जीजा ने गरम करके साली की सील तोड़ी
(हिंदी सेक्स स्टोरीज) 32
Khoobsurat Kunwari Sali Chudai
मेरा नाम संजना है और इस साल मेरी शादी होने वाली है। मैं छोटे से एक मोहल्ले की सीधी साधी लड़की हूं जहां संकरी गलियां, पड़ोसियों की हंसी और रोजमर्रा की छोटी छोटी बातें ही जीवन की धड़कन हैं। मैं सुंदर और भरे बदन की मालिक हूं जिसमें हर अंग आकर्षण और कोमलता से भरा हुआ है। Khoobsurat Kunwari Sali Chudai
मेरी कद काठी पांच फुट के करीब है, मेरा रंग बेहद गोरा और चमकदार है जो सुबह की धूप में मोती की तरह निखर उठता है। मेरी त्वचा इतनी मुलायम है कि हवा का हल्का स्पर्श भी रोएं खड़े कर देता है। मेरे स्तन भरे हुए, ऊपर उठे हुए और नाजुक हैं जो चलते समय हल्के से लहराते हैं।
मेरी कमर पतली है, कूल्हे चौड़े और गोल मटोल हैं जिनकी वजह से मेरी चाल में एक अनोखा आकर्षण आ जाता है। मेरी बड़ी बड़ी भावपूर्ण आंखें, गुलाबी भरे हुए होंठ और रेशमी काले लंबे बाल जो मेरी कमर तक लहराते हैं, जो भी मुझे देखता है वह बस टकटकी लगाकर देखता ही रह जाता है।
काफी मनचलों ने मुझे फंसाने के लिए तरह तरह के डोरे डालने की कोशिश की मगर मैं हमेशा सतर्क और संभली रहकर अपना दामन बचाकर चलती थी। मैंने मन में ठान रखा था कि अपना यह कोमल, अनछुआ और सुंदर बदन सबसे पहले अपने पति को ही सौंपूंगी ताकि हमारी पहली रात यादगार और खास बन सके। मगर किस्मत में तो कुछ और ही था।
मेरी एक बड़ी बहन भी है प्रिया। प्रिया दीदी की शादी को चार साल हो गए थे। मेरा जीजा अनीश बहुत ही हैंडसम और आकर्षक आदमी है। उनकी लंबी कद काठी, चौड़ी मजबूत छाती, तेजस्वी चेहरा और गहरी आंखें किसी भी लड़की का दिल आसानी से मोह लेते हैं। वे बातें इतनी मधुर और सम्मोहक तरीके से करते हैं कि सुनने वाला बस उनके शब्दों के जादू में बंधा रह जाता है, समय का एहसास तक नहीं होता।
उनकी आवाज में एक गहराई है जो मन में उतर जाती है और दिल की धड़कन बढ़ा देती है। दीदी के मुंह से मैंने उनके बहुत सारे किस्से सुन रखे थे। उनकी शादी से पहले कई लड़कियों से उनके घनिष्ठ संबंध रह चुके थे। कई लड़कियों के साथ वे पूर्ण संभोग तक कर चुके थे।
मैं शुरू शुरू में उन पर बहुत ज्यादा फिदा थी, उनके बारे में सोचते ही मेरे मन में एक मीठी सी बेचैनी और उत्तेजना सी होने लगती थी। आखिर साली जो ठहरी। मगर उनके कारनामे सुनने के बाद मैं उनसे संभलकर रहने लगी थी। मैंने कई बार देखा था कि वो मुझसे हमेशा चिपकने और पास आने की कोशिश करते थे।
मौका ढूंढकर कई बार उन्होंने मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर लिया था। उनके गर्म शरीर का स्पर्श मेरे नाजुक बदन से टकराता तो मेरी त्वचा पर सिहरन दौड़ जाती थी और सांसें तेज हो जाती थीं। एक दो बार तो उन्होंने अपनी कोहनी से मेरी नरम और भरी हुई चुचियों को जानबूझकर हल्के से दबाया भी था.
जिससे मेरे निप्पल तुरंत सख्त हो जाते थे, पूरे बदन में गर्मी की लहर दौड़ जाती थी और मन में शर्म के साथ एक अनजानी खुजली सी महसूस होती थी। मैं उनसे दूरी रखने लगी थी। मगर शिकारी जब देखता है कि उसका शिकार चौकन्ना हो गया है तो उसे पकड़ने के लिए तरह तरह की चाल चलता है। और निरीह शिकार उसके जाल में फंस जाता है।
मेरे संबंध की बातें चल रही थीं। मम्मी पापा को किसी लड़के को देखने दूर जाना था। दो दिन का पूरा प्रोग्राम था। घर पर मैं अकेली रह जाती इसलिए उन्होंने दीदी और जीजा को रहने के लिए बुलाया। वैसे मैंने उनसे कहा कि मैं अकेली रह जाऊंगी लेकिन अकेली जवान लड़की को कोई भी माता पिता अकेले नहीं छोड़ते।
दीदी और जीजा के आने के बाद मेरे मम्मी पापा निकल पड़े। जैसा मैंने सोचा था उनके जाते ही अनीश जी मेरे पीछे लग गए। द्विअर्थी बातें बोल बोलकर मुझे इशारा करते। दीदी उनकी बातें सुनकर हंस देती। मैं दीदी से कुछ शिकायत करती तो वो कहती कि जीजा साली के संबंधों में ऐसा चलता ही रहता है।
अनीश जी पर किसी बात का कोई असर नहीं होता था। मैं उनकी हरकतों से झुंझला उठी थी। उस दिन मैं नहाकर निकली थी। मेरे बाल अभी भी नम थे और उनमें शैम्पू की ताज़ी महक फैली हुई थी। मेरी त्वचा नहाने के बाद नरम और चमकदार हो गई थी। पानी की छोटी छोटी बूंदें मेरी गर्दन से नीचे सरक रही थीं जिससे मेरी पूरी देह ताज़गी से भर गई थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जैसे ही मैं कमरे में कदम रखा अनीश जी ने बिना एक पल भी सोचे मुझे अपनी मजबूत बाहों में कसकर भर लिया। उनकी मोटी बाहें मेरी पतली कमर के चारों ओर लिपट गईं और उन्होंने मेरे नरम बदन को अपनी चौड़ी छाती से पूरी तरह चिपका दिया। उन्होंने अपना चेहरा मेरे लंबे सिल्की बालों में गहराई से घुसा दिया।
उनकी नाक मेरे बालों की जड़ों से सट गई और वे गहरी गहरी सांसें लेकर मेरी बालों की सुगंध को अंदर खींचने लगे। उनकी गर्म सांसें मेरी खोपड़ी की त्वचा पर पड़ रही थीं जिससे मेरे रोएं खड़े हो गए। बालों की नमी उनकी ठोड़ी और गालों पर लग रही थी और शैम्पू की फूलों जैसी खुशबू उनके मुंह में घुल रही थी।
मैं गुस्से से तिलमिला उठी। मेरा पूरा शरीर क्रोध से कांपने लगा। मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था और गालों पर गर्मी छा गई थी। मैंने उन्हें दोनों हाथों से जोर से धकेला। अपनी हथेलियों से उनकी छाती पर दबाव डालते हुए उन्हें पीछे हटाने की पूरी ताकत लगाई।
“आप अपनी हदों में रहिए नहीं तो मैं मम्मी पापा से शिकायत कर दूंगी।” मेरी आवाज़ गुस्से से कांप रही थी।
“मैंने ऐसा क्या किया है। बस तुम्हारे बालों की महक ही तो ले रहा था।” कहकर अनीश जी ने वापस मुझे पकड़ने की कोशिश की। उनकी आंखों में शरारती चमक थी और होंठों पर मुस्कान खेल रही थी।
“खबरदार अपने हाथ दूर रखिए। मुझे छूने की भी कोशिश मत करना।” मैंने चेतावनी दी.
लेकिन वो बिना मेरी किसी बात की परवाह किए अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिए। उनकी उंगलियां मेरी बाहों की ओर बढ़ रही थीं। मैं अपने शरीर को सिकोड़ते हुए पीछे हटी और जोर से चीखी “दीदी।” दीदी किचन से तेजी से निकलकर आईं। उनकी आंखों में हैरानी और चिंता दोनों थीं।
“क्या हुआ क्यों शोर मचा रही है।” उन्होंने पूछा।
“दीदी जीजाजी को समझा लो। वो मेरे साथ गलत हरकतें कर रहे हैं।” मैंने रुआंसी आवाज में कहा। मेरी आंखें नम हो गई थीं।
दीदी ने उनकी ओर देखते हुए कहा “क्यों संजना को परेशान कर रहे हो।”
“मैं क्या परेशान कर रहा हूं? पूछो इससे मैंने ऐसी कौन सी हरकत की है जो ये इतना चिढ़ उठी।” अनीश जी ने बेपरवाही से जवाब दिया। उनकी आवाज़ में मासूमियत झलक रही थी।
“दीदी ये मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरे बदन को चूमने की कोशिश कर रहे थे।” मैंने आरोप लगाया। मेरा चेहरा गुस्से से लाल हो गया था।
गलत बिल्कुल गलत। मैं तो अपनी इस खूबसूरत साली के बालों पर न्योछावर हो गया था। मैं तो बस उसके सुंदर सिल्की बालों को चूम रहा था। पूछो संजना से अगर मैंने इसके बालों के अलावा कहीं होंठ लगाए हों तो।” अनीश जी ने सफाई दी। उनकी मुस्कान अभी भी बरकरार थी।
इससे पहले कि दीदी कुछ बोलती मैं बोल उठी “नहीं दीदी ये आपके सामने झूठ बोल रहे हैं। इनकी कोशिश तो मेरे बदन से खेलने की थी।” मेरे शब्दों में गुस्सा और शर्म दोनों थे।
दीदी ने जीजा जी की तरफ देखा तो वो कह उठे “तुम्हारी कसम प्रिया मैं संजना के सिर्फ बालों को छू रहा था। देखो कितने सुंदर बाल हैं।” ये कहकर वो मेरे पास आ गए और वापस मेरे बालों पर अपना हाथ फेरने लगे।
उनकी उंगलियां मेरे नम घने बालों में धीरे धीरे घुस रही थीं। वे बालों को जड़ से लेकर सिरे तक सहला रहे थे। बालों की नरमी और नमी उनके हाथों की हथेलियों पर महसूस हो रही थी। मैं गुस्से से तिलमिला कर उनको जोर से धकेलते हुए उनसे दूर चली गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“रहने दो रहने दो मुझे आपकी सारी हरकतें मालूम हैं। आप बस मुझसे दूर ही रहिए।” मैं रुआंसी हो उठी। मेरी आवाज़ लड़खड़ा रही थी और आंखों में आंसू आ गए थे।
“अरे संजना क्यों इनकी हरकतों को इतना सीरियस लेती हो। अगर ये तुम्हारे बालों को चूमना चाहते हैं तो चूम लेने दो। इससे तुम्हारा क्या नुकसान हो जाएगा।” दीदी ने समझाते हुए कहा। उनकी आवाज़ नरम और शांत थी।
“अरे दीदी ये जितने भोले बन रहे हैं ना उतने हैं नहीं।” मैंने विरोध किया।
“संजना अब मान भी जा।” दीदी ने फिर कहा।
“ठीक है। लेकिन ये वादा करें कि सिर्फ मेरे बालों के अलावा कुछ भी नहीं छुएंगे।” मैंने हिचकते हुए कहा।
जीजा जी ने कहा “ठीक है मैं तुम्हारी दीदी की कसम लेकर कहता हूं कि सिर्फ तुम्हारे बालों को ही चूमूंगा उसके अलावा मैं और किसी अंग को नहीं छूंगा। लेकिन अगर तुम खुद ही मुझे अपने बदन को छूने के लिए कह दो फिर?” उन्होंने मुझे छेड़ा। उनकी आंखों में मस्ती की चमक थी। “
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