शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-67
(Desi Kahani) 7
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वैशाली: ‘मैं प्रोमिस करती हूँ.. ये बात मौसम को कभी पता नही चलेगी.. तुझे मुझपर इतना भरोसा तो होना चाहिए.. और वैसे भी मैं कुछ दिनों में वापिस कलकत्ता चली जाऊँगी.. तेरा राज मेरे सीने में महफूज रहेगा.. ”
फाल्गुनी: “बात तो तेरी ठीक है.. पर कहते हुए मेरी जबान नही चलती.. प्लीज यार.. !!”
वैशाली: “फाल्गुनी, तू नाम देने में जितना शरमा रही है.. उतनी ही मेरी बेसब्री बढ़ते जा रही है.. अगर तूने मुझे नाम बता दिया.. तो मैं मौसम से तेरी दोस्ती फिर से करवा दूँगी.. बिना उसे कुछ बताएं.. ये मेरा वादा है.. ” वैशाली ने फाल्गुनी के दोनों स्तनों को दबाकर उसे उत्तेजित कर दिया.. शावर का गरम पानी उसकी चूत से होकर टपकते हुए उसे बेहद आनंद दे रहा था
फाल्गुनी: “ये कैसे मुमकिन होगा वैशाली? बिना नाम जाने मौसम नही मानेगी.. और मैं किसी भी सूरत में उसे नाम नही बता पाऊँगी.. नाम बता दूँगी तो भी हम दोनों की दोस्ती हमेशा हमेशा के लिए टूटने वाली है फिर मैं क्यों बेकार में उसके पापा का नाम बदनाम करूँ???”
वैशाली की सिट्टी-पीट्टी गुम हो गई.. उसके मुंह से चीख निकल गई “मतलब तू मौसम के पापा के साथ…………..!!!!!!!!!!!!!!!!” वहीं चीख दरवाजे से होते हुए मौसम के कानों तक पहुँच गई और फिर हवा में ओजल हो गई..
फाल्गुनी: “धीरे बोल वैशाली.. कहीं मौसम ने सुन लिया तो गजब हो जाएगा.. वो तो जान से मार देगी मुझे.. ”
वैशाली: “फाल्गुनी, मौसम के पापा के साथ तेरा संपर्क कैसे हुआ? कैसे शुरू हुआ ये सब? कुछ विस्तार से बता तो पता चले मुझे” वैशाली ने एक मिशन तो पार कर लिया था अब दूसरे की तैयारी करने लगी..
फाल्गुनी: “वो सब बाद में बताऊँगी वैशाली.. हम लोग कब से बाथरूम के अंदर घुसकर बैठे है.. सब नीचे साइट-सीइंग के लिए हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे.. मौसम भी क्या सोचेगी हमारे बारे में.. !! और हाँ.. तू मेरी और उसकी दोस्ती करवा दे फिर मैं अपनी कहानी सुनाऊँगी!!”
वैशाली: “उसका हल तो काफी सिम्पल सा है.. तू ऐसे ही किसी का भी नाम बता दे मौसम को.. ऐसे व्यक्ति का नाम बता दे जिसे मौसम जानती तो हो पर उससे कन्फर्म करने ना जा सके ”
फाल्गुनी: “ऐसे कैसे किसी का भी नाम ले लूँ?”
वैशाली: “दिमाग पर थोड़ा जोर लगा और सोच.. कोई तो नाम होगा.. कोई बुजुर्ग.. या पड़ोसी या कोई रिश्तेदार.. !!”
“नही यार.. ऐसा कोई नही है जिसका नाम ले सकूँ” फाल्गुनी सोचते हुए बोली
“तुम्हारे कॉलेज का कोई प्रोफेसर? ” वैशाली उसे नाम सोचने में मदद करने लगी
“प्रोफेसर तो सारे जवान है.. हाँ प्रिंसिपल सर बूढ़े है.. उनका नाम बता दूँ?” फाल्गुनी खुश हो गई.. अपनी समस्या का हल मिलने पर चमक आ गई उसके चेहरे पर..
“हाँ.. बढ़िया रहेगा.. मौसम तुम्हारे प्रिंसिपल से ये पूछने तो जाएगी नही की.. सर, क्या आप मेरी फ्रेंड को चोदते हो?.. ” वैशाली ने कहा
फाल्गुनी: “पूछने जाने का तो सवाल ही नही है.. बहोत ही स्ट्रिक्ट है प्रिंसिपल सर.. चल अब हम दोनों निकलते है बाहर”
वैशाली: “और सुन.. बाहर जाकर.. जैसा मैं कहूँ वैसे ही मौसम से बात करना.. ठीक है”
“ओके.. ” कहते हुए फाल्गुनी अपने और वैशाली के गीले जिस्म को तौलिए से पोंछने लगी..
बाहर मौसम की पूरी दुनिया गोल गोल घूम रही थी.. वो बेड पर अपना सर पकड़कर बैठी हुई थी.. पापा?? मेरे पापा?? ऐसा कैसे कर सकते है? फाल्गुनी के साथ सेक्स? मौसम के लिए उन दोनों के बाहर आने से पहले नॉर्मल हो जाना काफी जरूरी था.. नहीं तो उनको पता चल जाता की मौसम ये बात जान चुकी थी.. उसने आईने में देखकर अपना मेकअप ठीक कर लिया और लिपस्टिक लगाते हुए गीत गुनगुनाने लगी..
वैशाली और फाल्गुनी बाथरूम से बाहर निकले.. मौसम को मेकअप में व्यस्त देखकर दोनों के दिल को राहत मिली.. खास कर फाल्गुनी को.. क्यों की उसे डर था की जब वैशाली ने चीखकर उसके पापा का नाम लिया तब शायद मौसम ने सुन लिया हो.. !! डरते डरते उसने तिरछी नज़रों से मौसम की ओर देखा.. मौसम तो बेफिक्री से बैठी हुई थी..
वैशाली: “मौसम.. मैंने इस रंडी से उसके पार्टनर का नाम उगलवा लिया”
मौसम: “वैशाली, तू उसकी खास सहेली है.. इसलिए तुझे तो वो सब बताएगी.. दिक्कत तो उसे सिर्फ मुझे बताने में है..”
फाल्गुनी की आँखों में आँसू आ गए “ऐसा नही है मौसम.. तू मुझे गलत समझ रही है यार.. प्लीज ऐसा मत बोल”
मौसम को जैसे फाल्गुनी के आँसू या उसकी बातों से कोई फरक ही नही पड़ा हो वैसे उसने कहा “चलो अब नीचे चलें.. !! सब लोग हमारा वैट कर रहे होंगे”
फाल्गुनी के उदास चेहरे के सामने वैशाली ने देखा..
वैशाली: “मौसम, इतना भी क्या गुस्सा करना? ऐसा गुस्सा अक्सर दोस्ती के लिए खतरनाक साबित होता है.. डोर को कभी इतना भी मत खींचो की वो टूट जाएँ.. !!”
मौसम: “मैंने कहाँ कुछ किया या कहा है? जो भी किया है फाल्गुनी ने किया.. हम दोनों बचपन से साथ है.. एक दूसरे को हर छोटी बड़ी बात बताते है.. पर आज उसने इतनी बड़ी बात मुझसे छुपाई और तुझे बता दी.. अब तू ही बता.. मुझे दुख तो होगा ना.. !!”
फाल्गुनी ने नजरें झुकाते हुए कहा “यार, वो हमारे कॉलेज के प्रिंसिपल सर है.. इसलिए उनका नाम लेने में मुझे शर्म आ रही थी.. !!”
मौसम को दूसरा सदमा पहुंचा.. दोस्ती में एक और झूठ???
एक तरफ तो अपने पापा और फाल्गुनी के संबंधों के बारे में जानकर उसकी रूह कांप गई थी.. ऊपर से प्रिंसिपल के नाम का झूठ सुनकर उसे बड़ा धक्का लगा.. पर उसने अपने चेहरे से ये प्रतीत नही होने दिया.. और नॉर्मल होकर बोली “अरे वो टकलू.. !! तूने क्या देख लिया उस बूढ़े खूसट में? तू चाहती तो एक से बढ़कर एक लड़के तेरी टांगों के बीच आने के लिए तैयार थे.. हरीश है. राज है.. सब लाइन मारते है तुझे.. और तुझे उस बूढ़े माथुर में ऐसा क्या नजर आ गया.. ??”
मौसम को नॉर्मल होकर चर्चा में शामिल होता देख वैशाली खुश हो गई.. चलो आखिर सब ठीक होने लगा था..
वैशाली: “हाँ यार फाल्गुनी.. मौसम की इस बात से तो मैं भी सहमत हूँ.. कोई बांका जवान हेंडसम लड़का होता तो तुझे अपनी छातियाँ मसलवाने में कितना मज़ा आता.. उस बूढ़े में ऐसा क्या दिख गया तुझे? साले का एक पैर कबर में और दूसरा पैर अस्पताल में.. वो तुझे चोद गया.. मुझे तो ये बात हजम नही हो रही” फाल्गुनी ब्रा के हुक बंद करते हुए अपने तंदूरस्त स्तनों को थोड़ा सा उभारने लगी.. ताकि उनका आकार बाहर नजर आयें..
फाल्गुनी: “मैंने सामने से कहाँ कुछ किया है यार.. आप लोग तो मुझ पर ऐसे टूट पड़े जैसे मैं सामने से माथुर सर की चेम्बर में जाकर नंगी होकर लेट गई.. तुझे याद है मौसम उस दिन हम माथुर सर की चेम्बर में.. उस हरामी हरीश की कंप्लेन करने गए थे?? याद कर.. !!”
मौसम: “हाँ हाँ.. याद आया.. !!” मौसम को ताज्जुब हुआ.. कितनी आसानी से बातों की कड़ियाँ जोड़ रही है ये फाल्गुनी..!!!
फाल्गुनी: “उस दिन फिर तू बाहर पटेल सर से बात करने के लिए रुक गई और जैसे ही मैं माथुर सर के चेम्बर में गई.. तो मैंने देखा की वो पल्लवी मैडम को अपनी गोद में बिठाकर उनके बूब्स दबा रहे थे.. और पल्लवी मैडम उन्हे किस कर रही थी.. दोनों इतने बीजी थे की मैं उनके पास जाकर खड़ी हो गई तब तक उन्हें पता ही नही चला.. मैडम के ब्लाउज में हाथ डालकर वो उनके बूब्स को मसल रहे थे.. मैडम भी उनके पेंट के अंदर हाथ डालकर बैठी थी.. यार मौसम.. मैंने तो पहले कभी ऐसा कुछ देखा ही नही था.. मैं तो बुरी तरह चोंक गई.. क्या करूँ समझ में नही आ रहा था.. तभी अचानक उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी.. मैं भागकर बाहर चली गई.. दूसरे दिन तू कॉलेज नही आई थी.. तब कॉलेज खतम होने के बाद मैडम ने मुझे स्टाफ रूम में बुलाया और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया.. फिर उन्होंने जबरदस्ती अपने बूब्स मुझसे दबवाये और कहा की अगर मैं किसी को भी इस बारे में कुछ बताऊँगी तो वो मुझे फैल कर देंगे.. मैं बहोत डर गई थी यार.. इसलिए तुझे बता न सकी.. इस में मेरी क्या गलती? मैंने अपनी मर्जी से तो कुछ किया नही था”
वैशाली: “तूने मैडम के साथ ये सब किया तो माथुर सर बीच में कैसे आ गए फाल्गुनी? मुझे लगता है तू अभी भी कुछ छुपा रही है”
फाल्गुनी: “मैं सब कुछ बताती हूँ.. थोड़ा रुको तो.. !!”
तभी मौसम के मोबाइल पर पीयूष का कॉल आया.. उसने कहा की सब बस में बैठ चुके थे और तीनों की राह देख रहे थे.. जल्दी आओ.. तीनों फटाफट निकले पर निकालने से पहले वैशाली ने मौसम और फाल्गुनी की फिरसे दोस्ती करवा दी और कहा “मौसम, गुस्सा थूक दे.. “और फिर दोनों के स्तनों को बारी बारी दबा दिया.. फिर वैशाली और फाल्गुनी दोनों ने मिलकर मौसम के स्तन एक साथ दबाएं और उसे हंसा दिया.. मौसम फाल्गुनी से गले लग गई.. फाल्गुनी की आँखों से आँसू टपक पड़े.. वो इतना ही बोल पाई “मौसम प्लीज.. दोबारा कभी मेरे साथ ऐसा मत करना..”
मौसम: “तूने मुझसे ये सब छुपाया नही होता तो ये नोबत ही नही आती.. चल.. अब सब भूल जा.. चलते है अब.. देर हो गई है”
वैशाली: “एक मिनट रुको.. कुछ दिनों के बाद मैं वापिस कलकत्ता चली जाऊँगी.. फिर न जाने कब मिले.. एक लास्ट किस तो बनती है” तीनों ने एक दूसरे को किस किया और स्तन दबाएं और खिलखिलाकर हँसते हुए बाहर निकली
मौसम नॉर्मल होने का दिखावा कर रही थी.. लेकिन उसके दिल और दिमाग में तो आग जल रही थी.. रह रहकर उसे ये विचार आ रहा था की पापा और फाल्गुनी ने ऐसा क्यों किया? कब किया होगा? मम्मी कहाँ थी तब? मैं कहाँ थी? क्या वो दोनों मेरे घर पर ही करते होंगे? या फिर पापा की ऑफिस में?? नही नही ऑफिस में तो नही हो सकता.. तो फिर कहाँ मिलते होंगे वो दोनों.. और एकाध बार नही.. सात आठ बार.. !! जानना तो पड़ेगा ही.. फाल्गुनी पर नजर रखूंगी तो सब पता चल जाएगा.. !!!
शीला नंगी होकर अपने दामाद संजय की बाहों में पड़े पड़े गोवा की आखिरी रात को रंगीन बनाने की तैयारी में थी.. दोनों आज अपनी सारी इच्छाओं को पूर्ण करने की फिराक में थे.. क्योंकी ऐसा मौका उन्हें दोबारा नही मिलने वाला था.. दोनों आपस में एकदम खुल चुके थे
शीला की एक एक सिसकी.. संभोग के समय के हावभाव देखकर संजय पागल हो जाता था.. अब तो नोबत ऐसी आन पड़ी थी शीला के साथ प्रत्येक क्षण वो उत्तेजित ही रहता था.. पूरा समय लंड खड़ा रहने के कारण उसे दर्द होता था.. चार चार बार झड़ने के बाद भी शीला, संजय के गोरे.. वीर्य-विहीन लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़े रखती थी..
शीला: “बेटा.. मैंने कभी सोचा भी नही था की अपने दामाद के साथ ही मुझे ये सब करने का मौका मिलेगा.. जो कुछ भी हो रहा है वो मुझे इतना अच्छा लग रहा है की तुम्हें बता नही सकती.. लेकिन आज ये सब कुछ करने का आखिरी दिन है.. तू एक जानदार मर्द है.. एक औरत होने के नाते मैं इतना तो कह ही सकती हूँ की तू अपनी कामुक हरकतों से किसी भी लड़की या स्त्री को अपनी गुलाम बना सकता है.. संजय बेटा.. तेरी हरेक हरकत ऐसी होती है की तुझसे एक बार चुदने के बाद कोई भी तेरे इस डंडे को कभी भूल नही पाएगा.. और मैं तो पहले से ही सेक्स की काफी शौकीन हूँ.. तेरे ससुर के साथ मैंने इतने खुलकर मजे कीये है की तुझे क्या बताऊँ.. !! तेरे साथ चुदते वक्त.. तेरे दमदार धक्कों को मेरी चूत में लेते वक्त.. मुझे ऐसा ही लगता था जैसे तेरे अंदर मदन घुस गया हो.. ये तेरा सुंदर लंड इतना रसीला है की कोई भी स्त्री उसे देखते ही अपने छेद में लेने के लिए बेबस हो जाएँ.. ” शीला ने झुककर संजय के लंड को चूम लिया
संजय: “आहह मम्मीजी.. मुंह में लेकर चुसिए..बहोत मज़ा आ रहा है.. मम्मीजी, मैंने आज तक सेंकड़ों लड़कियों और औरतों को चोदा है.. पर आपके जैसी स्त्री मैंने आजतक नही देखि जो २४ घंटे बस चुदने के लिए ही बेकरार हो.. !!” कहते हुए संजय ने शीला के गदराए स्तनों को बड़ी मस्ती से दबा दिया “मम्मीजी, आप एक बार कलकत्ता आइए.. वहाँ मेरे बहोत सारे दोस्त है.. आपको नए नए लंडों को स्वाद मिलेगा.. !!”
शीला: “बेटा.. इतने दूर सिर्फ लंड लेने के लिए आऊँ?? और मुझे अलग अलग लंड लेने में दिलचस्पी नहीं है.. मुझे तो चाहिए एक ताकतवर लंड जो मेरे जनम जनम की भूख को संतुष्ट कर सकें.. मेरी चूत में जो हर दस मिनट पर चुदवाने की चूल मचती है.. उसे शांत कर सकें.. संजयं, तू यहाँ शिफ्ट हो जा.. फिर हम आराम से एक दूसरे को भोग सकेंगे.. तू मेरा दामाद है इसलिए किसी को शक भी नही होगा.. मेरा दिल अभी तेरा लंड लेकर भरा नही है.. अभी तो मुझे तुझसे बहोत बार चुदवाना है.. इतनी बार करवाना है की दोबारा कभी चुदवाने का मन ही न हो” कहते हुए शीला ने संजय को बिस्तर पर लेटा दिया और उसपर सवार हो गई.. संजय के लंड को अपनी गांड के छेद पर सेट किया और हल्के से दबाया.. आह्ह..
शीला: “तेरे मोटे लंड से जब गांड की दीवारें रगड़ती है तब बड़ी ही तेज खुजली होती है अंदर.. आज इस आखिरी रात को यादगार बनाने के लिए मैं तुझसे अपनी गांड मरवाना चाहती हूँ”
संजय: “ओह्ह ओह्ह आह्ह मम्मीजी.. कितनी टाइट है आपकी गांड आह्ह.. ” सिसकियाँ लेते हुए संजय ने अपनी गांड ऊपर कर दी और शीला की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर उसकी गांड को ड्रिल करने लगा.. शीला की दर्द से भरी सिसकियाँ.. और संजय की कराहों की गूंज के बीच.. शीला की गांड को चीरता हुआ संजय का तगड़ा लंड अंदर घुस गया.. शीला के परिपक्व और मदमस्त स्तनों को दोनों हाथों से पकड़कर मसलते हुए संजय ने उसे अपनी ओर खींचा.. और उसके रसीले कामुक होंठों पर एक जबरदस्त किस कर दी..
शीला और उसका दामाद संजय.. एक कपल की तरह नही.. पर पति पत्नी की तरह एक दूसरे में खो गए.. संजय का लंड शीला की गांड में ऐसे फिट हो गया जैसे वो दोनों जनम जनम के साथी हो.. कमर हुचकाते हुए संजय.. अपने लंड को शीला की गांड के अंदर बाहर कर रहा था.. और शीला की गांड ऐसे लंड गटक रही थी जैसे उसका सर्जन ही लंड लेने के लिए हुआ हो.. बड़ी मस्त ठुकाई हो रही थी शीला की गांड की..
संजय: “ओह्ह मम्मी जी.. कितनी टाइट गांड है यार.. मेरे लंड में दर्द होने लगा है.. आह्ह जरा धीरे धीरे.. !!!”
शीला: “आह्ह बेटा.. मेरा तो मन कर रहा है की मैं तेरी रखेल बन जाऊँ.. और तू मुझे पूरा दिन चोदता रहें.. अलग अलग आसनों में..ओह्ह बेटा.. बहोत जोरों की खुजली मची है मेरी गांड में.. लगा जोर से धक्के.. फाड़ दे मेरी गांड.. आह्ह आह्ह ओह्ह ओह्ह.. !!”
संजय के ऊपर हिंसक होकर कूद रही थी शीला.. कैसी जवान लड़की से दोगुना जोर था शीला के धक्कों में.. उसकी गदराई कामुक काया की एक एक अंग भंगिमा.. किसी भी पुरुष को अपने वश में करने के लिए काफी थी.. शीला ने हाथ नीचे डालकर संजय का लंड पकड़ लिया और थोड़ा सा रुककर अपनी गांड से बाहर निकाला.. थोड़ा सा झुकी और एक ही धक्के में अपने भोसड़े में उतार दिया..
शीला: “आह्ह.. आग तो यहाँ भी लगी हुई है.. जमकर धक्के लगा बेटा.. आग बुझा दे मेरी.. अब और रहा नही जाता संजु बेटा.. !!” शीला ने अपनी रिधम प्राप्त कर लिए थी.. वो संजय के जिस्म पर ऐसे हावी हो गई थी जैसे किसी बड़े मगरमच्छ ने छोटी सी गिलहरी को दबोच रखा हो.. संजय का लंड अब दर्द करने लगा था.. पर अपना बचाव करने की स्थिति में नही था वो.. शीला ने जैसे उसके शरीर, मन और मस्तिष्क पर कब्जा कर लिया था.. बेजान पड़े पड़े वो बस शीला से संचालित हो रहा था.. शीला के इस सुनामी जैसे हमले को देखकर वो स्तब्ध हो गया था.. पड़े रहने के अलावा उसके पास ओर कोई विकल्प नही था.. शीला इतनी हिंसक होकर उसके लंड पर कूद रही थी जैसे उसके लंड को शरीर से अलग कर देना चाहती हो..
संजय अब घबरा रहा था.. कहीं शीला की ये तीव्र सेक्स की भूख उसकी जान न ले ले.. आँखें बंदकर वो प्रार्थना कर रहा था की शीला जल्द से जल्द झड जाए.. करीब १२ मिनट के भीषण धक्कों के शीला ढल पड़ी.. ऐसे लाश होकर संजय की छाती पर गिरी जैसे उसके शरीर की सारी ऊर्जा भांप बनकर उड़ गई हो.. शीला के विराट स्तनों और बदन के वज़न तले संजय दब गया था.. उसका लंड अब वीर्य छोड़ पाने की स्थिति में भी नही रहा था.. और बिना झड़े ही नरम होकर शीला के भोसड़े से बाहर निकल गया था.. और मरे हुए चूहे जैसे लटक रहा था.. दायें तरफ के आँड की ओर लटक रहे मुरझाएं लंड को देखकर ही पता लग रहा था की शीला के भोसड़े के अंदर उस पर क्या बीती होगी.. संजय ने मन ही मन अपने ससुर को सलाम कर दी.. जिन्होंने इतने सालों से इस हवस की महासागर को समेटकर संभाल रखा था.. पता नही ससुरजी कैसे इस शेरनी को काबू में रखते होंगे.. !! संजय सोच रहा था.. मैं इतना बड़ा चुदक्कड़ हूँ फिर भी मम्मी जी ने मेरे झाग निकाल दिए.. कोई सामान्य इंसान होता उसकी तो जान ही निकल जाती मम्मी जी के नीचे.. !!!
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