं था तो उसका इंतेजार कर रहा था। पर वो वापस ही नहीं आया तो मैं लौट आया…” मैं दीदी की तरफ देखकर बोला। दीदी बिल्कुल नार्मल लगने की कोशिश कर रही थी।
मेरे जाने के बाद शायद वो फिर से नहाई थी, क्योंकी उनके बाल गीले थे- “अरे तुम्हारा दोस्त पता नहीं इतनी देर से ऊपर क्या कर रहा है? जाओ देखो जाकर…” दीदी ने फिर सफेद झूठ बोला। पर वो मुझसे और क्या कहती की तेरे जाने के बाद तेरे दोस्त ने चोद-चोदकर मेरी चूत के चीथड़े कर दिए।
खैर, मैं अपने कमरे में आ गया। वहां ऋषि बेड पर लेटा हुआ मुश्कुरा रहा था। वो मुझसे बोला- “क्यों बे पूरा शो देखा या बीच में ही खिसक गया था?”
मैंने कुछ जवाब नहीं दिया।
तभी दीदी की आवाज आई- “नीचे आ जाओ। मैंने खाना लगा दिया है। अपने दोस्त को भी ले आना…” हम दोनों नीचे जाकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। दीदी ने खाना लगा दिया और हम तीनों खाना खाने लगे।
ऋषि बोला – “वाह दीदी, खाना तो बहुत अच्छा बना है.
दीदी बोली – “थैंक यू। पर एक बात बताओ तुम्हारी उम्र तो मेरे बराबर है तो दीदी क्यों कहते हो? नाम से पुकारा करो मुझे…” ये वो ही बात थी जो कुछ देर पहले ऋषि ने दीदी से कही थी।
ऋषि बोला – “ओके दीदी, ओहह… सारी रश्मि। अच्छा मैं सोच रहा था मोनू की एक दो दिन तुम्हारे यहाँ ही रुक जाऊँ। घर पर बड़ी बोरियत होती है। तुमसे बातें करके टाइम भी कट जायेगा और थोड़ी पढ़ाई भी हो जाएगी…” ऋषि ने मेरा पैर अपने पैर से दबाया।
पर मैंने उसका साथ नहीं दिया और बोला – “पर तुम तो खाली हाथ आये हो। तुम्हारे कपड़े किताबें?”
ऋषि – “अरे यार दो दिन तुम्हारे कपड़े पहन लूँगा और तुम्हारी किताबें तो हैं ही क्यों दीदी?” जब ऋषि को मेरा सपोर्ट नहीं मिला तो उसने दीदी की तरफ देखा।
रश्मि – “हाँ हाँ तुम रुक जाओ, मैं किरण आंटी को फोन कर दूँगी। तुम ऊपर मोनू के साथ सो जाना और मैं नीचे बेडरूम में सो जाऊँगी…” दीदी ने ऋषि की कामना पूरी कर दी।
मैं समझ गया की दीदी की चूत की आग अभी शांत नहीं हुई है। अब मैं क्या बोलता जब मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी? खाना खाकर हम फिर से ऊपर आ गए।
तब ऋषि बोला – “अबे लोड़ू तुझे क्या हुआ है बे? बोल रहा था की यही रुकूंगा तो क्यों उंगली कर रहा था बे?”
“अब रुक कर क्या करोगे? जो करना था वो तो कर ही लिया…” मैंने डरते-डरते कहा।
“अबे अब वो मेरी रंडी है। अभी तो केवल चूत मारी है तेरी बहन की, आज रात को गाण्ड मारूंगा रश्मि की…” ऋषि बोला। अब मुझे सोने दे रात भर चुदाई करनी है तेरी बहन की।
“मैंने तुम्हारी बहन को थोड़ा देखा ही था तो तुमने मेरी गर्दन पकड़ ली थी और तुम मेरी बहन के साथ क्या करने को बोल रहे हो?” मैं फिर बोला।
“अबे अगर तुझमें दम है तो रिक्की को पटक के चोद ले मैं कुछ नहीं कहूँगा बस? अब दिमाग मत खराब कर। सोने दे..” और ऋषि दीदी के बेड पर लेटकर सो गया।
और मैं ये सोचने लगा की इसको कुछ फरक नहीं पड़ता की इसकी बहन को कोई भी चोदे? इसने तो बस मुझे डराने के लिए ड्रामा किया था। मेरा मन उखड़ा था तो मैं भी लेटकर सो गया। सपने में मैंने देखा की मैं पूरा नंगा बिस्तर पर लेटा हूँ और दीदी भी नंगी होकर मेरे खड़े लण्ड पर बैठ जाती है और उछल-उछलकर मेरा लण्ड अपनी चूत में लेने लगती है। ये सपना और पूरी दिन दीदी की चुदाई देखने की वजह से मैं नींद में ही झड़ गया, अचानक गीला-गीला लगने से मेरी नीद टूट गई तो मैंने देखा शाम के 7:00 बज गए थे। ऋषि अभी भी सो रहा था।
मैंने उसे जगाया और उससे कहा – “सुन भाई, अब तूने तो दीदी को चोद ही लिया है तो अब मेरे लिए भी कुछ जुगाड़ कर दे.
ऋषि बोला – “अबे मैंने रश्मि को रंडी क्या बोला, तूने तो सीरियसली ले लिया। जैसे मैं बोलूँगा और वो टांग उठाकर तुझे चूत दे देगी? अबे वो तेरी बहन है समझा मेरे कहने भर से तुझे नहीं दे देगी…” ऋषि मेरा मजाक उड़ाता बोला।
मैंने मन में सोचा – साले जब मैं तेरी माँ और बहन दोनों को चोदूंगा तब देखूँगा तेरी हीरोगिरी। ऋषि उठकर नीचे चला गया और मैं भी पीछे – पीछे नीचे आ गया।
दीदी टीवी देख रही थी, कहा – “ऋषि तुम्हारे घर मैंने फोन कर दिया था। बहुत देर सो लिए तुम लोग…” दीदी हमें देखकर बोली।
ऋषि बोला – “हाँ रश्मि बड़ी थकान हो गई थी
मुझे बड़ा अजीब लगा की वो दीदी को नाम से बुला रहा है और दीदी एकदम नार्मल बर्ताव कर रही है। खैर धीरे- धीरे समय काटने लगा और हम लोग बिना ज्यादा बात किये टीवी देखते रहे। रात को 10:00 बजे हमने खाना खाया।
फिर दीदी बोली- “तुम लोग तो दोपहर को सो चुके हो, तो तुम लोग तो जागोगे…” मैं चली सोने। फिर दीदी ने
बेडरूम में जाकर दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया।
मुझे थोड़ी खुशी हुई की दीदी ने दरवाजा बंद कर लिया है। मुझे नहीं लगता की अब वो ऋषि के लिए दरवाजा
खोलेगी। 10-15 मिनट बाद ऋषि बोला- “जा बे सो जा जाकर…”
“पर क्यों? मुझे नींद नहीं आ रही है…” मैंने बोला।
“अबे जाता है या मारूं तेरी गाण्ड?” ऋषि ने गुस्सा दिखाते हुए कहा।
मैं चुपचाप उठकर ऊपर आ गया और नीचे देखने लगा। 10 मिनट तक ऋषि टीवी देखता रहा। फिर उसने बेडरूम का दरवाजा नाक किया।
दीदी जाग रही थी। उन्होंने अन्दर से- पूछा कौन है?
“मैं हूँ..” ऋषि ने जवाब दिया।
“मोनू कहां है?” दीदी ने अन्दर से पूछा।
“वो सो गया है…” ऋषि ने कहा।
दीदी ने फौरन दरवाजा खोल दिया और ऋषि ने खींचकर दीदी को बाँहों में ले लिया। ऋषि दीदी के नरम होंठों का रस पीने लगा।
फिर दीदी ने कहा- अन्दर चलो ना।
ऋषि ने दीदी को गोद में उठा लिया और दोनों कमरे में चले गए फिर उन्होंने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया।
मैं वापस बिस्तर पर आकर लेट गया और सोचने लगा की मैंने बड़ी गलती की। दीदी तो पूरी चुदासी है अगर मैंने कोशिश की होती तो इस समय ऋषि के बदले मैं ही उनकी जवानी का रस पी रहा होता। पर जो भी किया अब मुझे ऋषि से बहुत जलन हो रही थी की उसने मेरी कुँवारी बड़ी बहन को चोद डाला था। मुझे लगा की अगर दीदी को किसी से चुदना ही था तो मुझसे क्यों नहीं? अगर मैंने हिम्मत की होती तो जैसे वो आज ऋषि का साथ दे रही है, वैसे ही मेरा भी तो दे सकती थी। यही सब सोचते हुए मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला।
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