शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-22
बरसों से तैयार ओवरब्रिज.. जिसका किसी बड़े नेता के हाथों उद्घाटन होना था.. वो किसी मामूली मजदूर के हाथ
बरसों से तैयार ओवरब्रिज.. जिसका किसी बड़े नेता के हाथों उद्घाटन होना था.. वो किसी मामूली मजदूर के हाथ
"आइए शीला जी" गोल बिस्तर जैसे शरीर वाले, अनुमौसी के पति, चिमनलाल ने शीला का स्वागत किया.. टीवी देखते
कविता: "पकड़ा तो था.. पर चूस नहीं पाई.. मेरा बहोत दिल कर रहा था उसका चूसने का.. "
Hii dosto waise to ye kahani kaafi purani h lekin jab yaad aati h to mera lund ekdam hard ho jata h aur didi ko chodne ka maza to bata hi ni skta, to padhiye ki maine didi ko kaise.
Hii dosto ye kahani meri aur meri chachi ki vasna ki khanai h mujhe meri chachi ko patane me kaafi time laga lekin wo ekdam kadak maal h. kehte h na" sabar ka fal meeth hota h"
Hii to dosto welcome back kaise ho ap log i hope sab ache hi honge to isme main apko bataunga kaise hum teeno ne enjoy kara apni hawas k sath
ससुर ने रूखी की लचकदार चर्बी वाली कमर पर अपना खुरदरा हाथ फेरा.. रूखी के भोसड़े से कामरस की धारा बह रही थी.. बूढ़े ने रूखी के घाघरे में हाथ डालकर उसके गोल मटके जैसे दोनों कूल्हों को पकड़ लिया..
शीला रूखी के दूध भरे स्तनों को देखकर उत्तेजित हो गई.. उसने रूखी से कहा "तेरा दूध पिए कितने दिन हो गए यार.. पहले थोड़ा सा दूध पी लेने दे मुझे.. "
बगल में बैठी चेतना अपने स्तनों को शीला के बबलों से रगड़ने लगी.. और शीला ने उसे खींचकर अपने होंठ चेतना के होंठों पर रखते हुए चूम लिया..
रसिक के निकलते ही शीला ने अपने घर को ताला लगाया.. और अनु मौसी के घर की तरफ दौड़ते हुए गई..