शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)-60
(Desi Kahani) 8
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वैशाली ने तुरंत ही अपनी पेन्टी को घुटनों तक सरकाते हुए स्कर्ट ऊपर चढ़ा दिया और फिर उलटी होकर बोली “प्लीज सर.. जल्दी कीजिए.. डाल दीजिए फटाफट” हल्की रोशनी में जगमगाते हुए वैशाली के चरबीदार कूल्हों पर थपकी लगाते हुए राजेश ने उन नितंबों को चौड़ा किया..
“सर वक्त बहोत कम है.. वो सब आराम से बाद में देख लेना.. ” उत्तेजनावश अपनी गांड को गोल गोल घुमाते हुए राजेश को आमंत्रित कर रही थी.. राजेश ने वैशाली की कमर को पकड़ा और अपने कड़े लंड को दोनों कूल्हों के बीच में लगाया..
“ईशशश.. सर.. वहाँ नही.. थोड़ा सा नीचे” अपने गांड के छेद पर राजेश के लंड के सुपाड़े का स्पर्श होते ही वैशाली ने सहम गई
“अरे यार.. इतना अंधेरा है.. कुछ दिखना भी तो चाहिए.. ” राजेश ने परेशान होते हुए कहा
“सर, आप एक बार जीभ से चाटिए ना.. मुझे बिना चटवाए मज़ा ही नही आता” वैशाली की विनती को सन्मान देते हुए राजेश झुककर नीचे बैठ गया और उसके दोनों चूतड़ों को फैलाकर पहेले गांड और फिर चूत को चाटने लगा.. वैशाली उत्तेजित होकर गांड उछालने लगी.. राजेश तुरंत खड़ा हो गया और वैशाली की चूत में एक धक्के में ही अपना पूरा लंड डाल दिया.. वैशाली सिसकने लगी.. राजेश ने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किया और फिर स्पीड पकड़ ली..
वैशाली के कूल्हों से राजेश की जांघों के टकराने की वजह से आवाज आ रही थी.. जब वो आवाज काफी ऊंची हो गई तब दोनों ने घबराकर गति धीमे कर दी.. और फिर से अपनी लय प्राप्त कर ली.. डरते डरते सेक्स करने का मज़ा ही अलग होता है.. करीब दो मिनट तक ऐसे ही धक्के लगाने के बाद राजेश ने अपने सख्त लंड से आखिर के तीन चार धक्के इतने जोर से लगाए की वैशाली की आँखों में पानी आ गया.. उसेके पेट में दर्द होने लगा.. और साथ ही साथ उसकी चूत भी ठंडी हो गई.. राजेश ने भी चूत को अपने वीर्य से सराबोर कर दिया..
अंधेरे माहोल की इस चुदाई के बाद वैशाली घूम गई और राजेश के लंड के प्रति आभार प्रकट करते हुए उसे झुककर चूमने लगी.. राजेश ने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया.. राजेश के लंड से खेलते हुए वैशाली ने एकदम धीमी आवाज में उसके कान में कहा “ये रात मुझे ज़िंदगी भर याद रहेगी.. आशा है की आपको भी मज़ा आया होगा.. अगर किस्मत रही तो फिर मिलेंगे.. मैं आपके साथ शांति से समय बिताना चाहती हूँ.. आपका स्वभाव मुझे बहोत पसंद आया.. आशा है की आप मेरी मित्रता का स्वीकार करेंगे.. हमारा शरीर संबंध तो बड़ा ही अनोखा रहा.. लेकिन लौटने के बाद क्या मैं आप से बिना किसी जिस्मानी संबंधों की मित्रता की अपेक्षा रख सकती हूँ ?”
राजेश वैशाली के सुंदर स्तनों को अपने दोनों हाथों से दबाते हुए बोला “वैशाली, हम बड़े अच्छे मित्र बनेंगे.. शरीर का संबंध बने या न बने.. उससे मुझे फरक नही पड़ता.. पर तेरे ये सुंदर स्तनों ने मुझे आज पागल ही कर दिया.. इन्हे दबाने की आशा तो मैं हमेशा रखूँगा ही.. लेकिन ये वादा है मेरा.. की जो भी होगा वो तुम्हारी इच्छा और स्वीकृति से ही होगा.. एक विनती करना चाहूँगा.. तुम्हें कभी भी फिर से ये दोहराने की इच्छा हो तो बेझिझक मेरे पास चली आना.. तुम्हारे जिस्म को पाने के लिए मैं हमेशा बेताब रहूँगा.. और कुछ पाए या न हो पाएं.. एक हल्की सी किस.. थोड़ा सा स्पर्श.. इतना भी मेरे लिए काफी होगा !!”
“ठीक है सर” हँसते हुए वैशाली ने राजेश के होंठों को चूम लिया.. “सर, पहले मैं बाहर देख लूँ.. पेसेज में कोई है तो नही.. मैं इशारा करूँ उसके बाद ही आप निकलना ” राजेश अब भी वैशाली के स्तनों को छोड़ नही रहा था.. दबाए ही जा रहा था
“सर अब आप मुझे छोड़ेंगे तो मैं बाहर निकलूँ” वैशाली ने हसनते हुए कहा
“असल में तेरी ब्रेस्ट इतनी आकर्षक है की मुझसे रहा नही जाता.. अब तुमने बिना जिस्मानी संबंधों वाली मित्रता की बात की है.. तो मैं ये सोच रहा हूँ की इन स्तनों दोबारा न जाने कब देखने को मिले.. ” राजेश ने कहा
“हम्म.. ओके सर.. ये लीजिए मेरी तरफ से माउंट आबू की ये आखिरी भेंट” कहते हुए उसने राजेश का चेहरा पकड़कर अपने स्तनों पर दबा दिया और उसके लंड को पकड़कर मसल दिया.. फिर वैशाली ने अपने आप को राजेश की गिरफ्त से मुक्त किया और धीरे से दरवाजा खोला.. पेसेज में कोई नही था.. उसने हाथ पकड़कर राजेश को बाहर खींचा.. “सर आप पहले जाइए.. कोई पूछे तो कहना वैशाली टॉइलेट गई है”
“ओह वैशाली.. ” कहते हुए राजेश ने एक बार फिर वैशाली के स्तनों को वस्त्रों के ऊपर से ही पकड़कर दबा दिया और फिर न चाहते हुए भी मुड़कर चलने लगा.. वैशाली फिर से अंदर गई.. और नल से पानी लेकर अपनी चूत को धोने लगी.. राजेश के लंड का सारा वीर्य उसने ठीक से साफ किया.. साफ करते करते उसकी मुनिया फिर से चुनमुनाने लगी.. उंगली से क्लिटोरिस को रगड़कर फिर से उसे शांत किया.. अपने स्तनों को ठीक से ब्रा के अंदर दबा दिए.. और अपने बाल ठीक कर दस मिनट बाद बाहर निकली..
जैसे ही वो अपने क्यूबिकल से बाहर निकली.. थोड़े से दूर बने क्यूबिकल का दरवाजा खुला और उसमें से पीयूष बाहर निकला.. पीयूष की नजर वैशाली पर नही थी.. वो तुरंत दरवाजा खोलकर बाहर की ओर भागा.. लेडिज टॉइलेट में पीयूष???? जरूर कुछ खिचड़ी पक रही थी.. पीयूष अंदर किसी के साथ ही घुसा होगा.. साथ जो भी था.. हो सकता है की वो वैशाली के निकलने से पहले ही चला गया हो.. या फिर अभी भए क्यूबिकल के अंदर ही हो? पता करने का बस एक ही तरीका था.. वैशाली बेज़ीन के पीछे लगे बड़े पत्थर के पीछे छुपकर इंतज़ार करने लगी
थोड़ी ही देर में दरवाजा खुलने की आवाज आई.. वैशाली का दिल जोरों से धड़कने लगा.. कौन होगा? कविता? नही नही.. उन दोनों के बीच तो झगड़ा चल रहा है.. जरूर वो रांड मौसम होगी.. वही कब से मेरे और पीयूष के बीच हड्डी बनकर बैठी हुई है.. पीयूष भी कमीना अपनी साली के पीछे लट्टू होकर घूमता रहता है.. उसकी कच्ची कुंवारी चूत को एकबार चोदकर ही दम लेगा वो.. जैसी जिसकी किस्मत.. नुकसान तो कविता को ही होगा.. कविता भी बेवकूफ है.. उसे इतना भी पता नही चलता की जवान कुंवारी बहन को अपने रोमियो पति के साथ घूमने देना ही नही चाहिए उसे.. और मौसम भी एक नंबर की मादरचोद है.. अपने कच्चे बबले दिखा दिखा कर पीयूष को पागल बना देती है.. जैसे स्तन सिर्फ उसके पास ही है.. मेरे मुकाबले में मौसम के छोटे स्तनों की कोई औकात ही नही है..
वैशाली के दिमाग में ये सारे विचार चल रहे थे तभी पेसेज में किसी के आने की चहलकदमी सुनाई दी.. और वो जो भी थी वह फिर से क्यूबिकल के अंदर चली गई और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया.. वैशाली के लिए ज्यादा देर तक छुपे रहना मुमकिन नही था.. क्यों की लेडिज टॉइलेट के दरवाजे से अंदर आते हुए वह साफ दिख रही थी..
वैशाली बाहर निकल गई और चलते हुए हॉल में आ पहुंची.. वह आकर राजेश सर के बाजू में बैठ गई.. पर यहाँ से उसे टॉइलेट वाला पेसेज नजर नही आ रहा था.. उसने राजेश से कहा “सर आपको एतराज न हो तो क्या आप मेरी कुर्सी पर आ सकते है.. यहाँ एसी की ठंडी हवा सीधे मेरे सर पर लग रही है”
“ओ स्योर.. ” कहते हुए राजेश खड़ा होकर वैशाली की चैर पर बैठ गया और वैशाली राजेश की चैर पर.. अब यहाँ से पेसेज बिल्कुल साफ नजर आ रहा था.. वैशाली थोड़ी थोड़ी देर पर.. राजेश से बातें करते हुए.. नजरें चुराकर पेसेज की ओर देख लेती..
राजेश ने धीमे से वैशाली के कान में कहा “यार वैशाली.. तेरी तो बहोत टाइट थी.. मज़ा आ गया यार.. ”
“थेंक यू सर” वैशाली ने शरमाते हुए नजरे झुका ली
वैशाली बेचैन नज़रों से पेसेज की ओर देख रही थी.. उसके यहाँ बैठने के बाद कोई अंदर गया भी नही था और बाहर आया भी नही था.. उसने पीयूष की ओर देखा.. वो तो आराम से म्यूज़िक के ताल पर झूमते हुए बियर पी रहा था.. वैशाली ने ये भी नोटिस किया की पीयूष भी बार बार पेसेज की ओर देख रहा था.. बहोत खुश लग रहा था पीयूष..
ना चाहते हुए भी राजेश की बातों को सुन रही थी वैशाली.. उसका सारा ध्यान पेसेज पर ही था.. वो कौन थी जो उसके पीयूष को अपनी जाल में फंसा रही थी? तभी पेसेज से एक परछाई आती हुई नजर आई.. धीरे धीरे वह परछाई हॉल की तरफ आते देख वैशाली टकटकी लगाकर पहचानने की कोशिश करने लगी..
चेहरा स्पष्ट दिखते ही वैशाली के पैरों तले से जमीन खिसक गई!!! अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था उसे.. !!! नालायक पीयूष.. ये क्या किया तूने? कब से लगा हुआ है इनके साथ? रेणुका और पीयूष?? ओह माय गॉड.. ये मैं क्या देख रही हूँ?? साला ये पीयूष तो खिलाड़ी निकला.. हरामी.. मादरचोद.. एक साथ कितनों को लपेटें रखा है उसने!! कभी मेरे साथ.. कभी मौसम के साथ.. और अब रेणुका के साथ भी.. !!!
चेहरा स्पष्ट दिखते ही वैशाली के पैरों तले से जमीन खिसक गई!!! अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था उसे.. !!! नालायक पीयूष.. ये क्या किया तूने? कब से लगा हुआ है इनके साथ? रेणुका और पीयूष?? ओह माय गॉड.. ये मैं क्या देख रही हूँ?? साला ये पीयूष तो खिलाड़ी निकला.. हरामी.. मादरचोद.. एक साथ कितनों को लपेटें रखा है उसने!! कभी मेरे साथ.. कभी मौसम के साथ.. और अब रेणुका के साथ भी.. !!!
“कब से क्या देख रही हो वैशाली? रेणुका को आज से पहले देखा नही क्या तुमने?” हँसते हुए राजेश ने कहा.. वो कब से वैशाली को रेणुका को देखते हुए देख रहा था.. परदे के पीछे क्या खेल चल रहे थे उसका राजेश को कोई इल्म नही था
वैशाली को एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे उसे रंगेहाथों किसी ने पकड़ लिया हो.. बात को घुमाते हुए उसने कहा “अरे सर.. मुझे रेणुका जी की साड़ी बहोत पसंद आ गई.. इसलिए कब से उन्हें देख रही हूँ.. कितनी खूबसूरत लगती है वो.. कोई नही कहेगा की उनकी उम्र ४० के करीब है.. तीस साल से जरा भी ज्यादा की नही लगती.. लगता है आपकी संगत का असर है ” आँखें लड़ाते हुए उसने राजेश से कहा
“हाँ वो तो है.. हम दोनों खूब इन्जॉय करते है.. लेकिन बिजनेस के चलते काफी समय से मैं उसे वक्त नही दे पा रहा.. अब यहाँ आकर कुछ वक्त साथ बिताने का मौका मिला है.. उसी की चमक है रेणुका के चेहरे पर.. इसके लिए मुझे पीयूष का भी आभार प्रकट करना चाहिए.. उसके आने के बाद ही मुझे ऑफिस से थोड़ा सा वक्त मिल पा रहा है.. और वही वक्त मैं रेणुका के साथ बीताता हूँ.. वरना पिछले तीन सालों में हम मुश्किल से तीन महीने ही साथ रहे है.. आई एम प्राउड ऑफ माय वाइफ.. मेरे इतने बीजी शिड्यूल के बावजूद उसने मुझे कभी एक लबज़ तक नही कहा.. अगर पीयूष मुझे न मिला होता तो हमारा संसार टूटने की कगार पर ही था.. ये तो अच्छा हुआ की रेणुका की एक सहेली शीला जी की सिफारिस पर मैंने पीयूष को इंटरव्यू के लिए बुलाया और सिलेक्ट कर लिया.. पीयूष उनका पड़ोसी है.. ” राजेश ने एक सांस में ही पूरी कथा सुना दी
वैशाली के दिमाग में विचारों की शृंखला सी चल पड़ी …अच्छा.. मतलब मम्मी ने ही रेणुका जी से बात करके पीयूष को नौकरी पर लगवाया है.. लेकिन पीयूष और रेणुका का सेटिंग हुआ कैसे होगा? इस सवाल का जवाब ढूँढना बेहद जरूरी था..
वैशाली: “शीला जी मेरी मम्मी है.. और पीयूष हमारा पड़ोसी है.. हम बचपन में साथ खेलकर बड़े हुए है.. और मैं उसे बहोत अच्छी तरह जानती हूँ.. बहोत ही होनहार लड़का है पीयूष” यह कहते हुए वैशाली मन में सोच रही थी.. जिस तरह उस दिन रेत के ढेर में मुझे रगड़कर चोदा था.. पीयूष होनहार तो है ही..
वैशाली: “कितना वक्त हुआ पीयूष को आपकी कंपनी जॉइन कीये हुए?”
राजेश: “ज्यादा नही.. बस दो महीने हुए है.. पर इतने समय में ही उसने जिस तरह काम किया है.. काबिल-ए-तारीफ है.. लड़का बहोत आगे जाएगा.. !!”
वैशाली सोचने लगी.. कुछ तो बात थी.. सिर्फ दो महीनों में ही पीयूष और रेणुका इतने करीब कैसे आ गए? कहीं नौकरी लगने से पहले ही दोनों का चक्कर चल रहा होगा क्या? और रेणुका मम्मी को कैसे जानती है? कहीं उन दोनों के बीच तो कहीं.. नही नही.. मुझे मम्मी के बारे में इतना गंदा नही सोचना चाहिए..
वैशाली जब विचारों में खोई हुई थी तब सिगरेट के धुएं के छल्ले उड़ाते हुए वैशाली के स्तनों को तांक रहा था.. अभी कुछ वक्त पहले ही इन्हे दबाए थे.. आहाहा.. कितना मज़ा आया था.. गले में पहने मंगलसूत्र के नीचे दिख रही दो स्तनों के बीच की खाई देखकर ही अंदर हाथ डालने का मन होने लगा राजेश को.. !! कितनी नाजुक और मदमस्त है.. !! एक पुरुष को जो चाहिए वह सब था वैशाली में..
दोनों चुपचाप एक दूसरे को देख रहे थे.. वैशाली सोच रही थी.. मम्मी और रेणुका के बीच कैसे संबंध होंगे? पापा काफी समय से विदेश है और रेणुका का पति भी ज्यादातर बाहर ही रहता है.. ऐसी स्थिति में कहीं दोनों ने मिलकर पीयूष के साथ ही.. ?? बाप रे.. क्या ऐसा हो सकता है?? हो तो सकता है.. पापा के बगैर दो साल मम्मी बिना सेक्स के तो रही नही होगी.. मैं खुद तीन-चार दिन से अधिक बिना सेक्स के पागल सी हो जाती हूँ.. संजय के बिना मुझे भी कितनी तकलीफ होती है!! कितनी रातें मैंने करवटें बदल कर और उँगलियाँ घिस घिसकर काटी है.. लेकिन उंगली में वो मज़ा कहाँ!! पुरुष का वो खास अंग जब अंदर स्पर्श करता है तब जो रियल टच की अनुभूति होती है.. वो उंगली में कभी नही मिल सकती.. अगर थोड़े दिन बिना सेक्स के रहना पड़े तो मेरी यह दशा होती है.. तो मम्मी और रेणुका को तकलीफ होना भी जायज था.. आखिर वह दोनों भी इंसान है और उनकी अपनी जरूरतें होंगी ही.. और यही इच्छा जब बेकाबू बनी होगी तभी रेणुका और पीयूष का संबंध बना होगा.. पर इन सब में मम्मी बीच में कहाँ से आई? क्या वो भी पीयूष के साथ करती होगी? हो सकता है.. शायद कोई ओर मर्द भी हो मम्मी के जीवन में.. जितना सोचती जा रही थी उतना ही उलझ रही थी वैशाली..
राजेश: “एक बात पूछूँ वैशाली?”
वैशाली: “हाँ पूछिए न, सर.. !!” पीयूष, रेणुका और मम्मी को अपने दिमाग से निकालकर सामने बैठे राजेश पर उसने ध्यान केंद्रित किया
“अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुझे काफी रीक्वेस्ट की थी.. किस और स्पर्श के लिए.. तब तो तुमने साफ साफ मना कर दिया था.. फिर अचानक ऐसा क्या हुआ जो तुमने मुझे टॉइलेट के अंदर खींच लिया? इस बात का ताज्जुब हो रहा है मुझे”
“आपकी बात और सोच बिल्कुल सही है सर.. मैंने पहले तो आपको मना किया था.. पर जैसे जैसे हम बात करते गए.. मुझे आपकी कंपनी में बहोत मज़ा आने लगा.. और माउंट आबू के इस रंगीन आजाद माहोल में.. बियर के नशे में.. मैंने कंट्रोल खो दिया सर.. !!”
“अच्छा.. मतलब तुम कंट्रोल खोकर मुझसे लिपट जाओ तो कोई प्रॉब्लेम नही.. और अगर मैं कंट्रोल खो कर सिर्फ एक किस मांग लूँ तो मेरी प्रपोज़ल रिजेक्ट?? ऐसा क्यों?”
वैशाली हंस पड़ी “सर, जो आउट ऑफ कंट्रोल होते है वो कभी प्रपोज नही करते.. सीधा पकड़ ही लेते है.. !! आपने प्रपोज किया क्यों की आप कंट्रोल में थे.. अगर आप आउट ऑफ कंट्रोल होते तो सीधा पकड़कर किस कर लेते.. पूछते नही !!”
“वो तो मैं कर ही सकता था.. पर फिर तुम मेरे बारे में क्या सोचती.. !! यहाँ इस वक्त तुम मेरी मेहमान हो.. तुम्हारी मर्जी के खिलाफ मैं कैसे कुछ कर सकता था?”
वैशाली: “बात तो आपकी सोलह आने सच है सर.. देखिए.. अगर हम चार धाम की यात्रा के दौरान ऐसा कुछ करते तो गलत होता.. पर यहाँ माउंट आबू का वातावरण ही अलग है.. रात का माहोल.. हाथ में बियर का ग्लास.. और ऐसे उत्तेजक कपड़ों में लड़कियां आस पास मंडरा रही हो.. तब थोड़ा सा ऊपर नीचे हो जाए तो हर किसी को थोड़ा समझना चाहिए.. अब ईसे देखो.. पीयूष की वाइफ कविता को.. जिस तरह के कपड़े उसने पहने है.. देखकर कितने मर्दों को इरेक्शन हो गया होगा.. !!”
राजेश: “कहीं तुम्हारे कहने का मतलब ये तो नही है न की ऐसा कुछ न करके मैंने गलती कर दी?? अगर ऐसा है तो मैं अपनी उस गलती को अभी सुधार लेने को तैयार हूँ”
“मतलब??” वैशाली रोमांचित हो गई राजेश की बात सुनकर.. “अरे मैं तो बस मज़ाक कर रही हूँ.. ” कहते हुए उसने बात को वहीं रोकने की कोशिश की.. पर राजेश इस बात का अंत लाने को तैयार नही था
“वैशाली, तेरी छाती पर ये जो मंगलसूत्र के बीच की लकीर दिख रही है ना.. वहाँ किस करने का बहोत मन कर रहा है.. अब अगर मैं इजाजत माँगता हूँ तो तुम कहोगी की मैं कंट्रोल में हूँ.. और अगर सीधे सीधे किस कर लेता हूँ तो तुम्हें लगेगा की मैंने तुमसे जबरदस्ती की.. अब बोलो.. मैं क्या करूँ?”
वैशाली एकदम ही शरमा गई.. आसपास करीब ४० लोग थे और उसमे से काफी लोग पहचान के भी थे.. अगर बियर के नशे में राजेश ने सब के बीच कोई उलटी सीधी हरकत कर दी तो.. बाप रे!!
“सर, आप भी ना.. बड़े वो हो.. !!”
राजेश: “क्यों?? मैंने पूछकर कुछ गलत किया क्या?”
वैशाली: “अरे नही नही.. मेरे कहने का ये मतलब था की पहले हमने जो कुछ भी किया वो चार दीवारों के बीच सब की नज़रों से दूर किया था.. और अभी आप मुझे सब के सामने छाती पर किस करना चाहते हो.. अगर रेणुका मैडम ने देख लिया तो आपको माउंट के ऊपर से ही धक्का दे देगी.. अगर आसपास कोई नही होता तो बात अलग थी.. ”
“अच्छा? ये बात है? तो चलो वापिस टॉइलेट में चलते है” राजेश ने वैशाली को चोंका दिया..
वैशाली सोच में पड़ गई.. अब क्या करें? बार बार टॉइलेट में थोड़े ही जा सकते है? कोई देख लेगा तो शक हो जाएगा..
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